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मेरा कोना

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29 Apr 2010
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चलो दोस्त...

एक सपना जल्दी से बुन लोसुन लो अपने दिल की बातये तुम्हारा वक्त हैआगे बढ़ो, लपक लोतुम ही होगे कलहर जगह, हर शिखर परउठो, भागो...कोई है जो तुम्हारा इंतजार कर रहा हैउसके लिए उठोतुम उठोगे, तो वो दौड़ पड़ेंगेउनके दौड़ने के लिए उठोएक सपना खरीदोसच करो
 
archana rajhans
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नंगे पांव मेरा दोस्त

पीले रंग की बुशर्टऔर पीले रंग की पैंट'गरीब'भूखा, नंगा गरीबये आम राय थी लोगों की लेकिन मेरा दोस्त नंगा नहीं थाताकिद!सिर्फ उसके पांव नंगे थे...वो नंगा नहीं था,परिस्थितियां थीं जो नंगी थीं,और नंगा था उसका समाजजो उसके ईर्द-गिर्द खड़ा था...जूते वालों का
 
archana rajhans
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कुछ गड़बड़ है भाई!

ये दुनिया कैसी है यार...हर रोज कुछ नया हो जाता है...कभी कुछ रिपिट नहीं होता...जैसे कि जो पढ़ो वो सवाल परीक्षा में पूछा ही ना जाए...ऐसे तो नहीं होना चाहिए न...ये सब क्या हो रहा है?...रिपिट ही नहीं होता कुछ भी... मैने तो सुना था जो होता है अच्छे के लिए
 
archana rajhans
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लड़की...खूबसूरत लड़की...और दोस्त...वाह वाह वाह

सुनते हैं आजकल इ धंधा खूब जोरों पर है कि कौन किसका और किसकी दोस्त है? ये दुनिया को बताया जाए, ये कहते हुए कि किसी को मत बताना...वैसे, ऐसी ही बातें दुनिया को सबसे ज्यादा पता होती है...जिसे बताते हुए ये कहा जाता है कि सुनो किसी को मत बताना अंदर की बात
 
archana rajhans
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कुछ तो बोलो दोस्त...

जैसे कि सबकुछ पहले से तय थाएक- एक पात्र ने जैसे रटा हुआ था...अपना-अपना संवादअपना-अपना किरदारसाफगोई से...पूरे वक्त पर, सबने निभाई थी अपनी जिम्मेदारीपूरे अदद सेअदना-कदना, औने-पौने सबनेहां, सबने तकरीबन छीले थे मेरे ज़ख्मजैसे कि नीयति का साथ देने के लिए
 
archana rajhans
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" शादी होने दीजिए, कल होकर न टूट गई तो कहिएगा जी"

देश की सबसे बड़ी चिंता इस वक्त ये है कि सानिया मिर्जा पाकिस्तान में शादी क्यों कर रही है...इस बात  से इतर कि सानिया का अपना जीवन है...वो हर वक्त पब्लिक प्रोपर्टी नहीं है... उसे प्रेम करने और अपने हिसाब से जीने का पूरा-पूरा अधिकार
 
archana rajhans
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बोलो..तपस्वी बनोगे

वो किसी का शत्रु नहीं है...सबका दोस्त है...धीमे धीमे बोलता है... उसने अपने जीवन के कोणों को मिटा दिया है...वो अब गोल है...सपाट चिकना गोल...उसपर बाहरी वातावरण का असर नहीं होता...क्या बात है...अगर किसी को दुनिया ज्यादा बुरी लगने लगी हो...तो उनके लिए सलाह
 
archana rajhans
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तुम होते तो...

