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निरन्तर

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18 Jun 2010
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गुरुदेव के सदविचार और मेरा ब्लागरों से क्षमायाचना सहित एक निवेदन

* यदि दुर्गुणों को छोड़कर सदाशयता का की रीति नीति को अपनाया जा सके तो समझाना चाहिए की मानवी गरिमा के अनु रूप मर्यादा पालन करना बन पड़ता है और हंसती- हँसाती, उठती- उठाती जिंदगी का रहस्य हाथ लग जाता है और ऐसे ही लोग ही धन्य हो जाते हैं . व्यवहारिक
 
महेन्द्र मिश्र
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जोग और कुछ यहाँ वहां की...

एक बार एक व्यक्ति ने फौजासिंह को एक पत्र भेजा जिसमे लिखा था की "" भेजने वाला महान और पढ़ने वाला गधा"" . उस व्यक्ति को फौजासिंह ने उत्तर भेजा इस तरह से ""भेजने वाला गधा और पढ़ने वाला महान""०००००ताउजी ने अपने पडोसी के लडके से पूछा - बेटा तुम्हें कैसी बहू
 
महेन्द्र मिश्र
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चुटकुले हंसो और हंसाओ ....

एक युवक बड़ा शर्मीला था और वह एक सुन्दर लड़की से विवाह करना चाहता था पर वह अपने दिल की बात शर्मीलेपन के कारण कह नहीं पाता था . डरते डरते एक दिन लड़की के सामने अपने विवाह का प्रस्ताव कुछ इस तरह से व्यक्त किया .क्या तुम मेरे लडके के हाथों या मेरे हाथो अपनी
 
महेन्द्र मिश्र
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तेरी यादों, उजाले के सहारे संग संग चल हैं प्यारे...

तेरी यादों, उजाले के सहारे संग संग चल हैं प्यारेगिरकर संभलते हुए लम्हें लम्हें गुजार रहा हूँ प्यारे.तेरा नाम भी मतलब की दुनिया में शामिल है प्यारेकभी नाम पा रहा था, तेरे कारण बदनाम है प्यारे. 0000
 
महेन्द्र मिश्र
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मेरा एक प्राब्लम : कृपया इन वायरसों से निपटने हेतु निदान बताये

ब्लागिंग करते तीन वर्ष से अधिक का समय व्यतीत हो चुका है . प्रारंभ में जब ब्लागिंग शुरू की थी तो यहाँ का वातावरण बड़ा अच्छा लगता था . टिप्पणी मिलने पर बड़ा खुश हो जाता था और फिर लिखने की एक धुन सवार हो जाती थी . खूब जी भरकर लिखा . कलमकारों की रचनाये, लेख,
 
महेन्द्र मिश्र
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गुटबाजी का चक्कर और लोग हुए घनचक्कर ...

दो चार लोग का समूह को गोट गुट कहते हैं . गुटबाजी कहाँ नहीं होती है . परिवार में बिरादरी में राजनीति में मुहल्लों में गली कूचो में नौकरी में व्यापार में हर जगह गुटबाजी बखूबी देखने को मिल सकती हैं . गुटबाजी का चक्कर ब्लागजगत में भी आजकल खूब देखने को मिल
 
महेन्द्र मिश्र
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माइक्रो पोस्ट - मनुष्य पुरुषार्थ का पुतला है और उसकी सामर्थ्य और शक्ति का अंत नहीं है

माइक्रो पोस्ट - मनुष्य पुरुषार्थ का पुतला है और उसकी सामर्थ्य और शक्ति का अंत नहीं है . वह बड़े से बड़े संकटों से लड़ सकता है और असंभव के बीच संभव की अभिनव किरणें उत्पन्न कर सकता है . शर्त यहीं है की वह अपने को समझे और अपनी सामर्थ्य को मूर्त रूप देने के
 
महेन्द्र मिश्र
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मेरे प्यार को तू झूठी तोहमत न लगा

तेरे दिल में जब वफ़ा का नाम नहीं है फिर तुझे गैरो से वफ़ा क्यों मिलेगी. मित्र की नादान दोस्ती को ठुकरा करतुझे फिर दिलों से भी दुआ न मिलेगी.क्या खता हुई मुझसे मुंह मोड़ लेते हो खुशियाँ देने आये बदले में गम मिले.मेरे प्यार को तू झूठी तोहमत न लगा मेरे जैसा
 
महेन्द्र मिश्र
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बचपन की यादे : तुम्हारी बऊ खौं ....

