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कथा सरित सागर

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08 Mar 2010
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'ब' ,'क' और विनयना - पद्मा राय

हमेशा की तरह नाक की सीध में चलती चली जा रही थी कि रिसेप्शन पर वीरा दी दिखायी दीं ।पंकज से किसी टॉपिक पर बात कर रहीं थीं । उन्हें वहां देखते ही स्कूल की पत्रिका की याद आ गयी ।एक दिन पहले ही मिली थी ।उसमें वीरा दी का एक आर्टिकल पढने को मिला । कमाल का सेन्स
Mar 07 2010 04:46 PM
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वर्कशॉप

यहीं पहुंचना था कि किसी और जगह ? तय करना कठिन था लेकिन दुविधा ज्यादा देर तक नहीं रही । तेज चाल से चलती एक महिला जिसने हरे रंग का शलवार कुर्ता पहन रखा था , तेजी से हमारी तरफ लपकती हुयी दिखाई दी ।स्टाफ की ही हो शायद लेकिन बहुत कोशिश करने पर भी मैं याद नहीं
Feb 27 2010 09:36 PM
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अंतिम इच्छा-

"बडी मुश्किल से बुआ जी की आँख लगी है , लगता है आज कुछ कुछ ज्यादा तकलीफ में हैं." रसोई के रोशनदान से छनकर आती हुयी आवाज बडकी दुलहिन की थी. वे सुन रहीं थीं. आधी नींद में और आधी जगी हुयी अपनी आँखें बन्द करके बुआ जी लेटीं थीं. किसी चलचित्र की तरह उनका पूरा
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अंतिम इच्छा

बडी मुश्किल से बुआ जी की आँख लगी है , लगता है आज कुछ ज्यादा तकलीफ में हैं." रसोई के रोशनदान से छनकर आती हुयी आवाज बडकी दुलहिन की थी. वे सुन रहीं थीं. आधी नींद में और आधी जगी हुयी अपनी आँखें बन्द करके बुआ जी लेटीं थीं. किसी चलचित्र की तरह उनका पूरा जी
Dec 29 2009 11:59 AM
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बहादुरी ( लघु कथा)

दस दिनों से शहर, कर्फ्यू से पस्त हिम्मत था. इतंने दिनों के बाद आज पहली बार कर्फ्यू में दो घंटे की ढील दी गयी है. कोतवाल साब की आंखें मूंदी जा रहीं थीं .दस दिनों से वे ठीक से सो नहीं पाये थे, आज थोडी देर के लिये जरा पीठ सीधी करने की इच्छा थी लेकिन अब
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शहीद

वहाँ हॉल में जितने लोग बैठे थे - लगभग सभी का सिर नीचे झुका हुआ था. आँखें- हाथ में थामें तम्बोला के टिकट पर अटकीं थीं. एक हाथ में तम्बोला का टिकट और दूसरे में पेंसिल सम्भाले , उनका पूरा ध्यान बोले जाने वाले नम्बरों पर ही था. फिर से एक नम्बर पुकारा गया
Dec 29 2009 11:59 AM
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'ब', 'क' और विनयना

हमेशा की तरह नाक की सीध में चलती जा रही थी कि रिसेप्शन पर नीरा दी दिखाई दीं . पंकज से बात कर रहीं थीं! उन्हें वहाँ देखकर स्कूल की पत्रिका की याद आई. एक दिन पहले ही मिली थी, उसमें वीरा दी का आर्टिकल पढने को मिला. कमाल का सेंस ऑफ ह्यूमर है इनका . आज उन
Dec 29 2009 11:59 AM
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विनयना

स्कूल नजदीक आ चुका है. जाने कब के नौ बज चुकें हैं. कितनी भी जल्दी कर लो किंतु रोज सवा नौ-साढे नौ तो हो ही जातें हैं. भागते हुये गेट से अन्दर घुसी . मुझे जिस क्लास मे पहुँचना है, वह क्लास रूम अन्दर की तरफ- आंगन के दूसरे छोर में है. हमेशा की तरह रास्ते
Dec 29 2009 11:59 AM
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अंतिम इच्छा

बडी मुश्किल से बुआ जी की आँख लगी है , लगता है आज कुछ ज्यादा तकलीफ में हैं." रसोई के रोशनदान से छनकर आती हुयी आवाज बडकी दुलहिन की थी. वे सुन रहीं थीं. आधी नींद में और आधी जगी हुयी अपनी आँखें बन्द करके बुआ जी लेटीं थीं. किसी चलचित्र की तरह उनका पूरा जी
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हमेशा नम्बर वन पर रहने वाली रेखा इस बार भी अव्वल रही

सात सितम्बर को अचानक बहुत दिनों बाद रेखा की याद आयी. उसका फोन नम्बर मेरे पास नहीं था. मैंने सोचा इंटरनेट पर शायद मिल जाय. इसलिये मैं गूगल सर्च इंजिन पर उसे तलाशने पहुँची. मुझे रेखा का ई मेल आई डी मिल भी गया. मैने उसे एक ई मेल किया भी और फिर शुरू हुआ
Sep 23 2008 10:51 AM
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हाशिमपुरा/ विभूति नारायण राय (आई•पी•एस•)

जीवन के कुछ अनुभव ऐसे होतें हैं जो जिन्दगी भर आपका पीछा नहीं छोडतें . एक दु:स्वप्न की तरह वे हमेशा आपके साथ चलतें हैं और कई बार तो कर्ज की तरह आपके सर पर सवार रहतें हैं. हाशिमपुरा भी मेरे लिये कुछ ऐसा ही अनुभव है. 22/23 मई सन 1987 की आधी रात दिल्ली ग