गत्यात्मक ज्योतिष's Image

गत्यात्मक ज्योतिष

http://sangeetapuri.blogspot.com/
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
17 Jun 2010
कुल प्रविष्टियां
256
पाठक भेजे
14874
पसंद
2007
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
58.10
पसंद करें
3
नापसंद करें

जन जन तक ज्‍योतिष के ज्ञान को पहुंचाने का प्रयास - 5

ज्‍योतिष आम लोगों के लिए बिल्‍कुल नया विषय है और हममें से सभी लोगों के दिमाग में यह बात पहले से है कि यह बहुत ही जटिल विषय है , इसलिए ज्‍योतिष सीखा ही नहीं जा सकता। लेकिन बात ऐसी नहीं है , ज्‍योतिष के सारे नियम जटिल क्‍यूं कर होंगे , अब हमें जिस विषय का
 
संगीता पुरी
पसंद करें
7
नापसंद करें

जन जन तक ज्‍योतिष के ज्ञान को ले जाने का प्रयास - 4

कल के आलेख से हमें जानकारी मिली कि आसमान के गोलाकार 360 डिग्री के 12 भाग कर 12 राशियां बना दी गयी है। अभी तक तो आपको इनके नाम भी याद हो गए होंगे। जन्‍मकुंडली में जिस खाने में 1 लिखा होता है , वह मेष राशि का प्रतिनिधित्‍व करता है , जहां 2 लिखा होता
 
संगीता पुरी
पसंद करें
3
नापसंद करें

जन जन तक ज्‍योतिष के ज्ञान को ले जाने का प्रयास - 3

आज एक बार फिर से शीर्षक में परिवर्तन करते हुए पिछली कडी को आगे बढा रही हूं। हमारा सामना अक्‍सर कुछ वैसे लोगों से होता है , जो ऐसे तो कभी ग्रहों या ज्‍योतिष पर जब कभी लंबे समय तक चलने वाली किसी विपत्ति में फंसते हैं , ज्‍योतिष पर अंधविश्‍वास ही करने लगते
 
संगीता पुरी
पसंद करें
4
नापसंद करें

खेल खेल में ज्‍योतिष की जानकारी देने का प्रयास - 2

कल के ही लेख को आगे बढाने का प्रयास कर रही हूं , पर एक टिप्‍प्‍णी के कारण शीर्षक में से वैज्ञानिक दृष्टिकोण हटा दिया जा रहा है। जब भी मैं ज्‍योतिष को विज्ञान कहती हूं , उनलोगों को कष्‍ट पहुंचता है , जो मोटे मोटे किताबों में लिखे वैज्ञानिकों खासकर
 
संगीता पुरी
पसंद करें
3
नापसंद करें

खेल खेल में वैज्ञानिक दृष्टिकोणयुक्‍त ज्‍योतिष की जानकारी देने का प्रयास - 1

मेरे द्वारा पत्र पत्रिकाओं में ज्‍योतिष से संबंधित जितने भी लेख छपे , वो सामान्‍य पाठकों के लिए न होकर ज्‍योतिषियों के लिए थे। यहां तक कि मेरी पुस्‍तक भी उन पाठकों के लिए थी , जो पहले से ज्‍योतिष का ज्ञान रखते थे। इधर कुछ वर्षों से ज्‍योतिष में प्रवेश
 
संगीता पुरी
पसंद करें
5
नापसंद करें

विरोधी समूह के द्वारा प्रशंसा और सम्‍मान .. इससे बडा सुख क्‍या हो सकता है ??

अपने तो हमेशा प्रशंसक होते हैं , इसलिए उसकी प्रशंसा आपको उतना सुख नहीं दे सकती , जितना एक विरोधी के द्वारा आपकी प्रशंसा किए जाने पर होता है। एक विरोधी के द्वारा प्रशंसा किए जाने का अर्थ है कि आप सही राह चल रहे हैं , जो आपका आत्‍मविश्‍वास बढाने में कामयाब
 
संगीता पुरी
पसंद करें
7
नापसंद करें

संगठन में ही बडी शक्ति है .. क्‍या आप इंकार कर सकते हैं ??