आज सुबह सुबह जब टहलने निकला जैसे ही एम.आर. सड़क पर पहुंचा उसी समय बचपन के चार मित्र का अचानक आमना सामना हो गया . बीच सड़क पर खड़े होकर काफी देर यहाँ वहां की बाते की और एक दूसरे के हाल चाल जाने . फिर हम पांचो मित्र सड़क के किनारे बनी पुलिया पर बैठ गए . फिर इस
 
महेन्द्र मिश्र
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ब्लागिंग की दुनिया में तुम चलना संभल के

ब्लागिंग की दुनिया में तुम चलना संभल के आज सुबह से फुरसत नहीं मिली दिनभर यहाँ वहां बेमतलब घूमता रहा अचानक उड़नखटोला फिल्म का ये गीत जिसे रफ़ी साहब ने गया है को सुनकर तत्काल दिमाग में आया की क्यों न इसे लेकर ब्लागिंग के ऊपर एक परोडी लिख दी जाए तो वह जम भी
 
महेन्द्र मिश्र
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ए गनपत जरा इंटरनेट तो खोल ए गनपत जरा ब्लाग तो खोल

ए गनपत जरा इंटरनेट तो खोल ए गनपत जरा ब्लाग तो खोल ए गनपत जरा जोरदार पोस्ट तो लिख रे ए गनपत के रे फिर से देख इस पोस्ट पर कितनी पोस्ट आई रे ए गनपत नहीं आती हैं तो तू भी टिप्पणी धकेल रे तब तो बाबा लोग आयेगा रे ए गनपत टिप्पणी नहीं आती है तो किसी खासे से पंगा
 
महेन्द्र मिश्र
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बुढऊ ब्लागर्स एसोसियेशन के स्वयंभू अध्यक्ष महोदय ....के नाम एक चिट्ठी

बडे ही दुखित मन से मैंने दादाजी के बुढऊ कहने पर गुस्से से एक पोस्ट फेंक कर मारी थी जिसे पढ़कर बुढऊ लोग भी पसीज गए थे और आनन फानन में ताउजी ने बुढऊ ब्लागर्स एसोसियेशन की स्थापना की घोषणा कर दी तो बुढऊ लोगो में एक आशा की लहर जाग उठी की दुनिया में कोई उनका
 
महेन्द्र मिश्र
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महान क्रान्तिकारी वीर शहीद भगत सिह और उनके विचार जयंती अवसर पर .....

आज शहीद भगत सिह की जयंती के अवसर पर भारत ही नही पूरा विश्व जगमगा रहा है.भगत सिह ने लिखा था कि एक दिन ऐसा आएगा जब उनके विचारो को हमारे देश के नौजवान मार्गदर्शक के रूप मे लेंगे . भगत सिह के शब्दो मे क्रांति का अर्थ है, क्रांति जनता द्वारा जनता के हित मे और
 
महेन्द्र मिश्र
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दिल की हर धड़कन को मै कैसे इस ख़त में लिखता हूँ

दिल का हाल मै लिखता हूँ हो सके तो यकीन कर लोमै तुझे तेरे ख़त लौटाता हूँ अगर हो सके तो दिल दे दो.दिल की हर धड़कन को मै कैसे इस ख़त में लिखता हूँ इस बैचैन दिल की धड़कनें शब्दों में कैसे लिख सकता हूँ.तूने दिल से मुझे ख़त लिखा..मैंने कब इनकार किया है तेरा
 
महेन्द्र मिश्र
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बढ़ती नकाब संस्कृति पर विचार...

जब मैं बहुत छोटा था उस समय महिलाये बड़े बुजुर्गो का मान सम्मान करने के लिए घूंघट का सहारा लिया करती थी . समय बदलने के साथ साथ लोगों की विचारधारा में परिवर्तन हुए आज स्थिति यह है की जगह जगह घूंघट की जगह लडके और लड़कियों में नकाब पहिनने का प्रचलन बढ़ता ही
 
महेन्द्र मिश्र
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जबलपुर ब्लागर्स मीट : जबलपुर के ब्लागर्स इंटरनेट पर हिंदी के विकास हेतु संकल्पित और मीडिया से रूबरू हुए ....

आज दिनाक १३-०३ -२०१० को जबलपुर ब्लागर एसोसियेशन के तत्वाधान में सिटी काफी हाउस जबलपुर में अपरान्ह २ बजे ब्लॉगर मीट आयोजित की गई इस अवसर पर लखनऊ से भाई महफूज अली, भाई गिरीश बिल्लौरे जी, भाई राजेश कुमार दुबे "डूबेजी", भाई बबाल जी, भाई विजय तिवारी " किसलय "
 
महेन्द्र मिश्र
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निरन्तर पर आज दो सौ पचास वी पोस्ट .... कल ब्लागर भाई महफूज अली जी, भाई ललित शर्माजी, अवधिया जी से मुलाकात...

