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14 Jun 2010
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मानसिकता ही दोयम दर्जे की हो चुकी है.

पहले जब फौज में जाने की बात होती थी, तो लोग सबकुछ भूल उसे करियर के रूप में अपनाने की सलाह देते थे. लेकिन आजकल ऐसा नहीं. फौज को लेकर क्रेज लगातार घट रहा. आइएमए, देहरादून से पासआउट कैडेट्स में झारखंड के मात्र आठ कैडेट्स थे. झारखंड जैसे स्टेट से यूथ फौज में
 
prabhat gopal
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लंबे इंतजार ने न्याय की उम्मीदों को दफन कर दिया

भोपाल गैस त्रासदी को लेकर मीडिया पूरी मेहनत कर रहा है. लेकिन ये मेहनत वैसे ही लग रहा है, जैसा कोई स्टूडेंट एग्जाम से एक रात पहले करता है. आज की मीडिया के पास सबकुछ है, लेकिन भोपाल हो या दिल्ली, वहां की मीडिया ने इन सब बातों का पहले खुलासा क्यों नहीं
 
prabhat gopal
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इतना अंतराल लिखने में कभी नहीं रहा..

पहले जब पोस्ट लिखने या नहीं लिखने का कोई सवाल मन में नहीं रहता था. जो आया, जिस पर आया, जमकर लिखा. लेकिन अब लगता है, जैसे सवालों की कमी हो गयी है या कोई ऐसी परिस्थिति सामने बनती या बिगड़ती नहीं दिखाई पड़ती, जहां से कुछ लिखना शुरू किया जाये. संवेदनाओं या
 
prabhat gopal
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फिर से एक विवेकानंद का पैदा होना जरूरी है...

जब से रविशंकर पर हमले की खबर देखी, तो मीडिया के लोग चिंतित हो गए। इतने बड़े आदमी पर हमले की खबर थी। सही मायने में कहें, तो चिंतित होना लाजिमी है, लेकिन इतनी चिंता आम लोगों के लिए कभी नहीं होती मीडिया में। एक चैनल में कुछ संत लोग बता रहे थे कि हम लोग ही
 
prabhat gopal
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यहां मामला संवेदना शून्य हो जाने का है (झाड़ग्राम)

जब झाड़ग्राम में हादसे की खबर मिली, तो साफ तौर पर दंतेवाड़ा के बाद लोग ऐसी खबर के लिए मानसिक तौर पर तैयार हो गये होंगे। सवाल ये नहीं है कि अब इन खबरों को लेकर कितनी कवरेज की गयी या हम समस्या को लेकर कितने गंभीर हैं। यहां मामला संवेदना शून्य हो जाने का
 
prabhat gopal
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पत्रकारिता---इस हालिया दर्द को कैसे बयां करे...

मेरे लिये पत्रकारिता आज एक प्रोफेशन यानी कमाने-खाने का जरिया है। हर पेशे या कहें प्रोफेशन में आपको एक चीज मिल जाएगी कि जानकारी के आधार पर वर्गीकरण किया जाता है। यूं कहें, जानकारी के आधार पर लोग बिना बताये दावा कर सकते हैं कि वे किसी और से ज्यादा जानकार
 
prabhat gopal
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कई सवालों के घेरे में है भाजपा

जब लालकृष्ण आडवाणी आगे हाथ जोड़े रथ यात्रा में निकले थे, तो हजारों लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा था। मैं भी भीड़ के एक कोने से लालकृष्ण  आडवाणी को देखकर रोमांचित हुआ था। मन में कई सपने जगे थे। एक सपना था कि कम से कम भाजपा कांग्रेस के विकल्प के रूप में
 
prabhat gopal
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आज का ये चिंतन

जब जिंदगी में ऐसा कुछ अनचाहा हो, जो नहीं होना चाहिए था, तो कई सवाल आने लगते हैं। मीडिया जैसी फील्ड में भी ऐसा होना लाजिमी है।  जिंदगी का हिसाब-किताब एक जैसा नहीं रहता। लोग एक जैसे नहीं रहते। वैसे में जो हम आज हैं, वह कल नहीं रहेंगे। और जो कल थे,
 
prabhat gopal
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झारखंड में बीपीएल पोलिटिक्स पोलिटिक्स...