हिंदी ब्‍लॉग जगत से जुडने के बाद प्रतिवर्ष भाइयों के पास दिल्‍ली यानि नांगलोई जाना हुआ , पर इच्‍छा होने के बावजूद ब्‍लोगर भाइयों और बहनों से मिलने का कोई बहाना न मिल सका। इस बार दिल्‍ली के लिए प्रस्‍थान करने के पूर्व ही ललित शर्मा जी और अविनाश वाचस्‍पति
 
संगीता पुरी
पसंद करें
1
नापसंद करें

पूरे महीने दिलो दिमाग में दुर्घटनाओं का खौफ छाया रहा !!

पिछले आलेख में मैने बताया कि इस बार की दिल्‍ली यात्रा मेरे लिए बहुत ही सुखद रही, पर पूरे महीने दिलो दिमाग में दुर्घटनाओं का खौफ छाया रहा। 5 मई को बोकारो से प्रस्‍थान की तैयारी में व्‍यस्‍त 4 मई को मिली एक भयावह दुर्घटना की खबर ने मन मे जो
 
संगीता पुरी
पसंद करें
6
नापसंद करें

पूरे महीने दिलो दिमाग में दुर्घटनाओं का खौफ छाया रहा !!

पिछले आलेख में मैने बताया कि इस बार की दिल्‍ली यात्रा मेरे लिए बहुत ही सुखद रही, पर पूरे महीने दिलो दिमाग में दुर्घटनाओं का खौफ छाया रहा। 5 मई को बोकारो से प्रस्‍थान की तैयारी में व्‍यस्‍त 4 मई को मिली एक भयावह दुर्घटना की खबर ने मन मे जो भय बनाया , वह
 
संगीता पुरी
पसंद करें
6
नापसंद करें

दिल को खुश करनेवाली रही यह दिल्‍ली-यात्रा

यूं तो पिछले तीन वर्षों से मई या जून महीने में मुझे दिल्‍ली में ही रहने की जरूरत पडती रही है , पर इस वर्ष की दिल्‍ली यात्रा बहुत खास रही । पूरे मई महीने दिल्‍ली में व्‍यतीत करने के बाद कल ही बोकारो लौटना हुआ है , इस दिल्‍ली यात्रा में बहुत रंग आते जाते
 
संगीता पुरी
पसंद करें
4
नापसंद करें

ज्योतिष: अद्वैत का विज्ञान (ओशो) ---- आपके लिए बहुत सारे लिंक

बहुत ही विवादास्‍पद विषय है ज्‍योतिष .. कुछ इसे विज्ञान मानते हैं .. तो कुछ धर्म से जोडकर देखते हैं .. कुछ अविकसित मानते हैं .. तो कुछ पूरा अंधविश्‍वास ही .. ओशों के शब्‍दों में जानिए .. आखिर क्‍या है ज्‍योतिष ??ज्‍योतिष के बारे में लिखे गए ओशो के आलेख
 
संगीता पुरी
पसंद करें
5
नापसंद करें

अब गर्मी से राहत की उम्‍मीद है !!

एक महीने पूर्व मौसम के बारे में लिखे गए मेरे आलेख के अनुसार भले ही 6 और 7 अप्रैल को बारिश के नहीं होने से मौसम ठंडा नहीं हो सका था , पर उस आलेख में मैने लिखा था कि 29 अप्रैल तक गर्मी अपनी चरम सीमा पर होगी , पर उसके बाद क्रमश: सुधार आएगा।
 
संगीता पुरी
पसंद करें
4
नापसंद करें

कोई भी संस्‍था कर सकती है .. ज्‍योतिष की वैज्ञानिकता के दूध का दूध पानी का पानी !!

27 फरवरी का समाचार पत्रों और ब्‍लॉग जगत में अदालत ब्‍लॉग के माध्‍यम से जानकारी मिली थी कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने 24 फरवरी को केंद्रीय गृह मंत्रालय, महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि विभाग और राज्य के डीजीपी से एक जनहित याचिका पर जवाब मांगे हैं। इस याचिका में
 
संगीता पुरी
पसंद करें
6
नापसंद करें

हमारी प्रार्थना का वास्‍तविक स्‍वरूप क्‍या हो ??

