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31 May 2010
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आलूबड़ा

अजित वडनेरकर जी के 'शब्दों के सफ़र'  पर आज ३१-०५-१० को ये नाश्ता मिला :-आलूबड़ा छोटा नही पसंद, 'बड़ा' खा रहे है हम,खाके, पचाके 'छोटा' ही बतला रहे है हम.घर है, न है दुकान, सड़क किसके बाप की!'वट' वृक्ष बनके फैलते, बस जा रहे है
 
Mansoor Ali
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बड़ा कौन ?

बड़ा कौन ?किस 'बला' में है मुब्तला 'गीरी'*       [ब्लागीरी]झाड़ या फूंक ही करा लीजे.फंकी चूरण की लो जो पेट दुखे,सर दुखे बाम ही लगा लीजे.समझ नही आता तकलीफ कहाँ पर है? हिन्दी ब्लागिंग में जो उठा-पटक चल रही है , अफ़सोस क विषय है. अपनी
 
Mansoor Ali
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शर्म हमको मगर नही आती....

शर्म हमको मगर नही आती....फटाफट इसमें* मिल जती है शोहरत,      [*T-20] जो हारे भी तो खुल जाती है किस्मत.हाँ ! मैंने दी है थाने  पर भी रिश्वत,न देता, कैसे बनता 'पास पोरट' ?हो रिश्वतखोर या
 
Mansoor Ali
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आडम्बर

अजित वडनेरकर जी, आज[२४-०४-१०/shabdon ka safar]  फिर आपने प्रेरित  किया है , आडम्बर के लिए, विडम्बना के साथ खेलना पड़ रहा है:-__________I [मैं]  P ह L ए ==========आ ! डम्बर-डम्बर खेले,वो मारेगा तू झेले , जो हारेगा वो
 
Mansoor Ali
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क्यों?/Why?

क्यों?ब्लॉगर भी  ज़हर फैला रहा है!जो बोया है वो काटा जा रहा है.धरम-मज़हब का धारण नाम करके ,भले लोगों को क्यों भरमा रहा है.अदावत, दुश्मनी माज़ी की बाते,इसे फिर आज क्यों दोहरा रहा है.सहिष्णु बन भलाई है इसी में,क्रोधी ख़ुद को ही झुलसा
 
Mansoor Ali
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'सतरंगी यादों के इंद्रजाल: एक ब्लोगर जिनके अंदाज निराले हैं.

'सतरंगी यादों के इंद्रजाल: एक ब्लोगर जिनके अंदाज निराले हैं.cAsE sENsitIve
 
Mansoor Ali
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नि:शब्द

नि:शब्द![अजित वडनेरकर जी  की अ-कविता रूपी कविताओं से किंक्रतव्यविमूढ़  होकर............]प्रयोग करके शब्दों के ब्रह्मास्त्र चल दिये,अर्थो का क़र्ज़ लाद के अब चल रहे है हम.शब्दों के कारोबार में कंगाल हो गए,अर्थो को बेच-बेच के अब पल रहे
 
Mansoor Ali
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मुफ्त की सलाह!

मुफ्त  की सलाह![शब्दों का सफ़र....की आज [०८.०४.१०.] की पोस्ट सलाह मश्वरा से सुलह सफाई तक .........से प्रभावित]बंद कमरों के मशवरो के स्वरूप,फैसले जो हुए अमल करना,शहद पर हक है हुक्मरानों का,जो बचे उसपे ही बसर करना.हाँ!
 
Mansoor Ali
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बेडमिन्टन/badminton

बेड man -शन [shun ]SO नया भी है पुराने जैसा,  मर्ज़ उनका है ज़माने  जैसा,अपने साथी को बदल कर दोनों,खेल पायेंगे दीवाने जैसा!  -मंसूर अली हाशमी cAsE sENsitIve
 
Mansoor Ali
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आज कल / Now a Days

 आज कल ब्लोगेर्स:छप-छपाना, न हुआ जिनको नसीब,बज़ बज़ाते फिर रहे है इन दिनों.खुबसूरत जब कोई चेहरा  दिखा,टिपटिपाते फिर रहे है इन दिनों.M F:बेच कर घोड़े भी वो सो न सके,हिन् हिनाते फिर रहे  है इन दिनों,रंग में ख़ुद ने ही डाली भंग
 
Mansoor Ali
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क्रिकेट की गिरगिट

आदरणीय दिनेश रायजी,सादर नमस्कार,महेंद्र नेह जी कि शानदार रचना पर एक गुस्ताखाना हज़ल हो गयी है. दरअस्ल आई.पी.एल  मेच देखते-देखते यह पढ़ना-लिखना कार्यरूप ले रहा था.आपको इस बात का इख्तियार देता हूँ कि इस सठियाई हुई रचना को सिरे से ख़ारिज करदे,
 
Mansoor Ali
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कुछ तो है नाम में!