अगर एक पाठक या नागरिक के तौर पर आप हमसे झारखंड की राजनीति के बारे में पूछियेगा, तो हाथ जोड़ दूंगा। भैया बिहार की राजनीति तो समझ में आती है, लेकिन यहां झारखंड में बीपीएल पोलिटिक्स यानी बिन पेंदी का लोटा पोलिटिक्स को देखकर मन हाय-हाय करता है। क्षण में पलटी
 
prabhat gopal
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मां के स्वरूप को जानने के लिए मृत्यु तक प्रतीक्षा करनी होगी..

आप मां के लिए किस लब्ज का प्रयोग करेंगे। किस शब्द का सहारा लेंगे। मां की कोख से उपजा एक फूल कल उसके खिलाफ ही आवाज बुलंद करे, तो उस पर क्या बीतती है, ये एक मां के दिल से ही पूछना चाहिए। मेरी मां मेरे लिये सबकुछ है। हर किसी के लिए मां का स्वरूप व्यक्तिगत
 
prabhat gopal
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माफ कीजिएगा, मैं ब्लाग जगत और तथाकथित बौद्धिक जनों की झूठी दलीलों से ऊब गया हूं....

माफ कीजिएगा, मैं ब्लाग जगत और तथाकथित बौद्धिक जनों की झूठी दलीलों से ऊब गया हूं। स्त्री विमर्श, नारी स्वतंत्रता और अधिकार के कोणों से निरूपमा की मौत पर हो रहे सवालों से झुंझलाहट होती है। निरूपमा के लिए हजारों आवाजें बुलंद हो रही हैं। ये महज टीआरपी बढ़ाने
 
prabhat gopal
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निरूपमा की मौत पर प्रियभांशु से सवाल, रिश्ते को एक नाम देने में देरी क्यों की?

निरूपमा की मौत के बाद रह-रहकर एक सवाल मेरे जेहन में बार-बार आ रहा है कि इस देश में ऐसे न जाने कितने प्रियभांशु होंगे, जो अपने रिश्ते को एक नाम देने से घबराते हैं। महानगर में रहना, वहां का स्वतंत्र जीवन जीना और परिवार से दूर रहकर खुद के लक्ष्य के प्रति
 
prabhat gopal
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निरूपमा की मौत, दुखद, हैं कई सवाल...

पहले दिन खबर आयी कि पत्रकार निरूपमा की करंट लगने से मौत हो गयी। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार था। उसमें जिस बात का खुलासा हुआ, उससे सब सकते में थे। मामला ये था कि गला घोंटकर निरूपमा की हत्या की गयी थी। पेट में गर्भ भी था।  मामले को लेकर
 
prabhat gopal
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मिला पांच सिरवाला नाग..

हाल में बंगलौर में मिला पांच सिरवाला नाग। अविश्वसनीय लगता जरूर है, पर है बिलकुल सच। ये तस्वीरें गवाह हैं।
 
prabhat gopal
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भ्रष्टाचार एक कलंक है...

इस देश को क्या हो गया है पता नहीं। जो जहां है, ज्यादा कमाने के चक्कर में दुह रहा है। शर्म को बेचकर, अंतरात्मा को रौंदकर हर कोई ज्यादा कमाने की चाह रख रहा है। मेडिकल का क्षेत्र हो या कूटनीति का सब जगह इस कदर खुद से मुहब्बत का पागलपन सवार है कि देश को बेच
 
prabhat gopal
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आइए पलटी मैनेजमेंट की पाठशाला झारखंड में

आइए पलटी मैनेजमेंट की पाठशाला झारखंड में। यहां वह सब देखिये और सीखियेगा, जो आप कहीं और नहीं सीख पाये। मौके पर कैसे पलटा जाये। कैसे जुगत भिड़ाई जाये। कहानी कुछ नरसिंहराव के जमाने से शुरू होती है। शिबू सोरेन रिश्वत कांड में नप जाते हैं। राजनीतिक साख गिरवी
 
prabhat gopal
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खतरनाक बनता जा रहा है फेसबुक का तिलिस्म

मैंने आते समय ट्रक के पीछे एक शेर देखा और फेसबुक पर डाला। चलती है गाड़ी, उड़ती है धूल, जलते हैं दुशमन, खिलते हैं फूल। कमेंट्स भी आ गये। फेसबुक का तिलिस्म खींचता है। हाल के दिनों में फेसबुक ऐसे द्वंद्व या दुष्प्रचार का केंद्र बन गया है, जहां से कुछ ऐसी बू
 
prabhat gopal
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मुंह बिचका कर और कंधे उचका कर बोलना क्या जरूरी है?