जब भी हमें किसी ऐसे वस्‍तु की आवश्‍यकता होती है , जिसे हम खुद नहीं प्राप्‍त कर सकते , तो इसके लिए समर्थ व्‍यक्ति से निवेदन करते हैं। निवेदन किए जाते वक्‍त हमें अपने मन का अहंकार समाप्‍त करना पडता है । यदि हम ऐसा न करें और अपने अहंकार में बने रहें तो
 
संगीता पुरी
पसंद करें
4
नापसंद करें

2010 में किन तिथियों को प्राकृतिक या मानवकृत दुर्घटनाओं या अन्‍य आपदाओं की संभावनाएं बनेंगी ??

काफी अर्से से पृथ्‍वी पर आनेवाले भूकम्‍प , तूफान , ज्‍वालामुखी तथा  अन्‍य प्राकृतिक आपदाओं के वक्‍त आसमान में ग्रहों की स्थिति का अध्‍ययन करने के बाद कुछ खुलासे तो हुए , पर पृथ्‍वी पर आक्षांस और देशांतर रेखा के निर्धारण में अभी भी कठिनाई आ ही रही है
 
संगीता पुरी
पसंद करें
4
नापसंद करें

ग्रहों का प्रभाव सिर्फ मुझे ही नजर क्‍यूं आता है ??

21 अप्रैल के आलेख में  मैने आनेवाले दो दिनों के लिए लिखा था कि आप संसार के किसी भी शहर में क्‍यूं न हो, उस शहर में सूर्योदय के समय में 5 घंटे 25 मिनट जोड दें। वहां से लेकर सवा दो घंटे तक आप काफी महत्‍वपूर्ण संदर्भों में उलझे रह सकते
 
संगीता पुरी
पसंद करें
4
नापसंद करें

पूरे दिनभर का 24 घंटा एक सा नहीं हुआ करता है !!

दो चार दिन पूर्व मैने अपने आलेख में लिखा था कि ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ के अनुसार बहुत दूर की घटनाओं के आकलन में दो चार महीनों , कुछ दूर की घटनाओं के आकलन में दो चार दिनों और प्रतिदिन की घटनाओं के आकलन में पंद्रह से बीस मिनट की गल्‍ती ही होनी चाहिए। कुछ
 
संगीता पुरी
पसंद करें
3
नापसंद करें

आखिर 'वेद अमृत' जैसी स्‍वच्‍छ धार्मिक पत्रिकाएं क्‍यूं नहीं चलती हैं ??

वर्ष 2002 तक या उसके बाद भी मैं कुछ घरेलू पत्रिकाएं पढा करती थी। दिसंबर माह में एक पत्रिका 'मेरी सहेली' के  साथ 'वेद अमृत' नाम की पत्रिका का लघु संस्‍करण प्राप्‍त किया था। उस छोटे संस्‍करण में नाम मात्र के कई लेख और कहानियां होने के बावजूद मैं इस
 
संगीता पुरी
पसंद करें
4
नापसंद करें

पश्चिम बंगाल, बिहार और असम में आए चक्रवाती तूफान की भारी तबाही को मेरी भविष्‍यवाणी के साथ नहीं जोडा जा सकता !!

29 मार्च को गर्मी को बढते हुए देख्‍ा मैने 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के मौसम के सिद्धांतों के आधार पर आनेवाले मौसम का आकलन करते हुए अपने पोस्‍ट में लिखा था कि 29 मार्च से 6 अप्रैल तक पारा उत्‍तरोत्‍तर चढेगा पर 7 अप्रैल को खास ग्रह योग के कारण बारिश के आसार
 
संगीता पुरी
पसंद करें
5
नापसंद करें

इतने बडे ज्‍योतिषीय योग में भी बारिश नहीं होने का कारण मैं बढते हुए प्राकृतिक असंतुलन को मानती हूं !!

भारतवर्ष में अधिक गर्मी के दिनों में भी समय समय पर बारिश होती है , पर तबतक तापमान में कमी नहीं आती , जबतक बारिश का कोई बडा योग उपस्थित नहीं होता है। 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के अनुसार भारतवर्ष में गर्मी के दिनों में सामान्‍यतया दो बार ग्रहों की ऐसी खास
 
संगीता पुरी
पसंद करें
4
नापसंद करें

कुछ बच्‍चे 300 से ऊपर नंबर लाएंगे .. कुछ बच्‍चों के नंबर निगेटिव भी होंगे .. आखिर क्‍यूं ??