कुछ तो है नाम में! नाम से धाम* जुड़े उससे तो पहचान मिले,नाम से काम जो जुड़ जाये तो सम्मान मिले, श्री बन जाये मति उसको श्रीमान मिले.'काम' हो जाये सफल उससे तो संतान मिले. मिलते-मिलते ही मिला करती है शोहरत यारों,नाम ऊंचा उठे;
 
Mansoor Ali
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पड्ताल/INVESTIGATION

पड्ताल/INVESTIGATIONनाम मे रखा क्या है!कौन तू बता क्या है?’मन’ है तू सही लेकिन,’सुर’ मे ये छुपा क्या है.कौन है तेरा मालिक?सब का वो खुदा क्या है!त्रिशूल, चान्द या क्रास,हाथ पे गुदा क्या है?फ़िर से तू विचार ले,नाम से बुरा क्या है.धर्म से भला है कुछ,धर्म से
 
Mansoor Ali
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गो-डावून [going down]

गो-डावून [going down][अजित वडनेरकरजी की आज{१७-०३-१०} की पोस्ट  गोदाम, संसद या डिपो में समानता से प्रेरित होकर]''माल'' हमने ''चुन'' के जब  पहुंचा दिया गोदाम में.शुक्रिया का ख़त मिला; ''अच्छी मिली 'गौ' दान में. पंच साला ड्यूटी देके लौटे, साहब हाथ
 
Mansoor Ali
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ज़ुबाँ/ Tongue

ज़ुबाँ / tongue / लेंगुएज दो धारी तलवार ज़ुबाँ  है,करवाती तकरार ज़ुबाँ  है.मिलवादे तो यार ज़ुबाँ है.चढ़वादे तो दार* ज़ुबाँ है.भली-भली जो चीज़े देखे,रसना भी है,लार ज़ुबाँ है.नंगे और भूखे लोगों की,कुरता भी शलवार ज़ुबाँ 
 
Mansoor Ali
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कानून, प्रशासन और आम आदमी...

कानून, प्रशासन और आम आदमी...अंधे कुए में झाँका तो लंगड़ा वहां  दिखा,पूछा, की कौन है तू यहाँ कर रहा है क्या?बोला, निकाल दो तो बताऊँगा माजरा,पहले बता कि गिर के भी तू क्यों नही मरा? मैं बे शरम हूँ, मरने कि आदत नही मुझे,अँधा था मैरा दोस्त यहाँ पर पटक
 
Mansoor Ali
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आखिर में

शब्दो से माला-माल कर रहे  अजित जी, की आज [१८-०२-१०] की ''शब्दों का सफ़र'' पर  प्रेरणा दायक पोस्ट से प्रभावित:-  माल बनता है मल ही आखिर में,'आज' बनता है 'कल'* ही आखिर में.धन पशु है; पशु भी धन ही है,चल भी होता अचल ही आखिर मे. महंगी होती
 
Mansoor Ali
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MHhashmi's Scrapbook Tubely - 100% Free Online Dating Service

MHhashmi's Scrapbook Tubely - 100% Free Online Dating Serviceठेकेदार !बिन बुलाया कोई मेहमान न चलने दूँगा,पाक-ओ-कंगारू है बयमान न चलने दूँगा.मैं किसी और की दूकान न चलने दूँगा,नाम में जिसके जुड़े खान न चलने दूँगा.याँ जो रहना है वडा-पाँव ही खाना
 
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ठेकेदार !

