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पुण्य प्रसून बाजपेयी

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14 Jun 2010
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महाभारत की

आतंक पैदा कर पूछने का अधिकार मीडिया को भी नहीं है। यह फिल्मी डायलॉग है। बिहार के चुनावी जंग में हाथ आजमा चुके प्रकाश झा की इस नयी "राजनीति" ने सियायत और मीडिया को लेकर कई सवाल खड़े किये हैं। सियासत अगर चरम पर पहुंच जाये तो हर रिश्ता सौदेबाजी में बदल जाता
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गांधी के शब्दों से गांधी को उजाड़ने की खता

“यू मस्ट बी द चेंज यू वांट टू बी "। महात्मा गांधी ने यह शब्द कब कहे पता नहीं लेकिन वर्धा में बापू कुटी जाने के रास्ते में बड़े बड़े अक्षरों में लिखे इन शब्दो ने बरबस शरीर में एक सिहरन जरुर दौड़ा दी कि कहीं बापू के लोग अब खड़े तो नहीं हो रहे। लेकिन कहीं
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Jun 11 2010 01:26 PM
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मनमोहन के फंदे में मीडिया

मीडिया के पेड न्यूज की कहानी सत्ता के लिये लॉबिंग और कॉरपोरेट घरानों के मुनाफे के लिये बिचौलिये की भूमिका तक पहुंचेगी, यह किसने सोचा होगा। खासकर उस दौर में जब पूंजी ही एक नयी सत्ता बनकर लोकतांत्रिक सत्ता को चुनौती दे रही हो। वैसे मीडिया का राजनीति से
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तपती जमीन तपते सवाल

पेड़ों को रखे आस-पास, तभी रहेगी मानसून की आस। दिल्ली से रानीखेत की तरफ जाते पहाड़ के गांवों की दीवार पर लिखी इन पंक्तियों ने कई बार ध्यान खींचा। हर बार जेहन में यही सवाल उठा कि जो इलाके पेड़-जंगलों से घिरे हैं, जहां पहाड़ों की पूरी कतार है। वहां इन
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'काइट्स' यानी पैसा नहीं प्यार चाहिए !

पतंग को उड़ते हुये देखना। कटी पतंग को लूटना। और लूटी हुई पतंग और मांझे के साथ पतंग उड़ाने का सुकून मैंने बचपन में खूब लूटा। इसलिये फिल्म 'काइट्स' शुरु होते ही स्क्रीन पर जैसे ही पतंग उड़ती हुयी नज़र आयी, वैसे ही पतंगों को लेकर मेरे अपने अतीत के सपने
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....अब सवाल मनमोहन के आगे का

पहली बार प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपनी सरकार का रिपोर्ट कार्ड तैयार कर रहे हैं। बीते छह साल में मनमोहन सिंह को कभी जरुरत पड़ी नहीं कि वह अपनी सरकार का रिपोर्ट-कार्ड दें। अगर बीते पांच साल को देखें या यूपीए-1 के दौरान मनमोहन सिंह के रिपोर्ट कार्ड को देखें
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शहीद और मौत का फर्क

जैसे 76 सीआरपीएफ जवान माओवादियों के बारुदी सुरंग की चपेट में आकर सवा महीने पहले शहीद हुये थे, ठीक वैसे ही सीआरपीएफ के 8 जवान सवा महीने बाद 8 मई को मारे गये। सवा महीने पहले देश के गृहमंत्री पी चिंदबरम खुद छत्तीसगढ़ के दांत्तेवाड़ा गये थे। लेकिन सवा महीने
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कौन मिटाएगा 26/11 का तिलक?

