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01 Jun 2010
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कुछ बहके बहके से अल्फाज़....जाने किसके लिए

वो खामोश नज्में कहता था मेरे लिएमैं बदन के रोम रोम से सुना करती थीवो अपनी आँखों से सहलाता था मुझेमैं घूँट घूँट उसके इश्क को पिया करती थीवो कुछ अधूरी सी इबारत लिख गया था मेरी धडकनों परमैंने उन्हें अपना नाम पता बनाकर पूरा किया थावो किसी लैला की बात किया
 
pallavi trivedi
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ज़िन्दगी के सफ़र के अगले पड़ाव की ओर....

एक हफ्ते में सब कुछ बदल गया! सत्रह तारिख को ट्रांसफर ऑर्डर आया....कल यहाँ से रिलीव हो गयी और कल जाकर नयी जगह ज्वाइन करना है! डी.एस.पी. रेल भोपाल से अब सिटी एस. पी. विदिशा.......नयी जगह जाने की स्वाभाविक उत्कंठा और उत्साह भी है पर भोपाल छोड़ने का दुःख भी
 
pallavi trivedi
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वक्त का यूं मनमानी करना भी भला लगता है.....

मैं अक्सर सोचती हूँ.....कई बार वक्त गुज़र कर भी क्यों नहीं गुज़रता....ढीट बनकर खड़ा रहता है! और कैसे कहे कोई इसे चले जाने को! वक्त से तकरार करना जैसे खुद को ही पराजित करना है! कई बार सोचती हूँ..मैं इस नामुराद के मुंह लगती ही क्यों हूँ मगर यादों का पुलिंदा
 
pallavi trivedi
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जाना सुधारने लोगों को....लौटना खाके मुंह की ...

कल बहुत देर तक डिस्कवरी चैनल देखते रहे! कोई शो था जिसमे दुनिया के सबसे साफ़ सुथरे शहरों के बारे में बताया जा रहा था! अहा...क्या शहर थे! बड़ा मजा आ रहा था देखने में!ऐसी चमचमाती हुई सड़कें कि चप्पल धरने का मन ही न करे! एक बच्चा सड़क पर चलते चलते अचानक मुंह के
 
pallavi trivedi
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कई खूबसूरत सुबहें समेट रखी हैं मैंने.....

आहा...एक और बेहद खूबसूरत सुबह! चेहरे पे मुस्कराहट वही बरसों पुरानी पर वजह हर रोज़ नयी! रोज़ की तरह आज भी निकली हूँ सुबह सैर करने.....पार्क की एक बैंच पर बैठती हूँ योगा करने पर....मन नहीं लगता! आज मन कहीं और अटका हुआ है.....एक क्रिकेट बॉल में ! पार्क में
 
pallavi trivedi
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एक सर्द ख़ामोशी....अंतहीन...

चारों तरफ एक बेचैन सी ख़ामोशी पसरी हुई है...! मुझे डर लगने लगा है इस सन्नाटे से! बार बार पसीना पोंछता हूँ! कोई दूर ले जाओ इस ख़ामोशी को....जो कानों के अन्दर से घुसकर मेरे पूरे शरीर में रेंगने लगी है! मेरे कान तरस गए हैं शोर को! इस सन्नाटे में मुझे मेरा
 
pallavi trivedi
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साल का पहला दिन...पपड़ी चाट सा

नए साल का पहला दिन....मिले जुले से एहसासों का एक अनोखा पैकेज लेकर आया ! शुक्र है इस बार मैंने नहीं सोचा था की साल के पहले दिन जल्दी उठकर घूमने जाउंगी...इसलिए " shit...शुरुआत ही संकल्प टूटने से हुई" वाला गिल्ट फील नहीं हुआ! ऑफिस पहुँचने तक सब कुछ एकदम
 
pallavi trivedi
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तेरी याद का एक पौधा

अपने दिल के गुलशन में मैंने रोपा था तेरी याद का एक पौधा मोहब्बत की खाद अश्कों के पानी से सींच सींच कर पाला बड़े प्यार से आज बड़ा हो गया है मेरा ये पौधा देख,कितने फूल आये हैं इसमें और तू बिखर गयी है फिजा में खुशबू बन के..... जाते जाते समेट ली थी तुम्ह
 
pallavi trivedi
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कुत्ता कुर्सी पर

