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सच को सलाम

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18 Jun 2010
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जय बोलो बाबा केदारनाथ और बद्री विशाल की

वक्त का पता नहीं पर आंखों में अब भी धुंधली तस्वीर बाकी है। अपनेराम दस या बारह साल के रहे होंगे। खबर आई कि गांव के कुछ बड़े-बुजुर्ग चार धाम की यात्रा पर जा रहे हैं, उन्हें विदाई देने आ जाओ। पुण्य मिलेगा। छोटी बुद्धि, ज्यादा कुछ नहीं समझ पाई। बाबा की
Jun 18 2010 02:36 PM
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बेटियाँ होती ही ऐसी हैं

आज भी वो दिन याद करता हूं खुद पर हँसी आने लगती है। सोचना हूं वो भी क्या दिन थे। मेरी छोटी सी मासूम रिया। बमुश्किल तीन-चार माह की रही होगी। मुझे देखते ही उसके चेहरे पर मुस्कुराहट दौड़ जाती। ऐसा लगता कि वो मुझसे कुछ कहना चाहती है। दिल-दिमाग को समझाता, अभी
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सचिन, सचिन और सचिन

सचिन के बल्ले से ग्वालियर के कैप्टन रूपसिंह स्टेडियम पर निकली ऐतिहासिक पारी को कवर करने में मीडिया भी पीछे नहीं रहा। पाठकों तक सचिन का यश पहुंचाने के लिए हिन्दी और मराठी के समाचार पत्रों ने कुछ अलग अंदाज में लीक से हटकर करने का प्रयास किया।  
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सलाम सचिन रिकॉर्ड तेंदुलकर

संगीत सम्राट तानसेन जब स्वर साधना करते थे तो रागों से दीपक जला दिया करते थे। उसी नगरी में आज सचिन तेंदुलकर ने ऐतिहासिक पारी खेलकर दिखा दिया कि उनकी क्रिकेट साधना का तप किसी भी रिकॉर्ड को ध्वस्त कर सकता है। सचिन को ग्वालियर का कैप्टन रुपसिंह स्टेडियम
Feb 24 2010 09:34 PM
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आओ फिर लहराएं तिरंगा प्यारा

दिल और दिमाग में जंग चल रही है। कौन जीतेगा कौन हारेगा, कुछ भी कहना मुश्किल है। दिल जज्बाती हो रहा है। अपने यारों के फोन इन जज्बातों को और हवा दे रहे हैं। जज्बातों का ज्वार यूं ही नहीं उठ रहा। क्योंकि जज्बातों के केंद्र में वो कैप्टन रूपसिंह स्टेडियम है,
Feb 22 2010 05:03 PM
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कहां गई बचपन की वो बातें...?

बच्चे को बच्चा ही रहने दो, दो-चार किताबें पढ़ लेगा तो हम जैसा हो जाएगा...। याद करो वो दिन जब अपनेपन की आबोहवा में कुछ बातें, कुछ किस्से छुटपन को सहलाया करते थे। चार दिन पहले ही किसी ने धुंधली यादों से पर्दा उठाया और सवाल किया कि क्या आपको याद है-(१) मछली
Feb 19 2010 12:53 AM
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कहां गया मेरा वो गाँव

बड़ी उलझन मैं हूं। व्यथित भी हूं। क्योंकि मेरा गाँव कहीं गुम हो गया है। वो गाँव जिसकी याद करते ही मन मयूर नाच उठता था। भला नाचता भी क्यों ना? गाँव का हर चेहरा भोला और अपनेपन से लबरेज था। पूरा गाँव प्यार का सागर नजर आता। शहर का अपनापन वाहनों के शोरगुल और
Feb 13 2010 12:26 PM
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अपनेराम बागियन के बीच

जिन भईयन ने उत्साह बढ़ाओ उन्हें अपनेराम की सिंगल राम-राम और जिन भईयन ने अब तक सच को सलाम ना देखो, उन्हें डबल राम-राम। कन्फ्यूज्ड न होऊ भईया। अपनेराम ने एक कहानी पढ़ी हती, बाको सार हम आपऊ ऐ बता देत हैं- एक गांव में एक स्वामी जी पहुंचे। जिन लोगन ने आदर
Dec 29 2009 11:57 AM
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अपनेराम पहुंचे चम्बल के बीहड़ में

अपनेराम जब कंचे, गिल्ली-डंडा खेलत हते, तबही से बड़े-बुजुर्गन से सुनत रहे थे कि चम्बल के बीहड़ में बड़े-बड़े डकैत होत हैं। हमारी मम्मी ने तो न सुलाओ, लेकिन गांव जाते तब हमें बताओ जातो कि जल्दी सो जाओ नहीं तो बागी उठा लै जांगे। शोले फिल्म के ठीक उस डाय
Dec 29 2009 11:57 AM
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लो आ गए अपनेराम

चम्बल के सब भईयन को अपनेराम की राम-राम। अपने भईयन से मिलवे को बहुत दिना से मन हतो, मगर का करते नौकरी के फेर में ताल-तलैयन की नगरी में पहुंच गए। अपने आप में इतने उलझ गए कि भईयन के बारे में सोचऊ न पाए। खैर, गुस्ताखी माफ। अब आपको शिकायत का मौका नहीं दें
Dec 29 2009 11:57 AM
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सच को सलाम

चम्बल की माटी सच कहने की हिम्मत देती है। हमने दैनिक भास्कर के बैनर पर नकली देसी घी और सिंथेटिक दूध बनाने वालो के खिलाफ अभियान चलाया। इस पर आपकी क्या राय है?
Dec 29 2009 11:57 AM
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अभिषेक को कमाल तो देखो...

