"कुश की कलम"

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07 Jun 2010
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बादल ऑन ड्यूटी हो.. और चाय की तलब..!

बादल ऑन ड्यूटी हो.. और चाय की तलब..! ए ऊपरवाले!  क्या खालिस ज़िंदगी दी है तूने....!  इस से बढ़िया कॉम्बिनेशन तो हो ही नही सकता.. 
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स्पिट...फार्ट... एंड स्टार्ट ब्लोगिंग

स्पिट...फार्ट... एंड स्टार्ट ब्लोगिंग
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लव स्टोरी... विद आउट लव!

लव के बिना भी कोई लव स्टोरी होती है..?  अजी होती है.. अधिकतर स्टोरियों में से लव लापता ही होता है..
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खट्टी मिश्री जैसी लाईफ...

हवा और तेज़ हो रही है.. पन्ने उड़ाने की चाल है.. मैंने पेपरवेट रख दिया है.. तुम्हारे ख्याल कीमती है मेरे लिए.. मैं इन्हें वेस्ट नहीं जाने दूंगा.. बड़ी मुश्किल से मिलती है हंसी तुम्हारी.. इस बार आँखे खुली रखूँगा...मैंने अपने मोबाइल से कैच कर लिया है.. अब
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मुझे सोल्यूशन चाहिए.. कॉमरेड

इन लौटती आवाजों को पीछे धकेल धकेल कर मेरे माथे पर पसीने का पहाड़ उग गया है.. पर ये फिसल फिसल के मेरे कानो में आकर बैठ जाती है.. मैंने अपने दोनों हाथ अपने कानो पर रख दिए है.... पर ये स्थायी समाधान नहीं है.. मुझे सोल्यूशन चाहिए.. कॉमरेड, अपने दल वाले मुझे
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फटा पोस्टर निकला हीरो..

फटा पोस्टर निकला हीरो.. फिल्म हीरो हीरालाल का ये डायलोग आज भी हम तब इस्तेमाल कर लेते है जब कोई धमाकेदार एंट्री लेता है... फिल्मो के कुछ डाय्लोग्स कालजयी हो जाते है.. सबसे कॉमन में शोले का डायलोग आता है.. जब भी कही दो चार लोग चुप बैठे है तो कोई आकर कहेगा
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साईड 'ए' वाली ज़िन्दगी भी क्या जिंदगी थी....

रेट्रो मेमोरीज... उन गलियों की जहाँ छीले हुए घुटनों के साथ.. सड़क पर गावस्कर को पीछे छोड़ने की कसमे खायी थी .. आवारगी कंधो पर ढोते हुए पापा से नज़रे बचाते घरो में घुसने का नाम ही तब ज़िन्दगी हुआ करता था.. कैलंडर के पन्नो के साथ उम्र भी बदल चुकी है... पर
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साईड 'ए' वाली ज़िन्दगी भी क्या जिंदगी थी....

रेट्रो मेमोरीज...  उन गलियों की जहाँ छीले हुए घुटनों के साथ.. सड़क पर गावस्कर को पीछे छोड़ने की कसमे खायी थी .. आवारगी कंधो पर ढोते हुए पापा से नज़रे बचाते घरो में घुसने का नाम ही तब ज़िन्दगी हुआ करता था.. कैलंडर के पन्नो के साथ उम्र भी बदल चुकी
Jan 05 2010 05:16 PM
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बा'रा'त निकली है... तो दूर तलक जायेगी...

जिसने लाईफ में बारात अटैंड नहीं की है उसने कही बैठकर झक ही मारा है.. बारातो में झूमकर ठुमके लगाने का अपना ही एक अलग मज़ा है.. यु तो हर बारात में ही कुछ ना कुछ नया मिल जाता है... पर जो हर बारात में मिलता है वो बड़ा कमाल मिलता है.. और आप को यकीन नहीं होगा
Nov 17 2009 03:30 PM
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बा'रा'त निकली है... तो दूर तलक जायेगी...

