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15 Jun 2010
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मौन की पौन

आज अर्जुन दिख रहा क्यों कौरवों के वेश में । क्यों दिशा से रहित वायु बह रही इस देश में ॥ श्मसान सा भोपाल को जिनने बनाया था कभी । अब भी उनको पालते अर्जुन हमारे देश में ॥ कौन है जो डस गया और सपेरा कौन है। हर कोई सच जानता अब हमारे देश में ॥ घट गया वह बुरा था
 
प्रदीप मानोरिया
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panee

पानी की कमी जो सर्वत्र ही छाई है । स्वंयसेवी संस्थायें चिंता से घबराई हैं ॥ एक संस्था ने पानी की बचत पर सेमिनार कराया । भांति भांति के लोगों को सुनने सुनाने बुलाया ॥ बहुत लोग माइक पाकर खुशी से फ़ूले । सुनाये जल बचत के अपने फ़ार्मूले ॥ एक बोले बार बार गिलास
 
प्रदीप मानोरिया
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माँ

ज़िन्दगी में जब कोई अवसाद आता है ।माँ तेरी ममता का आँचल याद आता है ॥वक्‍त है बीता बहुत तेरे बिन रह्ते हुये ।किन्तु हर पल माँ तुझे मैं साथ पाता हूँ ॥रहगुज़र में धूप भारी पर नहीं कुम्हला सका ।साया ममता का सदा मैं साथ पाता हूँ । भूल हो जाये कोई फ़िर बोध हो
 
प्रदीप मानोरिया
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होली की हार्दिक शुभ कामनायें

पर्व ये होली ऐसी सजायें ।.प्रेम खुशी व प्यार लुटायें॥.जल है अमोलक इसे बचायें।.तिलक लगा त्यौहार मनायें ॥ =Pradeep Manoria09425132060
 
प्रदीप मानोरिया
Feb 28 2010 08:53 AM
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आप सबसे क्षमा चाह्ता हूं

मेरे ब्लोग के सभी पाठ्कों से मैं ह्रदय से क्षमा प्रार्थी हूं , संभवत: कल या परसों किसी ने मेरे पासवर्ड को हेक करके मेरे ब्लोग पर बहुत भद्दी और अश्लील पोस्ट डाल दी । जिससे मेरा मन अत्यंत क्षुब्ध हुआ है और आप सभी जिनके संज्ञान में यह आया होगा उनका ह्रदय भी
 
प्रदीप मानोरिया
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मोहब्बत - रूहानी ज़ज्बा

गुलशन में र वानी है , और रुत भी सुहानी है |नहीं ज़ज्बा -ए-इश्क अगर ,फिर कैसी जवानी है ||नहीं चैन कहीं मिलता , आँखे भी उनींदी हैं |नज़रों में बसी सूरत ,ये इश्क निशानी है ||आह्ट हो जरा कोई , आमद सी लगे उनकी |नगमा ये मोहब्बत का, उल्फत की कहानी है ||इज़ह
 
प्रदीप मानोरिया
Dec 29 2009 11:45 AM
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महावीर जयंती

वीर प्रभु की जन्म जयन्ति देती यह संदेश है / जीव सभी हैं शुध्द सिध्द सम पर का नहीं प्रवेश है / देह धार अंतिम ये अलौलिक घटना मंगलकार है / सच्चे सुख का मार्ग दिखाने लिया प्रभु अवतार है / भिन्न भिन्न हैं वस्तु जगत में नित रह कर पर्याय धरें / अपनी अपनी मर
 
प्रदीप मानोरिया
Dec 29 2009 11:45 AM
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स्वागत -२००९ - प्रदीप मानोरिया

नव वर्ष में वंदन नया , उल्लास नव आशा नई |हो भोर नव आभा नई, रवि तेज नव ऊर्जा नई | विश्वास नव उत्साह नव,नव चेतना उमंग नई |विस्मृत जो बीती बात है ,संकल्प नव परनती नई |है भावना परिद्रश्य बदले , अनुभूति नव हो सुखमई | किंतु हालात क्या होते हैं :--- सरकार न
 
प्रदीप मानोरिया
टैग: NEW YEAR
Dec 29 2009 11:45 AM
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धक्का-अष्टक = प्रदीप मानोरिया

धक्का की महिमा बड़ी , करना सोच विचार |धक्के से ही होत हैं, काम अनेक हज़ार || धक्के से ही चल रही हिंद देश सरकार |मेडम धक्का देत हैं , ड्राइवर है सरदार ||1|| धक्का मंदी का पायकर , औंधा शेयर बाज़ार |अब तेज़ी का मुंह तके , धक्के का इंतज़ार ||2|| इस मंदी
 
प्रदीप मानोरिया
Dec 29 2009 11:45 AM
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दोस्त और बचपन की यादें = Pradeep Manoria