जबसे ब्लागजगत की दहलीज पर मैंने कदम रखा है आलम यह है की लोग मिलते रहे और कारवां बढ़ता गया की तर्ज पर ब्लागरो से मेल मुलाकात बढ़ती गई और यहाँ ब्लॉग पर उंगलियाँ चलती रही और ब्लॉग पर पोस्टे बढ़ती गई और आज स्थिति यह है की आप सभी से मिल रहे निरन्तर प्यार
 
महेन्द्र मिश्र
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क्या रिटायरमेंट शब्द सिर्फ बूढों के लिए है ?

आज सुबह जब बिस्तर छोड़े तो दिल बड़ा खुश था और मन ही मन में सोच रहा था की आज का दिन बहुत अच्छी तरह से गुजरेगा . सुकून के अंगड़ाई लेते हुए बाथरू म में नागिन फिल्म का यह पुराना गाना गाते हुए "मेरा मन डोले मेरा तन डोले " नहाने धोने की तैयारी कर रहा था की
 
महेन्द्र मिश्र
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महिला दिवस पर - देवियाँ देश की जाग जाएँ अगर

आज देश के साथ सारे विश्व में अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है . आज के दिन महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में जागरुक कराने और उन्हें उनके अधिकारों की जानकारी देने के लिए तरह तरह के आयोजन किये जा रहे हैं . ब्लागजगत में नर नारी
 
महेन्द्र मिश्र
Mar 08 2010 07:20 PM
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जवानी के दिनों की कतरने ...दर्दे दिल की बात को मै इस चिट्ठी में कैसे लिख सकता हूँ

दर्दे दिल की बात को मै इस चिट्ठी में कैसे लिख सकता हूँइस दिल में उठे तूफानों को चिट्ठी में कैसे लिख सकता हूँ.000शिकायत हमें आप से है की आपने हमें अब तक देखा नहीं तेरे पैगाम के इंतज़ार में है दिल मेरा पर तूने पैगाम भेजा नहीं.000दिल से तुम खूब मुस्कुराया
 
महेन्द्र मिश्र
Mar 04 2010 07:05 PM
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होली के बाद के ब्लागरी चुटकुले ...

* स्वामी भविष्यानंद को गाने गाने का बड़ा शौक था . कभी भी फक्कड़ी मौज में गाना बेसुरी आवाज में गाने लगते थे . एक नया गाना मेहबूबा मेहबूबा होली की ठुर्रस में गाते हुए सीधे चले जा रहे थे और धुन्नस में सीधे नदी में घुस गए . फिर थोड़ी देर बाद नदी में से एक जोर
 
महेन्द्र मिश्र
Mar 02 2010 06:06 PM
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तेरी दीवानगी ने ही मुझे ये प्यारी जिंदगी दी है ..

तेरी दीवानगी ने ही मुझे ये प्यारी जिंदगी दी है फूलो ने जैसे चमन में इन बहारो को खुशबू दी है.000आँखों ने देखा और दिल की इन सांसो से सराहा बस यह दिल आपका दिल से दीवाना बन गया है.
 
महेन्द्र मिश्र
Feb 23 2010 06:40 PM
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फाग गीत - नर्मदा रंग से भरी होली खेलेंगे श्री भगवान

आज एक बहुत करीबी मित्र के यहाँ मै मिलने गया . अच्छा भरा पूरा परिवार है . दादा भी हैं दादी भी हैं . इस परिवार में महिलाओं की अधिकता है और उस परिवार में बड़ा सौहाद्र पूर्ण वातावरण है जब परिवार की चार महिलाए मिलकर साथ बैठती हैं तो खूब गीत लोकगीत भजन आदि
 
महेन्द्र मिश्र
Feb 19 2010 07:44 PM
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जोग मुस्कुराने के लिए ....

