हिन्दी के चिराग's Image

हिन्दी के चिराग

http://hindikechirag.blogspot.com/
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
18 Apr 2010
कुल प्रविष्टियां
8
पाठक भेजे
579
पसंद
5
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
72.38
पसंद करें
1
नापसंद करें

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर'

राष्ट्रीयता एवं जागरण की चेतना के साथ-साथ भारत के गौरवमयी अतीत की पहचान तथा रुढियों की जंजीरों में जकड़ी वर्त्तमान व्यवस्था के प्रति असंतोष से उत्पन्न क्रांति की आहवान करने वाले राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का एक परिचय
Apr 18 2010 01:51 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

हिन्दी आलोचना के युगपुरुष: आचार्य रामचंद्र शुक्ल

आचार्य रामचंद्र शुक्ल हिन्दी समालोचना के युगपुरुष हैं। वे हिन्दी साहित्य में प्रौढ़ समालोचना के जन्मदाता हैं। शुक्ल जी के साहित्यिक आलोचना के प्रभाव को इस बात से भी आँका जा सकता है कि हिन्दी आलोचना के इतिहास को तिन भागों में विद्वानों ने विभक्त किया
पसंद करें
0
नापसंद करें

भारतेंदु हरिश्चंद्र: हिन्दी गद्य के पुरोधा

भारतेंदु हरिश्चंद्र हिन्दी साहित्य की गद्य विधा के आधार स्तम्भ हैं। यद्यपि हिन्दी गद्य-साहित्य का प्रारम्भ मुंशी सदासुख लाल, इंशा अल्ला खां, लल्लू लाल एवं सदल मिश्र के द्वारा माना जाता है पर वह हिन्दी गद्य का नमूना मात्र था। भारतेंदु ने हिन्दी गद्य क
Dec 29 2009 12:01 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

निराला: एक परिचय

निराला जी हिन्दी साहित्य के महानतम सृजनकारों में से एक हैं। छायावाद की धुरी रहने के बावजूद निराला की कविताओं में प्रगतिवाद की नीव भी स्पष्टतया परिलक्षित होती है। उनके दुर्धर्ष संघर्ष की क्षमता उन्हें मात्र एक रचनाकार न रहने देकर एक साहित्यिक आदर्श के
Dec 29 2009 12:01 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

क्रन्तिकारी भक्त कवि कबीरदास

हिन्दी साहित्य के भक्तिकाल के कवियों में कबीरदास निर्गुण भक्ति काव्य-धारा में उच्च स्थान पर विराजमान हैं। उनका व्यक्तित्व क्रन्तिकारी व्यक्तित्व है, उन्होंने अपनी बात बेबाक ढंग से कही भले ही वह सामने वाले को कितनी भी चुभी। यद्यपि कबीर के जीवन के संबं
पसंद करें
0
नापसंद करें

लोकहितवादी भक्त कवि: तुलसीदास

हिन्दी साहित्य के भक्ति काल में भक्त कवियों ने अपने समाज और संस्कृति की रक्षा हेतु काव्य ग्रंथों की रचना की। इस काल में प्रवाहित होने वाली भक्ति काव्य धाराएँ सगुण काव्य तथा निर्गुण काव्य के रूप में दो हिस्सों में विभक्त थी। सगुण काव्य धारा की पुनः दो
पसंद करें
0
नापसंद करें

जयशंकर प्रसाद: जीवन तथा कृतित्व

जयशंकर प्रसाद छायावाद के चतुः स्तंभों पन्त, महादेवी, पन्त तथा प्रसाद में से एक महत्वपूर्ण स्तम्भ हैं। प्रसाद जी ने हिन्दी साहित्य की काव्य, नाटक, कहानी तथा निबंध विधाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यहाँ मैं इनके जीवन तथा रचना संसार से संक्षिप्त परि
पसंद करें
0
नापसंद करें

उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद

हिन्दी साहित्य की दो प्रमुख विधाओं कहानी एवं उपन्यास को साहित्याकाश में स्थापित करने का श्रेय निश्चय ही मुंशी प्रेमचंद को जाता है। उपन्यास में यथार्थवाद की जिस प्रकार से उन्होंने प्रस्तुति की वह उपन्यास को सीधे सामाजिक सन्दर्भों से जोड़ने के लिए आवश्