सपनों के महल में हम भी रहतें चलते आसमान में सितारों के पदचाप के साथ हम भी मिलातें सुरताल देखतें, इस झिलमिल दुनिया को अगर तुम होते... और ही होता मेरे बहकने का अंदाज़ ज़ुबां पर यूं न पसरा होता सन्नाटा चीरते हुए जो हर शोर को आज दे रहा है यूं चुनौति काश.
 
archana rajhans
Dec 29 2009 11:46 AM
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तुम ही कह दो

तुम ही कह दो अब बात जो मेरे मन में है फैसला हर घड़ी सुनाया नहीं जाता दिलकश हो जो फसाना बार बार उसे सुनाया नहीं जाता ( बहुत लंबे समय से कुछ नहीं लिख पा रही हूं...लिख रही हूं तो पोस्ट नहीं कर पा रही हूं...थोड़ी व्यस्तता है...हालांकि  पोस्ट &n
 
archana rajhans
Dec 29 2009 11:46 AM
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ज़रा संभलो, ये तुम्हें बांट खाएंगे

इसे चाहे जो भी कहें...लेकिन टेलीविजन पर अगर मुंबई- बिहार= उत्तर भारत... की कोई भी ख़बर आती है तो मुझे देखने की कतई इच्छा नहीं होती...मुझे लगता है जो देश आतंकवाद से जूझ रहा है उस देश के लोग कैसे आपस में इस तरह से लड़ मर सकते हैं....और एक साथ ये भी लगत
 
archana rajhans
Dec 29 2009 11:46 AM
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कब तक चुप बैठें...

एक दिन तूफान आया...छोटा सा तूफान...इतना सा कि कुछ हल्की किस्म की चीजें उड़ने लगीं...ज़मीन से एक एक बालिस्त उपर...हल्की चीजों को लगा कि अब तो बस स्वर्ग अगर कहीं है तो यहीं हैं..."क्या ज़मीन की धूल भरी जिंदगी"...लेकिन थोड़ी देर बाद तूफान ठहर गया...और व
 
archana rajhans
Dec 29 2009 11:46 AM
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कुछ और बोल लिया होता

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र पर हमला होता है...तो देखिये जरा बयान किस तरह के आते हैं...आतंकियों ने इस बार डस्टबिन को ब्लास्ट के लिए चुना...इस बार साइकिल पर बम नहीं रखा गया....दो दिन बाद मेट्रो के कर्ता-धर्ता ने बयान जारी किया सुरक्षा के मद्दे नज़र सभ
 
archana rajhans
Dec 29 2009 11:46 AM
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तमाशा चलता रहेगा

भेड़ चाल में शामिल हो जाउं इससे बेहतर है कि देख लूं, बैठकर तमाशा अभी जो शुरू होने वाला है खत्म हो जाएगा जल्द तमाशे के मंचन के लिए फिर शुरू होगा अभिनय रचा जाएगा एक नाटक देखते रहिए, ये दुनिया तमाशा है जब तक हम आप हैं चलता रहेगा
 
archana rajhans
Dec 29 2009 11:46 AM
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ये जीत जरूरी थी

कांग्रेस लेड यूपीए की लोकसभा में जीत कई दृष्टि से जरूरी था..अगर ये दल बहुमत साबित नहीं कर पाती तो शायद आने वाले दिन भारत के लिए काफी मुश्किलों भरा होता....और इसका सबसे ज्यादा खामियाजा पप्पू को भुगतना पड़ता,जो पहले से बहुत बेहाल है.... इस जीत ने एक जो
 
archana rajhans
Dec 29 2009 11:46 AM
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औने पैने सब बिकेंगे...

देश में महा राजनीतिक भुखमरी चल रही है...इस दौर में हर अद्धे कद्धे सब बिकेंगे...इनके दाम भी खूब मिलेंगे....ठीक वैसै ही जैसे भूखमरी में होता है...लोग घास की रोटियां खाने लगते हैं....कच्ची लकड़ियों को चूसा जाने लगता है.... बड़ी चर्चित है ये कहावत कि आम
 
archana rajhans
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क्या मायावती है देश की अगली पीएम !