वैलेंटाइन के दिन एक प्रेमी अपनी प्रेमिका दया से मिलने उसके घर गया . वहां उसे प्रेमिका के पिता मिले . उन्होंने पूछा - कहो कैसे हो ?प्रेमी प्रेमिका के पिता से - बस आपकी दया चाहिए .----ताउजी जी आंख दिखाने आँखों के डाक्टर के पास गए - बोले मुझे एक के दो दिखाई
 
महेन्द्र मिश्र
Feb 16 2010 12:17 PM
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सभी ब्लॉगर भाई बहिनों को महाशिवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामना

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधी पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बंधनात मृत्योमुक्षीय मामतातॐ शिवजी सदा सहाय करे.ॐ नमो शिवाय हर हर महादेव बमबम भोलेनाथसभी ब्लॉगर भाई बहिनों को महाशिवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामना. फोटो - दमोह जिले के बांदकपुर में स्थित तीर्थ स्थल
 
महेन्द्र मिश्र
Feb 12 2010 02:10 PM
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आजकल के बच्चे समय से पहले ही बड़े हो रहे हैं ?

एक समाचार पत्र में पढ़ा की एक स्कूली छात्र ने अपने हाथ को ब्लेड से काटकर एक छात्रा का नाम लिखने की कोशिश की गई . उस बालक का यह दुस्साहस आने वाले समय की कहानी कह रहा है जब बचपन समाज के लिए नासूर साबित हो सकते हैं . बालक समाज के जिस माहौल में पलते और बढ़ते
 
महेन्द्र मिश्र
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कुछ चुटकुले हँसने के लिए ....

एक रेस्टारेंट के मैनेजर से एक ग्राहक ने शिकायत की तुम्हारे यहाँ के नौकर बड़े बदतमीज हैं बार बार आवाज देकर बुलाने पर भी नहीं आते हैं .रेस्टारेंट के मैनेजर ने ग्राहक से खेद प्रगट करते हुए नौकरों को उसके सामने इन शब्दों में कुछ इस तरह से फटकार लगे - गधे
 
महेन्द्र मिश्र
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माइक्रो पोस्ट : मुम्बई मेरी है

आज दिनभर से टी.वी. में देख रहा हूँ मुम्बई मेरी है ..... मुम्बई हम सबकी है ... मैंने भी भारत देश की धरती पर जन्म लिया है इसीलिए डंके की चोट पर ऐलान कर रहा हूँ की मुम्बई मेरी है . जय हिंद महेन्द्र मिश्र जबलपुर.
 
महेन्द्र मिश्र
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हंसी पिटारा - अपणे ताउजी का नौकर

अपणे ताउजी का एक नौकर हरयाणवी था बहुत चुस्त चालाक था पर था ताउजी का ऊँचे दर्जे का वफादार था . अपणे ताउजी भी कम फोकस बाज नहीं थे उन्होंने अपणे नौकर को समझा कर रखा था की जब कोई मेहमान घर आये और वो कोई चीज की फ़रमाइस करें तो तुम कुछ बढ़ा चढ़ा कर बताया करो की
 
महेन्द्र मिश्र
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आरती टंकी माता की....

कल २६ जनवरी को राज भाटिया जी ने टंकी का उदघाटन करवा दिया और ताउजी को ऊपर चढाने के राजी कर लिया हैं . टंकी का उदघाटन तो हो गया तो मैंने सोचा चलो भाई अब टंकी माता की आरती भी कर लेते है . चलिए स्तुति करें टंकी माई की ....आरती टंकी माता की ओम जय टंकी माता
 
महेन्द्र मिश्र
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गणतंत्र दिवस के अवसर पर मैंने हमारे राष्ट्रगान जन गन मन अधिनायक के बारे में कुछ इस तरह से पढ़ा ?

जब जब अकबर के दरबार के किस्से पढ़ता हूँ तो उनके दरबारी भी याद आ जाते हैं . ये दरबारी हमेशा अकबर की शान में कसीदे पढ़ते थे उनपे लेख पुराण और रचनाये लिखते थे . हमारे देश को स्वतंत्रता प्राप्त किये हुए ६० वर्षो से अधिक का समय हो गया है . अभी तक मुझे यह
 
महेन्द्र मिश्र
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ब्लागर पच्चीसी : खूसट ब्लॉगर की आत्मा और ब्लागर

एक गहरी अँधेरी रात में सुनसान श्मशान घाट में एक ब्लॉगर पहुंचा और पेड़ से एक खूसट ब्लॉगर का शव उतारा और अपने कंधे पार लादकर उसे लेकर चल पड़ा . रास्ते में ब्लॉगर की आत्मा ने ब्लॉगर से कहा - पहले मेरे सवाल का जबाब दो वरना तुम्हारा सर टुकडे टुकडे हो
 
महेन्द्र मिश्र
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नेताजी जयंती "तुम मुझे खून दो मै तुम्हे आजादी दूंगा" नेताजी और जबलपुर शहर ....