ये कुत्ते लोगों को इतने प्रिय क्यों होते हैं...समझ में ही नही आता! खासकर देसी काले भूरे खजैले कुत्ते से लोग इतनी प्रीति रखते हैं की उनके बच्चे जल भुन जाएँ!सुबह सुबह अखबार पढ़ते हुए अगर बच्चा आकर लटक जाए तो उसकी ऐसी तैसी कर देंगे लेकिन अगर गली में घूम
 
pallavi trivedi
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क्लर्क के एक्जाम में मैं फर्स्ट आया था

गर्व से माँ बाप का मस्तक उठाया था जब क्लर्क के एक्जाम में मैं फर्स्ट आया था पर जल्द ही दुनिया ने आइना दिखा दिया सच्चाई से बच्चों का पेट भर न पाया था ईमान और गैरत से जब बात न बनी चापलूसी का हुनर तब काम आया था पहली बार घर पे मैं मिठाई ले गया जब सौ रुपय
 
pallavi trivedi
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जिंदगी के सिक्के का खोटा पहलू

आज ऑफिस में बैठे बैठे दरवाजे के बाहर नज़र पड़ी...एक बच्चा काफी देर से एक सिपाही के साथ खडा था! उत्सुकता वश अन्दर बुलाया...पता चला बच्चे पर चोरी का इल्जाम है और बाल अपराध शाखा में पूछताछ के लिए लाया गया है! एक दुबला पतला,सांवला सा करीब १२-१३ साल का लड़क
 
pallavi trivedi
Dec 29 2009 11:43 AM
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ये रिश्ते भी कितने अजीब होते हैं

आज बरसों बाद तुम्हे देखा अच्छे लग रहे थे काली टीशर्ट और जींस में पर तुम्हे कह भी न पायी बस...यादें खींच कर ले गयीं बीते दिनों में अभी कल की ही तो बात थी तुम शामिल थे मेरी ढलती शामों और उनींदी रातों में हमारी ख्वाहिशों ने साथ ही तो मचलना सीखा था याद ह
 
pallavi trivedi
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जी चुरा ले गया वो टूटे दांत वाला लड़का....

आज की सुबह कुछ ख़ास थी! एक तो हलके कोहरे में डूबी हुई सड़कें जो रात भर बारिश के बाद धुली धुली और खूबसूरत नज़र आ रही थी! दूसरे एक ऐसा वाकया जिसने इस सुहानी सुबह को और भी सुहाना बना दिया! आज सुबह सुबह उठने में बहुत आलस आ रहा था....मगर इतनी सुन्दर सुबह म
 
pallavi trivedi
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वो जो बिछडे हैं कब मिले हैं फ़राज़ ......

फिर किसी राहगुज़र पर शायद... वो कभी मिल सकें मगर शायद......... आज ये ग़ज़ल मुझे न जाने किस दुनिया में ले गयी! सारे वो चेहरे जिनके साथ कभी न कभी जिंदगी के बहुत खूबसूरत पल बिताये हैं, अचानक से जेहन में कौंध गए! जिन दोस्तों के बिना शायद ये जिंदगी ऐसी न हो
 
pallavi trivedi
Oct 01 2009 01:08 PM
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फोकट का मनोरंजन.. अति उत्तम अति उत्तम

बातें देने में हम भी माहिर हैं....किसी भी आम भारतीय की तरह! अभी दो दिन पहले ही किसी से कह रहे थे कि देखो जरा हमारे देश में लोगों को कितनी फुर्सत है....कहीं भी टाइम बर्बाद करते रहते हैं, समय की कीमत नहीं समझते, जहां फोकट का मनोरंजन होते देखा वहीं रुक गए
 
pallavi trivedi
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गलत टाइम पे हँसे तो फंसे.....