अरे च म्बल के बीहड़न में बसे भिंड को मौड़ा है अपओ अभिषेक । कूची चलाउत-चलाउत ग्वालियर आओ और फिर वहां ते वाया इंदौर पहुंच गया जयपुर। मुंबई में आतंकी हमलों के बाद अपए अभिषेक की कूची से ऐसे जानदार-शानदार व्यंग्य निकले कि कछु पूछो मत। बिना विलंब के आपकी ख
Dec 29 2009 11:57 AM
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सिंधियाजी ने क्यों नहीं डाला वोट

ग्वालियर के जयविलास परिसर में जीवित सिंधिया राजवंश के महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस के कद्दावर नेता है और विधानसभा चुनाव में अपने अधिक से अधिक समर्थकों को टिकट दिलाने में उन्होंने कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। जब अपनों को टिकट दिला ही दिया, तो उन्ह
Dec 29 2009 11:57 AM
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चरणभाट और कलमभाट

ताल-तलैया की नगरी से ग्वालियर आना हुआ, तो सोचा क्यों न सियासी हलचल की नजर की जाए। जब अपनों (अरे भाई वोई कलमघसीटू क्लर्क) के बीच पहुंचे तो अहसास हुआ कि पूरा निजाम ही बदला हुआ है। जब भी सियासी बयार चलती है, लोगों के चोले बदल जाते हैं। कुछ नेता गिरगिट क
Dec 29 2009 11:57 AM
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हर डाल पर राज ठाकरे बैठा है........

लाख टके का एक सवाल, आखिर बिहारी ही क्यों मार खाते हैं? क्या इसके लिए राज ठाकरे ही पूरी तरह से जिम्मेदार है? इन सवालों का जवाब पाने के लिए हमें कुछ मुद्दों पर विचार करना होगा। नाम जुदा हो सकते हैं पर राज ठाकरे जैसे फितरती और राष्ट्रतोड़क तत्व देश के ह
Dec 29 2009 11:57 AM
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राजमाता पर फिल्म के मायने

ग्वालियर के सिंधि या राजवंश की आखिरी राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने लोगों के दिलों पर बरसों राज किया। राजपथ से लोकपथ का उनका यह सफर क भी रजिया सुल्तान बनी बॉलीवुड की ड्रीमगर्ल हेमा मालिनी अब परदे पर जीवंत करने जा रही हैं। 'एक थी रानी ऐसी भी' नामक फिल्म
Dec 29 2009 11:57 AM
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आलोक जी कर्ज अभी बाकी है..

खरी-खरी कहने के लिए चम्बल की माटी के लाल आलोक तोमर को अपनेराम की राम-राम। दो बार आलोक जी को जानने-समझने का अवसर मुझे मिला। पहला ग्वालियर के बसंत विहार में रश्मि परिहार के निवास पर दोस्तों की महफिल में और फिर दिल्ली में आपके आवास पर। उनके बारे में औरो
Dec 29 2009 11:57 AM
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अनुपम अहसास पारसमणि का

भोपाल के रवींद्र भवन में ख्यात पर्यावरणविद् और गांधीवादी अनुपम मिश्र के साथ मंच पर मौजूदगी मेरे लिए किसी सुखद स्वप्न से कम नहीं थी। उनके बारे में जो सुना था, पढ़ा था, उन्हें उससे भी कहीं ज्यादा पाया। आचार-विचार और पहनावे में ऐसी सादगी, जो हर किसी को
Dec 29 2009 11:57 AM
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सचिन वाकई तुम महान हो..

सचिन तेंदुलकर जितने महान बल्लेबाज हैं, उतने ही अच्छे इंसान भी। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में तीस हजार रनों की दहलीज पर खड़े सचिन का यह कहना कि वे पहले भारतीय हैं और मुंबई सबके लिए है, उन लोगों के मुंह पर तमाचा है जो कथित महाराष्ट्रीयन हितों की आड़ में आए
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कोई तो समझाए इस पागल को

पागलपन की भी कोई हद होती है लेकिन महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (मनसे) के मुखिया राजठाकरे की करतूतें रुकने का नाम नहीं ले रही। चर्चाओं में बने रहने के लिए हर रोज कोई न कोई नया फरमान जारी कर देते हैं। अब राज ठाकरे चाहते हैं कि एसबीआई की भर्ती में स्थानीय
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अजय, तुसी तो छा गए यार..

आपको पता ही है कि पंजाब की माटी के पुत्तर अजय गर्ग ने छह नवंबर 2009 को रिलीज होने वाली मधुर भंडारकर की फिल्म जेल में दाता सुन, मौला सुन.. गीत लिखा है। इस गीत को स्वर दिए हैं स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने। किसी भी युवा गीतकार के लिए इससे ज्यादा गौरव
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सुनिये, गुनिये लता की आवाज में अजय गर्ग का दाता सुन ले..मौला सुन ले

मस्तमौला अजय। बेहतरीन पत्रकार के साथ जानकार इंसान भी। जो भी करते हैं डूबकर करते हैं, दिल से करते हैं। उनकी कलम का जादू मधुर भंडारकर की आगामी फिल्म जेल में नजर आएगा। इस फिल्म में अजय के लिखे गीत दाता सुन ले...मौला सुन ले.. को वर्ष 1957 में वी.शांताराम
Oct 14 2009 07:57 PM
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कम से कम चम्बल का मान तो बढ़ा

रामनाथ गोयनका एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म अवार्ड की गत दिवस घोषणा हुई, तो यह जानकार सुखद आश्चर्य हुआ कि एक लाख रुपए के प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म अवार्ड फॉर हिन्दी प्रिंट कैटेगरी के अंतिम तीन नामांकन में अपनेराम का भी नाम था। यह अवार्