जिसने लाईफ में बारात अटैंड नहीं की है उसने कही बैठकर झक ही मारा है.. बारातो में झूमकर ठुमके लगाने का अपना ही एक अलग मज़ा है.. यु तो हर बारात में ही कुछ ना कुछ नया मिल जाता है... पर जो हर बारात में मिलता है वो बड़ा कमाल मिलता है.. और आप को यकीन नहीं हो
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बेचारी महफ़िल.. कुछ ऐसी लुटी..

महफ़िल पूरे शबाब पर है.. गुमनाम से शायर अपनी ठोडी पर कलम टिकाये बैठे है.. उनका उल्टा पांव सीधे पांव पर पड़ा है.. और नज़र नामचीन लोगो पर.. नामचीन लोगो के शेरो पर गुस्ताख लोग तालिया पीट रहे है.. गुमनाम शायर ने पान की पीक थूकते हुए कहा है... नामुराद..! सब
Oct 14 2009 07:36 PM
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बेचारी महफ़िल.. कुछ ऐसी लुटी..

महफ़िल पूरे शबाब पर है.. गुमनाम से शायर अपनी ठोडी पर कलम टिकाये बैठे है.. उनका उल्टा पांव सीधे पांव पर पड़ा है.. और नज़र नामचीन लोगो पर.. नामचीन लोगो के शेरो पर गुस्ताख लोग तालिया पीट रहे है.. गुमनाम शायर ने पान की पीक थूकते हुए कहा है... नामुराद..! 
Oct 09 2009 05:22 PM
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हलकट दुनिया का सिपाही..

हलकट दुनिया के पिछवाडे पर लात देकर उसने गाडी स्टार्ट कर दी थी.. लोग बाग़ सड़क पर दौड़ रहे थे.. सारी गाड़िया फूटपाथ पर चल रही थी.. अचानक किसी ने बिलकुल पास आकर ब्रेक मारा.. @$%#$% कुछ निकला था उसके मुंह से.. शायद कोई गन्दी गाली रही होगी.. नहीं गन्दी नहीं,
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हलकट दुनिया का सिपाही..

हलकट दुनिया के पिछवाडे पर लात देकर उसने गाडी स्टार्ट कर दी थी.. लोग बाग़ सड़क पर दौड़ रहे थे.. सारी गाड़िया फूटपाथ पर चल रही थी.. अचानक किसी ने बिलकुल पास आकर ब्रेक मारा.. @$%#$% कुछ निकला था उसके मुंह से.. शायद कोई गन्दी गाली रही होगी.. नहीं गन्दी नहीं,
Aug 25 2009 01:47 PM
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लीम्बू सोडा..

आप हमेशा की तरह उन्हें मना रहे है.. उनको मानना ही है ये वो भी जानती है और आप भी.. फिर भी आप मना रहे है.. वो चाहती है बस थोडी देर और मनाया जाये.. आप कोशिश तो कर रहे है,, पर आपको प्रोमिस भी करना पड़ेगा.. कि आज के बाद आप उनके घरवालो के खिलाफ कुछ नहीं
Aug 06 2009 06:38 PM
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लीम्बू सोडा..

आप हमेशा की तरह उन्हें मना रहे है.. उनको मानना ही है ये वो भी जानती है और आप भी.. फिर भी आप मना रहे है.. वो चाहती है बस थोडी देर और मनाया जाये.. आप कोशिश तो कर रहे है,, पर आपको प्रोमिस भी करना पड़ेगा.. कि आज के बाद आप उनके घरवालो के खिलाफ कुछ नहीं
Aug 06 2009 06:38 PM
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सुगर क्यूब पिक्चर प्रजेंट्स "पापाजी"

सुगर क्यूब पिक्चर प्रजेंट्स "पापाजी"रद्दी पेप्पर..तपती दोपहरी में बाहर रद्दी वाले ने आवाज़ लगायी.. मैं उठ गया था.. मुझे लगा अखबार बहुत हो गए है इन्हें रद्दी में बेच दिया जाना चाहिए.. मैंने उस से पुछा अखबार का क्या भाव है.. वो बोला अंग्रेजी है या
Jul 30 2009 12:49 PM
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सुगर क्यूब पिक्चर प्रजेंट्स "पापाजी"

सुगर क्यूब पिक्चर प्रजेंट्स "पापाजी"रद्दी पेप्पर..तपती दोपहरी में बाहर रद्दी वाले ने आवाज़ लगायी.. मैं उठ गया था.. मुझे लगा अखबार बहुत हो गए है इन्हें रद्दी में बेच दिया जाना चाहिए.. मैंने उस से पुछा अखबार का क्या भाव है.. वो बोला अंग्रेजी है या
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हर बारिश की अपनी एक अलग कहानी है..