मुझे लगता है हम हिन्दुस्तानी कुछ अलग ही मिट्टी के बने होते हैं! हर हाल में मस्त....स्कूल के दिन याद आते हैं!एक छात्र की ठुकाई चल रही है! छात्र दो सेकंड को बुरा सा मुंह बनाता है अगले ही पल अपने साथी को देखकर चेहरे पर ढाई इंच की मुस्कान फ़ैल जाती है! वो
 
pallavi trivedi
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हाज़िर हूँ......ब्रेक के बाद

तीन महीने का अच्छा खासा ब्रेक हो गया ब्लोगिंग से! मुझे याद आता है वो दिन जब डेढ़ साल पहले ब्लॉग लिखना शुरू किया था...एकदिन में दो दो पोस्ट लिख लेती थी! भले ही पोस्ट तीन दिन बाद करती थी! दिमाग में तूफ़ान मेल की तरह विचार आते थे! मुझे लगता था...ये एक ऐसी
 
pallavi trivedi
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साहब...एक शेर पकडा है वो भी गूंगा बहरा

बीता महीना चुनाव के कारण बहुत व्यस्तता भरा बीता! एक तो बला की गर्मी , ऊपर से चुनाव. इससे ज्यादा भयावह कॉम्बिनेशन नहीं हो सकता! इतनी गर्मी में घूम घूम कर तीन बार तो लू लग गयी! हांलाकि जिसने जो सलाह दी..एक आध छोड़कर सब पर अमल भी किया! कैरी का पना, नीबू
 
pallavi trivedi
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जिंदगी बेहद खूबसूरत है,चलिए इसे पहले से भी ज्यादा प्यार करें.....

। " कल ही एक नॉवेल पढ़ते वक्त ये पंक्तियाँ देखी! कितना सच है, जिंदगी की सुन्दरता की इससे सुन्दर व्याख्या मैंने नहीं पढ़ी थी! मेरे कई दोस्तों से कई बार जिंदगी की फिलॉसफी पर चर्चा होती है...कितनी अजीब बात है वही जिंदगी बहुत खूबसूरत लगती है जब हमारे साथ
 
pallavi trivedi
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जब कोई महबूबा चांदनी ओढ़कर उतरती है तो कैसी लगती है....

सुबह मेहँदी महक रही थी बिस्तर पर मैं तो रातरानी सिरहाने रखकर सोया था होंठों पर गर्म साँसें अभी भी दहक रही थीं और पलकों पर आज फिर एक मोती झिलमिलाया था खुली खिड़की से जब झाँका था मैंने तो आसमा के आखिरी कोने पर लहराता दिखा था तुम्हारा रेशमी आँचल , जिसका
 
pallavi trivedi
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घासीराम मास्साब की जिंदगी का एक दिन

आज नल आने का दिन है....घासीराम मास्साब की कसरत का दिन! पूरी टंकी भरने के लिए डेड सौ बाल्टी भरकर ऊपर दूसरी मंजिल पर लाना कोई जिम जाने से कम है क्या? हाँ...ये अलग बात है की इस कसरत से घासीराम मास्साब के दाहिने हाथ की मसल तो सौलिड बन गयी पर बाया हाथ बेच
 
pallavi trivedi
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बस हमें लग गया सो लग गया....क्या कर लोगे हमारा

कल की ही तो बात है!एक परिचित बातों बातों में कह उठे..." कल शाम को आते हैं आपके घर" ठीक साहब,,आ जाइये" अब कल शाम भी आई! हम बाकी सारे प्रोग्राम निरस्त करके बैठे हैं साहब का इंतज़ार करते!शाम गहराने लगी...हम इंतज़ार करते रहे!फोन लगाने की कोशिश की ..मगर वो
 
pallavi trivedi
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बेवफाई जुर्म क्यों नहीं ?

क्या दिल टूटने से चोट नहीं लगती? क्या किसी की भावनाओं के साथ खेलने की कानून में कोई सजा नहीं है? क्या दिल पर लगी खरोंच शरीर पर आई खरोंच से कम दुःख देती है?" उसकी आंसुओं से भीगे प्रश्न लगातार मेरे जेहन पर हथौडे की तरह पड़ रहे हैं! वो आज आई थी मेरे ऑफिस
 
pallavi trivedi
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माँ...अब मैं बड़ा हो गया हूँ

मुर्गा मुर्गी प्यार से देखें,नन्हा चूजा खेल करे कौन है जो आकर के मेरे,मात पिता का मेल करे " दो कलियाँ " फिल्म का ये गाना सुनते ही मेरी एक दोस्त की आँखें भर आती थीं! और अच्छे खासे हंसते खेलते चेहरे पर गहन पीडा दिखाई देने लगती थी! उसके मम्मी पापा बचपन
 
pallavi trivedi
Feb 07 2009 11:17 AM
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राजस्थान यात्रा- एक शरारत भरी शुरुआत

