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गुरतुर गोठ

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17 Jun 2010
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डबरी झन बनय डबरा - गुड़ी के गोठ

आधुनिकता के चकाचौंध म चौंधियाये हमन जेन गति ले अपन परम्परा, संस्कृति अउ जीवन जीए के ढंग ल बिसरावत जावत हवन, उही गति ले कई किसम के समस्या घलोक हमर मन के आगू म अभरत जावत हवय। चाहे वो विकास के बात होवय ते सुख- समृद्घि के जम्मो म एकर पाछू विनास अउ पीरा के
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
Jun 17 2010 07:01 AM
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सोरिहा बादर - गुड़ी के गोठ

तइहा के बात आने रिहीसे जब ठउका लगते असाढ़ के बादर उमडय़ अउ कालिदास के बिरहा भोगत यक्ष ह वोला सोरिहा बना के अपन सुवारी तीर पठो देवय। अब वो जुग बदले के संगे-संग बादर के अवई-जवई के बेरा घलो बदले बर धर लिए हे, अइसे म बिरहा भोगत यक्ष कइसे करय, वो अपन सुवारी ल
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
Jun 16 2010 11:59 AM
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संस्कृति बिन अधूरा हे भाखा के रद्दा

भाखा के मापदण्ड म राज गठन के प्रक्रिया चालू होए के साथ सन् 1956 ले चालू होय छत्तीसगढ़ी भाखा ल संविधान के आठवीं अनुसूची म शामिल करे के मांग आज तक सिरिफ मांग बनके रहिगे हवय। अउ लगथे के ए हर तब तक सिरिफ मांगेच बने रइही, जब तक राजनीतिक सत्ता म सवार दल वाला
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
Jun 14 2010 02:23 PM
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नइए भरोसा संगवारी-रागी

नइए भरोसा संगवारी-रागीहवा पानी अउ आगी।नइए भरोसा संगवारी रागी॥दाई बहनी सबके खाथे किरिया।नइए लाज शरम पिरिया॥न दाई ल, दाई जानत हे।न बहिनी ल, बहनी मानत हे॥सबके ऐके ठन राज आय।धन-दौलत अउ काज आय॥मोर खेत कइके बताथे लबरा।देखे जाबे त दीखत हे डबरा॥लबरा के मुंह बड़े
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
Jun 12 2010 09:14 PM
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आंजत-आंजत कानी होगे! - बियंग

'जिहां तक नाक के सोझ म देखे के बात हे त इहां के मनखे तो वइसे घलोक नाक के सोझ म नई देख सकय। काबर ते इहां जम्मो चिक्कन-चांदन सड़क मन म कोन मेर जझरंगा भरका होही, गङ्ढा होही तेकर तो ठिकानच नइ राहय त भला बपरा ह अंधमुंदा या सोझ देखत कइसे रेंग सकथे? फेर ये बात
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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Jun 09 2010 09:00 AM
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मोर लीलावती के लीला - बियंग

कहां बोचक के जाबे तें। डोंगरी-पहाड़, अलीन-गलीन, जिहां हाबे, तिहां ले खोज के निकालिहौं। सात तरिया में बांस डारूंगा। केकंरा और मुसुवा के बिला मं हाथ डारहूं। अइसे काहत बइहाय गदहा कस किंजरे लगेंव। हुरहा पोस्टमेन हर, भकाड़ूराम चऊंक मा, अभरा तो गे। मैं आंखी
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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सइताहा - कहिनी

परेम के गौटिया घर अवई हा फलित होगे। चार महिना की बीते ले गौटनिन के पांव भारी होगे। दूनों परानी ल गजब खुसी होगे। मानो दुनिया के जम्मो सुख वोकर आगू मे आगे। लइका के लालन-पालन म दूनो परानी ह जम्मो बेरा ल पहा दय। सबो खेती -खार के देख-रेख ल परेम ह करय। एक दिन
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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Jun 07 2010 12:03 AM
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गुरूजी नमस्कार - कबिता

गुरूजी नमस्कार,काहत हावे सरकार।सिक्छक तो नई बना पायेनफेर सिक्छा म कर्मी जोड़े के खातिरमिहनत करेन अपार।गुरू जी नमस्कार॥बने नंबर घला दे देनएक दू तीन सिक्छा कर्मीअइसन हे कानून निकाल केसिक्छित बेरोजगार मन ल,करथन बंठाधार।गुरू जी नमस्कार॥ये गुरू के निन्दा हरे
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
Jun 05 2010 07:15 AM
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कोंदा मनके भजन महोत्सव - गुड़ी के गोठ

