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Hindi Poems by Archana Panda

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30 Apr 2010
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Hindi Poems by Archana Panda

मेरी बातों ने उन्हें छुआ होगा, पर.. शायद.. कुछ यूं हुआ होगा ...मशरूफ होंगे काम में, तभी चुप्पी सी छाई है...लिखा नींद में होगा, जो ख़त कड़वा पैगाम लायी है ...मेरी हर बात, करके याद, उनका दिल जो टूटा होगा,तभी हर बात पर , मुंह से उनके वो ज़हर छूटा
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Hindi Poems by Archana Panda

खबर तकें वो , भेज के पैगाम प्यार का...कुछ लीजिये हुज़ूर ! लुत्फ़ इंतज़ार का....जो गाँव से आये थे तो मिलते गले थे हम ,अब फासला संभालिये इस शहरी यार का....(c)Archana// khabar taken wo, bhej ke paigam pyar ka...kuch lijiye Huzoor! lutf intazaar ka....jo gaanv
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Hindi Poems by Archana Panda

लिखती रहो तुम , आपके इस चाह के सदके ,हमारी आह पर मचली हरेक उस वाह के सदके,जहाँ पर साफ़ कर आये हैं जाके, सब गुनाह-ए-जुर्म ,ऐसी पाकीजगी, ऐसे इबादत गाह के सदके .....(C) Archana Likhti raho तुम aapke is chah ke sadke ,hamari aah pe machali harek us WAh ke
Apr 01 2010 03:13 AM
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Hindi Poems by Archana Panda

मुस्कानों की कीमत, रिश्तों की व्यापारी सीख गयी,बाजारों के जैसे, कैसे बदले यारी सीख गयी ...बड़ा नाज़ था मुझे कभी, के दिल का मोल नहीं होता,तेरे प्यार में यारा मैं तो दुनियादारी सीख गयी ...(c)ArchanaMuskaanon ki kimat, Rishton ki Vyapaari seekh
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Hindi Poems by Archana Panda

खुद की गलती पे हमें माफ़ किये जाते हैं ,चेहरे पे धूल, आइना साफ़ किये जाते हैं,आप ही कातिल मेरे और आप ही मुंसिफ बने ,वल्लाह ! क्या खूब इन्साफ किये जाते हैं....khud ki galti pe hamen maaf kiye jaate hain,chehre pe dhool, aina
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Hindi Poems by Archana Panda

दिल जिंदा है वहीँ जहाँ आँखों में सपने रहते हैं,परदेस सही, पर देस वही जहाँ सारे अपने रहते हैं,सुर-असुर- बेसुर जहाँ अपने गीतों को गा सकें,है वही दोस्त का दर जहाँ हम बिना बताये जा सकें .....~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
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कोई इंडिया से जब आए ...

कोई इंडिया से जब आए तो वो यही सोच कर आए, कि मैं सपनों के देश में आ तो पाई रे ... पर आकर इस प्लेस में यूँ लगता है. डॉलर भी तो पेड़ पे नहीं आते हैं , मन तन्हा है, जीवन सूना फिर भी रे, सुख दुःख में हम किस किस से मिल पाते हैं ? मंहगा डे केयर है , जीरो पे
Dec 29 2009 11:47 AM
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नया साल !

नए साल का तुमसे है कहना , यूँ ही गाते ही रहना , तुम दिल से , समझे ? नए साल का तुमसे है कहना, मुस्काते ही रहना , खुशी से , समझे ? हाँ , अपना भी दिन आएगा , जहाँ हमको दोहराएगा , हम पर खुशियाँ बरसायेगा , समझो जो कहती हूँ , नए साल का .... तुम यों , हारे ह
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मैं और अमरीका !

अमरीका में मैं दस साल से रह रही हूँ | अब ये भी घर सा लगने लगा है | ऐसा नहीं है की भारत को मैं भूली हूँ | आज भी भारत तन मन में बसता है लेकिन जिस देश से मुझे रोटी मिलती है , मेरे बच्चों को शिक्षा मिलती है , जहाँ मेरा परिवार बसता है, और जहाँ आज मैं गर्व
Dec 29 2009 11:47 AM
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दिवाली

उजली शाम , रौनक हैं रातें , अब दिवाली मनाएंगे हम , पल दो पल हंस लें खुशी से , सारे सपने सजायेंगे हम , जो तुम सोचो कैसे धूम मचाओगे , कपड़े , जेवर , कितने पटाखे लाओगे , यादों में रखना तुम उन बेचारों को , किस्मत से टूटे , तूफां के मारों को , जिनके लिए ,
Dec 29 2009 11:47 AM
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कल समां था जहाँ !

