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गुरुदेव के सदविचार और मेरा ब्लागरों से क्षमायाचना सहित एक निवेदन
* यदि दुर्गुणों को छोड़कर सदाशयता का की रीति नीति को अपनाया जा सके तो समझाना चाहिए की मानवी गरिमा के अनु रूप मर्यादा पालन करना बन पड़ता है और हंसती- हँसाती, उठती- उठाती जिंदगी का रहस्य हाथ लग जाता है और ऐसे ही लोग ही धन्य हो जाते हैं . व्यवहारिक
Jun 10 2010 05:27 AM


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