ताज होटल के क्रिस्टल रूम में 26/11 पर फैसला आने के 36 घंटे पहले दो मिनट का मौन रखने के लिए जैसे ही सारे खड़े हुए, बगल में खड़े ताज के ही एक अधिकारी ने जानकारी दी कि यह सवा सौवीं श्रद्धांजलि है। मौन टूटा तो मैने पूछा कि क्या ताज के हर समारोह में यह होता
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कॉरपोरेट के आगे प्रधानमंत्री भी बेबस

ठीक एक साल पहले प्रधानमंत्री अपने नये मंत्रिमंडल में जिन दो सांसदों को शामिल नहीं करना चाहते थे, संयोग से दोनो ही डीएमके के सांसद थे और दोनो पर ही भ्रष्टाचार के आरोप थे। असल में 2009 के आमचुनाव में जिस तरह कांग्रेस का आंकडा 200 पार कर गया और यूपीए गठबंधन
May 03 2010 12:39 PM
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लाठी खालि, गुली खालि...

लाठी खालि,गुली खालि/ तेबू नाहि सोराज पालि / घरे नाथे अन किरे / कैसे बांची प्राण... है यह जिन्दगी का संघर्ष लेकिन अंधेरे में गूंजती महिलाओं की यह आवाज एकदम छोटे बच्चों के लिये लोरी का काम करती है और धीरे धीरे महिलायें जब आश्वस्त हो जाती हैं कि बच्चे सो
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..क्योंकि न्यूज चैनलों के लिए नक्सली ब्रांड नहीं हैं

जितने कैमरे, जितनी ओबी वैन, जितने रिपोर्टर और जितना वक्त सानिया-शोएब निकाह को राष्ट्रीय न्यूज चैनलों में दिया गया, उसका दसवां हिस्सा भी दंतेवाडा में हुये नक्सली हमले को नहीं दिया गया। 6 अप्रैल की सुबह हुये हमले की खबर ब्रेक होने के 48 घंटे के दौर में भी
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माओवादियों की समानांतर सरकार

छत्तीसगढ़ के दांतेवाड़ा में नक्सलियों ने 73 पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया तो पहली बार ऑपरेशन ग्रीन हंट को करारा झटका लगा। लगा कि रेड कॉरीडोर में रेड हंट ही चलता है। इस घटना के बीच आपको एक गांव ले चल रहे हैं, जिसके हालात देखकर अंदाजा लग सकता है कि शायद
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सरकार की पार्टनर मीडिया?

बॉलीवुड फिल्म ‘रण’ से लेकर ‘माय नेम इज खान’ और ‘गजनी’ से लेकर ‘थ्री इंडियट्स’ । कोई भी चर्चित फिल्म, जो बीते तीन-चार वर्षो में लोकप्रिय और हिट रही हो या फिर आने वाली हो, वो बिना मीडिया पार्टनर के आपको नजर नहीं आयेगी। पार्टनर बनने को लेकर होड़ भी कुछ इस
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ये गड़करी की टीम नहीं, भागवत की हार है

उनसठ साल पहले श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने नेहरु मंत्रिमंडल से त्यागपत्र देकर एक राष्ट्रवादी राजनीतिक दल की स्थापना के लिये तत्कालीन सरसंघचालक गुरु गोलवरकर से कार्यकर्ता मांगे थे। तब आरएसएस ने उन कार्यकर्ताओं को श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ जाने की इजाजत दे
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एक अदद लोहिया की तलाश.......

यह सोचना वाकई मुश्किल होगा कि राम मनोहर लोहिया की कोई लीक अब के दौर की राजनीति में बची है। मुश्किल इसलिये क्योकि संसदीय व्यवस्था में सत्ता की राजनीति से जो भी समाजवादी- लोहियावादी दो-दो हाथ कर रहे हैं, वह लोहिया को अपनी राजनीतिक जरुरतों के मुताबिक
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नक्सलबाड़ी के वसंत (कानू सान्याल) की खुदकुशी

1970 में जब कानू सन्याल को गिरफ्तार किया गया तो वह फौजी पोशाक पहने हुये थे। और चालीस साल बाद नक्सलबाडी के हाथीघिसा गांव के झोपडीनुमा घर में जब उनका शव मिला तो शरीर पर सिर्फ लुंगी और गंजी थी। चालीस साल के इस दौर में कानू सन्याल वामपंथी धारा में
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खबरदार करते न्यूज चैनलों में खबर कहां है?

