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14 Apr 2010
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सानिया-शोएब और सुनंदा से आगे भी एक दुनिया है..

देशवासी बदलते मौसम की तपिश और महंगाई की आग में झुलस रहे हैं। कई राज्य नक्सली आग में जल रहे हैं। मुंबई पर हमला करने वाला अमेरिका में बैठा है। कुछ लोग ऐसे हैं जो सौख से कम खाते हैं ताकि उनका शरीरआकर्षक बना रहे। वहीँ करोड़ों की तादाद ऐसी है जिसके पास अपने
 
Pragati Mehta
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रेलयात्रियों को बचाइए

पिछले हफ्ते मैं मथुरा से लौट रहा था। रास्ते में एक गार्ड साहब मिल गए। उनसे कुछ देर रेल पर बात करने का मौका मिला। इन दिनों वह आगरा-दिल्ली रूट की मेल एक्सप्रेस ट्रेन में चलते हैं। मैंने उनसे पूछा-ममता जी के टाइम में रेल का सिस्टम कैसा चल रहा है। छूटते ही
 
Pragati Mehta
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नए साल पर लें तीन संकल्प

अभी रात के 9 बजे हैं. सिर्फ़ तीन घंटे बाद ही नया साल आ जाएगा। सभी जगह नए साल के आगमन की खुशी में धमा चौकडी मची है। कहीं डीजे है तो कहीं मेले लगे हैं। जश्न के इस क्षण में हम भी शामिल हैं। लेकिन मेरी यह गुजारिश है की समय के साथ हमें भी चलना चाहिए। हमें
 
Pragati Mehta
Dec 29 2009 11:52 AM
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कंधार के बाद ही भारत को हमला करना चाहिए था

मुंबई हादसे के बाद से ही भारत सरकार ने सख्त रवैया अपनाया और पाकिस्तान को वांछित आतंकियों की एक सूची सौंप दी। विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने तो सैन्य कार्रवाई से भी परहेज न करने की बात कहकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर माहौल गर्मा दिया था। निश्चित तौर पर अब
 
Pragati Mehta
Dec 29 2009 11:52 AM
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यह हल रहा तो ऐसे कितने दरवाज़े बंद हो जायेंगे

भारत अब इन आतंकी वारदातों से नहीं दहलता। इतना विशाल और शक्तिशाली देश भला डर भी नहीं सकता। आतंकी वारदातें भी यहाँ के लिए नई बात नही रह गई। लेकिन केरल की एक घटना ने जरुर पूरे देश को झकझोर दिया। मौत पर राजनीति करने की जो शर्मनाक परम्परा शुरू हुई है यह उ
 
Pragati Mehta
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मुंबई को उतारना होगा अपने चेहरे से घटिया नकाब

मुंबई की घटना लगातार बढती ही जा रही है. अब तक कई लोग पीट-पीट कर खदेड़े जा चुकें हैं। कई भीड़ में मारे भी गए हैं। एक आक्रोशित और उर्जावान नौजवान की आवाज़ को भी आप-हम सभी ने इसी मुंबई में दफ़न होते देखा। लेकिन लगता है अब ऐसी आवाज दबने वाली नहीं है. मुंबई
 
Pragati Mehta
Dec 29 2009 11:52 AM
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राजनीति कीजिये, लेकिन विकाश के लिए

देर से ही सही लेकिन मायावती ने अपना फ़ैसला बदलकर एक अच्छी पहल की है। राजनीति तो होनी ही चाहिए। लेकिन स्वस्थ और पोसिटिव। रेल कोच फैक्ट्री कहीं बने लेकिन तरक्की तो उत्तरप्रदेश की ही होगी। यदि स्टेट में यह फैक्ट्री नहीं लग पाती तो इसका कहीं न कहीं नुकसा
 
Pragati Mehta
Dec 29 2009 11:52 AM
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हिम्मत को नहीं हिला सकते ये धमाके

बहुत हुआ। जयपुर और अहमदाबाद के बाद बद्मिजाजों ने अब दिल्ली को निशाना बनाया है। ऐसी घटनाओं के बाद तमाम लोग पुलिस और खुफिया तंत्र की बखिया उधेड़ने में लग जाते हैं। राजनेता भी एक-दुसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने लगते हैं। और फ़िर पुलिस कुछ लोगों को हिरासत
 
Pragati Mehta
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बंद कीजिये टीआरपी का ये अँधा खेल

बुधवार सुबह मैं घुमने के लिए अपार्टमेन्ट से बहार निकल रहा था। रोज की तरह कुछ बच्चे स्कूल जाने को बस का वेट कर रहे थे। लेकिन आज देखा की कुछ बच्चे ऐसे भी हैं जो आज स्कूल नहीं जाना चाह रहे हैं । उनका कहना था की आज प्रलय आने वाला है। मैं आपलोगों के साथ घ
 
Pragati Mehta
Dec 29 2009 11:52 AM
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सुनील गौतम को आपकी मदद चाहिए

साथियों वक्त बहुत कम है। हम सबों के बड़े भाई जैसे वरिष्ठ पत्रकार सुनील कुमार गौतम बेहद दर्दनाक और तंगहाली की इस्थिति से गुजर रहे हैं। चार साल से वह अपनी बीमारी से लड़ रहे हैं। लेकिन अब उनके पास इलाज़ कराने तक का पैसा नहीं है। उनकी जिंदगी बचाने के लिए
 
Pragati Mehta
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भोज घड़ी कोहडा .....