आजकल देश दुनिया की राजनीति खंगाल रही हूं.....मतलब कुछ पढ़ रही हूं.... लेकिन इस बीच जाने क्यों मायावती बार बार दिमाग में आ रही हैं...मुझे लगता है कि तमाम पार्टियों में वो एक तेज़ी से उभरती हुई नेता लगती हैं.....इसलिए राजनीतिक किताबों से निकल कर मैं अच
 
archana rajhans
Dec 29 2009 11:46 AM
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कुछ भूलें कुछ याद रहा...

सूरज चांद सितारे मेरे साथ में रहे जब तक तेरे हाथ मेरे हाथ में रहे शाख से टूट जाएं वो पत्ते नहीं हैं हम आंधियों से कह दो औकात में रहे " ये लाइन्स मुझे मेरे किसी जानने वाले ने लिखी थी....एक अरसा गुजर गया....उनसे कभी मुलाकात नहीं हुई...आज वो याद आए....म
 
archana rajhans
Dec 29 2009 11:46 AM
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मेरा कोना

इतना भी गुस्सा करो नहीं जानी!
 
archana rajhans
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दो मौत हजार पेंच

आरुषि- हेमराज का कत्ल....अब ये बताने की जरूरत नहीं रह गई है कि ये दोनो कौन थे.....कहां के थे....और क्या हुआ कि हम इसकी चर्चा कर रहे हैं.....इन दोनो के हत्यारे पता नहीं कौन है..... पिछले महीने भर से ये मर्डर टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज है.....अखबार का एंकर
 
archana rajhans
Dec 29 2009 11:46 AM
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तुसाद से गांधी को ले आओ...

लंदन के तुसाद म्यूज़ियम में स्टेच्यू लगना अपने आप में बहुत बड़ी बात होती है.. ऐसा अक्सर कहा जाता है....लेकिन ये बात उनलोगों के लिए सही है जिन्हें दुनिया में मशहूर होना बाकी है.... महात्मा गांधी तुसाद से कहीं बडी शख्सियत है....और वो सिर्फ अपने देश भार
 
archana rajhans
Dec 29 2009 11:46 AM
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सीखो गुर्जरों से कुछ सीखो...

अजीब है अपना देश भी.. महंगाई बढ़ गई तो अब सब लेफ्ट का वेट करेंगे कि लेफ्ट सरकार से समर्थन वापस लेती है या नहीं....आतंवाद सिर चढ़ कर ब्लास्ट करेगा...लोग देखते रहेंगे....लेकिन जब मामला एक कुनबे के आरक्षण का हो तो पूरा देश एक जुबान बोलेगा.....आग लगाई जा
 
archana rajhans
Dec 29 2009 11:46 AM
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...जो अब किये हो दाता

ख्वाब मुझे अब नहीं दिखते शायद , इन आंखों ने सबकुछ देख लिया है"
 
archana rajhans
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आएगा कभी वसंत....

मेरे लिए ये वक्त सबसे अफसोसजनक है। पिछले कुछ महीनों में मैंने जो जाना वो निस्संदेह वेदनायुक्त है। मैने दुनिया को हमेशा खूबसूरत अंदाज़ में देखा। हमेशा ये सोचा कि चलो बुरा हो रहा है तो कुछ अच्छा भी होगा...यहां नहीं,वहां अच्छा मिलेगा। ये नहीं वो अच्छा ह
 
archana rajhans
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प्रभाष जोशी पत्रकारिता की दुनिया में हमेशा जीवित रहेंगे

मैं तो अख़बार में कुछ और ढूंढ रही थी। नहीं मिला। जो मिला उसकी अपेक्षा कहीं से नहीं थी। इतना रोमांचक मैच...उसपर सचिन के 175 रन...आखिर जोशी जी चुप कैसे रह सकते थे... क्रिकेट खासकर सचिन की बारिकी से वाकिफ जोशी साहब हमेशा इस तरह के रोमांचक मैच के बा
 
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सफर खत्म हुआ लेकिन...