संसद के अंदर-बाहर महिला आरक्षण बिल को लेकर हंगामा था। तमाम न्यूज चैनलों में बहस चल रही थी कि आरक्षण बिल पास होगा या नहीं। रिपोर्टरों से लेकर विशेषज्ञ इस मुद्दे पर जूझ रहे थे। अचानक हिन्दी के तीन टॉपमोस्ट राष्ट्रीय न्यूज चैनलो के पर्दैं पर ब्रेकिंग न्यूज
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देश को संसद नहीं पूंजी चलायेगी

2004 में चंदौली में माओवादियो ने विस्फोट से एक ट्रक को उड़ा दिया था । उस वक्त उत्तर प्रदेश में चंदौली ,मिर्जापुर और सोनभद्र ही तीन जिले थे, जो माओवाद प्रभावित थे । लेकिन बीते छह साल में माओवाद प्रभावित जिलों की तादाद बढ़कर 30 पार कर गयी । यह अलग बात है
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बिन माई-बाप के दो साल से टिकी इस हॉकी टीम को देखिए और समझिए !

मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम से बाहर निकलती भारतीय टीम के साथ कोई नहीं था । ना कोई अधिकारी। ना कोई सुरक्षाकर्मी। ना किसी न्यूज चैनल का कैमरा। यह वही टीम है जिसके लिये चंद मिनट पहले तक ध्यानचंद स्टेडियम के भीतर पन्द्रह हजार दर्शकों का, लगातार सत्तर मिनट
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मीडिया को कठघरे में रखती एक कविता, गौर कीजिए...

बंधु....जो हालत और हालात देश के हैं, वैसे में अक्सर हम जैसे बहुत कुछ कहना-लिखना चाहते हैं। लेकिन कभी चंद लाइने हमारे बहुत-कुछ कहे या लिखे से आगे की बात कह जाती हैं। कभी मेरी सहयोगी रही ऋचा साकले ने मुझे यह कविता भेजी...तो मुझे लगा यह तो हम सभी को पढ़नी
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Mar 05 2010 10:06 AM
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'मेरा बेटा आतकंवादी नही वतन परस्त है’

आतंक को लेकर सरकार से अलग है युवा मन की परिभाषा जिस इंडियन मुजाहिदीन के संस्थापक आमिर रजा खान को लेकर गृह मंत्रालय पुणे धमाके में सीधा आरोप लगा रहा है, उसी आमिर के पिता रजा खान सीधे कहते है, “ मेरा बेटा वतन परस्त है, वह वतन से गद्दारी कर ही नहीं सकता। "
Mar 03 2010 12:31 PM
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खान को क्यों कहना पड़ता है, मैं आतंकवादी नहीं हूं

पुणे ब्लास्ट ने एक बार फिर मुस्लिमों को लेकर आतंक का सवाल उभार दिया। चूंकि ब्लास्ट की जांच में कोई ठोस सबूत हाथ लगे नहीं हैं तो पुणे को मालेगांव से भी जोड़ा जा रहा है। यानी निशाने पर कहीं ना कही कट्टर हिन्दुत्व भी है। एक तरफ चरमपंथी मुस्लिम तो दूसरी तरफ
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माय नेम इज....और मैं पत्रकार नहीं हूं

लोकतंत्र के चार खम्भों में सिनेमा की कोई जगह है नहीं, लेकिन सिल्वर स्क्रीन की चकाचौंध सब पर भारी पड़ेगी यह किसने सोचा होगा। "माई नेम इज खान" के जरिये सिनेमायी धंधे के मुनाफे में राजनीति को अगर शाहरुख खान ने औजार बना लिया या राजनीति प्रचार तंत्र का सशक्त
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Feb 21 2010 10:37 AM
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मुंबई कहां से चली और कहां आ पहुंची

जिस मुंबई पर महाराष्ट्रीय गर्व करता है और अधिकार जमाना चाहता है, असल में उसके निर्माण में उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वाद्ध के उन स्वप्नदृष्टा पारसियों की निर्णायक भूमिका रही, जो अंग्रेजो के प्रोत्साहन पर सूरत से मुंबई पहुंचे। लावजी नसेरवानजी वाडिया जैसे
टैग: mumbai
Feb 19 2010 08:23 AM
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क्या फिर भी पाकिस्तान से बात की जाये