दोस्त तेरी याद बहुत आती है / यादें तेरी या उन लम्हों की जो बिताये थे तेरे साथ बचपन में /आज भी ताजा हैं वे याद पचपन में /दोस्त तेरी याद बहुत आती है / स्कूल से गोल मार अमरूद के बगीचे में /दौड्ते दौड्ते जामफ़ल तोडते / माली का डर भी मन में भरा हुआ / पेड
 
प्रदीप मानोरिया
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ताजे दोहे

दिल्ली :-देत दुहाई जो रहे , मानव के अधिकार |निरस्त पोटा कर दिया ,मनमोहन सरकार || नीर समान बहता रहा,निर्दोषों का खून |बस वोटों के लोभ में ,टांग दिया क़ानून || हमले आतंकी हुए ,बढ़ने लगा दबाब |तब जाके जागे कहीं, टूटे लोभ के ख्वाव || नए नाम नई जिल्द में
 
प्रदीप मानोरिया
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शुभ दीपावली ..

दीपो की कतार से ,एकता औ प्यार से उर के उल्लास से ,जीवन के प्रकाश से खुशियाँ फैलाई हैं दीवाली आई है ....................राम राज्य शान की , मुक्ति वर्धमान की न्याय और नीति की ,अहिंसा की रीति की याद ये दिलाई है दीवाली आई है ..................इस प्रकाश प
 
प्रदीप मानोरिया
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swantrata diwas =pradeep manoria

गली गली में बजते देखे आज़ादी के गीत रे जगह जगह झंडे फहराते यही पर्व की रीत रेसभी मनाते पर्व देश का आज़ादी की वर्षगांठ है वक्त है बीता धीरे धीरे साल द्वय और साठ है बहे पवन परचम फहराता याद जिलाता जीत रे गली गली में बजते देखे आज़ादी के गीत रे जगह जगह झंडे
 
प्रदीप मानोरिया
टैग: freedom
Aug 14 2009 09:54 AM
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मिलने की प्यास रहने दे

ये जो गम हैं मेरे, मेरे ही पास रहने दे |जिन्दगी में बाकी ये , जीने की आस रहने दे || वो मिले या न मिले , उल्फत की शमा जलती रहे |न रहे साथ भले , यादें ही पास रहने दे || कतरा कतरा शराब में जिन्दगी शामिल है |मय मयस्सर नहीं , महकती हुई सांस रहने दे || घूँ
 
प्रदीप मानोरिया
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HINDI KAVYA MANCH

फिर वही राज वही काज वही मंहगाई है |हिंद में कठपुतली ने फिर से कुर्सी पाई है ||वही मेडम वही गुड्डा वही है डोर हाथों में |फर्क इतना कि कुछ मजबूती हाथ आई है ||हिंद में रेल समझोते से चली है अब तो |या बिहारी या कि बंगाली ने इसे चलाई है ||खुद पे ज्यादा भरो
 
प्रदीप मानोरिया
टैग: sonia gandhi
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कब आओगे मेघ और फिर कब बरसोगे

राह तकत नयना थके, सतत जोहते बाट |माह अषाढ़ भी जा रहा , नहीं आई बरसात ||तपन नहीं अब सहन है , अब आये मानसून | छींटे भी दुर्लभ हुए, बीत चला है जून || चार माह से कृपा बहुत , हे रवि तुमरा तेज़ | रात हुए भी चुभत है , गरम गरम यह सेज || नहीं चैन दीखत कहीं ,
 
प्रदीप मानोरिया
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पिताजी - एक श्रद्धांजलि

अपनो के विछोह से |बंधे जिनके मोह से |उनके अवसान से |जीव के प्रयाण से |दुख की गहराई है |याद बहुत आई है |जितना मैं भुलाता हूँ |भूल नहीं पाता हूँ |मुझ पे उनका साया था |हाथों से मुझे खिलाया था |धूप में कुम्हलाता हूँ |कुछ सोच नहीं पाता हूँ |कैसे अब जी पाऊ
 
प्रदीप मानोरिया
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सपनों का मौसम -- सन्दर्भ : लो.स.चुनाव२००९

पूरे देश में फसल स्वप्न की कैसी यह हरियाई है | दिवस हजारों बीते देखो याद हमारी आई है || पूर्ण देश में सपनों के विक्रेता ऐसे घूम रहे | गाँव गली में घूम घूम कर बूढे बच्चों को चूम रहे || कोई क़र्ज़ माफी के सपने ,सपने बिजली पानी के | कन्या की शादी के सपन
 
प्रदीप मानोरिया
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जरनैल का जूता

ज से जूता, ज से जैदी, ज से ही जरनैल है | वैश्विक यह संस्कृति हमारी कितना सुन्दर मेल है || कलम नवीसी कलम सिपाही दोनों ही पत्रकार हैं |छोड़ कलम को आज बनाया जूते को हथियार है ||अंतर ह्रदय ज्वालामुखी कैसा, कैसा ऐसा क्रोध है | स्याही सूखीआज कलम की या विरो
 