अभी बाहर बारिश हो रही है.. हाथ की बोर्ड पर टक टक कर रहे है.. नज़रे खिड़की पर जमा है.. और मन है कि सोच रहा है एक फर्लांग भर कर सीधा सड़क पर पहुँच जाए और बारिश में दो चार ठुमके लगा ले.. ये बारिशे भी कितनी जालिम होती है.. हमेशा तब आती है जब आप बहुत बिजी होते
Jul 24 2009 06:16 PM
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उछालता कोई मुझे तो..

उछालता कोई मुझे तोखिलखिला देती...मुस्कुराता कोई तोपलकें हिला देती..पूछता कोई जो कुछजवाब आँखें हिला कर देती..गोद मैं उठाता कोई तोउसे गीला कर देती..डाँटता कोई मुझे तोझटमूट् रोती..आती जब नींद तोमाँ की गोद में सोती..मम्मी की पहन साड़ीश्रृंगार मैं करती..आ जाए
Jul 24 2009 06:09 PM
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उछालता कोई मुझे तो..

उछालता कोई मुझे तोखिलखिला देती...मुस्कुराता कोई तोपलकें हिला देती..पूछता कोई जो कुछजवाब आँखें हिला कर देती..गोद मैं उठाता कोई तोउसे गीला कर देती..डाँटता कोई मुझे तोझटमूट् रोती..आती जब नींद तोमाँ की गोद में सोती..मम्मी की पहन साड़ीश्रृंगार मैं करती..आ
Jul 13 2009 11:19 AM
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आँठवा अखबार

देर रात मालिनी आईने के सामने बैठी रही.. आने वाले मेहमान को निहार रही है.. बगल वाले कमरे के दरवाजे के खटखटाने की आवाज़ से बेखबर.. जानती है कि थोडी देर बाद ये आवाज़ बंद हो जायेगी.. रात और लम्बी होती जा रही है.. मालिनी सोने की कोशिश कर रही है.. वो जानती है
Jul 09 2009 09:07 AM
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हर बारिश की अपनी एक अलग कहानी है..

अभी बाहर बारिश हो रही है.. हाथ की बोर्ड पर टक टक कर रहे है.. नज़रे खिड़की पर जमा है.. और मन है कि सोच रहा है एक फर्लांग भर कर सीधा सड़क पर पहुँच जाए और बारिश में दो चार ठुमके लगा ले.. ये बारिशे भी कितनी जालिम होती है.. हमेशा तब आती है जब आप बहुत बिजी
Jul 09 2009 09:00 AM
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आँठवा अखबार

देर रात मालिनी आईने के सामने बैठी रही.. आने वाले मेहमान को निहार रही है.. बगल वाले कमरे के दरवाजे के खटखटाने की आवाज़ से बेखबर.. जानती है कि थोडी देर बाद ये आवाज़ बंद हो जायेगी.. रात और लम्बी होती जा रही है.. मालिनी सोने की कोशिश कर रही है.. वो जानती
Jun 16 2009 06:31 PM
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जैसी बची है वैसी की वैसी बचा लो रे दुनिया..

मुसीबतों में भी लोगो को आशा की किरण नज़र आ जाती है.. देखिये ना हमारे घर के सामने करीब सौ सालो से जिन्दा एक महिला की मृत्यु हो गयी.. पता चला बीमार थी लेकिन मौत नहीं आ रही थी तो घर वालो ने उसे मुक्ति देने के लिए ४६ डिग्री टेम्प्रेचर में बिना पंखे वाले एक
Jun 03 2009 05:11 PM
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जैसी बची है वैसी की वैसी बचा लो रे दुनिया..

