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सुर-पेटी

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12 Jan 2010
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चिरकुमार है यह प्रभाती:कुमार गंधर्व तराना

बीता दिन पं. कुमार गंधर्व की याद दिलाता रहा. 12 जनवरी को ही हमसे विदा हुए थे कुमारजी. लेकिन विदा कहाँ हुए. वे तो पूरे ठाठ से अपनी रसपूर्ण गायकी के साथ हमारे मन एक जीवंत दस्तावेज़ बन मौजूद हैं. अठारह बरस बाद भी हम कुमारजी को भूले नहीं. कबाड़ख़ाना पर जीवनसिंह
 
संजय पटेल...
टैग: गायन.
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काँटा कोई दामन थामेगा जब जब याद मेरी आएगी

सितारा बन गए तो इसका मतलब ये नहीं कि किसी भी चीज़ को आप हल्के से लें.ये बात उस्ताद मेहंदी हसन साहब से सीखी जा सकती है.अब देखिये उन्होंने ग़ज़ल की दुनिया में तमाम ऊँचाईयाँ पा लेने के बाद भी किसी दीगर गायकी को भी पूरी गंभीरता से लिया. चाहे वह फ़िल्म म्युज़ि
 
संजय पटेल...
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उस्ताद राशिद ख़ाँ ; आओगे जब तुम साजना

भारतीय चित्रपट संगीत हमेशा से रचनाधर्मी रहा है। थोड़ा पीछे जाएँ तो याद आता है कि उस्ताद अमीर ख़ॉं , उस्ताद बड़े ग़ुलाम अली ख़ॉं, पं. डी.वी. पलुस्कर, बेग़म अख़्तर, पं. भीमसेन जोशी, विदूषी निर्मला अरुण, विदूषी किशोरी अमोणकर, लक्ष्मी शंकर, आरती अंकलीकर, पं. अज
 
संजय पटेल...
Dec 29 2009 11:55 AM
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वो नज़र नज़र से गले मिली तो बुझे चराग़ भी जल गए

सुरपेटी पर पहली बार तशरीफ़ ला रहे हैं उस्ताद मेहंदी हसन साहब. न जाने कितनी बार लिख चुका हूँ कि ग़ज़ल की दुनिया का ये अज़ीम गुलूकार शायरी की आन रखने के लिये ताज़िन्दगी अपने आप को झोंकता रहा है. जब ख़ाँ साहब गा रहे होते हैं तब मूसीक़ी और शायरी को जैसे मनचाही
 
संजय पटेल...
टैग: ग़ज़ल
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सूनी हुई मेरे देश की धरती;नहीं रहे महेन्द्र कपूर

एक संगीतप्रेमी मित्र ने जैसे ही एस.एम.एस.भेज कर गायक महेन्द्र कपूर के निधन का समाचार दिया, मन यादों के उन गलियारों की सैर करने लगा जब दो बार उनसे म.प्र.सरकार के प्रतिष्ठित लता पुरस्कार के आयोजन में व्यक्तिगत रूप से मिलने का सुअवसर मिला था. दूसरी बार
 
संजय पटेल...
Dec 29 2009 11:55 AM
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कुमार गंधर्व गायकी के सुघड़ तेवर दिखाता मुकुल शिवपुत्र का स्वर

पं.मुकुल शिवपुत्र गान-शिरोमणि पं.कुमार गंधर्व के ज्येष्ठ चिरंजीव है.बचपन से ही उन्हें सुर की संगत घर आंगन में ही मिली. सूफ़ियाना तबियत के मुकुलजी ऐसे गायक हैं जिन्हें अपने आपको बताने और अपना गाना सुनाने की कोई उत्तेजना नहीं है. मन लग गया गाने को तो गा
 
संजय पटेल...
Dec 29 2009 11:55 AM
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ढलती रात में सुनिये आशाजी का ये अनसुना सा गीत.