इधर काफी व्‍यस्‍तता चल रही है , एक खास काम में मेरा ध्‍यान संकेन्‍द्रण बना हुआ है , ऐसे में लिख पाना तो संभव नहीं ,  इसके बावजूद ब्‍लॉग जगत से दूरी नहीं बन पाती। दो चार घंटों में एक बार एग्रीगेटरों को खोलकर अपने रूचि के विषयों पर निगाह डाल
 
संगीता पुरी
पसंद करें
6
नापसंद करें

आसमान में बुध ग्रह की एक खास चाल .. क्‍या आप भी इससे प्रभावित हो रहे हैं ??

29 मार्च से ही आसमान में मेष राशि में बुध ग्रह कर काफी समय तक रहना पृथ्‍वी के जड चेतन पर बहुत प्रभाव डालने में समर्थ है। चूंकि ज्‍योतिष में बुध ग्रह बुद्धि , ज्ञान का ग्रह माना जाता है , इसलिए यह विद्यार्थियों और बौद्धिक श्रम करनेवाले लोगों को अधिक
 
संगीता पुरी
पसंद करें
6
नापसंद करें

एक महीने में एक भी भविष्‍यवाणी सही नहीं हुई .. आज से ज्‍योतिष का अध्‍ययन बंद !!

पूरे पच्‍चीस वर्षों का अध्‍ययन व्‍यर्थ होने से मेरा सारा जीवन  बर्वाद हो गया , न जाने कितने दिनों से कितने लोगों ने मुझे ज्‍योतिष का अध्‍ययन करने से मना किया था , पर मैने एक न सुनी और ज्‍योतिष को विज्ञान के रूप में साबित करने का दावा करती रही। पर आज
 
संगीता पुरी
पसंद करें
4
नापसंद करें

दिन ब दिन पारा चढता ही जा रहा है .. अप्रैल , मई और जून में मौसम का क्‍या हाल रहेगा ??

एक सप्‍ताह से इस ब्‍लॉग को अपडेट नहीं कर पा रही थी , कल फुर्सत निकालकर दूसरे जगहों के लिए चार चार पोस्‍ट लिखा , पर इसके बावजूद अपने ब्‍लॉग को अपडेट न कर सकी। बढती हुई गर्मी से परेशान होकर राहत की उम्‍मीद में पंचांग में मौजूद ग्रहों की स्थिति को देखते हुए
 
संगीता पुरी
पसंद करें
5
नापसंद करें

विज्ञान का वास्‍तविक तौर पर प्रचार प्रसार काफी मुश्किल लगता है !!

भारतवर्ष में फैले अंधविश्‍वास को देखते हुए बहुत सारे लोगों , बहुत सारी संस्‍थाओं का व्‍यक्तिगत प्रयास अंधविश्‍वास को दूर करते हुए विज्ञान का प्रचार प्रसार करना हो गया है। मैं उनके इस प्रयास की सराहना करती हूं , पर जन जन तक विज्ञान का प्रचार प्रसार कर
 
संगीता पुरी
पसंद करें
4
नापसंद करें

क्‍या कहता है आपकी जन्‍मकुंडली का केमद्रुम योग ??

काफी दिनों तक ज्‍योतिष के अध्‍ययन और मनन में रत होने के बाद भी सटीक भविष्‍यवाणियां करने में विफल रहे कुछ लोगों से अक्‍सर हमारी मुलाकात हो जाती है , जो अपनी तरह हमें भी ज्‍योतिष का अध्‍ययन छोडने की सलाह देते हैं। उनका मानना है कि ज्‍योतिष के परीक्षित माने
 
संगीता पुरी
पसंद करें
4
नापसंद करें

लगभग सभी व्‍यक्ति को पूर्णिमा के दिन तैयार किए गए चंद्रमा के छल्‍ले को पहनना चाहिए !!

हमलोग जब भी ग्रहों के प्रभाव और ज्‍योतिष की चर्चा करते हैं , आम लोगों की जिज्ञासा किन्‍ही अन्‍य बातों में न होकर ग्रहों के दुष्‍प्रभाव को दूर करने के उपायों को जानने की ही होती है। इस विषय पर हमने 'क्‍या भवितब्‍यता टाली जा सकती है ?' शीर्षक से 11 आलेखों
 
संगीता पुरी
पसंद करें
4
नापसंद करें

आप सबों को नए विक्रमी संवत् की ढेर सारी शुभकामनाएं !!

