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कुछ बहके बहके से अल्फाज़....जाने किसके लिए
वो खामोश नज्में कहता था मेरे लिएमैं बदन के रोम रोम से सुना करती थीवो अपनी आँखों से सहलाता था मुझेमैं घूँट घूँट उसके इश्क को पिया करती थीवो कुछ अधूरी सी इबारत लिख गया था मेरी धडकनों परमैंने उन्हें अपना नाम पता बनाकर पूरा किया थावो किसी लैला की बात किया
Jun 01 2010 02:12 PM


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