मुसीबतों में भी लोगो को आशा की किरण नज़र आ जाती है.. देखियेना हमारे घर के सामने करीब सौ सालो से जिन्दा एक महिला की मृत्युहो गयी.. पता चला बीमार थी लेकिन मौत नहीं आ रही थी तो घर वालोने उसे मुक्ति देने के लिए ४६ डिग्री टेम्प्रेचर में बिना पंखे वाले एक क
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फ़िर भी दिल है हिन्दुस्तानी..

जितनी शिद्दत से मैं मंदिर के सामने से गुज़रते वक़्त सजदा करता हूँ उसी भावना से किसी मस्जिद पर भी सर झुकाता हूँ.. गुरूद्वारे और चर्चो पर भी इसी तरह की एक प्रक्रिया स्वत: ही हो जाती है.. और यकीन मानिए इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है.. ये बिलकुल सहज है..दरअसल
May 27 2009 06:05 PM
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फ़िर भी दिल है हिन्दुस्तानी..

जितनी शिद्दत से मैं मंदिर के सामने से गुज़रते वक़्त सजदा करता हूँ उसी भावना से किसी मस्जिद पर भी सर झुकाता हूँ.. गुरूद्वारे और चर्चो पर भी इसी तरह की एक प्रक्रिया स्वत: ही हो जाती है.. और यकीन मानिए इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है.. ये बिलकुल सहज है..द
May 27 2009 05:57 PM
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इसीलिए तो कहता हूँ खुशनुमा हो जाओ यारो..

पचास की स्पीड से चलती मेरी गाडी के सामने से गुजरते ही एक साईकिल वाला ब्रेक लगाता है और रुक जाता है.. ये वो कन्डीशन है जब मुझे सबसे ज्यादा दुःख होता है.. मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि कोई साईकिल वाले को ब्रेक नहीं लगाना पड़े.. क्योंकि मैं तो एक्सीलरेटर दबा
May 11 2009 01:10 PM
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इसीलिए तो कहता हूँ खुशनुमा हो जाओ यारो..

पचास की स्पीड से चलती मेरी गाडी के सामने से गुजरते ही एक साईकिल वाला ब्रेक लगाता है और रुक जाता है.. ये वो कन्डीशन है जब मुझे सबसे ज्यादा दुःख होता है.. मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि कोई साईकिल वाले को ब्रेक नहीं लगाना पड़े.. क्योंकि मैं तो एक्सीलरेटर द
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क्रिकेटर ले लो क्रिकेटर ले लो

हमेफोन उठाते ही आवाज़ आई क्रिकेटर ले लो.. क्रिकेटर ले लो.. हम बौखलाए.. भाई ये क्या है.. नयी रिंगटोन. नया फोन.. और लोन के लिए तो फोन आते थे ये अब क्रिकेट का क्या चक्कर है. हमने पूछा भय्ये माज़रा क्या है.. क्या बक बक कर रहे हो..? वो बोला देखिए श्रीमान मैं
May 06 2009 12:42 PM
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क्रिकेटर ले लो क्रिकेटर ले लो

हमेफोन उठाते ही आवाज़ आई क्रिकेटर ले लो.. क्रिकेटर ले लो.. हम बौखलाए.. भाई ये क्या है.. नयी रिंगटोन. नया फोन.. और लोन के लिए तो फोन आते थे ये अब क्रिकेट का क्या चक्कर है. हमने पूछा भय्ये माज़रा क्या है.. क्या बक बक कर रहे हो..? वो बोला देखिए श्रीमान
May 06 2009 12:40 PM
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ज़िंदगी अब पुरानी जीन्स लगती है..

तारीख १३ अक्टूबर २००५ समय शाम ७ बजेमैंने पापा के कमरे में जाकर कहा जयपुर जा रहा हूँ.. अब वही जॉब करूँगा..पापा ने पुछा कब ?मैंने कहा अभी ७.३० बजे की ट्रेन है..मेरे दोस्त मुझे छोड़ने आये थे ट्रेन चल चुकी थी मैं अपने दोस्तों के साथ भाग रहा था प्लेटफोर्म
Apr 23 2009 01:36 PM
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ज़िंदगी अब पुरानी जीन्स लगती है..