सितम्बर ग्यारह के दर्दनाक हादसे को समर्पित एक गीत )- आप इसकी विडियो यहाँ देख सकते हैं --- http://www.youtube.com/watch?v=1YoM5R3u9ds कल समाँ था जहाँ , अब हवा है वहां , एक पल में गया , जो सदी में बना , सिर्फ़ मंज़र नहीं , हौसला खो गया , खौफ़्फ़ कैसे करु
Dec 29 2009 11:47 AM
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कोई इंडिया से जब आए ...

कोई जाए तो ले आए, मेरी लाख दुआएं पाये " गीत कि धुन पर आधारित कोई इंडिया से जब आए तो वो यही सोच कर आए, कि मैं सपनों के देश में आ तो पाई रे ... पर आकर इस प्लेस में यूँ लगता है. डॉलर भी तो पेड़ पे नहीं आते हैं , मन तन्हा है, जीवन सूना फिर भी रे, सुख दुः
Dec 29 2009 11:47 AM
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मेट्रीमोनी

एक दिन अकस्मात् , हो गई दासजी से मुलाकात, हमने कहा कैसे हैं सर, उन्होंने कहा क्या सुनाएँ ख़बर ? तीस साल से हैं अमरीका , रहन सहन इस देश का सीखा, कटी जवानी डॉलर पीछे , काम किया बस आँखें मींचे , दया प्रभु की सब है चंगा , बस जीवन में अब एक पंगा, बड़ी कार
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फिर ज़िन्दगी के दांव पेंच चलने लगे हैं !

किस राह पे हम आज यूँ ही चलने लगे हैं ? आप ही के रंग में क्यूँ ढलने लगे हैं? मोम का जिगर है तो बचें जी आग से, हाय ! क्या करें जो आह से पिघलने लगे हैं .... गरूर था कि आपको भी अपने सा बना देंगे, अब ख़ुद को देख , हाथ अपने मलने लगे हैं ... बताये ये कोई हम
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हिन्दी -Hindi

इसकी विडियो आप यहाँ देख सकते हैं- http://www.youtube. com/watch? v=OPQ3ihoZsjo हिन्दी हिन्दी करते हैं , कहने से डरते हैं, Hindi don't know का बड़ा आम डायलोग है ! Hindi I love, but cannot say it अब , अंग्रेज़ी झाड़ने का बड़ा फैला आज रोग है ! कैसे रहे सा
Dec 29 2009 11:47 AM
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चाँद - चकोर

किसी गुलसितां में चहकती थी हरदम , दो आंखों में उसकी महकती थी शबनम , सभी फूल पाती उसी पर फ़िदा थे , जो गूंजे सदा में उसी की सदा थे | थी लाडो सभी की चहेती चकोर , कूदती भागती थी वो चारों ही ओर , था मासूम दिल ऐसा , भोली सी सूरत , थी उसके लिए ये जहाँ खूबसू
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गंगा मौसी !

धन्यवाद देती हूँ श्री शरद तैलंग जी को जिन्होंने इस कविता की खामियां निकाल कर इसे तराशा है | इस कविता की पूर्णता में शरदजी का बहुत बड़ा हाथ है | धन्यवाद शरदजी ! किसी देश में नदी किनारे , था मेरा एक गाँव, धेनु, धरा , धन, धाम प्रचुर था, थी पीपल की छाँव,
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मेरी सहेली

इसकी विडियो आप यहाँ देख सकते हैं- http://www.youtube.com/watch?v=mY9hYl_0i8Y ज़िन्दगी भर उस से मेरी होड़ सी लगी रही , वो पहेली , मेरी सहेली , निज रक्त सी सगी रही , बात करके आज उस से , मन लगा उड़ने वहां पर , घर द्वार , इस संसार से , हट के बसे दुनिया ज
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Every action has an equal & "opposite" reaction !

कह गए थे न्यूटन साहब, एक पते की बात ! चलो आज मैं share करुँ वो बात आपके साथ .... कहा उन्होंने हर क्रिया की प्रतिक्रिया हमेशा आती है, क्षमता उतनी ही , पर उसकी दिशा बदल सी जाती है , आज जाने दिल में इतना दुःख क्योंकर छाया है, बात साफ है शायद तूने, किसी
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पराया

दिल में फिर सिहरन सी ? किसका ये साया है ? वीराने दिल में फिर रहने कोई आया है ..... कहता है दिल तुमको हाथों से छूलूं , डर है न टूटे जो रिश्ता बनाया है ..... मुझपे तो थी , सारी दुनिया की बंदिश , दिल मेरा तुमपे किस तरह से आया है ? गर है हकीक़त , ये कैसे
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दौर-ऐ-इश्क

गुज़र रही थी ज़िन्दगी अपने ही तौर से , नज़र लगी किसी की , मिले हम इश्क - ऐ - दौर से , हंसने लगी है दर्पण , कलम भी मुस्कुराई , ये मैं ही हूँ , या मिल रही हूँ शक्श - और से ? हर वक्त दिल पर मची हुई परछाईयों की चीख ! कैसे करुँ मैं बंद कान हरसू ये शोर से ,
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प्रवासी हैं , कुबेर नहीं ,!

