चेतो अब तो's Image

चेतो अब तो

http://chetoabato.blogspot.com/
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
22 Apr 2010
कुल प्रविष्टियां
20
पाठक भेजे
692
पसंद
22
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
34.60
पसंद करें
3
नापसंद करें

क्यों रूठ गईं मां

किसी ने कल्पना भी न की होगी कि गंगा मैया के ये दिन भी देखने पड़ेंगे। जिस नदी से तीर्थराज प्रयाग की पहचान है, उसी का यह रूप कैसे हो गया। आखिर क्यों रूठ गईं मां? अगर गंगा को सदा साफ रखा जाता, प्रदूषित न होने दिया जाता, फैक्ट्री का गंदा पानी न गिराया जाता
 
सचिन मिश्रा
पसंद करें
1
नापसंद करें

ताकि रोशन रहे दुनिया

अंधेरे में रहना किसे अच्छा लगता है, पर यह अंधेरा धरती की बेहतरी के लिए हो तो यह कदम सचमुच ही तारीफ़ के काबिल है। धरती को ग्लोबल वार्मिग के खतरे से बचाने की इस मुहिम के तहत एशिया, प्रशांत, मध्य-पूर्व और अमेरिका समेत दुनिया के 150 से अधिक देशों के हजारों
 
सचिन मिश्रा
पसंद करें
3
नापसंद करें

बहाएं नहीं, बचाएं पानी

'जल ही जीवन है' के मायने अगर हम आज नहीं समझे तो भावी पीढ़ी बूंद-बूंद को तरसेगी। भू-गर्भ जल वैज्ञानिकों की माने तो मौजूदा व भावी जल संकट से निजात पाने के लिए भू-गर्भ जल का सिर्फ दोहन हीं नहीं इसे रीचार्ज भी करना होगा। दुखद स्थिति यह है कि 'वाटर
 
सचिन मिश्रा
पसंद करें
0
नापसंद करें

कुछ तो शर्म करो

आश्रम में मची भगदड़ और उसमें मारे गए बच्चों व महिलाओं के परिजन भले ही गहरे शोक के सागर में डूब गए हों, पर कृपालु महाराज और उनकी मंडली को जरा सा भी पछतावा नहीं है। ये महाशय इस घटना में मारे गए लोगों के परिजनों के जख्मों पर मलहम लगाने के बजाय उस पर नमक
 
सचिन मिश्रा
Mar 06 2010 01:42 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

तो न मचती भगदड़

एक तरफ लालच, दूसरी तरफ अव्यवस्था। यही लालच और अव्यवस्था उनके लिए काल बन गया। आस्था का सैलाब पलक झपकते ही मातम में बदल गया। संत कृपालु महाराज के भक्तिधाम मंदिर आश्रम में थाली, रुमाल और बीस रुपये के नोट के लिए मची होड़ में इस कदर अव्यवस्था फैली कि भगदड़ मच
 
सचिन मिश्रा
पसंद करें
0
नापसंद करें

तो बहू कहां से लाओगे

अगर इसी तरह लोग बेटी को गर्भ में मारते रहे तो वह दिन दूर नहीं, जब उन्हें घर में बहू लाने के लिए तरसना पड़ जाए। जब कन्याएं ही नहीं रहेंगी तो लोग कैसे होगी कंजक पूजा।बेटी को अनचाही बनाने में सबसे बड़ा दानव दहेज है, वहीं काफी हद तक समाज की वो मानसिकता भी
 
सचिन मिश्रा
Feb 28 2010 02:17 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

कब लेंगे सबक

अगर पिछली घटनाओं से सबक लिया जाता तो आज फिर श्रद्धालुओं की जयघोष मौत की चीखों में तब्दील न होती। इसे मंदिर प्रशासन की लापरवाही कहें या सरकार की। लेकिन राजस्थान के जोधपुर में मेहरानगढ़ किले के पास स्थित चामुंडा देवी मंदिर में मंगलवार सुबह मची भगदड़ मे
 
सचिन मिश्रा
पसंद करें
0
नापसंद करें

महिला उत्पीड़न कब तक ?

महिला उत्पीड़न के मामलों में हो रहा इजाफा चिंता का विषय है। ऐसा कोई दिन नहीं होता है, जब देशभर में कहीं न कहीं महिला उत्पीड़न के मामले सामने न आतें हों। कभी किसी महिला का दहेज कम लाने के लिए उत्पीड़न होता है तो कभी किसी महिला का बेटी के पैदा होने पर
 
सचिन मिश्रा
पसंद करें
0
नापसंद करें

हिंदी : कब बनेगी भारत के माथे की बिंदी?

राष्ट्रभाषा हिंदी की दुर्दशा जितनी भारत में है, उतनी अन्य किसी देश में उसकी मातृ भाषा के लिए देखने को नहीं मिलेगी। भारतीय संविधान में व्यवस्था के 58 साल बाद भी हिंदी व्यवहार में राष्ट्रभाषा नहीं बन पाई। देश की आजादी के बाद जब अपना संविधान बना तो हिंद
 
सचिन मिश्रा
पसंद करें
0
नापसंद करें

खुदा भी आसमां से...

