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'जग जीत' ने का हुनर
बात थोड़ी पुरानी हो गई है। लेकिन बात अगर तारीख़ बन जाए तो धुंधली कहाँ होती है।बात, 1 दिसंबर 2009 की है। जगजीत जी यूएस में थे, वहीं से फ़ुनियाया - 'आलोक, कश्मीर पर नज़्म लिखो। 9 दिसंबर को वहां शो है, गानी है।' मैंने कहा - 'मगर में तो कभी कश्मीर गया नहीं।
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Feb 16 2010 12:54 PM


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