3
बचपन
याद बहुत आती बचपन की।जब करीब पहुँचा पचपन की।।बरगद, पीपल, छोटा पाखर।जहाँ बैठकर सीखा आखर।।संभव न था बिजली मिलना।बहुत सुखद पत्तों का हिलना।।नहीं बेंच था फर्श भी कच्चा।खुशी खुशी पढ़ता था बच्चा।।खेल कूद और रगड़म रगड़ा।प्यारा जो था उसी से झगड़ा।।बोझ नहीं था सर
Jun 17 2010 07:25 AM


Shuffle