"कश्मीर की आजादी ही हमारा संघर्ष है। भारत की फौज ने कश्मीरियों को बंदूक और बूटों तले रौंद रखा है। वहां लोग गुलाम हैं। हम अपना संघर्ष कश्मीर की आजादी के लिये जारी रखेंगे।" यह ऐलान जेहादी काउंसिल का है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की राजधानी
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Feb 17 2010 07:05 AM
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टैरर इज बैक : पुणे में उठे सवाल, निशाना कहीं कॉमनवेल्थ तो नहीं

यह धमाका कहीं भी किया जा सकता था। और कहीं भी का मतलब है...सौ से ज्यादा मौत। क्योंकि पुणे के लिये सेटरडे नाइट का मतलब होता है हंगामा। और धमाका जिस अमोनियम नाइट्रेट के जरिए कराया गया, इसका असर पुणे के किसी भी बार-रेस्तरा में कितना जबरदस्त हो सकता था, यह
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कोई कैसे बताए कि मीडिया बिका हुआ है

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चार साल के शासन के दौरान अपने सुशासन के प्रचार-प्रसार में सौ करोड़ रुपये फूंक दिये। हरियाणा के सीएम ने पिछले साल चुनाव के ऐलान से ऐन पहले के ढाई महीने में अपनी सफलता के गीत गाने में अस्सी करोड़ रुपये फूंके थे।
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राष्ट्रपति के मायके का हाल, पार्ट-2

चालीस करोड़ की ज़मीन पर लाख रुपये का टेंडर और किसान को मुआवजे में दिये सवा चौदह लाख सरकार से कौन लड़ सकता है ? पहले भी कुछ नहीं कर पाये और अब भी कुछ नहीं कर सकते। आमदार-खासदार तो दूर सरपंच भी धोखा दे गया तो किसे भला-बुरा कहे। अब सरकार ही दलाल हो जाये तो
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हिन्दुत्व की बिसात पर पहली चाल है भागवत का मराठी मानुस

भारत एक हिन्दू राष्ट्र है और इससे कोई इंकार नहीं कर सकता। यही वह पहला वाक्य है, जिसे मोहन राव भागवत ने संघ की कमान संभालते ही कहा था। जाहिर है बीजेपी के राष्ट्रीय नेता तब इसे पचा नहीं पा रहे थे कि 21वीं सदी में इस तर्ज पर अगर आरएसएस सोचने लगी तो उनकी
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रामू का प्रण और अमिताभ का 'रण'

26/11 के बाद सीएम विलासराव देशमुख की कुर्सी खिसकने ने ही शायद मीडिया की ताकत का एहसास रामगोपाल वर्मा को कराया होगा, क्योकि घायल ताज होटल में आंतक के चिन्ह को देखना सीएम की जरुरत होती है, लेकिन कलाकार बेटे रितेश देशमुख और रामगोपाल वर्मा के लिये यह किसी
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सवालों ने बेचैन किया तो जिंदगी की तंग गलियां छोड़ जवाब खोजने मओवादी बना एक इंजीनियर

चन्द्रपुर इंजीनियरिंग कॉलेज की दीवार पर चिपके पुलिसिया पोस्टर ने झटके में माओवादियों को लेकर सरकार के नजरिये और सरकारी सिस्टम को लेकर एक पूरी बहस मेरी आंखों के सामने ला कर खड़ी कर दी । पोस्टर में काले घेरे में एक युवक की तस्वीर छपी थी । जिसके ऊपर मोटे
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कामरेड बसु नहीं लाल सलाम की मौत

कामरेड ज्योति बसु...लाल सलाम । मुट्ठी भिची हुई और हाथ हवा में उठाकर लाल सलाम कहने की ताकत कितने वामपंथी नेताओ में है..लगातार टेलीविजन स्क्रीन पर इसे ही देखने के लिये बैठा रहा। फोन पर ज्योति बाबू के बारे में पहले दो घंटे कमेन्ट्री करते वक्त और बाद में
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क्यों मुंबई में है सभी की जान