१५ तारीख से राजस्थान यात्रा पर निकली हुई थी! !यात्रा ख़त्म हुई पर खुमार अभी तक छाया हुआ है....शायद अभी कुछ दिन और रहेगा!जाने कितनी बार फोटो देख चुकी हूँ!मम्मी ,दोनों छोटी बहने गड्डू और मिन्नी, साथ में गड्डू की दोस्त अस्मिता और उसकी मम्मी हम छै लोगों
 
pallavi trivedi
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घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूं कर लें.....

मैं न्यू मार्केट जाती हूँ..गाडी से उतरने लगती हूँ इतने में मेरा मोबाइल बजता है! मैं नहीं उठाती, दो बार पूरी रिंग बज जाती है! तीसरी बार मैं उठाकर बात करती हूँ....अभी तक पार्किंग में ही खड़ी हूँ!बात करने के बाद आगे बढ़ने लगती हूँ इतने में देखती हूँ की ए
 
pallavi trivedi
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घुघूती जी कहाँ हैं आजकल?

मित्रो ...काफी वक्त से घुघूती जी ब्लॉग जगत से अनुपस्थित हैं! न ही पोस्ट के रूप में और न ही टिप्पणी के रूप में वे पिछले काफी समय से उन्होंने कुछ लिखा है!बीते दिनों उनके पतिदेव का स्वास्थ्य कुछ खराब था...इसलिए फ़िक्र हुई की कहीं उनके स्वास्थ्य ज्यादा खर
 
pallavi trivedi
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आस्तिक और नास्तिक के बीच एक शास्त्रार्थ

पंडित रामेश्वर शर्मा- शहर के एक स्कूल में शिक्षाकर्मी वर्ग -२ के पद पर कार्यरत मास्टर! स्कूल में सिलेबस कम और रामायण,महाभारत ज्यादा पढाते हैं,चूंकि उन्होने भी छुटपन से ही सिलेबस कम और रामायण ,नहाभारत ज्यादा पढा! जुगाड़ बैठ गयी सो नौकरी मिल गयी! घोर आ
 
pallavi trivedi
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" अतिथि देवो भव"

न जाने किस जमाने में रची गयी होगी ये लाइन " अतिथि देवो भव" ! वैसे जिस भी ज़माने में रची गयी हो , एक बात तो तय है की उस वक्त अतिथि बड़े बढ़िया टाइप के होते रहे होंगे!बढ़िया माने ऐसा काम करने वाले जिससे मेजबान ऐसी कहावत बनाने को मजबूर हो जाए!वैसे बचपन
 
pallavi trivedi
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शायद खुशियाँ सबको अच्छी नहीं लगतीं....

अभी हाल ही में राज भाटिया जी का लेख देखा....आदतों का गुलाम होने के विषय में! कल ही घर में काम करने वाली बाई ने बताया की उसकी बेटी बहुत परेशान है...पति कुछ नहीं करता , दिन भर शराब पीता है और मारपीट करता है! कई बार सोचती हूँ...कितने लोग सिगरेट, शराब, ड
 
pallavi trivedi
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एक सिफारिश छोटी सी...

सुनो मांओ बाहर रिमझिम बरसात हो रही है मत बांधो अपने नन्हे मुन्नों को घर के अन्दर किताबों,वीडियोगेम और कार्टूनों में तुमने शायद देखा नहीं तुम्हारे नन्हे की आँखें खिड़की के बाहर टिकी हुई हैं क्या तुम्हे उसकी आँखों की प्यास नज़र नहीं आती? उसे निकलने दो घ
 
pallavi trivedi
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बंधे हुए है हम सब एक अनजानी डोर से

रोज़मर्रा के जीवन में भी अचानक कभी कुछ ऐसा देखने को मिल जाता है जो यकीन दिला जाता है कि हम सभी इंसानों के बीच ऐसा कुछ है जो हमें एक दूसरे से जोड़े रखता है! अनायास ही नितांत अपरिचित चेहरे अपने से लगने लगते हैं...और सभी एक धागे से बंधे हुए से लगते हैं.!
 