कल रात एक अंगरेजी समाचार चैनल देख रहा था। एक प्रसिद्ध खिलाड़ी के साथ विचार-विमर्श का दौर चालू था। वैसे तो अंगरेजी बोलने और पढ़नेवाले शायद आधुनिकता में एक पायदान ऊपर रहते हैं। ये बात आप और हम सब समझते हैं। हमारा मकसद अंगरेजी भाषा के प्रति विरोध करना नहीं,
 
prabhat gopal
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आइपीएल विवाद - सरकारी विभाग

आज आइपीएल विवाद के बाद सरकारी विभाग जाग रहे हैं। औपचारिकता निभायी जा रही है। मीडिया हर पल की जानकारी दे रहा है। सवाल ये है कि इतने करोड़ों की लेन-देन में अनियमतता के बाद भी सरकारी विभागों को कोई खबर नहीं है। एक बात जाहिर है कि सत्ता केंद्र में बैठे
 
prabhat gopal
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मेरी बड़ी बेटी आज तीन साल की हो गयी..

मेरी बड़ी बेटी आज तीन साल की हो गयी। तीन साल देखते-देखते बीत गए। काफी कुछ कहने-बोलने को है। तीन साल की सोना और एक साल की सौम्या आज हमारी जिंदगी के अहम हिस्से हैं। उनके साथ टाम एंड जेरी की शैतानी और छोटा भीम की हर जांबाजी को देखना हमारी विवशता
 
prabhat gopal
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उफ्फ ये कुकुर प्रजाति के सदस्य, न जीने देंगे, न मरने

रात में आफिस से निकलते वक्त हमारा सामना तीन चीजों से होता है, रात के अंधेरे से, खुद से और कुकुर झुंड से। दिनभर कुकर बिरादरी के सदस्यों को यहां-वहां मुंह मारते देखियेगा, लेकिन रात में उनकी मीटिंग और एकता देखकर आप दांतो तले उंगलियां दबा लेंगे। स्कूटर
 
prabhat gopal
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नीतीश का अंगरेजी में ब्लागियाना....

जिंदगी के पन्नों को पलटते हुए नीतीश कुमार ब्लाग की दुनिया में कदम रखकर नयी कहानी लिख रहे हैं। नीतीश वह सबकुछ कर रहे हैं, जिससे कम से कम सकारात्मक संदेश जाये। ये प्रयास नीतीश का सराहनीय है। एक बेहतर कदम है। लेकिन नीतीश इस मामले में एक जगह चूक गये।
 
prabhat gopal
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देख तेरे संसार की हालत क्या हो गयी भगवान

आज से २०-३० साल के बाद बूढ़ों की संख्या ज्यादा हो जाएगी। अभी जो जन्म दर वह पहले की अपेक्षा कम हो गयी है। यानी जनसंख्या कम होने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जब भी पेंशन प्लान के बारे में सुनता हूं, तो सोचता हूं कि क्या हमें इस ओर पहल करनी चाहिए। अपनी
 
prabhat gopal
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आइपीएल का धंधा. ..... लगता है कुछ गंदा

देखिये लालू प्रसाद कहते हैं कि बीसीसीआइ का सरकार अधिग्रहण करे। ये तीन-चार साल बाद सरकार जाग रही है। जब देश में सुरक्षा के सवाल पर आइपीएल को साउथ अफ्रीका में कराया जा रहा था, तब सोचा जाना चाहिए था, ये सब। शशि थरूर और सुनंदा पुष्कर के बहाने आइपीएल के पीछे
 
prabhat gopal
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शायद कल रफ्तार तेज हो जाये...

