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मानसिकता ही दोयम दर्जे की हो चुकी है.
पहले जब फौज में जाने की बात होती थी, तो लोग सबकुछ भूल उसे करियर के रूप में अपनाने की सलाह देते थे. लेकिन आजकल ऐसा नहीं. फौज को लेकर क्रेज लगातार घट रहा. आइएमए, देहरादून से पासआउट कैडेट्स में झारखंड के मात्र आठ कैडेट्स थे. झारखंड जैसे स्टेट से यूथ फौज में
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Jun 14 2010 10:09 AM


Shuffle








