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21 May 2010
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सोनिया गांधी यानि देश का चेहरा...

21 मई...दिल्ली की वीरभूमि और वीरभूमि पर देश की नहीं दुनिया की ताकतवर हस्तियों में से एक हस्ती...19 साल पहले यही वो तारीख थी...जो देश के सबसे बड़े राजनीतिक घराने की बहू के राजनीति में जाने की नींव बी...ये जानते हुए भी कि उसे राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं
 
अनिल कुमार वर्मा
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दिल को मिला सुकून...

09 मार्च 10देश की आधी आबादी को जिस मौके का इंतजार 14 सालों से था...वो आखिरकार आ ही गया...पुरुष प्रधान समाज में अपने हक की लड़ाई लड़ने की उसकी ताकत में अब इज़ाफा होता नजर आ रहा है...जी हां..महिला आरक्षण बिल कदम दर कदम अपनी मंजिल की तरफ बढ़ चला
 
अनिल कुमार वर्मा
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मौत का भंडारा....

04 मार्च 2010बस एक लापरवाही और जिंदगियां मौत के मातम में डूब जाती हैं...हादसे होते हैं लेकिन कोई सबक नहीं लिया जाता...जिसकी गवाह हैं प्रतापगढ़ की ये तस्वीरें...जो मौत पर मातम की जीती जागती गवाह हैं...ये नजारा कुंडा में बने राम जानकी मंदिर का है..जो
 
अनिल कुमार वर्मा
Mar 04 2010 11:03 PM
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जब आश्चर्य भय औऱ विस्मय में बदल गया...

03 मार्च 2010ये नज़ारा किसी की भी आंखों को सुकून पहुंचाने के लिए काफी है...हैदराबाद में बुधवार से शुरू हुए एअर शो के दौरान इस तरह के नजारे लोग अपनी आंखों में उतार रहे थे और ये करतब दिखा रहे पायलटों की तारीफ कर हैरत जता रहे थे लेकिन इसी बीच कुछ ऐसा
 
अनिल कुमार वर्मा
Mar 03 2010 09:33 PM
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कराहता हिन्दुस्तान

14 फरवरी 201026/11 के बाद छाई खामोशी मन में ये सवाल पैदा कर रही थी कि क्या हिन्दुस्तान को बार बार अपने नापाक इरादों से दहलाने वाले दहशतगर्द शांत हो गए हैं...क्या हिन्दुस्तान की सरकार का सख्त रुख इस बार उनके इरादों को डिगाने में कामयाब हो गया है...क्या अब
 
अनिल कुमार वर्मा
Feb 14 2010 07:21 PM
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ताल्लुकात में कोई कमी नहीं रखते...

मई 05 ताल्लुकात में कोई कमी नहीं रखते वो सबसे मिलते हैं पर दोस्ती नहीं रखते हमें भुलाकर अगर शादमां वो रहते हैं तो हम भी दिल में कोई बेकली नहीं रखते ज़मीं की ख़ाक उन्हें ख़ाक में मिला देगी अभी तो फर्श पर वो पांव भी नहीं रखते हमारे टूटे हुए घर में शम्म
 
अनिल कुमार वर्मा
Dec 29 2009 11:42 AM
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मैं भी जीवित हूं....

मार्च 09 मैं आया था तुम्हारे घर, तुम तो कहती थी... मेरे द्वार खुले हैं, हर पल तुम्हारे लिए... पर वहां एक ताला था, मैं सीढ़ियों पर बैठा... कर रहा था...तुम्हारा इंतजार, एक घण्टा...दो घण्टा...विवश... अंतत: मैनें खिड़की से झांका, नजर आया... एक सूखा गुलाब
 
अनिल कुमार वर्मा
Dec 29 2009 11:42 AM
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तेलंगाना को जानो...