कभी-कभी लगता है, जैसे कुछ काम नहीं होगा। लगता है, जैसे अपने बस में कुछ नहीं। सुनते हैं कि बर्नआउट वाले स्टेज में ऐसा होता है। क्या हमने ऐसा कर लिया है क्या? इतना काम कर लिया है? या हमारे पास टॉपिक या यूं कहें मुद्दों की भरमार नहीं है। मैं अब सानिया
 
prabhat gopal
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Apr 17 2010 02:36 PM
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ये एक अपील है..... जिससे हम सबका फायदा होगा

इन दिनों इतनी गरमी पड़ रही है कि बाहर धूप में निकलने को मन नहीं कर रहा। रांची जैसे शहर में इतनी गरमी उफ्फ। मैं गरमी पर ये दूसरी पोस्ट लगातार लिख रहा हूं। ये पोस्ट इसलिए जरूरी है कि अब लोगों को ये कम से कम ख्याल आये कि हमें पेड़ों को लगाना चाहिए। आज मैं
 
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रवीश से गुजारिश है कि हमें इतना भावुक मत कीजिये

मैं जब एनडीटीवी पर उजड़ती बस्ती के फिर से बसने की कहानी देख रहा था, तो खुद में सीखने की ललक को जगा रहा था। यहां ये तारीफ किसी ऐसी चीज के लिए नहीं है, जो सिर्फ कहने के लिए है, बल्कि जिन सामाजिक सरोकारों को लेकर लगातार हम रिपोर्टिंग की अपील एक दर्शक के
 
prabhat gopal
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दंतेवाड़ा से ज्यादा सानिया एपिसोड का प्रसारण, सर पटकने का मन करता है..

इलेक्ट्रानिक मीडिया ने दो दिनों में दंतेवाड़ा और सानिया की खबरों के प्रसारण के समय में सानिया की खबरों को ज्यादा तरजीह दी। लाइव टेलीकास्ट किया। ऐसा लगा कि शोएब भाई साहब के मामले ने दो देशों के संबंधों को बिगाड़ने की स्थिति पैदा कर दी है। सीधे तौर पर कहने
 
prabhat gopal
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चिदंबरम पीछे नहीं हटें..

ये देश एक जंग लड़ रहा है। लगता है, जैसे अभी शुरुआत है। एक शब्द कहेंगे, चिदंबरम पीछे नहीं हटें। ये नक्सली सीधे रास्ते, अनुनय-विनय और दया की बातें नहीं जानते। इन पर दया दिखाना इस देश को अंधेरे में झोंकना है। नक्सल पर बहस अब सीमा को पारकर चुकी है। ७६ जानें,
 
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ये रिश्ते, जाने-अनजाने

आपने ये महसूस किया है कि हममें और आपमें एक सनक रहती है ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाने की। लेकिन ये पैसा एक सीमा के बाद मायने नहीं रखता। कई लोगों के पास ढेर सारा पैसा है, लेकिन खुशी का दो शब्द बोलनेवाला कोई नहीं होता। अंतिम समय में कोई ऐसा नहीं होता है, जो
 
prabhat gopal
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सिर्फ शब्दों की जुगलबंदी से कब तक ताली बजवाने का सिलसिला चलता रहेगा...

मंत्री जयराम रमेश भोपाल में कन्वोकेशन के दौरान गाउन उतारते हुए उसे बर्बरता का प्रतीक मानते हैं। अंगरेजी राज, अंगरेजी शासन, गुलामी ये शब्द, ये बातें किसी को जागरूक नहीं करतीं। लगता है जैसे बेवकूफ बनाया जा रहा है। जिस शिक्षा प्रणाली को आज हमारा देश लागू
 
prabhat gopal
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वो अब नहीं है..

आज एक नर्सिंग होम में जाना हुआ। वहां रिसेप्शन पर बतौर हेड एक महिला बैठा करती थीं। ऐसा कहें, चार-पांच बार जाने के दौरान उनकी व्यस्तता और कर्मठता ने जेहन में ऐसा खाका खींचा था कि मन कर्म करने को प्रेरित होता था। यू कहें हाइपर एक्टिव। शायद नौ महीने के बाद
 
prabhat gopal
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बताइये, सानिया ब्याह रचाएंगी और परेशानी सारे लोगों को है...