तारीख १३ अक्टूबर २००५ समय शाम ७ बजेमैंने पापा के कमरे में जाकर कहा जयपुर जा रहा हूँ.. अब वही जॉब करूँगा..पापा ने पुछा कब ?मैंने कहा अभी ७.३० बजे की ट्रेन है..मेरे दोस्त मुझे छोड़ने आये थे ट्रेन चल चुकी थी मैं अपने दोस्तों के साथ भाग रहा था प्लेटफोर्म
Apr 23 2009 12:57 PM
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लाईफ की छुपम छुपाई..

जिंदगी कब लाईफ बन गयी पता ही नहीं चला.. अभी थोडी देर पहले ही तो बचपन मुझे जवानी के घर छोड़ने आया था.. तब जो जीते थे, जिंदगी तो वही थी.. अब जो है उसे तो लोग बाग़ लाईफ कहते है.. पर फर्क दोनों में कुछ भी नहीं.. पहले हम इससे खेलते थे अब ये हमसे खेलती है.
Apr 14 2009 02:46 PM
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लाईफ की छुपम छुपाई..

जिंदगी कब लाईफ बन गयी पता ही नहीं चला.. अभी थोडी देर पहले ही तो बचपन मुझे जवानी के घर छोड़ने आया था.. तब जो जीते थे, जिंदगी तो वही थी.. अब जो है उसे तो लोग बाग़ लाईफ कहते है.. पर फर्क दोनों में कुछ भी नहीं.. पहले हम इससे खेलते थे अब ये हमसे खेलती है..
Apr 14 2009 02:45 PM
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दस पैतालीस की आखिरी मेट्रो

दस पैतालीस की आखिरी मेट्रो थी.. द्वारका से इन्द्रप्रस्थ की तरफ जा रहा था.. कैब आई नहीं थी तो मेट्रो ही लास्ट आप्शन था.. मैं ट्रेन में जाकर बैठ गया.. हाथ में राहेजा की किताब 'एनिथिंग फॉर यु मेम थी.' मैं किताब पढ़ रहा था.. जनकपुरी स्टेशन आया ट्रेन रुकी और
Apr 07 2009 06:47 PM
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"कुश की कलम"

दस पैतालीस की आखिरी मेट्रो थी.. द्वारका से इन्द्रप्रस्थ की तरफ जा रहा था.. कैब आई नहीं थी तो मेट्रो ही लास्ट आप्शन था.. मैं ट्रेन में जाकर बैठ गया.. हाथ में राहेजा की किताब 'एनिथिंग फॉर यु मेम थी.' मैं किताब पढ़ रहा था.. जनकपुरी स्टेशन आया ट्रेन रुकी
Apr 07 2009 06:39 PM
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ब्लोगर मिस्ट्री ऑफ़ प्राचीन काल !! हेव डेयर टू सॉल्व इट ?

यह एक फिल्म नहीं मगर इसमें कुछ पात्र तो है क्या करे अगर वो काल्पनिक नहीं है तो.. नाम न ले.. इशारों में समझा दे.. उस दौर में चले जाये जब लोगो के पास भाषा नहीं थी इशारों इशारों में बाते होती थी.. नहीं मैं किसी प्रेमी युगल के बारे में बात नहीं कर रहा उनसे
Apr 04 2009 03:54 PM
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ब्लोगर मिस्ट्री ऑफ़ प्राचीन काल !! हेव डेयर टू सॉल्व इट ?

अबूझनदास की प्राचीन कालीन पहेलियों के भित्ति चित्र मिले है हमें.. कुछ कुछ समझने की कोशिश की पर समझ में नहीं आ रहा है सब कुछ उथल पुथल .. समझने बैठो तो चक्कर खाकर नीचे गिर जाओ.. पता नहीं किस युग की है.. लेकिन सुलझेगी इसी युग में.. ये इस के पीछे की तरफल