प्रदीप मानोरिया
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फागुन की बहार - Pradeep Manoria

फागुन आयो फागुन आयो फागुन आयो रे |बरसे रंग अबीर गुलाल गगन में फागुन आयो रे || गोपी नृत्य दृश्य कटि दौलन संग गिरधारी रे |प्रेम नयन के तीर हैं तीखे, कर पिचकारी रे ||बरसे रंग अबीर गुलाल गगन में फागुन आयो रे फागुन आयो फागुन आयो ........... जाता जाड़ा ग्र
 
प्रदीप मानोरिया
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होली और चुनाव की कॉकटेल

अब के आयो एइसों फाग रेवडी बँट रही चारों ओर | जाको ओर छोर न दीखे ,बाँटो बाँटो का शोर || कोई वेतन वृद्धि देता कोई टेक्स में छूट | जनता का वे माल लुटा कर वोट रहे हैं लूट || अब के आयो एइसों फाग रेवडी बँट रही चारों ओर | दुनिया जूझ रही संकट से , यहाँ भरी भ
 
प्रदीप मानोरिया
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सुख ?

बीत रहा जीवन यूँ ही , बस सुख की अभिलाषा | सुख है दुख या फ़िर सुख , अनभिज्ञ रहा क्या परिभाषा || तीव्र आकुलित भोक्ता दुःख का , कम आकुलता क्या यह है सुख ? जग भर जिसको सुख कहता है , वह सुख है अथवा है दुःख ? निर्विचार जीवन जीता है , रत रह व्यर्थ प्रयासों
 
प्रदीप मानोरिया
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मंहगाई और स्वप्न

 
प्रदीप मानोरिया
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टी वी न्यूज चैनल

टी वी न्यूज चैनल की कलाकारी है / टी आर पी का भूत इन पर तारी है / सनसनी वारदात जैसे कार्यक्रम / पैदा करते वीभत्सता डर और भ्रम / समाज की जागरूकता के नाम पर दे रहे नालेज / वास्तव में बन गये हैं अपराध सिखाने के कालेज / हमें समाज को जगाना है ये तो इक बहान
 
प्रदीप मानोरिया
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आज की फैशन

फैशन की दुनिया में जबरदस्त कमाल है | अल्पता और लघुता से आया हुआ भूचाल है | पूर्व के आविष्कारों में स्कर्ट की लंबाई घटती गई | अब स्कर्ट ऊपर से टॉप नीचे से घट जाना है फैशन नई | low waist स्कर्ट या जीन्स show waist टॉप का नया फैशन है | उसकी मोबाइल से फो
 
प्रदीप मानोरिया
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जल पुनर्भरण आज की आवश्यक्ता - - WATER HARVESTING

सूखता जाता हुआ जल / कुछ तो होगा इसका भी हल / क्या ये प्रश्न करता है उद्वेलित / इसे हल करने कभी हुए प्रेरित / एकांगी रूप से प्रवृत्त व्यवहार में ही लीन हैं / मिलता जहॉं से अरे मात्र लेने में तल्लीन हैं / नीर के उपयोग के संग दुरूपयोग पर भी हैं डटे / धी
 
प्रदीप मानोरिया
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बूढी आशा

आशाओं से भरी निगाहें , मन कितना मजबूर है |तन जर्जर सामर्थ्य नहीं है , दुःख ही दुःख का पूर है || सर्द रात तन रहे ठिठुरता , यह दरिद्र संजोग है |हाथ में चिंदी असमंजस है , क्या इसका उपयोग है ||चेहरे पर झुर्री का जाला , निर्धनता का नूर है .......आशाओं से
 
प्रदीप मानोरिया
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मौसम

मौसम का ये मिज़ाज हुआ खुशगवार है |आयेंगे वो जो पास, मेरे इंतज़ार है | वो दूर नहीं पास मेरे जान लीजिये |है चश्म में रूख वो हसीं मेरे आज है |मौसम का ये मिज़ाज हुआ खुशगवार है | जुल्फों के पेंचों खम है भला स्याह क्यूं बडे |दिन में हुई है शाम यहॉं गुल की
 
प्रदीप मानोरिया
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टी वी सीरियल्स एकता स्टाइल

पारिवारिक पृष्ठ भूमि की कहानियों पर आधारित / आजकल चल रहे टी वी के धारावाहिक /समाज में खूब छा रहे हैं / शायद सभी को भा रहे हैं / भारतीय संस्कृति की संकेत मात्र साडियॉं / ब्लाउज की आवश्यकता को नकारती टीवी की नारियॉं /वक्रता के भाव चेहरे पर सजाये / अपने
 
प्रदीप मानोरिया