दिसम्बर 09 पिछले कुछ दिनों से पृथक तेलंगाना राज्य को लेकर पूरे देश में जबरदस्त हलचल मची हुई है.आंध्र प्रदेश जल रहा है तो राजनीतिक हलके भी सुलग रहे हैं.कहीं हां ते कहीं ना का शोर कानों को परेशान कर रहा है.इसी परेशानी के बीच ये जानने की इच्छा जोर मारने
 
अनिल कुमार वर्मा
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तेरा आंचल जो ढल गया होता....

जून 2009 तेरा आंचल जो ढल गया होता रुख हवा का बदल गया होता देख लेता जो एक झलक तेरी चांद का दम निकल गया होता झील पर खुद ही आ गए वरना तुमको लेने कमल गया होता पी जो लेता शराब आंखों से गिरते गिरते संभल गया होता क्यों मांगते वो आईना मुझसे मैं जो लेकर गज़ल
 
अनिल कुमार वर्मा
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रख सको तो एक निशानी हूं मैं...

जून 09 अगर रख सको तो एक निशानी हूँ मैं खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं रोक पाए न जिसको ये सारी दुनिया वोह एक बूँद आँख का पानी हूँ मैं... सबको प्यार देने की आदत है हमें अपनी अलग पहचान बनाने की आदत है हमे कितना भी गहरा जख्म दे कोई उतना ही ज्यादा मुस्कर
 
अनिल कुमार वर्मा
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चाहा जिसे मुक्त कर दो उसे...

मई 09 चाहा जिसे मुक्त कर दो उसे प्यार को तोलने की तराजू यही मोहब्बत का मारा चला आएगा ना आए तो समझो तुम्हारा नहीं
 
अनिल कुमार वर्मा
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उससे जुदा हो गया मैं....

मई 09 मैं ये सोचकर उसके दर से उठा था कि वो रोक लेगी मना लेगी मुझको हवाओं में लहराता आता था आंचल कि दामन पकड़कर बिठा लेगी मुझको कदम ऐसे अंदाज में उठ रहे थे कि आवाज देकर बुला लेगी मुझको मगर उसने रोका ना उसने बुलाया न दामन ही पकड़ा न मुझको बिठाया न आवाज
 
अनिल कुमार वर्मा
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दिल को किसी सूरत बहलाना नहीं आता...

अप्रैल 09 निगाहों में कभी माज़ी का अफसाना नहीं आता मगर दिल को किसी सूरत भी बहलाना नहीं आता हुई मुद्दत बहार आए,सूनी पड़ी है दिल की महफिल भी हमारी ओर कोई दिल की दीवाना नहीं आता न बह जाए कहीं दिल से,तुम्हारी याद की रंगत इसी डर से हमें तो अश्क बरसाना नही
 
अनिल कुमार वर्मा
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आज तुम मुझसे दूर हो जाओगी....

अप्रैल 09 आज तुम मुझसे दूर हो जाओगी अपनी दुनिया नयी बसाओगी अब किसी अजनबी की बाहों में अपनी रानाइयां लुटाओगी मैनें माना कि दूर जाओगी अपनी दुनिया नयी बसाओगी फिर भी मैं पूछता यह हूं तुमसे नक्शे माज़ी मिटा भी पाओगी जब दिल से मुझे भुलाओगी दर हकीकत फरेब खा
 
अनिल कुमार वर्मा
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मैं तेरी सौगात लिए...

अप्रैल 09 दीप जलाए अश्कों के और आहों के नग्मात लिए कौन आया है ज़ेहन में मेरे,यादों की बारात लिए काली घटा को देख के,आई याद तुम्हारी जुल्फों की सावन ऋतु आई है लेकिन अश्कों की बरसात लिए अपनी अपनी बात सुनाई,सबने तुम्हारी महफिल में बैठे रहे हम ही तन्हा,दि
 
अनिल कुमार वर्मा
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वो जो न था आदर्श तुम्हारा...

अप्रैल 09 तन्हा बैठा सोच रहा हूं वो जो न था आदर्श तुम्हारा आज वही एक आम सा लड़का शीशों वाले उस कमरे में पास तुम्हारे बैठा होगा लंबी और घनी ज़ुल्फों में जूही की कलियां अटकाए और गुलाबी से होठों पर एक सच्ची मुस्कान सजाए अपनी जीत पे नाजां नाजां तुम उससे
 
अनिल कुमार वर्मा
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सच बता गांव से आने वाले...