ठेकेदार !बिन बुलाया कोई मेहमान न चलने दूँगा,पाक-ओ-कंगारू है बयमान न चलने दूँगा.मैं किसी और की दूकान न चलने दूँगा,नाम में जिसके जुड़े खान न चलने दूँगा.याँ जो रहना है वडा-पाँव ही खाना होगा!इडली-डोसा, पूरबी-पकवान; न चलने दूँगा.घाटी लोगों की जमाअत का भी
 
Mansoor Ali
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शीत युद्ध/cold war

खान idiots है, टाइगर genie ?, yes!दोनों मुंबई से प्यार करते है.........!जब भी मौक़ा मिला बिना चूके,एक दूजे पे वार करते है.-मंसूर अली हाश्मी   cAsE sENsitIve
 
Mansoor Ali
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HOT

[HOT...HOTTER....HOTTEST........    Heartthrob Ranbir Kapoor  is India's Most Desirable Man    in ZOOM Top 50 list.   -T.O.India 8jan.2010]अबतो पुरुष भी HOT है, बाज़ार की शै है,जिंसों के कारोबार में बिकना भी
 
Mansoor Ali
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नुस्ख़ा

नुस्ख़ाबढ़े ठंडक ! तो इतना काम कर जा ,'अमर' बन, इस्तीफा देकर गुज़र जा.बदल ले भेष*, ग़ालिब कह गए है,तू खुद अपना ही तो 'कल्याण' कर जा.'नदी' की 'त'रह बहना खुश नसीबी,  [N D T]तकाज़ा उम्र का लेकिन ठहर जा.करे 'आशा'ए तेरी 'राम' पूरी, ज़रा तू 'लालसाओं' से उभर
 
Mansoor Ali
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लेखा-जोखा

 लेखा-जोखा फिर नए साल ने दस्तक दी है,सर्द झोंको ने भी कसकर दी है.अपनी तकदीर हमें लिखना है,कोरे सफ्हात की पुस्तक दी है.बा मुरादों ने दुआए दी तो,ना मुरादों ने छक कर पी है.'तेल-आंगन' से न निकला फिर भी, हाद्सातों ने तो  करवट ली है.बर्फ की तरह
 
Mansoor Ali
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दुहाई

फ़रियाद !'रू'ह 'ची'त्का'र कर रही अब तक,'रा' को पहुंचादो उसके 'ठौर' तलक.अबतो इन्साफ की दुहाई है,मसअले कितने ऐसे  गौर तलब  ? -मंसूर अली हाशमी  cAsE sENsitIve
 
Mansoor Ali
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केट / CAT

सी ए टी ...केट , केट यानि बिल्ली नही! फिर बुद्धिजीवियों से इक  mistake हो गई, अबकी, शिकार चूहे से एक CAT हो गई!   थी NET पर सवार मगर लेट हो गयी, होना था T-20, मगर test हो गई. zero फिगर पे रीझ के लाये थे पिछले साल, इक साल भी न गुज़रा, व
 
Mansoor Ali
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हृदयांजलि: अपना पीडीएफ पुस्तक कैसे प्रकाशित करें

हृदयांजलि: अपना पीडीएफ पुस्तक कैसे प्रकाशित करें : "लिंक एक लिंक बना" cAsE sENsitIve
 
Mansoor Ali
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Liberhan Commission

लिब्राहन आयोग  एक 'रपट'  फिर लीक हो गयी, हार किसी की जीत हो गयी. देर से आई, ख़ैर न लायी, कैसे भी कम्प्लीट हो गयी. तोड़-फोड़ तो एक ही दिन की, 'सत्रह साली'   ईंट*  हो गयी. संसद पर जो भी गुज़री हो, 'अमर-वालिया' &n
 
Mansoor Ali
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T V Channels

टी. वी. चेनल्स  खबरों के  कुछ  चेनल बीमार नज़र आते है, इनमे से कुछ  लोकल  अखबार  नज़र  आते  है. बिग बोसों के  छोटे कारोबार  नज़र आते हैं, छुट-भय्यो को,हर दिन  त्यौहा
 
Mansoor Ali
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kati patang

कटी पतंग  [शब्दों का  सफ़र पर अजित वडनेरकरजी कि आज कि पोस्ट  मांझे की सुताई से चकरी व् मांझा उधार ले कर .......] अभी हाल ही में कटी थी पतंग, पुराना था मंझा लगी जिस पे ज़ंग, थी सत्ता कि चाहत बड़ी थी उमंग, नतीजो ने उनका उड़ाया
 
Mansoor Ali
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devaluation

अवमूल्यन  जो बे हुनर थे आज वो इज्ज़त म'आब* है, अच्छे भलो का देखिये ख़ाना खराब है. ताउम्र भागते रहे जिसकी तलाश में, पाया ये बिल अखीर* के वो तो सराब* है. संस्कार और शरीअते सिखलाने वालो के, हाथो में हमने देखा कि उलटी किताब है. जीरो पे है फुगाव
 
Mansoor Ali
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Forbes- Power Measuring Machine!