वो कहीं से भली नहीं थी, उसकी क्रूरता, उसके चेहरे पर दिख रही थी। मेरा मन कह रहा था कि उससे दूर रहूं। उसे न देखूं। लेकिन नज़र थी कि बार बार उधर चली जा रही थी। एकाध बार उसने भी मुझे देखा था। वो मेरी तरफ देखकर क्या सोच रही थी ये मुझे नहीं पता था, लेकिन
 
archana rajhans
Aug 13 2009 05:55 PM
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हां, सच से डर लगता है

रेखा...भगवती चरण वर्मा का वो उपन्यास जिसे पढ़ने का मौका मुझे कई बार मिला लेकिन हर बार किसी न किसी वजह से टल गया... रेखा समाज की परतों को खोलती एक अदभुत रचना है...जो हरयुग में अपनी शसक्त मौजूदगी दर्ज कराती रहेगी...लेकिन दिक्कत ये कि जब मैने इस
 
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तुम आओगे दोस्त

चंद लफ़्ज अब भी है मेरे पास तुम आओं तो कहूं... आओ न एक बार मिलकर बैठें वैसे ही... सच पर डालकर पर्दा देखें सपने जैसा कुछ-कुछ तुम्हे याद है क्या-क्या हम सोचा करते थें देखते-देखते सच हो गए सारे और हकीकत गुम गया आओ न! बैठें, बातें करें... शायद दूर हो जाए
 
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मेरे दोस्त की हौसला अफ़जाई

कैसे कह दूं कि थक गया हूं मैं न जाने किस किस का हौसला हूं मैं '' मेरे दोस्त ने मेरे लिए कहा था, बहुत पहले...उसे और मुझे नहीं पता कि किसकी लाइन है...हो सकता है उसने खुद भी लिखा हो...लेकिन मैं जरूर जानना चाहती हूं कि ये किसकी लाइन है...किसी को पता हो त
 
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मैं बैल हांकूंगा

बाबू! यहां मन नहीं लगता ओझल हो रहा है सबकुछ बाबू... बस! बस! यहां मन नहीं लगता चलो, चलो... ये जगमग चांद सितारे नहीं बाबू मुझे मद्दिम सी डिबिया में रहना है यहां नहीं बाबू यहां मन नहीं लगता चिकनी जुबान, चिकने लोग, चिकना फर्श मेरा पैर फिसलता है बाबू! यहा
 
archana rajhans
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ग्लैमर

कितना डराता है तुम्हे तुम्हारा चेहरा??? जब तुम उतार देती हो रंग-रोगन चेहरे पर बन आए उस निशान को देखकर क्या किलस उठती हो तुम... जिसे झुर्रियां कहते हैं??? शायद दुख से भर जाती हो तुम इसलिए आंख के तुरंत नीचे उग आया है काला धब्बा और कई बार कपाल पर द
 
archana rajhans
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लड़की का नाम क्या?

दिल्ली के क्नॉट प्लेस में एक घटना हुई...दो महिलाएं ऑटो में बैठी-बैठी जल गईं...पता नहीं कैसे...और हर उस घटना की तरह इस 'कैसे' का पता कभी नहीं चल पाएगा। दरअसल, मेरा उस घटना पर कुछ नहीं कहना है.... हम यहां जो कहना चाह रहे हैं वो ये कि उन दोनो महिलाओं मे
 
archana rajhans
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ये क्या ख़बर है?

महंगाई का दौर देह,लेकिन सस्ता ख़बरों में एक ये भी ख़बर खरीदो, खरीदो... जानिब, स्त्री मूल्य तय नहीं करती बाज़ार नहीं बनाती इसलिए, सस्ती हो गई है आज सबसे कीमती चीज! दुनिया भी क्या खूब है कभी अस्मत, कभी देह और कभी मांस का लोथड़ा कहती है बिल्कुल अपने हिस
 
archana rajhans