अप्रैल 09 सच बता गांव से आने वाले तेरी लोगों से मुलाकात तो होगी खेत खलिहान कहीं बात तो होगी सच बता गांव से आने वाले तुमसे मिलती है,कहीं वो मेरी हरजाई भी जिसने आवारा बनाया मुझे सौदाई भी घर से बेघर किया, दी मुझे रुसवाई भी सच बता गांव से आने वाले उसने क
 
अनिल कुमार वर्मा
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बस तुम्हें चाहा करूं...

अप्रैल 09 मैं तुम्हें हां बस तुम्हें चाहा करूं तू मिली तो जिन्दगी का पा लिया हर पल खुशी का शुक्रिया कैसे करूं, बस तुम्हें चाहा करूं मेरी चाहत को नया अंजाम तुमने ही दिया जिन्दगी को जिन्दगी का नाम तुमने ही दिया में तेरे बारे में बस सोचा करूं हौसला तुमन
 
अनिल कुमार वर्मा
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समय हो गया लो चला जा रहा हूं...

अप्रैल 09 समय का पहरुआ बड़ा ही सजग है किसी को भी रुकने ना देगा यहां पर सभी हैं मुसाफिर उमर की डगर के किसी को न मिलती है मंजिल यहां पर लिए जा रहा हूं ये आंसू नयन में सुनहरे सपन सब दिए जा रहा हूं समय हो गया लो चला जा रहा हूं... न सोचो कि पूरी न हो पाई
 
अनिल कुमार वर्मा
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प्रेम ये है प्रेम...

अप्रैल 09 आग से जले ना, जल से बुझे ना हवा से उड़े ना, तूफां से डरे ना दिल और जां में जमीं आसमां में नाम है जिसका सारे जहां में प्रेम ये है प्रेम प्रेम है पूजा, प्रेम है शक्ति प्रेम है ज्योति, नई अनुभूति प्रेम ही सुर है, प्रेम ही भाषा प्रेम जीवन की है
 
अनिल कुमार वर्मा
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उससे जुदा हो गया मैं...

अप्रैल 09 मैं ये सोचकर उसके दर से उठा था कि वो रोक लेगी, मना लेगी मुझको हवाओं में लहराता आता था आंचल कि दामन पकड़कर बिठा लेगी मुझको कदम ऐसे अंदाज में उठ रहे थे कि आवाज़ देकर बुला लेगी मुझको मगर उसने रोका, न उसने बुलाया न दामन ही पकड़ा, न मुझको बिठाया
 
अनिल कुमार वर्मा
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अब तो मैं भूलने लगा था तुम्हें...

अप्रैल 09 अब तो मैं भूलने लगा था तुम्हें आज फिर आ गई हो जाने क्यों रंग और नूर का जहां बनकर एक खिलते गुलाब की मानिन्द इक चटकती हुई कली की तरह लम्हा लम्हा संवरती जाती हो नक्श बनकर उभरती जाती हो तुम चली जाओगी घड़ी भर में इतने वक्फे में सबसे मिल लोगी घर
 
अनिल कुमार वर्मा
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मैं तुझे चाहता नहीं लेकिन...

अप्रैल 09 मैं तुझे चाहता नहीं लेकिन फिर भी, जब तू पास नहीं होती खुद को कितना उदास पाता हूं गुम से अपने होशो-हवास पाता हूं जाने क्या धुन समाई रहती है इक खामोशी सी छाई रहती है दिल से भी गुफ्तगू नहीं होती मैं तुझे चाहता नहीं लेकिन... फिर भी रात के खाली
 
अनिल कुमार वर्मा
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मत कराओ प्रतीक्षा...