खुदा भी आसमां से जब देखता होगा मैंने यह क्या कर डाला सोचता होगा चाह थी उसकी सब लोग मिलकर रहेंगे यह न जाना अपनों को भी नहीं बख्शेंगे बहन ही बहन को धकेल देगी सेक्स रैकेट में महिला ही महिला को बेच देगी चंद रुपयों में और बाप ही लूट लेगा बेटी की आबरू गुरु
 
सचिन मिश्रा
पसंद करें
0
नापसंद करें

छई छप छई

जैसा करोगे वैसा भरना ही पड़ेगा। प्रकृति से छेड़छाड़ का खामियाजा भुगतना ही पड़ेगा।। पहले तो बाज नहीं आए अपनी हरकतों से। अब क्यों चिल्ला रहे हो खुदा बचाए मुसीबतों से।। कहीं बारिश तो कहीं बाढ़ का कहर। करते रहो छई छप छई।।
 
सचिन मिश्रा
पसंद करें
0
नापसंद करें

अफवाह या हकीकत

फिर दूध पीन लगीं मूर्तियां, अफवाह है या हकीकत यह कोई न जाने। लोग सरपट भाग रहे हैं, मूर्तियों को दूध पिलाने।। कब तक लोग यूं ही भागते रहेंगे अफवाहों के पीछे। हकीकत भी जानेंगे या आप भी भाग रहे हैं लोगों के पीछे।।
 
सचिन मिश्रा
पसंद करें
0
नापसंद करें

कब लेंगे सबक

देश में धार्मिक स्थलों पर हर साल अफवाह फैलती हैं और भगदड़ मचती है, जिससे सैकड़ों लोगों की जानें जाती हैं। फिर भी ऐसी घटनाओं से सबक नहींलिया जाता है, अगर सबक लिया जाता होता तो रविवार को हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित नयना देवी मंदिर में हादस
 
सचिन मिश्रा
पसंद करें
0
नापसंद करें

असुरक्षित महिलाएं

समय के साथ भले ही सब कुछ बदल गया हो, पर महिलाओं के प्रति पुरुषों की क्रूरता का रवैया शायद अभी तक नहीं बदला है। यहीं कारण है कि कार्यस्थल व सड़कें तो दूर की बात है अपने घरों में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। महिलाएं व युवतियां ही नहीं मासूम बच्चे भी ब
 
सचिन मिश्रा
पसंद करें
0
नापसंद करें

कैसे बुझेगी प्यास

अगर ऐसे ही दुरुपयोग होता रहा तो अगला विश्वयुद्ध पानी के लिए होना तय है। जलवायु परिवर्तन के मद्देनजर आने वाले समय में देश में सबसे बड़ी समस्या जल संकट की होगी इसमें दो राय नहीं है। चूंकि जलवायु परिवर्तन से हिमखंड पिघल रहे हैं, जिसकी वजह से नदियों में
 
सचिन मिश्रा
पसंद करें
0
नापसंद करें

मुसीबत में 'अन्नदाता'

देश में किसानों की हालत किसी से छिपी नहीं है। अपने खून-पसीने से अन्न का उत्पादन कर दूसरों का पेट भरने वाले किसान आज खुद भूखे पेट सोने के लिए मजबूर हैं। कभी बेमौसमी बारिश उन पर कहर ढाती है तो कभी सूखा। न तो उन्हें सूदखोरों से चंगुल से मुक्ति मिल रही ह
 
सचिन मिश्रा
पसंद करें
0
नापसंद करें

कैसे भरेगा पेट

सरकार के लाख जतन के बावजूद महंगाई और आबादी सुरसा की तरह मुंह फैलाए जा रही है। खाद्य भंडार खाली हो रहे हैं, अनाज घट रहा है। अगर यहीं हाल रहा तो आगे चलकर कैसे भर पाएगा बढ़ती आबादी का पेट। महंगाई पर बचाव करने के कांग्रेस की झोली के सारे तर्क व तीर अब लग
 
सचिन मिश्रा
पसंद करें
0
नापसंद करें

शर्माओ मत, हिंदी बोलो

आज राष्ट्रीय हिंदी दिवस है, फिर हिंदी विकास और प्रसार की बातें होंगी, लेकिन ये केवल बातों तक ही सीमित रहेंगी। क्योंकि हमें राष्ट्रभाषा हिंदी से नहीं, बल्कि विदेश ले जाने वाली भाषाओं से लगाव है तो फिर हिंदी का सम्मान कौन करेगा और कैसे होगा? इसकी किसी को
 
सचिन मिश्रा
पसंद करें
2
नापसंद करें

शादी और आबादी

देश में राष्ट्रीय जनसंख्या नीति की घोषणा के बाद सरकार ने आपातकाल के दौर में जबरन नसबंदी का अभियान चलाया था। लेकिन बाद में केंद्र में सत्ता में आई जनता पार्टी की सरकार ने पूर्ववती कांग्रेस सरकार की इस नीति को बाध्यकारी से ऐच्छिक नसबंदी कार्यक्रम में त
 
सचिन मिश्रा