तुम मुझे खून दो मै तुम्हे आजादी दूंगा का नारा देने वाले नेताजी सुभाष चंद बोस की आज जयंती है. स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी का यह नारा आज भी जनमानस के दिलो पर छाया हुआ है जो दिलो में जोश और उमंग पैदा कर देता है . वे कांग्रेस के उग्रवादी विचारधारा के
 
महेन्द्र मिश्र
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वाह री जन हितेषी सरकारें : अंधेर नगरी चौपट राजा टका सेर भाजी टका सेर खाजा

कभी बचपन में आज से चालीस पैतालीस साल पहले मै पाठ्य पुस्तकों में अंधेर नगरी और चौपट राजा के विषय में कभी खूब चटकारे ले लेकर पढ़ा करता था . अंधेर नगरी के बारे में पुस्तक में यह कहा गया था की अंधेर नगरी चौपट राजा टका सेर भाजी टका सेर खाजा . जो जिसकी मर्जी
 
महेन्द्र मिश्र
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व्यंग्य : ओ मंहगाई महारानी तेरा जबाब नहीं ....

ओ मंहगाई की देवी महारानी तुम्हें क्या कहूँ तेरी महिमा अपरम्पार हैं . तू कहाँ से आई कब कहाँ दस्तक दे दे तेरा कोई ठिकाना नहीं है और जहाँ तेरे चरण पड़ जाए वहां त्राहि त्राहि मच जाती है . तुझे यदि सुरसा की बहिन कहूं तो कोई दिक्कत की बात नहीं है क्योकि तू ऐसे
 
महेन्द्र मिश्र
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ताउजी पर कुछ चुटकुले और कुछ ठक ठक करती लखटकिया लाइने ----

ठण्ड कुछ बढ़ गई है जिसके असर से ब्लॉग जगत अछूता नहीं है . हिंदी ब्लागजगत में माहौल भी कुछ ठंडा ठंडा सा दिख रहा है इसीलिए माहौल में कुछ गर्मी लाने के लिए कुछ जोग -ताउजी से ताऊ का एक मित्र - मित्र तुम्हारे मोबाइल पर आई लव यूं के खूब लगातार मैसेज आ रहे है .
 
महेन्द्र मिश्र
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मकर संक्रांति विशेष - हाल क्या था दिलो का हमसे पूछो न सनम ...उनका पतंग उड़ाना गजब हो गया ....

ओह जब जब मकर संक्रांति आती है तब अपना बचपना भी याद आ जाता है और उन सुखद दिनों की स्मृतियाँ दिलो दिमाग में छा जाती है . वाकया उन दिनों का है जब मै करीब पन्द्रह साल का था . कहते है की जवानी दीवानी होती है . इश्क विश्क का चक्कर भी उस दौरान मेरे सर पर चढ़कर
 
महेन्द्र मिश्र
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आप सभी के प्रेम स्नेह ने बाध्य कर दिया की मै फिर कलम चलाऊ...

तीन सालो का ब्लागिंग का सफ़र....खूब पोस्टे पढी....खूब लिखी और खूब टिप्पणियां दिलोजान से अर्पित की . हिंदी ब्लागिंग को देखा जाना और समझा.... बस यही समझ में आया है की बस वही खींच तान, लल्लू चप्पू बाजी, संयमित मर्यादित नपे तुले शब्दों का अभाव , जो कहते है
 
महेन्द्र मिश्र
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क्या यही स्वतंत्र अभिव्यक्ति का मंच है की किसी पर भी कुछ भी थोपो .... क्या ब्लागिंग जीनियस करते है आदि आदि ....क्यों न अब ब्लागिंग को राम राम कर ली

तीन सालो का ब्लागिंग का सफ़र .... खूब पोस्टे पढी.... खूब लिखी और खूब टिप्पणियां दिलोजान से अर्पित की . हिंदी ब्लागिंग को देखा जाना और समझा .... बस यही समझ में आया है की बस वही खींच तान, लल्लू चप्पू बाजी, संयमित मर्यादित नपे तुले शब्दों का अभाव , जो कहते
 
महेन्द्र मिश्र
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माइक्रो - बहुमूल्य बात ...

नियति क्रम से हर वास्तु हर व्यक्ति का अवसान होता है . मनोरथ और प्रयास भी सर्वथा सफल कहाँ होते है ? यह सब अपने ढंग से चलता रहे पर मनुष्य भीतर से टूटने न पाए इसी में उसका गौरव है . जिस तरह से समुद्र तट पर जमी हुई चट्टानें चिर अतीत से अपने स्थान पर अड़ी
 
महेन्द्र मिश्र