सात्विक धुनों का जादू जगाने वाले संगीतकार रवीन्द्र जैन की बंदिश है यह. राग मारवा के स्वर और आशा भोंसले की आवाज़.एक लम्हा लगता है सुनने वाले को जैसे संबोधित कर आशाजी कह रहीं है...साथी रे भूल न जाना मेरा प्यार..(फ़िल्म:कोतवाल साब) चित्रपट संगीत के दायरे
 
संजय पटेल...
Dec 29 2009 11:55 AM
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राग दुर्गा : सखी मोरी रूमझुम : पं.नारायणराव व्यास.

अतीत गलियारों की सैर हमेशा सुखदायी होती है वह भी तब जब आप गुज़रे ज़माने के ऐसे अज़ीम फ़नकार से रूबरू हों जिन्होंने अपनी सुमधुर गायकी से पूरे देश को लगभग सम्मोहित ही कर लिया था. बात कर रहा हूँ पं.नारायणराव व्यास की. ग्वालियर घराने के ऐसे गुणी-गायक जिनके स
 
संजय पटेल...
Dec 29 2009 11:55 AM
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आशा भोंसले की आवाज़ में ये क्लासिकल रंग की बंदिश

भारतीय संगीत की पटरानी आशा भोंसले की आवाज़ की वर्सेटलिटि का जवाब नहीं. उन्हें सिर्फ़ हिन्दी चित्रपट गीतों की सीमा में बांधना मूखर्ता ही होगी. गुजराती,मराठी,पंजाबी,राजस्थानी और अंग्रेज़ी तक में अपनी आवाज़ का जलवा बिखेर चुकीं आशाजी ने गायकी के क्षेत्र में
 
संजय पटेल...
Dec 29 2009 11:55 AM
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गायक मुकेश के गुजराती श्रोताओं के लिये ये सुरीली भेंट

इंटरनेट ने चीज़ों को आसान बनाया है और ब्लॉग लेखन ने ये शऊर दिया है कि चीज़ों को दूसरों के साथ बाँटों....क्या क्या छाती पर बांध कर ले जाओगे.यूनुस भाई और सागर भाई के साथ मिलकर श्रोता-बिरादरी के लिये जब मुकेश स्मृति-दिवस(27 अगस्त) पर काम चल रहा था तो मैं
 
संजय पटेल...
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Dec 29 2009 11:55 AM
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एक विलक्षण प्रस्तुति : मैं नहीं माखन खायो !

आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का दिन पूजा-पाठ,अनुष्ठान का तो है ही लेकिन मैं व्यक्तिगत रूप से इस दिन को भारतीय संगीत दिवस मानना पसंद करता हूँ. श्रीकृष्ण का संगीतप्रेम जग-जाहिर है. उनके हाथों में सजी बाँसुरी इसकी तसदीक करती है. एम.एस.शुभलक्ष्मी,जुथिका रॉय,ल
 
संजय पटेल...
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आज बरसी –शहनाई ख़ाँ साहब की

अभी सच्चा सुर लगा ही कहॉं है ? उसी की तलाश में तो हम इतने बरस बजाते रहे। जब सच्चा सुर लगा गया तो समझिए हम पहुँच गए विश्वनाथ की शरण में।' ताज़िंदगी सुरों में रमने वाले भारतरत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ॉं ने ये बात अभी कुछ दिन पहले बनारस में एक साक्षात्कार
 
संजय पटेल...
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पं.कुमार गंधर्व - मंगल दिन आज ; बना घर आयो

मालवा के लोक संगीत में शास्त्रीय रागों की असीम संभावना तलाशने वाले कुमारजी ने एक तरह से मालवा को वैश्विक पहचान दी . प्रस्तुत रचना राग मालावति में निबध्द है जिसमें कुमारजी ने मालवी बंदिश को पिरो दिया है. कलाकार हमेशा अपने कलाकर्म से संगीतप्रेमियों के
 
संजय पटेल...
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छोटी सी गुड़िया की कहानी और उस्ताद अली अकबर ख़ाँ का सरोद.

फ़िल्मी संगीतकारों ने कहीं कहीं तो करिश्मा ही कर दिया है. 1955 में बनीं फ़िल्म सीमा का ये गीत ले लीजिये ...सुनो छोटी सी गुड़िया की लम्बी कहानी. गीतकार हैं शैलेंद्र और संगीतकार शंकर-जयकिशन. भव्य आर्केस्ट्राइज़ेशन के नामचीन संगीतकार. सिचुएशन के मुताबिक एस.
 
संजय पटेल...
Dec 29 2009 11:55 AM
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अब डरने की कोई बात नहीं ; अंग्रेज़ी छोरा चला गया एक दुर्लभ गीत

बहुत दिनों से मन था कि एक ब्लॉग सिर्फ़ संगीत को लेकर बना लिया जाए. मन ने आज कहा कि पन्द्रह अगस्त से बेहतर शुभ दिन और क्या हो सकता है इस नेक काम के लिये.तो लीजिये साहब बिसमिल्लाह करता हूँ.उम्मीद है आपकी मुहब्बते और मशवरे मिलते रहेंगे.मुलाहिज़ा फ़रमाएँ सु
 
संजय पटेल...
टैग: मुकेश
Dec 29 2009 11:55 AM
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कभी बिंदिया हँसे ,कभी नैन हँसे; नाहिद अख़्तर

इंटरनेट की रविवारीय सैर में ये गीत मुझे हाथ लगा. नाहिद अख़्तर की आवाज़ है और बहुत प्यारे बोल हैं. सबसे अच्छी बात मुझे यह लगी कि नाहिद आपा की आवाज़ में सुर की जो ख़ालिस सचाई है वह आजकल बहुत कम सुनाई देती है. दूसरी चीज़ इस गीत का कम्पोज़िशन है. पाकिस्तान से
 
संजय पटेल...
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आरती अंकलीकर के स्वर में एक सुन्दर रचना

जयपुर अतरौली घराने की नुमाइंदगी करने वाली युवा गायिका आरती अंकलीकर भारतीय शास्त्रीय संगीत परिदृष्य की लोकप्रिय कलाकार हैं.शास्त्रीय और उप-शास्त्रीय संगीत दोनो ही विधाओं में उन्हें सुनना हमेशा विस्मय और सुक़ून देता है. अभी हाल ही में वे इन्दौर तशरीफ़ ला
 
संजय पटेल...
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ये उस्ताद अमीर ख़ाँ नहीं;गोस्वामी गोकुलोत्सवजी हैं

उनका स्वर,तान और बोल-बनाव सुनकर यही लगता है कि यह इन्दौर घराने के स्वर सम्राट उस्ताद अमीर ख़ाँ साह्ब की आवाज़ है.लेकिन हुज़ूर ये हैं पद्मश्री गोस्वामी गोकुलोत्सवजी महाराज. इन्दौर में ही बिराजते हैं और पुष्टिमार्गी श्री वल्लभाचार्य सम्प्रदाय के वरिष्ठ आच
 
संजय पटेल...
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अब कहाँ सुनने को मिलता है ऐसा भरा-पूरा मालकौंस ?

अभी 24 जून को संगीतमार्तण्ड ओंकारनाथ ठाकुर का जन्म दिन था. ग्वालियर घराने की गायकी के इस शीर्षस्थ गायक ने कुछ ऐसे अदभुत करिश्मे रचे जिसकी दूसरी मिसाल मिलना मुश्किल है. गुजरात में जन्में और वाराणसी में महामना पं.मदनमोहन मालवीय के आग्रह पर बनारस हिन्दू
 
संजय पटेल...
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मैं तो साँवरे के संग राची-कौशिकी चक्रवर्ती.

पटियाला घराने की गायकी के अनुगामी पं.अजय चक्रवर्ती की यशस्वी सुर-पुत्री कौशिकी के गले में अपने पिता-गुरू की सारी ख़ूबियाँ मौजूद हैं.वे जब जो गा रहीं है तो अपनी एक विशिष्ट छाप छोड़ देतीं हैं.अल्पायु में ही उन्हें नाम,शोहरत और प्रतिष्ठित मंच मिलने लग गए
 
संजय पटेल...
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संगीतकार मदनमोहन - 85वाँ जन्मदिन-दो दुर्लभ गीत

अज़ीम संगीतकार मदनमोहन आज होते तो पूरे ८५ बरस के होते। ये कहने में कोई झिझक नहीं कि तमाम ख़राबियों के बाद यदि क़ायनात में कुछ सुरीला बचा है तो वह मदनमोहन जैसे गुणी संगीतकारों की बदौलत। नाक़ामयाब फ़िल्मों का क़ामयाब संगीत रचने वाले मदनमोहन के लिए आज संगीतप्
 
संजय पटेल...
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पिनाज़ मसानी की आवाज़ में एक सुन्दर भजन

यूँ उनका नाम ग़ज़ल की दुनिया में ज़्यादा लोकप्रिय है लेकिन आज सुनिये पिनाज़ मसानी की आवाज़ में एक भजन. सखी भाव में पगा ये भजन गाने वाली पिनाज़ ने किराना घराने के वरिष्ठ संगीत साधक पं.फ़िरोज़ दस्तूर साहब से बाक़ायदा क्लासिकल मूसीकी की तालीम ली और उन्हें विदूषी
 
संजय पटेल...
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दिल में अब तक तेरी उल्फ़त का निशाँ बाक़ी है

ग़ज़ल के परचम को ऊँचा ले जाने वाले सर्वकालिक महान गुलूकार मेहंदी हसन साहब इन दिनों बहुत बीमार हैं.आर्थिक रूप से उन जैसा कलाकार इसलिये भी संकट में है कि उन्होंने कभी अपनी ज़िन्दगी को बहुत गंभीरता से लिया ही नहीं.भविष्य के लिये सोचने का मौक़ा उन जैसे कलाका
 
संजय पटेल
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याद-ऐ-नबी का गुलशन महका महका लगता है

उस्ताद नुसरत फ़तेह अली का नाम ज़ुबाँ आए तो समझिये इबादत हो गई. क़व्वाली को जिस अंदाज़ में उन्होंने गाया है वह जितना रूहानी है उतना ही करामाती भी. बस सुनते वक़्त चाहिये थोड़ी सी तसल्ली और एक क़िस्म की लगन.यदि ये दोनो आपके पास हैं तो नुसरत बाबा यक़ीनन आपको दूस
 
sanjay patel
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आशा भोंसले की आवाज़ में मियाँ की मल्हार में तराना

कहते हैं भोर बेला में जीवन के सारे मनोरथ पूरे होते हैं.आज दिन की शुरूआत कुछ जल्दी हो गई और हाथ आ गई यह अनमोल बंदिश. आशा भोंसले जन्मोत्सव पर ब्लॉगर-बिरादरी के ज़रिये कई नायाब चीज़े सुनने को मिलीं लेकिन आज जो मिला उससे अच्छी स्वरांजलि सदी की इस महान गायि
 
संजय पटेल
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बाँसुरी के जादूगर से सुनिये - जादूगर सैया छोड़ो मोरी बैंया

बलजिंदर सिंह मेरे शहर के जाने माने बाँसुरी वादक हैं.हम प्यार से उन्हें बल्लू भाई कहते हैं.कंस्ट्रक्शन का लम्बा चौड़ा कारोबार है बल्लू भाई का लेकिन दिल रमता है संगीत में.बाँसुरी बजाते हैं और क्या ख़ूब बजाते हैं.किसी भी आयोजनों में कितनी चमक दमक हो लेकिन
 
संजय पटेल