पिछले कई दिनो से मैं इस ब्‍लॉग को अपडेट नहीं कर पायी , गत्‍यात्‍मक चिंतन पर मेरा चिंतन जरूर चल रहा था। उसमें लिखे पोस्‍ट पर हमारे विवाह की वर्षगांठ पर आप सबों की ढेर सारी शुभकामनाएं मिली , जिसके लिए मैं आप सबों का आभार व्‍यक्‍त करती हूं। उम्‍मीद करती हूं
 
संगीता पुरी
पसंद करें
1
नापसंद करें

11 मार्च से युवा वर्ग पर पड रही मंगल ग्रह की बाधा दूर होने वाली है !!

अक्‍तूबर से ही गोचर में खास स्थिति को देखते हुए मैने मंगल ग्रह के बारे में लेखों की शृंखला प्रकाशित करनी शुरू की थी । 29 अक्‍तूबर 2009 को पकाशित किए गए आलेख में मैने जानकारी दी थी कि आनेवाले दो महीने महत्‍वाकांक्षी युवकों के लिए बडे ही खास रहेंगे। पूरे
 
संगीता पुरी
पसंद करें
5
नापसंद करें

मेरे ब्‍लॉग पर पाठकों की संख्‍या 50,000 पहुंची .. मेरे ब्‍लॉगर प्रोफाइल को भी 20,000 लोगों ने विजिट किया !!

अगस्‍त 2007 में मुझे जब हिंदी में ब्‍लागिंग करने के बारे में जानकारी मिली थी , तो मैने इस दिशा में कदम बढा ही दिया था। जीमेल में मेरा अकाउंट नहीं था , इंटरनेट के बारे में आधी अधूरी जानकारी थी , फिर भी वर्डप्रेस पर नियमित रूप से लिखना तो शुरू कर दिया था ,
 
संगीता पुरी
पसंद करें
0
नापसंद करें

मदद करने वाले हाथ प्रार्थना करने वाले होंठो से अच्छे होते हैं .. आप 1098 (केवल भारत में )पर फ़ोन करें !!

रोजाना जो खाना खाते हो वो पसंद नहीं आता ? उकता गये ? ............ ... ........... .....थोड़ा पिज्जा कैसा रहेगा ? नहीं ??? ओके ......... पास्ता ? नहीं ?? .. इसके बारे में क्या सोचते हैं ? आज ये खाने का भी मन नहीं ? ... ओके .. क्या इस मेक्सिकन खाने को
 
संगीता पुरी
पसंद करें
1
नापसंद करें

आज आप साहित्‍य शिल्‍पी में प्रकाशित मेरी नई कहानी 'कलियुग का पागल बाबा' पढें !!

आज मेरी एक कहानी 'कलियुग का पागल बाबा' साहित्‍य शिल्‍पी में प्रकाशित की गयी है। इस कहानी में एक ज्ञानी पुरूष को वर्तमान परिस्थितियों से जूझते हुए दिखाया गया है। इसको पढकर डॉ अरविंद मिश्रा जी ने मुझे मेल किया .... आपकी कहनी साहित्य शिल्पी पर पढी - मेरा
 
संगीता पुरी
Mar 06 2010 08:53 AM
पसंद करें
1
नापसंद करें

गत्यात्मक ज्योतिष का संक्षिप्त परिचय और इसके जनक के बारे में जानकारी

कई दिन पूर्व के अपने पोस्‍ट में मैं यह स्‍पष्‍ट कर चुकी हूं कि मैने अपने ब्‍लॉग को हल्‍का बनाने के लिए कई विजेट्स हटा दिए हैं। इसी क्रम में मैने गत्यात्मक ज्योतिष का संक्षिप्त परिचय और इसके जनक के बारे में जानकारी देनेवाले विजेट्स को भी हटा दिया था,
 
संगीता पुरी
Mar 03 2010 03:20 AM
पसंद करें
1
नापसंद करें

होली के ग्रह ब्‍लॉगरों पर उल्‍टा पुल्‍टा प्रभाव छोडेंगे ... बुरा न मानो होली है !!