अब बड़े-बड़े जलसा अउ सभा समारोह ले देवई संदेश ह अनभरोसी कस होवत जात हे, अउ एकर असल कारन हे अपात्र मनखे मनला वो आयोजन के अतिथि बना के वोकर मन के माध्यम ले संदेश देना। राजनीतिक मंच मन म तो एहर पहिली ले चले आवत हे, फेर अब एला साहित्यिक सांस्कृतिक मंच मन म
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
Jun 04 2010 06:24 AM
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गांव के गुरूजी - कहिनी

''गांव के गुरूजी कहिस के छोटे-छोटे बात में सरकार के मुंह देखना ठीक नई होवय। सरकार तो हमन ल स्कूल के भवन बना के दे दे हावय। अब ये भवन के सुरक्षा अउ मरम्मत के जिम्मेदारी हमर गांव वाला मन के आय। ये स्कूल में हमर लइका मन पढ़े बर आथें। ओखर मन के सुरक्षा बर ये
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
Jun 03 2010 06:09 AM
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बेनी मा फूल गूंथे के दिन

बेनी मा फूल गूंथे के दिनफूल वाले घाटी फेर होगेसुहागिनकली मन के मुस्काए के दिन,धूप छांह के छेड़ छाड़ के दिनभंउरा मन के टोली उतरगेबाग बगीचा माकोनो मुस्काए मंद-मंदगुल मोहर के तरि मा,कोइली कुहके अमरइयापपीहा वन उपवनलाल दहकत टेसू वाला दिन,अमलताश डाली-डाली माआ गे
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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गुदेलना - कहिनी

राधा अपन अंतस के पीरा ला कभू कोनो ल जनान नी देवय। फेर येकर कोनो नइहे कहिके लोगन जइसने पाथे वइसने ताना मारे मा कमी नी करय। राधा ह बिगर धियान दे अपन रसता आवत-जात रिथे। फेर ककरो बहकावा मा नी अईस। रसता मा कतको झन कुछु-न-कुछु कहात रिथे फेर लहुट के जुवाब कोनो
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
Jun 01 2010 06:25 AM
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चरगोड़िया

भूख नई देखय जूठा भात,प्यार (मया) नई देखय जात-कुजात॥समय-समय के बात, समय हर देही वोला परही लेनाकभू दोहनी भर घी मिलही, कभू नई मिलही चना-फुटेना।राजा अउ भिखारी सबला, इही समय हर नाच नचाथे,राजमहल के रानी तक ला, थोपे बर पर जाही छेना॥बेटी के बर बिहाव, टीका
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
May 31 2010 08:44 AM
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सांस म जीव लेवा धुंगिया

आज मौसम परिवर्तन के मार झेलत मनखे अचरज खा गे जब बसंत रितु म जाड़ ह अपन डेरा जमाय हावय। बरसात म गर्मी झेलत मनखे मौसम के पीरा ल सहत हावय। मौसम खुदे अचरज म हावय के मोर दिसा कइसे बदल गे हावय। इही सुग्घर साफ पर्यावरन ल करिया करत हमर विकास के रद्दा मलेगइया ये
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
May 29 2010 06:14 PM
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रहचुली

मेला म लगे हे रहचुलीतरी ऊपर घूमत सहेजे रहचुलीचेंवचेंव चेंव नरियावत हे रहचुलीबाबू, नोनी सबो ल बलावत हे रहचुलीपईसा म झूले बर बइठाए म रहचुलीआ रे टुरा झूल ले, कहिथे ये रहचुलीमीत-मयारू के मया ठउर ये रहचुलीआमा के ममहावत मऊर ये रहचुलीजिनगी के संसो-पीरा मेटाथे
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
May 27 2010 06:10 PM
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कहिनी : पिड़हा

न वा जमाना आय के बाद जुन्ना कतको चीज नंदावत जात हे। एमा सिल लोड़िहा, पिड़हा, जांता, झउंहा अउ कतको जिनिस सामिल हवय। जांता तो आज कल बिलकुले नंदा गे हे। गांव में घलो खोजबे तो मिलना मुसकिल हे। वइसने मिक्सी के आय ले पढ़े-लिखे माइ लोगन मन सिल लोड़िहा ल हिरक के नइ
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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बखत के घोड़ा