नया पैमाना  अप-डेट* होके गुंडे पाए नया मुकाम, दाऊद पूरबी तो पश्चिम का है ओसाम[a]. सर्वेयरों* को मिलते अब रोज़ नए काम बदनाम भी हुए तो होता है बड़ा नाम. *Forbes' List  cAsE sENsitIve
 
Mansoor Ali
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My Foot

माय फूट! वो नहीं बोलता झूट, ''अमची'' न बोला तो 'हूट' माय फूट! 'आज़मी' को डाला कूट , किसको भली लगी करतूत? माय फूट. अस्मिता में डाली फूट, कैसी मानुस में अब टूट, माय फ़ुट. चाहें देश ये जाए टूट, दल को करना है मजबूत, माय फूट. नही पूरा हुआ [
 
Mansoor Ali
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Come! meants?

चटके का झटका  वाणी मेरी पढ़के उसने आज एक चटका दिया, अर्थ उनके शब्दों का में ढूंढ़ता ही रह गया, वो लिखे कि- इतने सुन्दर,कितने सुन्दर आप है, इस बुढापे में ये कितनी ज़ोर का झटका दिया. अब ब्लागों पर लगी तस्वीर का मैं  क्या करू, छप गई; हटती
 
Mansoor Ali
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Self Appreciation

प्राप्ति ....कमेंट्स की! पीठ खुजाने में दिक्कत है?  आओ! एसा कर लेते है... मैं खुजलादूं आपकी... बदले में , मेरी ; तुम खुजला देना. एक हाथ से मैंने दी तो, दूजे से तुम लौटा देना. कर से,  कर [tax] ही की भाँति अधिक दिया तो [refund] लेना. -मं
 
Mansoor Ali
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Karnataka/scam/terror

कर- नाटक ! # अब दल का खुला है फाटक,   ''कर'' लो जो भी हो ''नाटक''.   'येदू' जो  कभी  ''रब्बा'' थे,   अब क्यों लगते है  जातक. # धन ढूंढ़ता राजा को पहले,   अब ''राजा'' को धन की चाहत, &nbs
 
Mansoor Ali
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This Year

समझौता वातावरण में शोर न पैदा करेंगे हम, दिल के दीये जला के उजाला करेंगे हम. फोड़ा पटाखा,फहरा पताका है चाँद पर, दीपावली वही पे मनाया करेंगे हम. कुर्बानियां तो ईद की करते है बार-बार, खुद को भी अपने देश पे कुर्बां करेंगे हम. पटरी से रेल उतर गई, इंज
 
Mansoor Ali
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This Time

अबकी बार ......                                      &n
 
Mansoor Ali
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Noble Prize

नौ [२००९] में बल से हासिल!    नो [No] में वैसे ही  बल नही होता, शान्ति में;  जैसे छल नही होता. कच्चे नारयल में ये मिलेगा पर, पक्के पत्थर में जल नहीं होता. सच्चे साधू में मिल भी जाएगा, हर कोई बा-अमल नही होता. बाज़* पाए [ई ] बहुत ही
 
Mansoor Ali
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Mine Nine-Nine

9 - 9 - NO!9--९ सुनते दिन गुजरा था,No--No सुनते रात गुज़र गई.खैर यही की खैर से गुजरी, पंडित जी की जेब भी भर गई.रस्ता काट न पाई बिल्ली,हम सहमे तो वह भी डर गई.काम बहुत से निपटा डाले,काम के दिन जब छुट्टी पड़ गई.एक सदी तक जीना होगा,जिनकी नैना ९ से लड़
 
Mansoor Ali
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Sallu Miyaa

[With Sallu it is sometimes difficult to keep his shirt on....T. O. I./21.09.09]Shirt [शर्त?]पहन लूँ या निकालूं फर्क क्या है,दिखाऊँ या छुपाऊं हर्ज क्या है,मैं हर सूरत बिकाऊं शर्त? क्या है,बताएं कोई इसमें तर्क क्या है?जो बाहर हूँ, मैं अन्दर से वही हूँ,मगर
 
Mansoor Ali
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