अप्रैल 09 न जाने कब तक लिखता रहूंगा यूं ही बेचैन निगाहों से एक टक! कुछ तलाशता हुआ शायद नजर आ जाए कभी छवि तुम्हारी भटकने से पहले संभाल ले जाएं मुझे बाहें तुम्हारी कहते हैं फल मीठा होता है प्रतीक्षा का बेहद बाढ़ सी आई है गमों की मेरी जिन्दगी में शायद ब
 
अनिल कुमार वर्मा
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जब सांझ की बेला होती है...

मार्च 09 जब सांझ की बेला होती है में इस पीपल के साए में तालाब के तट पर आता हूं हम दोनों जहां पे मिलते थे दो पल के लिए दो क्षण के लिए फिर मिल के बिछड़ जाते थे हम इस बार मगर यूं बिछड़े हैं जैसे न कभी मिल पाए हों इस बार जो तट पर आया हूं दो पल के मिलन की
 
अनिल कुमार वर्मा
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तुम मिली और बिछड़ गई मिलकर....

मार्च 09 तुम मिली थी तो मैनें सोचा था, मैं बहारों के गीत गाऊंगा दिल शिकस्ता सही मगर फिर भी आंसुओं की हंसी उड़ाउंगा... तुम मिली थी तो मैनें सोचा था मैं फिजाओं में रंग भर दूंगा अपने चेहरे पर बिखरी फिक्रों को मुस्कुराहट में दफ्न कर दूंगा... तुम मिली थी
 
अनिल कुमार वर्मा
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वे जो करते हैं प्यार...

मार्च 09 प्यार पर सदियों से पहरा रहा है...हर रिश्ते का आधार होने के बावजूद जमाना इसका दुश्मन ही बना रहता है...इस रिश्ते में सिवाए दर्द के कुछ हाथ नहीं आता...मुश्किलें ही इस रिश्ते का साथी होती हैं...बावजूद इसके लोग प्यार करते हैं...प्यार बांटते हैं..
 
अनिल कुमार वर्मा
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अलविदा-ए-दोस्त...

मार्च 09 अलविदा ए दोस्त जाने फिर कहां हो सामना जा रहे हो तुम न जाने कौन बस्ती किस शहर दरमियां बस एक पटरी चन्द डिब्बे हैं तो क्या दूरियां हजारों मील की इनमें आईं आज उभर पोंछ डालो आंख का पानी न देखो फिर से घूमकर याद की खामोशियां होंगी हमारा हमसफर
 
अनिल कुमार वर्मा
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जंग 80 और 40 की...

मार्च 09 कांग्रेस के नेतृत्व में चल रही केन्द्र की यूपीए सरकार में पड़ी दरार ने अब खाई का रूप ले लिया है। बिहार में आरजेडी और एलजेपी के साथ सीटों का झगड़ा इस कदर बढ़ा कि यूपीए के भीतर ही एक नए मोर्चे ने जन्म ले लिया। बिहार में कांग्रेस के खिलाफ झण्डा
 
अनिल कुमार वर्मा
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और प्यार क्या और प्यार कहां...

मार्च 09 यूं तो प्यार पर इतना कुछ लिखा जा चुका है कि कहने को शायद ही कुछ शेष बचा हो...लेकिन हर बार जब इस विषय पर कुछ लिखा जाता है तो वो नया ही लगता है...ढाई अक्षर के इस शब्द की महिमा ही ऐसी है...इसीलिए मैं आज फिर इस प्यार को परिभाषित करने बैठ गया हूं
 
अनिल कुमार वर्मा
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आली रे आली नैनो आली

मार्च 09 मुंबई में नैनों के लांच के साथ ही रतन टाटा ने अगर दुनिया की सबसे सस्ती कार लांच करने का वादा पूरा किया तो इसी के साथ तमाम राजनीतिक उतार चढ़ावों के बीच भारतीयों के साथ चल रही आंख मिचौली का खेल भी खत्म हो गया। अब नैनो अपने लटकों झटकों के साथ भ
 
अनिल कुमार वर्मा
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हिसाब किताब