कई दिन पहले आया मुझको इंडिया से एक फोन, मैंने पूछा बड़े प्यार से भाई तुम हो कौन, उत्तर था साहित्य सम्मलेन करना एक है , मैंने कहा - आईडिया बड़ा ही नेक है , आया सवाल - क्या आप अपनी कोई रचना गा पाएँगी? आप इसके हेतु भारत आ पाएँगी? मारे ख़ुशी के कैसी कैसी
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Hindi Poems by Archana Panda

रगों में जोश, दिलों में रवानगी रहे, ज़िन्दगी झूमे जहाँ दीवानगी रहे ... इस एहसास को हम सच्ची पावन धूप दें, एक दूजे से कुछ सीखें, इसे दोस्ती का रूप दें .... ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
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रुसवाई मुहब्बत की

रुसवाई मुहब्बत की कोई महफ़िल में गायेगा, और उम्मीद भी करता है की वो लौट आएगा .... अरे पहले मुहब्बत के उसूलों को तो पढ़ लो तुम, जहाँ तुम तुम दिल उछालोगे, वहीँ ये चोट खायेगा... -अर्चना ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
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पास पड़ोस

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~आज सुनाऊं तुम्हें कथा जिसमे राजा न रानी है,परी नहीं , ना हाथी घोडे ऐसी अजब कहानी है,अमरीका के किसी शहर में पांच पडोसी रहते थे,साथ मनाते खुशियाँ वो सब मिल के दुःख सुख सहते थे,हर होली पर रंग, दिवाली रौनक का आभास था,इसी मुहल्ले में
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Aug 26 2009 02:20 AM
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आजादी

आप इस कविता की विडियो यहाँ देख सकते हैं -http://www.youtube.com/watch?v=tsCVGHCQ0lIदेखो ये बस्ती ये हँसते चेहरे,न कोई बंदिश न कोई पहरे,हो मुबारक हिन्दोस्तान को आजादी का सिला,जब जवानों ने जान गवांई , हंस के गोली सीने पे खायी ,उनकी कुर्बानी के ही दम से हम
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बात जो दिल में थी आज फिर..दिल ही में रह गयी....

कहना था कुछ , क्या कहना था, जाने क्या कह गयी, बात जो दिल में थी आज फिर, दिल ही में रह गयी , क्यूँ रुक रुक के लिखती हूँ मैं, क्यूँ हकलाऊं इतना, वो पर्वत सी हिम्मत मेरी रेत सी क्यूँ ढह गयी ? किस साहिल से टकराऊंगी, छोड़ किनारा अपना, डरती हूँ जो इस ज्वार
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हम गुस्से में चिल्लाते क्यूँ हैं ?

नमस्कार मित्रों, आज एक बहुत ही अच्छी कहानी पढ़ी मैंने | इसे पढ़कर मुझे कविता लिखने का मन किया सो मैंने एक कविता लिखी है | मूल विचार मेरे नहीं हैं किन्तु इसे कविता के रूप में ढालने का प्रयास किया है| कहानी को भी कविता के बाद संलग्न किया है ताकि आप उसका
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नौकरी की टोकरी पार्ट 2

जब मैं एक हाउस वायिफ थी, क्या कूल मेरी लाइफ थी ! पर काल चला चाल, देख मेरी वो हंसी, मैं नौकरी की टोकरी के जाल मैं फँसी | हाँ, थी मेरी तमन्ना , मेरा भी व्हाइट कोल्लर होगा, होगी मेरी एक पहचान और जेब में डॉलर होगा , पर डॉलर आया बाद में, पहले जीवन ही कट ग
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बड़ी धूप चमकी आँगन में इस गर्मी के मौसम में!

यूँ तो लफ्जों-ख़ास से तेरी ग़ज़ल महकी रही, आई समझ जितनी मुझे, तेरी बातें अच्छी लगीं, कुछ कशिश भी दिख रही थी खयाली जज़्बात में , पर हकीकत से तेरी , वो मुलाकातें अच्छी लगीं , जब ज़िन्दगी की बेबसी पे तिश्नगी का वार हो, तिस पे उनके बद दुआ की सौगातें अच्छी ल
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जो टूट के भी टूट नहीं पाता है !

जो टूट के भी टूट नहीं पाता है, जो काटो यूँ लगे और ही बढ़ जाता है , जो पूछे कोई शम्मा की रात कैसी थी? परवाना क्यूँ हँसते हुए जल जाता है.... हर बात में एक याद तेरी आती है , हर गीत पर एक तार सा चल जाता है , वो प्यार भरा तार तेरी ही शहर से होगा, सपना बने