खावत हे, पियत हेरातदिन मारा-मारी जियत हेबिन लगाम दउड़त हेबखत के घोड़ा।रात हर दिन हो जाथेदिन हर रात हो जाथेबिन काम होय आरामलागथे मनखे ल हरामआज ये डहरकाल ओ डहरये शरीर बन जाथेकोदो कस गरू बोराबखत के घोड़ा।चलगे जेकर पांव के टापूमुड़ के नई देखय पाछूयेहर अपन मंजिल
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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छत्‍तीसगढि़या संगी मन संग जरूरी गुपचुप बात

हिन्‍दी ब्‍लॉग के जम्‍मो संगी मन ला जय जोहार. संगी हो आपमन अभी के ब्‍लाग जगत में होत धरी के धरा झूमा झटकी ला देखत होहू. हमर कई झिन भाई मन अपन-अपन गुट के नेता के संग देहे के खातिर पोस्‍ट और टिप्‍पणी ले ससन भर भर के बान मारत हें. राजकुमार सोनी भाई, ललित
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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खेती म हावय सब सुख - कहिनी

सीताराम हर एक दिन शहर गीस घूमे बर, शहर के हालचाल जाने बर सीताराम शहर पहुंचगे। बढ़िया-बढ़िया घर-कुरिया, पांच तल्ला छै तल्ला। सब ल देखिस घूमत-घूमत सीताराम ल भूख लागिस खोजत-खोजत एक ठन बढ़िया होटल म गिस पेट भर रोटी-भात खाइस। होटल वाला ल पूछथे, कस गा भइया, के
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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छत्तीसगढ़ी हायकू

बिन पानी के।सावन-भादो! जेठ।मन उदास।x ठग-ठग के।तैं बिलवा बादर।कांहां बुलबे?x बिगन पानी।कइसे होही खेती।संसो लागथे।x बिचारे हस?निरदई बादर।मन के पीरा।x पीरा ओनहा।पीरा दसना पी-ले।खा ले पीरा ल।विट्ठल राम साहू 'निश्छल'मौंवहारी भाठामहासमुन्द
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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विचार ले भटकगे धारा : गुड़ी के गोठ

लोकतंत्र के नांव म जबले वोट के राजनीति शुरू होय हे, तबले कोनो भी नियम-कायदा या कहिन के विचारधारा ह जम्मो राजनीतिक पारटी मन ले तिरियावत जात हे। एकरे सेती अब कोनो भी पारटी ह अपन एजेण्डा ऊपर ईमानदार नइ दिखय। कहूं न कहूं वोमा लीपापोती या तिरिक-तीरा के चिनहा
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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माटी माथा के चंदन

मोर गांव के करंव बंदन,माटी माथा के चंदन।सपना सुग्घर दूनो नयनन,आड़ी-पूंजी जिनगी धन॥हरियर-हरियर खेती-खारलीपे-पोते घर-दुवार॥गंगा कस नरवा के पानी,अन धन ले भरे कोठार॥सेवा के सोंहारी बेलय,पिरित के धरे पईरथन।करमा, ददरिया, पंडवानीगली खोर म गीता बानी।घर-घर तुलसी
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
May 08 2010 03:56 PM
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मितानी के गांठ - कहिनी

दाई-दाई! मेंहा काली सलमा दीदी घर रहूं। दीदी ह मोला काली रूके खातिर बड़ किलोली करत रीहीस हे। बड़े बाबू ह घलोक रूके बर मनावत रीहीसे। ममता ह अपन दाई ल चिरौरी करत कहिथे। त दाई ह कथे- तेहां मोला झिन पूछ बेटी, तोर ददा ल जाके बता। ममता ह गांव के पंच कातिक के
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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बसंत 'नाचीज' के छत्तीसगढी गजल

बिना, गत बानी के घर, नाना नानी केडोकरी, डोकराबिन, दवई पानी केआय डोली, काकरढेला रानी केलगत कइसन होहोरा छानी केऊंचा है दामकाहे कानी केबतावथस अइसनदेबे लानी केदिखथे करेजा कसतरबुज चानी केबके आंय बांयबेइमानी करकेकर दान, पुन ऊनानि कभू दानी केमरगे खा
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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जब पवन दीवान दऊड़ म अव्वल अइस