मार्च 09 एकाध महीने बाद मेरा ब्लाग साल भर का हो जाएगा...उम्मीद के हिसाब से लोगों का मेरी इस गली में आना जाना कम ही हुआ...अपनी तरफ से मैनें समाज की हर दुखती रग को छूने की कोशिश की है...थोड़ा उदास हूं कि लोगों का भरपूर प्यार नहीं मिला...समझ नहीं पा रहा
 
अनिल कुमार वर्मा
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घोषणाओं की घुट्टी चुनावी घोषणा पत्र

मार्च 09 चुनावी जंग जीतने के लिए राजनीतिक दल उम्मीदवारों के चयन के साथ जिस विषय पर सबसे ज्यादा माथापच्ची करती हैं वो होता है घोषणा पत्र...किन मुद्दों के साथ जनता के बीच जाना है...उसे किस तरह के वादों की घुट्टी पिलानी है...उसे किन सपनों के झुनझुने थमा
 
अनिल कुमार वर्मा
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प्यार को प्यार ही रहने दो...

मार्च 09 प्यार आखिर क्या है..पूजा है..आस्था है..विश्वास है..एक तपस्या है या फिर जुनून..प्यार मन में छुपी एक कोमल भावना है या फिर आराधना..कुछ भी हो..प्यार तो प्यार है..वक्त बदला..दौर बदला..रहने सहने खाने पीने का तौर बदला..पर प्यार नहीं बदला ना बदलेगा.
 
अनिल कुमार वर्मा
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बहुत याद आई शहनाई...

मार्च 09 शहनाई के सुर हमेशा से मुझे अपनी ओर खींचते रहे हैं...शायद यही वजह है कि दुनिया भर में इस वाद्य यंत्र को उसकी असली पहचान दिलाने वाले उस्ताद का जन्म दिन भी मुझे याद था...काफी सोचा उस्ताद जी को किस रूप में याद करूं...फिर लगा ब्लॉग पर कुछ लिखा जा
 
अनिल कुमार वर्मा
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संवेदना

 
अनिल कुमार वर्मा
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हवस की आग में झुलसते रिश्ते...

मार्च 09 मुंबई के मीरा रोड निवासी उस शख्स पर चढ़ा था अमीर बनने का नशा...उसकी पत्नी को भी थी पैसों की हवस...दोनों जा पहुंचे एक तांत्रिक की शरण में...तांत्रिक ने बताया उन्हें जल्द अमीर बनने का तरीका...लेकिन उस तरीके की बलि चढ़ गई दो मासूम बच्चियों की ज
 
अनिल कुमार वर्मा
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छिड़ी लड़इया यूपी में...

मार्च 09 लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है...इसके साथ ही शुरू हो गया है...सियासत की बिसात पर मोहरे सजाने का खेल...समीकरणों की गणित के हिसाब से खिलाड़ियों को मैदान में उतारने की कवायद में जुटे राजनीतिक दल नफा नुकसान तौल रहे हैं...देश के सबसे बड़े राज्य
 
अनिल कुमार वर्मा
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वरुण तूने ये क्या किया ?

मार्च 09 भारतीय राजनीति के पर्दे पर यदाकदा नुमायां होने वाले वरुण गांधी आजकल हॉट आइटम बने हुए हैं। चारों तरफ उन्हीं की चर्चा है। अखबारों में संपादकीय लिखे जा रहे हैं तो टेलीविजन की दुनिया में भी उन्हें लेकर बहस का दौर चल रहा है। चुनावी माहौल की गर्मी
 
अनिल कुमार वर्मा
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चलो रे फिर चुनाव आया है...

मार्च 09 लोकसभा चुनाव का बिगुल बजने के साथ ही राजनीतिक दलों की कसरत शुरू हो चुकी है। भारतीय राजनीति की बात करें तो बीते कुछ सालों में वो काफी बदलाव देख चुकी है। मतदाताओं ने मुद्दों से भटकते राष्ट्रीय दलों को उनकी औकात दिखाई है तो क्षेत्रीय दल को मजबू
 
अनिल कुमार वर्मा