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11 Jun 2010
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दुनिया में अगर आए हैं तो जीना ही पड़ेगा .....

दुनिया में अगर आए हैं... तो जीना ही पड़ेगा है जिंदगी अगर गम... तो उसे पीना ही पड़ेगा
 
sumeet "satya"
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ईशीईईईई बहुत तीखा है......

मस्त चटपटा कचालू खालो भाई मुह जल जाये तो पैसे देना.... नहीं तो मत देना
 
sumeet "satya"
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खुसरोबाग...

 
अजित त्रिपाठी
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मेरी गुड़िया...

 
अजित त्रिपाठी
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जिंदगी के सफ़र में गुजर जाते हैं जो मुकाम ....

जिंदगी के सफ़र में गुजर जाते हैं जो मुकाम .... वो फिर नहीं आते ...... फिर नहीं आते
 
sumeet "satya"
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न्यूड नेचर....

ये तस्वीर मैंने महाबलेश्वर की वादियों में खींची है।
 
Rajesh Tripathi
May 08 2010 09:56 PM
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बूढ़ा घर.....

गर्मी की तपन से निजात दिलाते थे ये मकान,तर हो जाता था कलेजा......लेकिन समय के साथ लोग बदलते गये छोड़ते गये अपने गांव को भूलते गये गीली मिट्टी की खुशबू शहर में फ्लैट के अंदर कैद हो गये वो लोगजिनके गांवों के घरों कच्ची मिट्टी वाले आंगन थे और आंगन के बीच
 
Rajesh Tripathi
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रेत वाला जंगल

ये तस्वीर मुंबई के पास एक बीच से उतारी है
 
Rajesh Tripathi
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खुजलीबाज और उंगलीबाज

खुजलीबाज और उंगलीबाजकई दिनों से कुछ लिखने की फिराक में हूं,लेकिन मेरी लिखने की अभिलाषाओं पर दो तरह के लोग मिलकर ऐसा तुषारापात करते हैं कि भावनाओं की फसल का अंकुर कागज़ पर उतरने के पहले ही मटियामेट हो जाता है...ये दोनो सुकून और शांति के दुश्मन हैं...
 
अजित त्रिपाठी
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ये जहाँ है कहाँ !

क्या सच में- कभी कैथवास जी की फोटोग्राफ में गरीब लड़की को देखती बच्ची की आँखों में झलकती मासूमियत बरक़रार रह पाएगी, क्या सच में कभी गरीब-अमीर की दूरी कम हो पाएगी ,क्या सच में कभी गरीब आदिवासियों को उनकी जमीन वापस मिल पाएगी और वो नक्सल नही एक आम भारतीय
 
sumeet "satya"
Apr 11 2010 04:04 AM
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बुरा न मानो होली है...

होली आई यारपड़ेगी पिचकारी की मारकि गोरिया हो जा तू तैयारजोगीरा सारारारा...नशीली सी है फगुन बयारजोबन पे पड़ेगी रंग की धारमगन हैं भौजी आज हमारजोगीरा सारारारा...लाल लाल टेसु से गालगाल पे गहरा लाल गुलालमत मलना मेरे लालजोगीरा सारारारा...ई तो एकदम कट्टा
 
अजित त्रिपाठी
Feb 28 2010 12:28 PM
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Rajesh Tripathi
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पुरकैफ जी नहीं रहे

साथियों बड़े दुःख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि अब पुरकैफ जी हमारे बीच नहीं रहे ! हालांकि राजेश त्रिपाठी 'पुरकैफ' के राजेश त्रिपाठी अभी मौजूद हैं और स्टार न्यूज़ मुंबई में मजे कि नौकरी कर रहे हैं लेकिन पुरकैफ जी कि बात ही कुछ और थी ! पुरकैफ यानी कि
 
sumeet "satya"
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और रिश्ता ख़त्म..

कुछ तुमने कहा कुछ मैंने कहा और जल उठी आग सुलगने लगे ज़ज्बात तुमने बुझाने की कोशिश नहीं की, और संयोग से मुझे भी पसंद है गरम चाय !
 
अजित त्रिपाठी
Dec 23 2009 02:30 AM
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कौन है सच्चा राष्ट्र भक्त ?