होली का त्‍यौहार शक संवत के नए वर्ष के शुरू होने की खुशी में मनाया जाता है, इसलिए इस दिन के ग्रह नक्षत्रों का वर्षभर प्रभाव रहना स्‍वाभाविक है। इस वर्ष ग्रह नक्षत्र बिल्‍कुल उल्‍टी पुल्‍टी स्थिति में हैं , इसलिए सभी लोगों का यह वर्ष बिल्‍‍कुल विपरीत
 
संगीता पुरी
Feb 28 2010 08:20 PM
पसंद करें
1
नापसंद करें

ललित शर्मा जी का आभार .. आप सबों को भी एक जानकारी दे दूं !!

काफी दिनों से अपने ब्‍लॉग का टेम्‍प्‍लेट बदलकर इसे नया रूप देने की मेरी इच्‍छा हो रही थी। चार पांच दिन पूर्व मैने वह कर भी डाला, फिर गूगल को छान मारते हुए हेडर के लिए भी एक बढिया चित्र भी चुनकर लगा लिया। पर आजतक मैने इस बात पर जरा भी ध्‍यान नहीं दिया था
 
संगीता पुरी
Feb 26 2010 07:08 PM
पसंद करें
1
नापसंद करें

प्रवीण शाह जी को दिया गया मेरा जबाब ..... आप भी प्रयोग कर सकते हैं !!

मेरी पिछली पोस्‍ट में प्रवीण शाह जी की बहुत ही महत्‍वपूर्ण टिप्‍पणी मिली ,प्रवीण शाह ने कहा… आदरणीय संगीता जी, 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' की दृष्टि से मनुष्‍य के मन को विकास देने में जन्‍मकालीन चंद्रमा की भूमिका होती है। इसके कारण जन्‍मकुंडली में चंद्रमा की
 
संगीता पुरी
पसंद करें
1
नापसंद करें

मन , बुद्धि और आत्‍मा हमारी परिस्थितियों से कैसे प्रभावित होती है ??

अन्‍य पशुओं की तरह ही गर्भ में भ्रूण के रूप में ही प्रतिदिन हमारा शारीरिक विकास आरंभ हो जाता है और वह जन्‍म के बाद भी पूरे जीवन जारी रहता है, पर जन्‍म के कुछ ही दिनों बाद हमारे मन के विकास की बारी आती है। अपनी शारीरिक आवश्‍यकताओं के पूरी होने मात्र से
 
संगीता पुरी
Feb 22 2010 03:40 PM
पसंद करें
1
नापसंद करें

एक ही गोत्र या अल्‍ल में विवाह क्‍यूं वर्जित माना जाता है ??

वैवाहिक मामलों के कई प्रकार के प्रश्‍न जैसे जन्‍मपत्री मिलान, विवाह की रीति , सात फेरे, विवाह में गोत्र का महत्‍व आदि हमारे मस्तिष्‍क में घूमते रहते हैं , जिनका सटीक जबाब हमारे पास नहीं होता। ऐसे ही कुछ प्रश्‍न 'अखिल भारतीय खत्री महासभा' द्वारा पूछे गए
 
संगीता पुरी
पसंद करें
1
नापसंद करें

अन्‍य विज्ञानों से तालमेल बनाकर ही ज्‍योतिष को अधिक उपयोगी बनाया जा सकता है !!

प्राचीन काल के आदि मानव से आज के विकसित मनुष्‍य बनने तक की इस यात्रा में मनुष्‍य के पास अनुभवों के रूप में क्रमश: जो ज्ञान का भंडार जमा हुआ , वो इतनी पुस्‍तकों , इतने पुस्‍तकालयों और वेबसाइट के इतने पन्‍नों में भी नहीं सिमट पा रहा है। एकमात्र प्रकृति में
 
संगीता पुरी
Feb 18 2010 05:44 PM
पसंद करें
1
नापसंद करें

क्‍या इस तरह के ग्राफों के बाद भी ज्‍योतिष की वैज्ञानिकता पर प्रश्‍नचिन्‍ह लगाया जा सकता है ??

गिरीश बिल्‍लौरे 'मुकुल' जी द्वारा लिए गए मेरे इंटरव्‍यू वाले पोस्‍ट में दो प्रकार की ग्राफ की भी चर्चा की गयी है , जो उनके जन्‍म विवरण के आधार पर 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के सिद्धांतों पर आधारित मेरे स्‍वयं के द्वारा विकसित किए गए सॉफ्टवेयर से निकाला गया
 
संगीता पुरी
Feb 15 2010 04:47 PM