सचमुच यह वही कहावत है ' भोज घड़ी कोहडा रोपने वाली '। यानि जब पार्टी में सभी खाने आ जायें तो फ़िर खेत में सब्जी उपजाने की बात हो । इन दिनों बिहार के बाढ़ में कुछ ऐसा ही दिख रहा है। कोसी की विकराल भयावह धारा सभी को लीलने को बेताब है। कई लोग डूबकर मर चुक
 
Pragati Mehta
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भगवान के लिए अभी पॉलिटिक्स मत कीजिये

बिहार का शोक ' कोसी फिर अपने प्रलयंकारी रूप में सामने है। सैकडों गाँव और लाखों लोग भयावह बाढ़ में फंसे हैं। दहाड़ मारती कोसी की धारा में फंसे लोगों का एक-एक पल बेशकीमती है। थोडी लापरवाही या देरी उनके जान का दुश्मन बन सकता है. भूखे-प्यासे उन लोगों की
 
Pragati Mehta
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बाढ़ के वो खौफनाक मंजर...

यमुना की बाढ़ ने मुझे उत्तर बिहार की बाढ़ की याद दिला दी। वो दर्दनाक और खौफनाक मंजर मेरे आंखों के सामने आज फ़िर घुमने लगा। गाँव-गाँव को लीलने को आमादा बागमती नदी । मरने वालों की हर दिन लम्बी होती सूची । भूख से बिलखते बच्चे और साफ पानी के लिए तरसता गला
 
Pragati Mehta
Dec 29 2009 11:52 AM
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सचमुच कमाल के हैं आप

सचमुच कमाल हैं आप। दौड़ती-भागती टीवी की लाइफ में भी बिल्कुल अलग । बोलने का ख़ुद का तरीका। सलीके के शब्द और कायदे का आलेख। चेहरे पर गंभीरता और आवाज़ में दम । और वही सटीक तिपन्नियाँ। नवाबों के शहर को तो आप पर नाज़ है ही, सभी हिन्दुस्तानियों को भी आप पर
 
Pragati Mehta
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काश एक अपना भी घर होता

देश की राजधानी दिल्ली पर हमसभी को नाज़ है। दिल्ली में अपना एक बंगला हो यह सभी चाहते हैं। लेकिन महंगाई के इस दौर में कुछ ही ऐसे खुशनसीब होते हैं जिनके सपने पुरे होते हैं। निजी बिल्डरों के फ्लैट के दाम सुनकर तो उस बारे में सोचने की भी हिम्मत नहीं हो पात
 
Pragati Mehta
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अब दूर नहीं रही दिल्ली

आपने भी किसी को यह कहते सुना होगा की- दिल्ली अभी दूर है. नेता जी भी अपने भाषण में विरोधियों के लिए कहते थे अरे उनके लिए अभी दिल्ली दूर है. यानि असंभव टाइप काम को लेकर पहले लोग यही कहते थे। लोगों के नज़र में दिल्ली बहुत दूर थी। लेकिन तेज भागती जिन्दगी
 
Pragati Mehta
Dec 29 2009 11:52 AM
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राजिव्किशोर की माता जी का निधन

फिर एक दुखद समाचार है। अपने साथी राजिव्किशोर की माता जी श्रीमति निर्मला प्रसाद का मंगलवार देर रत निधन हो गया। वह करीब ६० साल की थीं। कुछ दिन पहले ही उन्हें हार्ट की प्रॉब्लम आई थी। बेहतर इलाज के लिए ही उन्हें दिल्ली लाया गया था। लेकिन अचानक चलते-फिरत
 
Pragati Mehta
Dec 29 2009 11:52 AM
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भाई, वो डॉक्टर साहब कहाँ चले गए

अरे भाई, वो डॉक्टर साहेब कहाँ हैं आजकल। कौन डॉक्टर ? अरे वही नॉएडा वाले। तुम यार डॉक्टर को भी नहीं जानते हो। लगता है तुम्हे देश के नेशनल मैटर वाले ख़बरों से भी कोई मतलब नहीं होता है। नेशनल मैटर। हाँ यार दिन रात चैनल पर वही समाचार आता था। कोई चैनल खोल
 
Pragati Mehta
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सुप्रतिम को देखिये, कभी हिम्मत मत हारिये..