सुरताराजिम तीर के कोमा गांव म साहित्य म रुचि रखइया के कमी नइ हे। इही गांव काबर आसपास के बहुत अकन गांव म घलो साहित्यकार अउ कवि मन के अइसे छाप पड़े हे के लोगन अपन लइका के नाव घलो कवि मन के नाव जइसे धराय-धराय हवे।वइसे तो राजिम क्षेत्र के जम्मो भुंइया
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
May 01 2010 11:42 PM
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छत्तीसगढ़ी व्याकरण के 125 बछर

जे मन आज घलोक छत्तीसगढ़ी ल संवैधानिक रूप ले भाखा के दरजा पाए के रद्दा म खंचका-डिपरा बनावत रहिथें, उंकर जानकारी खातिर ये बताना जरूरी होगे हवय के ए बछर ह छत्तीसगढ़ी व्याकरण बने के 125 वां बछर आय। आज ले ठउका 125 बछर पहिली हीरालाल चन्द्रनाहू "काव्योपाध्याय"
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
Apr 29 2010 03:00 PM
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कुकुर मड़ई माने डॉग शो अउ डॉग ब्‍यूटी कान्टेस्ट - गुड़ी के गोठ

नवा जमाना संग नवा-नवा चरित्‍तर सुने ले मिलथे। पहिली तीज-तिहार, मेला-मड़ई के नांव सुनते मन कुलके अउ हुलके ले धर लेवय। काबर ते एकर ले अपन गौरवशाली परम्परा अउ संस्कृति के चिन्हारी मिलय। फेर अब अइसे-अइसे आयोजन होथे, ते वोकर नांव ल सुनके तरूवा भनभना जथे। अभी
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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खजरी असनान - गुड़ी के गोठ

असनान तो वइसे कई किसम के होथे जइसे घुरघुरहा असनान, पानी छींचे असनान, साबुन असनान, झुक्खा असनान, गंगा असनान, शाही असनान, कुंभ असनान, चिभोरा असनान फेर अब ए सबले अलग हट के एक नावा असनान घलोक हमर इहां संचरगे हे, जेकर नांव हे- खजरी असनान। खजरी असनान बड़ा
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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झांझ के गुर्रई संग बासी के सुरता - गुड़ी के गोठ

मंझनिया के घाम ह अब जनाए ले धर लिए हे। एकरे संग अवइया बेरा के लकलकावत घाम के सुरता संग हरर-हरर के अवई-जवई अउ झांझ-बड़ोरा के गुर्रई के सुरता मन म समाए बर धर लिए हे। फेर संग म करसी-मरकी के जुड़ पानी अउ गोंदली संग बोरे-बासी के सेवाद घलोक मुंह म जनाए बर धर
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
Apr 18 2010 09:09 PM
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संवैधानिक आजादी के सुख पहुंचय आम जनता तक

सिरिफ केन्द्र के राजधानी दिल्ली, प्रांत मन के राजधानी अउ जिला मन के राजमार्ग भर म हरेक साल भारी-भरकम के जुलुस निकाले भरले जनतंत्र नइ कहावय। या हरेक पांच साल म वोट डारे के तिहार मनाय ले गणतंत्र सुफल नइ होवय। जउन दिन हरेक जनता ल रोटी, कपड़ा, मकान, दवाई अउ
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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भगत के बस म भगवान - लोककथा

गजब दिन के बात आय। महानदी, पैरी अऊ सोंढूर के सुघ्घर संगम के तीर म एक ठन नानकुन गांव रिहिस हे। नदिया के तीर म बसे गांव ह निरमल पानी धार म धोवाके छलछल ले सुघ्घर दिखय। गांव के गली-खोर ह घलो गउ के गोबर म लिपाय मार दगदग ले दिखत राहय। कोन्हो मेर काकरो घर-
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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भाग ल अजमावत हावय

दिन-रात पोंगा ल, वजावत हावयंघर-घर म जाके, रिरियावत हावंयअईसन छाये हे, चुनावी मऊसमचारो खूंट मनखे, बगरावत हावंयकोन्हों कुछु करंय त झन करंयफेर, लोगन ल आसरा देवावत हावयनान-नान लईका, जंवरिहा, सियानदारू पीरे बन गेहें मितान'नल', 'जांता' अऊ 'पत्ती' छापासब्बो
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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गुड़ी के गोठ - संस्कृति बिन अधूरा हे भाखा के रद्दा