दुनिया के नक्शे पर जिस शहर की पहचान सबसे बड़े वित्ताय शहर के तौर पर हो और जिस शहर में दुनिया के सबसे ज्यादा अरबपति हों, क्या उस शहर को सिर्फ मराठी मानुस के नाम पर अलग किया जा सकता है। असल में मराठी मानुस की राजनीति तले मुंबई का मतलब वह आर्थिक नीति भी है
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राष्ट्रपति के मायके का हाल : वेलकम टू मिहान, शेतकारी चे श्मशान

विदर्भ की बहू प्रतिभाताई पाटिल जब राष्ट्रपति बनी तो तुलसाबाई गायकवाड ने सर मुंडा लिया। उसे भरोसा हुआ कि उसकी हालत देखकर राष्ट्रपति उनसे जरुर पूछेगी ऐसा क्यो किया और जब जानकारी मिलेगी तो प्रतिभा ताई जरुर कोई पहल करेंगी । हुआ भी यही राष्ट्रपति बनने के बाद
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फिल्म और राजनीति में सरोकार का धंधा

चंदेरी के बुनकरों का सवाल आमिर खान जब ‘थ्री इडियट्स’ के प्रचार के दौरान उठा रहे रहे थे, उस वक्त लोकसभा में मंहगाई को लेकर सांसद हंसते-मुस्कुराते चर्चा करते हुये चर्चा से बचना चाह रहे थे । आमिर खान सामाजिक सरोकार को प्रचार का हथकंडा बनाकर अपने धंधे में
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“थ्री ईडियट्स” में आमिर खान है कहाँ?

जीनियस जीनियस होता है... उसके जरिये या उसमें अदाकारी का पुट खोजना बेवकूफी होती है। शायद इसीलिये थ्री ईडियट्स आमिर खान के होते हुये भी आमिर खान की फिल्म नहीं है। थ्री ईडियट्स पूरी तरह राजू हिराणी की फिल्म है। वही राजू जिन्होने मुन्नाभाई एमबीबीएम के जर
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आखिर किसे इडियट बना रहे हैं आमिर खान !

हैलो , जी आमिर खान आपको इन्वाइट कर रहे हैं। इंटरव्यू देने के लिये । आप तो जानते है कि अमिर खान देश भ्रमण कर रहे हैं। जी...थ्री इंडियट्स को लेकर । हां , रविवार को वह चेन्नई में होंगे...तो आपको चेन्नई आना होगा। आप बीस दिसंबर यानी रविवार को चेन्नई पहुंच
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आडवाणी युग के बाद की भाजपा

नागपुर में पहली बार सीमेंट की सड़क 1995 में बनी तो रिक्शे वालों ने आंदोलन छेड़ दिया । रिक्शे वालों का कहना था कि नागपुर में जितनी गर्मी पड़ती है उससे सीमेंट की सड़क में टायर चलते नहीं हैं। लेकिन कार वाले खुश हो गये कि अब गड्ढ़े में हिचकोले नहीं खाने
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दिल्ली का गोल्फ लिंक, मधुशाला....कैनवास औऱ बच्चन परिवार

दिल्ली का सबसे खामोश लेकिन सबसे हसीन इलाका गोल्फ लिंक। 14, गोल्फ लिंक के ठीक बाहर जैसे ही मैने गाड़ी रोकी, गेट पर लिखा देखा गांधी। यह कैसे हो सकता है...मै तो गैलरी में पेंटिग्स देखने आया था । लेकिन गांधी.....। सामने खड़े वाचमैन ने टोका....कहां जाना ह
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कोपेनहेगेन, मीडिया और कविता

कोपेनहेगेन से कुछ निकलेगा इसकी संभावना नहीं के बराबर है । सवाल है जो पर्यावरण अमेरिका के लिये अर्थशास्त्र है , वही पर्यावरण हमारे लिये संस्कृति है । और कोपेनहेगेन में इसी संस्कृति को कानूनी जामा पहनाकर टेक्नालाजी बेचने-खरीदने का धंधा शुरु हुआ है । सं