सचमुच इसे सुप्रतिम की मौत पर जीत ही कहेंगे। दिल्ली की इस घटना को जिसने भी देखा वो दहल गया, लेकिन उस हिम्मतवाले को दाद दीजिये जिसने उस रड को इतने देर तक बर्दास्त किया। एक रड पहले कार में घुसता है फिर वह उसके पेट के उपरी हिस्से को भेदते हुए पीठ को पार
 
Pragati Mehta
Dec 29 2009 11:52 AM
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अरे ये क्या हुआ....

नरेन्द्रनाथ के यह कहते ही की ..कोमल जी नहीं रहे. एक हाथ में तौलिया लिए मैं ठिठक गया। नरेन्द्र उस दर्दनाक घटना के बारे में बता रहे थे और मैं आगे की वो पुरी बदहवास तस्वीर बना रहा था। पहले तो विश्वास ही नहीं हुआ। ऐसा भला कैसे हो सकता है। लेकिन उन्होंने
 
Pragati Mehta
Dec 29 2009 11:52 AM
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बेहद दर्दनाक, कोमल जी अब हमारे बिच नहीं रहे

बेहद दर्दनाक और बुरी ख़बर। अपने साथी कोमल जी अब हमारे बिच नहीं रहे। आजमगढ़ के करीब एक रोड एक्सीडेंट में उनकी जीवन इहलीला समाप्त हो गई। गुरुवार की देर रात वह अपने कुछ साथियों के साथ वाराणसी से लौट रहे थे की रास्ते में एक ट्रक से उनकी गाड़ी की टक्कर हो
 
Pragati Mehta
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' भय हो ' ऑस्कर के लिए जाता तो क्या होता?

पहले चला जय हो। खूब बजा। खूब सुना गया। अब मैं ' भय हो ' गाने को खूब सुन रहा हूँ। इस गाने में गजब का खिंचाव है. मैं इसके राजनितिक चेहरे की बात नहीं कर रहा हूँ। मैं सोंच रहा हूँ यदि ऑस्कर जितने वाली रहमान साहब के जय हो की जगह यदि ' भय हो ' को इसी सुर-त
 
Pragati Mehta
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काश, जॉर्ज भी अटल जी जैसा सम्मान पाते

कितना अच्छा होता की जॉर्ज जैसे समाजवादी नेता को भी अटल बिहारी वाजपेयी जैसा सम्मान मिलता। अटल जी की तरह जॉर्ज भी चुपचाप बैठ जाते। उम्र और सेहत का ख्याल रखते। चुनावी तिकड़मों से अपने को दूर कर लेते। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। जॉर्ज फ़र्नान्डिस फ़िर मैदान मे
 
Pragati Mehta
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स्लमडॉग पर किस बात की खुशी ?

इन्डियन्स एंङ डॉग्स नॉट अल्लोवेड '। कुत्ते से हम भारतीयों की तुलना करने वाले इस वाक्य पर घोर आपति प्रकट की गई थी। अंग्रेजों के इस नजरिये पर हमें तरस आया था। गुलामी की दिनों में भी हमने इसे अपमान समझा था। हमारी ताक़त भले कम थी लेकिन इसके खिलाफ हर भारत
 
Pragati Mehta
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ये वैलेंटाइन का जमाना है

ये वैलेंटाइन का जमाना है चंदा नहीं अब मामा है, गाँव की याद आती नहीं वो मिटटी अब सताती नहीं, माँ से हो जाती है कभी बात पिता जी भी आ जाते हैं कभी याद गर्लफ्रेंड से मिलती है जब निजात तो कर लेता हूँ दो-चार बात, अभी लगा हूँ वैलेंटाइन वीक में होली में अब व
 
Pragati Mehta
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गजब: ठेठ गाँव में लिए गए शहर के फैसले

दु निया को सभ्यता सिखानेवाला बिहार। अब फ़िर से हमारे सामने है। कभी शिक्षा और महात्मा गाँधी की कर्मभूमि रहा बिहार अपने इतिहास को भूलने लगा था। भगवान बुद्ध की इस धरती को लोग दुसरे नज़र से देखने लगे थे। बिहारियों का क़द्र कम हो गया था। लेकिन एक बार फ़िर बि
 
Pragati Mehta
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उस दिन सूरजकुंड पटना जैसा लगने लगा था.

सचमुच, उस दिन हरियाणा का सूरजकुंड अपना पटना जैसा लगने लगा था। 4 फरवरी 2000 का वो ऐतिहासिक पल इस 4 फरवरी को भी याद आ गया। अपने ग्रुप के कुछ साथी जुटे थे। पुरानी यादें तजा हो गईं। सबकुछ 2000 जैसा लग रहा था। अन्तर सिर्फ़ इतना भर था की उस 4 फरवरी को हम ए
 
Pragati Mehta