pallavi trivedi
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दर्द बांटना श्रीमान व्यंगेश्वर जी का

श्रीमान व्यंगेश्वर जी से तो आप सभी परिचित होंगे...अरे वही जो बड़े अच्छे अच्छे व्यंग लिखते हैं.! पूरी दुनिया में श्रेष्ठ व्यंगकारों में गिनती होती है इनकी! हमारा भी सौभाग्य है की हम इनके मित्रों में शामिल हैं! हमें इसलिए भी इनका मित्र बनना पड़ा क्योकि
 
pallavi trivedi
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क्यों नहीं लिखते एक ऐसी नज़्म..

एक मुट्ठी धूप, चन्द कतरे रात के एक बूढा आसमान और उस पर टंगे चाँद को समेटते हो अपने जेहन में और रच देते हो एक नज़्म कभी मेरे घर आकर देखो यहाँ भी है एक बूढा बाप शायद एक आध मुट्ठी अनाज भी मिल जाये चन्द कतरे आंसुओं के टूटी खाट के सिरहाने पड़े हैं और एक चाँ
 
pallavi trivedi
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ठसाठस भरी बस में तीन घंटे

बड़े दिनों बाद इस बार बस में सफ़र करने का अवसर प्राप्त हुआ....ब्लॉग बनाने के बाद से एक फायदा ज़रूर हो गया है! अच्छा अनुभव हो तब तो अच्छा है ही...ख़राब हो तो भी एक सुकून मिलता है की चलो एक पोस्ट का मसाला मिल गया! कहने का मतलब ये कि इस ब्लॉग ने मुश्किल
 
pallavi trivedi
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एक पुरानी ग़ज़ल

बहुत दिनों से ब्लॉग से दूर थी....आज कुछ नया तो नहीं एक पुरानी ग़ज़ल ही पोस्ट कर रही हूँ!बहुत दिनों से कुछ नया नहीं लिखा!शायद एक दो दिन में कुछ नया लिखूं... जब से तकदीर कुछ खफा सी है जीस्त भी मिलती है गैरों की तरह शब के साथ ही गुम होते हैं वफ़ा करते हैं
 
pallavi trivedi
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किस्सा -ए -होस्टल ( भाग २)

पिछली बार वो तीन दिन होस्टल में और इस बार का अनुभव मात्र तीन घंटे का था...दिल्ली के एक गर्ल्स होस्टल का! साल भर पहले सबसे छोटी बहन मीडिया का कोर्स करने के बाद दिल्ली में नौकरी कर रही थी! और वहीं के एक गर्ल्स होस्टल में रह रही थी! उसी दौरान दिल्ली किस
 
pallavi trivedi
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खुशियाँ हमसे बचके जायेंगी कहाँ

कल की बारिश में खुशियों को भीगते ,मचलते,नाचते और तैरते देखा और छोटी बहन सिन्नी ने घर के अन्दर से कैमरा लाकर इन अनमोल पलों को कैद कर लिया!तेज़ बारिश में वो ३० मिनिट! वाकई ऐसा लग रहा था जैसे मुस्कराहट बरस रही हो आसमान से!कचरा बीनने वाले बच्चों को बारि
 
pallavi trivedi
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किस्सा -ए-होस्टल

लोग कहते हैं की होस्टल लाइफ के अपने आनंद होते हैं...और सही भी है अगर कॉलेज का होस्टल हो और दोस्त यारों के साथ जीवन के वो हसीन साल गुजारे जाएँ तो वे पल अविस्मरनीय बन जाते हैं!हमारे लिए भी अविस्मरनीय ही हैं वो तीन दिन! पहला अनुभव - एम.ए. करने के बाद पी
 
pallavi trivedi
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'ए खुदा...बचपन को तो बख्श

रात के वीराने में उसकी किलकारी जैसे किसी ने साँझ ढले राग यमन छेड़ दिया हो उसकी वो नन्ही-नन्ही अधखुली मुट्ठियाँ नींद में मुस्कुराते होंठ बार-बार बनता-बिगड़ता चेहरा मोहपाश में बाँध रहे थे विडम्बना यह कि वो फरिश्ता नरम बिछौना, पालना या माँ की गोद में नह
 
pallavi trivedi