बताइये, सानिया ब्याह रचाएंगी और परेशानी सारे लोगों को है। शोएब भाई साहब भी हंसते हुए शादी की बात स्वीकार करते हैं। लेकिन इसी के साथ बवाल खड़ा हो गया। बहस चल निकली। सानिया को लेकर सब परेशान हो गये। भाई, ये दो लोगों के बीच का मामला है। अब कानूनी लिहाज से
 
prabhat gopal
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रांची जैसे शहर में बढ़ती गरमी, किसी कयामत का दस्तक जरूर दे रही

कभी-कभी जिंदगी ऐसे सवाल करती है, मानो वह खुद ही सवाल पूछ रही हो। यहां गरमी की दुपहरी में इस शहर की जिंदगी को भी लगता है जैसे नजर लग गयी है। कभी रांची आते, तो हरियाली के बीच और पेडों के झुरमुटों के नीचे आपको गरमी का अहसास नहीं होता था। विभाग ने सड़क चौड़ी
 
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बिहार की राजधानी पटना का नाम पाटलिपुत्र कर दिया जाये.!

एक सवाल ये उठाया जा रहा है कि बिहार की राजधानी पटना का नाम पाटलिपुत्र कर दिया जाये। हमने एक जगह कमेंट्स भी दिये कि नाम में क्या रखा है। नाम से क्या परिवर्तन हो जायेगा। बंबई को मुंबई कहने लगे या मद्रास को चेन्नई, तो क्या हो गया? इन सारे संदर्भों में ये
 
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फेसबुक पर चिरकुटई, अंग्रेजीदांओं की चिल्लपों और हम सब

आप फेसबुक पर जायें और किसी हीरो, हीरोइन का नाम लेकर उनकी आइडेंटीटी खोजें, तो हो सकता है कि २०-३० से ज्यादा एक ही नाम के आइडेंटीटी मिल जायें। कभी-कभी तो पुरुषों के पहचान के नाम पर हीरोइनों की फोटो चिपकी रहती है या फिर किसी हीरो की। फरजी पहचान के सहारे
 
prabhat gopal
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अमिताभ राजनीतिकों से क्यों रखें संबंध?

अमिताभ जब गुजरात के ब्रांड अंबेस्डर हो जाते हैं या फिर मुंबई के सी लिंक के उद् घाटन समारोह में भाग लेते हैं, तो अखबारों के पन्ने बयानबाजी, अंतरविरोधों से भर उठते हैं। सवाल ये है कि आखिर अमिताभ राजनीतिक कार्यक्रमों या राजनीतिकों से क्यों संबंध रखें। ये
 
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बर्बाद हो देश का खेल, आइपीएल को मस्त होकर खेल

पैसा, पैसा, पैसा और पैसा। अब तो शराब और शबाब भी। आइपीएल मैचों के बाद पार्टी की रातों का टेलीकास्ट क्या संदेश दे रहे हैं? इस देश में बाजार का इस कदर हावी होना एक खतरे का संकेत हैं। हॉकी, जो हमारा राष्ट्रीय खेल है, उसे लेकर जो नौटंकी जारी रहती है और जो
 
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हनुमान हमारा मार्ग प्रशस्त करें..

रामनवमी में राम जन्मोत्सव को लेकर एक अलग तरह का उत्साह रहता है। वैसे में हनुमान भक्तों का उमंग कुछ अलग रहता है। मुझे हनुमान हमेशा से ऊर्जा से भरपूर और मार्ग दिखानेवाले देवता नजर आये। जब भी भय लगा, तो हनुमान चालीसा का पाठकर खुद को उससे मुक्त कर लिया। राम
 
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कानू सान्याल, कम्युनिज्म

कभी-कभी किसी की मौत पर दुख होता है,तो कभी किसी की मौत पर न दुख और न कोई अन्य बोध। मन तटस्थ भाव से उस खास व्यक्ति की पिछली जिंदगी और उसके निष्कर्षों से तारतम्य बैठाने की कोशिश करती है। खबर आयी कि नक्सल आंदोलन के प्रणेता कानू सान्याल नहीं रहे। आत्महत्या कर
 
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