१- क्या आप सच्चे राष्ट्रभक्त हैं ? २- हाँ मै हूं । १- सुबूत ? २- मतलब ? १- इसका सुबूत क्या है ? २- जी ..... जी मुझे अपने देश से प्यार है । १- और ? २- और ............................................................................... कुछ नहीं । वास्तव
 
Abhimanyu k sharma
Nov 08 2009 04:42 AM
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हिंदी फाँट डाउनलोड Hindi Unicode Font Download

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Sandeep Singh
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महगाई के दोहे

महगाई ने ऐसा मारा की मिडिल वर्ग मार जाएहे बनवारी मुरलीधारी मनमोहन लेव बचाय . गोभी,भिंडी दाल तो अब सपनो मे दिखते हैंआलू और टमाटर कभी कभी ही मिलते हैं. शक्कर ने तो मध्यवर्ग का छोड़ दिया है साथ इतने ऊँचे दम हुए की नही पहुँचता हाथ .अभी तलाक़ मंदी ने मारा अब
 
अजित त्रिपाठी
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Chay Baithkee

 
Amlendu Tripathi
Aug 24 2009 08:51 PM
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Chay Baithkee

ज़िन्दगी है छोटी, हर पल में खुश रहो ...ऑफिस में खुश रहो, घर में खुश रहो ...ჯહઔહჯ═══■■═══ჯહઔહჯआज पनीर नहीं है , दाल में ही खुश रहो ...आज जिम जाने का समय नहीं , दो कदम चल के ही खुश रहो ...ჯહઔહჯ═══■■═══ჯહઔહჯआज दोस्तों का साथ नहीं, टीवी देख के ही खुश रहो
 
Amlendu Tripathi
Aug 24 2009 08:41 PM
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Chay Baithkee

अनदेखी अनजानी सीमधुर कल्पनाओं की सरिता मेंतब बहते जानाकितना अच्छा लगता थाकोलाहल से दूर कहींसूनी सड़कों पर उस धुंधली सी संध्या मेंवो साथ तुम्हाराकितना अच्छा लगता थाउन कम्पित अधरों को मै जब छूने की कोशिश करता थातब प्रतिवाद तुम्हाराकितना अच्छा लगता थाकिन्तु
 
Amlendu Tripathi
Aug 24 2009 08:41 PM
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Chay Baithkee

मौत नहीं है हल सपनो का,माना टूटा बल अपनों का.फिर भी हम मर जाएँ कैसे,खुद की लाश जलायें कैसे?सपनो के टूटे पंखों से,अपनों के विरह मनको से.नीड़ भला सजायें कैसे,सोते न जग जाएँ कैसे?फिर भी उसकी किसी छवि को,उसके नयनो के अमित रवि को,खुद में हम झुठलायें कैसे?कैसे
 
Amlendu Tripathi
Aug 24 2009 08:40 PM
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ऐसी आज़ादी और कहाँ..?

ऐसी आज़ादी और कहाँ..?दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा हाल ही में दिए उस फैसले का सबने स्वागत किया हैं जिसमे समलैंगिकता से संबंधित धारा '३७७' को हटाने के दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश दिए हैं...अब भारतीय संस्कृति पर एक बदनुमा दाग लग जायेगा क्योंकि 'ऐसी आज़ादी और कहा' ..जी
 
Deepak
Jul 27 2009 08:20 PM
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लिखिए भाई लिखिए भाई

लिखिए भाई लिखिए भाईपीपल पेड़ पुराना लिखिए,गांव का एक ज़माना लिखिए।भौजाई का ताना लिखिए,देवर का गुर्राना लिखिए ।नाना का वो गाना लिखिएनानी का शर्माना लिखिए ।अपना कोई फसाना लिखिएबीवी से घबराना लिखिए ।देश का ताना बाना लिखिए,देश की जान बचाना लिखिए ।धूप में
 
अजित त्रिपाठी
Jul 25 2009 02:45 PM
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अजय राय पुरस्कृत

चाय बैठकी के बैठकबाज अजय राय को आर्थिक पत्रकारिता में उनके उल्लेख नीय योगदान के लिए बनारस बीड्स आर्थिक पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित किया गया है । पुरस्कार के लिए देश भर से तीन लोगों का चयन हुआ है अजय के अतिरिक्त प्रसिद्द आर्थिक पत्रकार संजय पुगुलिया
 
Swarup
Jul 20 2009 09:52 PM
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एक पैर का नाच...

शहर के बीच चौराहे की फुटपाथ पर जमा थी भीड़ चल रहा था एक पैर का नाच लोग टकटकी लगाये देख रहे थे उस सोलह साल की लड़की को जो फिल्मी धुन पर दिखा रही थी एक पैर का नाच नाच का ये तमाशा दिखा रही लड़की बहुत सुन्दर थी किसी गांव की गोरी की तरह घुंघरुओं की छनक के साथ
 
Rajesh Tripathi
Jun 29 2009 04:53 PM
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big hand

 
Rajesh Tripathi
May 22 2009 10:15 PM
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big foot

गोवा बीच..........
 
Rajesh Tripathi
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still life in fast train

मुंबई लोकल ट्रेन.....................
 
राजेश पुरक़ैफ
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baby with train

मुंबई लोकल ट्रेन..............
 
Rajesh Tripathi
May 06 2009 04:36 PM