भाखा के मापदण्ड म राज गठन के प्रक्रिया चालू होए के साथ सन् 1956 ले चालू होय छत्तीसगढ़ी भाखा ल संविधान के आठवीं अनुसूची म शामिल करे के मांग आज तक सिरिफ मांग बनके रहिगे हवय। अउ लगथे के ए हर तब तक सिरिफ मांगेच बने रइही, जब तक राजनीतिक सत्ता म सवार दल वाला
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
Apr 11 2010 10:19 PM
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गुड़ी के गोठ - आरूग चोला पहिरावयं

जब कभू संस्कृति के बात होथे त लोगन सिरिफ नाचा-गम्‍मत, खेल-कूद या फेर जे मन ल सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत मंच आदि म प्रस्तुत करे जा सकथे, वोकरे मन के चरचा करथें। मोला लागथे के ए हर संस्कृति के मानक रूप नोहय। एला हम कला के अंतर्गत मान सकथन, फेर जिहां
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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आदि परब के अद्भुत रंग - सुशील भोले

गुड़ी के गोठ बसंत ऋतु संग बलदे मौसम के नजारा संग कला-जगत के घलो रंग बदलत देख के मन गदगद होगे। छत्तीसगढ़ी कला-संस्कृति के नांव म इने-गिने गीत-नृत्य मन के प्रस्तुति देख-देख के असकटाये आंखी ल आदि परब के रूप में मनमोहनी देखनी मिलगे। एला देखे के बाद मन म ए
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
Apr 04 2010 03:22 PM
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धान बेचई के करलई

किसान के पीरा ह जग हँसई होगे।मंडी म धान के बेचई करलई होगे॥अधरतिहा ढिलाइस बईला-गाड़ी।जुड़ म चंगुरगे हाथ-गोड़ माड़ी॥झन पूछ भूख, पियास नींद के हाल।चोंगी, माखुर तको जइसे, होगे बेहाल॥होटल के गरम वोहा दवई होगे।मंडी म धान के बेचई, करलई होगे॥लोग हे मंडी म धान के
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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सरग निसैनी म चघ लइका हांसत हे, बादर ले चंदा झांकत हे

पुस्तक समीक्छासरग निसैनी(लइका गीत)डॉ. पीसी लाल यादवप्रकाशक- दूधमोंगरा, गण्डई, जिला राजनांदगांवमूल्य-10 रुपए'सरग निसैनी' म लइका गीत के पंक्ति हावय। एक-एक गीत ऊपर गोड़ मड़ावत लइका बुध्दिमानी के सरग तक पहुंच जही। निसैनी के हर पंक्ति लइका के पसंद के हावय। अमली
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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छत्तीसगढ़ी लोक कला के धुरी 'नाचा'

'जुन्ना समय अउ अब के नाचा म अब्बड़ फरक होगे हे। जुन्ना नाचा कलाकार मन रुपिया-पइसा के जगह मान सम्मान बर नाचयं गावयं। गरीबी लाचारी के पीरा भुलाके कला साधना म लगे राहयं, कला के संग जिययं अऊ मरयं। आज काल में नाचा म दिखावा जादा होथे कला साधना कमतियागे। फिलिम
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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प्रकृति के नवा सिंगार अउ नवा बछर

सुशील भोले भईया ला सुनव यूट्यूब मा - विडियो साभार - http://www.youtube.com/user/webmediablogभारतीय नव वर्ष माने चैत महीना के अंजोरी पाख के पहिली तिथि। मोला लगथे हमर ऋषि-मुनि मन प्रकृति के नवा सिंगार ल आधार मानके ए तिथि ल जोंगिन होहीं तइसे लागथे।
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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घासीदास जी के अमर संदेश-पंथी गीत

सत ल जाने बर घासीदास सन्यासी होगे। सत असन अनमोल जिनीस ल पाए बर वाजिब साधना के जरूरत परिस। बर-पीपर सांही पवित्र वृक्ष ल छोड़के ये औंरा-धौंरा असन साधारन पेड़ के खाल्हे तपस्या म लीन होगे। ये घासीदास के निम्न वर्ग लोगन के प्रति ओखर पिरीत अउ लगाव के प्रतीक आय।
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari