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साझा-सरोकार

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08 Mar 2010
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होरी खेलूंगी कह कर बिस्मिल्लाह

कहा जाता है कि हज़रत मोहम्मद [स] को आज के ही दिन  लगभग साढ़े चौदा सौ साल पहले अल्लाह ने पूरे संसार के लिए रहमत बनाकर भेजा था.इस दिन को लोग ईद-मिलादुन-नबी कहते हैं. इस रहमत का ही नतीजा है कि हिन्दुस्तान का एक सूफी-संत बुल्ले-शाह पंजाब में जाकर होली
 
शहरोज़
टैग: holi
Feb 27 2010 11:31 AM
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खान शास्त्री का राष्ट्रीय साम्प्रदायिक सौहार्द्र

जब दिल में हो महब्बत , रूह लबरेज़ जज़्बाए-इंसानियत से .तो आपका कारवां चलता ही रहेगा , बढ़ता ही रहेगा.हम बात कर रहे हैं,58 वर्षीय डॉ.मोहम्मद हनीफ खान शास्त्री  की जो  संस्कृत के माने हुए विद्वान हैं, उनकी सर्वाधिक प्रसिध्द पुस्तकें हैं: मोहनगीता,
 
शहरोज़
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रिजवाना : संस्कृत की नयी इबारत

रिजवाना परवीन का साधिकार संस्कृत बोलना, इसे बस कर्मकांड की भाषा में ढाल चुके आभामंडित विद्वानों के लिए भी चुनौती है। यह संस्कृत शिक्षिका भाषायी संगम की, इसलिए साझा विरासत और साझा देश प्रेम की भी अनूठी मिसाल है। संस्कृत के बहुत जटिल व्याकरणीय संरचना और दो
 
शहरोज़
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ब्लाग जगत की सबसे अच्छी प्रतिक्रिया यहाँ देखिये !

२५ सितम्बर को फिरदौस ने लगता है अत्यन्त दुखी होकर एक पोस्ट लिखी " मार दो गोली, हिन्द के तमाम मुसलमानों को " उनके जवाब में बहुत से जागरूक साथियों ने प्रतिक्रियाएं दीं ! डॉ सुभाष भदौरिया, अपने देश भक्ति पूर्ण विचारों को व्यक्त करने के लिए मशहूर , एक बे
 
सतीश सक्सेना
Dec 29 2009 12:00 PM
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करिश्मा कुदरत का..

असाध्य रोग को आसानी से ठीक करने वाली चमत्कारिक चिकित्सा पद्धति - होमिओपैथी ! सतीश सक्सेना की कलम से आज जब मैं कई घटनाओं के बारे में सोचने लगा जिनका सम्बन्ध बीमारियों से है.तो सहसा ख्यालआया कि कट्टरता वादियों से पूछूं भैया इनका धर्म क्या होता है.और जो
 
सतीश सक्सेना
Dec 29 2009 12:00 PM
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पंडित-पुरोहित के बिना उर्स मुकम्मल नहीं होता

हिन्दू भी रखते हैं रोज़ा आज मुल्क के दुश्मन तरह-तरह की आतंक कारी गतिविधियों द्बारा हमें बांटने में लगे हैं.वहीँ हम ब्लोगेर-मित्र भी इक-दूसरे को हिंदू-मुस्लिम के चश्मे से देखने की कोशिश कर रहे हैं.अगर दरहकीक़त ऐसा कर रहे हैं तो अप्रत्यक्ष सही हम उन देश
 
शहरोज़
Dec 29 2009 12:00 PM
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सतीश सक्सेना की क़लम से : दिल से कहो !

शाहजहांपुर जिले के गाँव गढिया रंगी में १५ दिसम्बर १९५४ को जन्मे सतीश सक्सेना पेशे से सिविल इंजिनियर हैं.फिलहाल केन्द्र में सरकारी मुलाजिम हैं। समाज की सेवा करना इनकी फितरत में शामिल है तो साहित्य इनका शौक .लेकिन इनका साहित्यिक लेखन भी जन-सेवा की ही श
 
शहरोज़
Dec 29 2009 12:00 PM
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आज़ादी पर श्रद्धा की बानगी

विदिशा में जन्म और शिक्षा-दीक्षा भी यहीं। दूर-दूर तक साहित्य और अदब-ऐ-चमन की रानायिओं से वास्ता नहीं .लेकिन सिंगापूर पहुंचकर आपने अपनी कलम से जन्मजात शायरा होने की सनद हासिल कर ली.electrononics में m.sc. श्रद्धा वहाँ इक स्कूल में हिन्दी पढाती हैं और
 
शहरोज़
Dec 29 2009 12:00 PM
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वेद कुरआन : बहुत कुछ समान

अल्लाह शब्द इलाह(पूज्य) से बना है.ऋग्वेद १-१-२ में भी ईल शब्द का प्रयोग ईश्वर के लिए हुआ है.ईल का अर्थ भी पूज्यनीय होता है. __________________ जो मुसलमान किसी गैर-मुस्लिम नागरिक पर ज़ुल्म करेगा , उसके हक को मारेगा या उसकी चीज़ ज़बरदस्ती ले लेगा, तो मै
 
शहरोज़
Dec 29 2009 12:00 PM
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काश मिले मंदिर में अल्लाह मस्जिद में भगवान मिले.

अल्लाह के लिए न तुम भगवान के लिए लड़ना है तो लड़ो सदा इन्सान के लिए हर धर्म है महान हर मज़हब में बड़प्पन लेकिन नहीं है अर्थ कुछ शैतान के लिए अपना ये घर संवारो मगर ध्यान तुम रखो हम वक्त कुछ निकालें इस जहान के लिए * सुबह मोहब्बत शाम महब्बत अपना तो है काम म
 
शहरोज़
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दिनकर के बहाने

संस्कृति के चार अध्याय जैसी अमर-कृति के रचयिता और अपने समय के चर्चित लेखक-कवि रामधारी सिंह दिनकर की इधर तीन पुस्तक पढने का सुयोग मिला.पुस्तकें हैं: स्वामी विवेकानंद , हे राम ! और लोकदेव नेहरू . मैं उन्हीं पुस्तकों के हवाले से आज बात करूंगा.उन्हों ने
 
शहरोज़
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तू भी हिंदू है कहाँ, मैं भी मुसलमान कहाँ

महिना हो आया.अब वक़्त ने मुहलत दी.यूं तंत्र ने मुझे रोकने की शपथ ले रखी थी.आज जनेयू के भाई रागिब के मेल ने इस पोस्ट के लिए विवश कर दिया.उन्होंने secularjnu का लिंक भेजा है.जब क्लीक किया तो इस नज़्म पर नज़र जा टिकी.भाई रागिब फोन पर अनुपलब्ध हैं अभी.वरना
 
शहरोज़
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है राम के वजूद पे हिन्दुस्तां को नाज़

है राम के वजूद पर हिन्दुस्तां को नाज़ अहले नज़र समझते हैं इसको ईमाम-हिंद तलवार का धनी था, शुजाअत में फ़र्द था पाकीज़गी में जोश, मुहब्बत में फ़र्द था। इकबाल की इक नज़्म से हम में से सारे लोग इस वितंडा से वाकिफ ज़रूर होंगे कि विभाजन में उर्दू शायर इकबाल क
 
शहरोज़