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कसूर किसका

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25 Mar 2010
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कुछ तो शर्म करो

न तो उन्हें कोई अफसोस है, न ही वो माफी मांगना चाहते हैं। बस वो तो सिर्फ चर्चा में ही बने रहना चाहते हैं। तभी तो इनका कहना है कि मैं जो कह रहा हूं या जो कर रहा हूं, वहीं ठीक है। भले ही हमाम में सभी नंगे हो पर.. चाहे वो बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख व उत्तर
 
सचिन मिश्रा
Mar 26 2010 06:59 AM
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ये सब क्या है

अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है, जब उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के मनगढ़ में कृपालु महराज के आश्रम में मची भगदड़ में मारे गए लोगों के परिजनों को देने के लिए सूबे की मुख्यमंत्री के पास पैसे नहींथे। तब उनका कहना था कि सूबा वित्तीय संकट से गुजर रहा है, लिहाजा
 
सचिन मिश्रा
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तो कैसे भरेंगे जख्म

माया की 'माया' अगर अपरंपार न होती तो वह चर्चा में क्यों रहती। हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती की। ये मूर्तियों पर तो पानी की तरह करोड़ों रुपये बहा सकती हैं पर, कृपालु महाराज के आश्रम में मची भगदड़ में मारे गए लोगों के परिजनों को
 
सचिन मिश्रा
Mar 07 2010 02:03 AM
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कौन याद करे कुर्बानी

इनकी जान बचाने के लिए वे शहीद हो गए और उनकी इस कुर्बानी को याद करने के लिए ये चंद मिनट भी नहीं निकाल सके। ये वहीं शहीद हैं जो सात साल पहले संसद पर हुए हमले में शहीद हो गए थे। मगर कई सांसद ही नहीं,बल्कि कई केंद्रीय मंत्रियों ने भी इन शहीदों को श्रद्धा
 
सचिन मिश्रा
Dec 29 2009 12:02 PM
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फिर संयम क्यों?

चाहे वह प्रधानमंत्री हों या गृहमंत्री भले ही आए दिन कहते हों कि आतंकवाद से निपटने के लिए कड़ा कानून बनेगा। ये किया जाएगा, वो किया जाएगा। मगर किया कुछ नहीं जाता है। और उम्मीद भी नहीं है कि कुछ कर भी पाएंगे ये। जब तक नेतागण आतंकवाद से निपटने की रणनीति
 
सचिन मिश्रा
Dec 29 2009 12:02 PM
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ये तो होना ही था

मंुबई में आतंकी हमलों के बाद अगर केंद्र सरकार जबर्दस्त दबाव में आई न आती तो क्या गृहमंत्री शिवराज पाटिल पद छोड़ते? जब-जब विस्फोट हुए, तब-तब उन्हें हटाने की मांग की गई। मगर केंद्रीय नेतृत्व ने हर बार क्यों अनसुनी? जब पाटिल बहुत पहले ही अक्षम साबित हो
 
सचिन मिश्रा
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क्या हुआ तेरा वादा?

चुनावी मौसम में वैसे तो नेता जी आते हैं, वादे करते हैं और चले जाते हैं। भले ही वो वादे पूरे हो या ना हों पर कोई इनसे यह नहीं पूछता है कि पिछली बार इन्होंने जो वादे किए थे, उनमें से कितने पूरे हुए। और अगर कोई पूछने की हिम्मत करता है तो उसे पुलिस हिरास
 
सचिन मिश्रा
Dec 29 2009 12:02 PM
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शिबू भी राज की राह पर !

झारखंड के मुख्यमंत्री शिबू सोरेन भी लग रहा है कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे की राह पर चलने की तैयारी कर रहे हैं ! तभी तो विधानसभा के अष्टम स्थापना दिवस पर वह कहते हैं कि बिहारी यहां रह रहे हैं और रहेंगे, पर हमें आदिवासियों मूलवासियों
 
सचिन मिश्रा
Dec 29 2009 12:02 PM
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...पर हकीकत क्या है?

आतंकी आते हैं और कहर बरपा कर चले जाते हैं। चाहे वह राष्ट्रीय राजधानी हो या कहीं और, हर जगह वह अपने खौफनाक इरादों को अंजाम देते हैं। फिर भी इनसे कड़ाई से निपटने के बजाए हमारे नेता एक-दूसरे पर दोषारोपण कर रहे हैं। इससे भले ही जनता को बरगलाकर वोट हासिल
 
सचिन मिश्रा
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वादे हैं, वादों का क्या...

चुनावी मौसम में यूं तो सभी राजनीतिक दल चुनाव घोषणापत्र जारी करते हैं, और इसमें ऐसे-ऐसे वादे करते हैं जो शायद ही कभी पूरे हों। कहते हैं, हमारी सरकार आई तो ये कर देंगे..वो कर देंगे..लेकिन ये क्या कर देंगे..यह सभी जानते हैं। क्योंकि ये सियासी दल जानते ह
 
सचिन मिश्रा
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राजनीति की खातिर

महाराष्ट्र में नब्बे फीसदी जॉब स्थानीय लोगों (मराठियों) के पास हैं। यह कोई और नहीं,बल्कि महाराष्ट्र सरकार के आंकड़े बताते हैं। फिर भी यह कहा जा रहा है कि महाराष्ट्र में बाहरी लोग स्थानीय लोगों (मराठियों) से जॉब छीन रहे हैं। और इस पर पिछले कुछ समय से
 
सचिन मिश्रा
Dec 29 2009 12:02 PM
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असली भिखारी या नकली भिखारी

चुनावी बिगुल बजते ही नेताओं ने वादों की झड़ी लगानी शुरू कर दी है। हम जीतने के बाद ये करेंगे..वो करेंगे..मगर ये क्या करेंगे..वो सभी जानते हैं। इंदौर के एक विधानसभा क्षेत्र क्रमांक चार से एक भिखारी समाधान नाइक ने पर्चा दाखिल करके नेताओं को नकली और खुद
 
सचिन मिश्रा
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आंसू नहीं थमते

स्वार्थ की राजनीति न होती तो सरकारें निकम्मी न होतीं न ही उस छुट भइये की पौ बारह होती न मुंबई में उसकी बपौती होती न ही उत्तर भारतीयों की हत्या होती न ही वे विधवा होतीं वे वोट के खातिर क्या नहीं करते इनकी आंखों में आंसू नहीं थमते
 
सचिन मिश्रा
Dec 29 2009 12:02 PM
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खुद को भी तो बदलो

क्षेत्रवाद की राजनीति कर राज ठाकरे ने भले ही महाराष्ट्र की राजनीति में जगह बना ली हो, पर राष्ट्रीय राजनीति में अपना भविष्य शून्य कर लिया है। शायद उन्हें इसका आभास नहीं है अगर होता तो वह प्रेसवार्ता में यह न कहते कि सरकार बदलेगी। मेरा भी वक्त आएगा तब
 
सचिन मिश्रा
Dec 29 2009 12:02 PM
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कैसे मनाएं दीवाली?

भले ही वे दूसरे का पेट भरते हों, पर खुद अब भी भूखे पेट हैं। दिन-रात कड़ी मेहनत के बाद भी वे अपने परिवार के लिए दो वक्त की रोटी नहीं जुटा पा रहे हैं। ऐसे में वे अपने परिवार की दूसरी जरूरतें कैसी पूरी करते होंगे। उन पर सभी कहर ढाते हैं। कभी बेमौसमी बार
 
सचिन मिश्रा
Dec 29 2009 12:02 PM
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ये हैं अवाम के हितैषी

जिस तरह से हाथी के दांत दिखाने के और, और खाने के और होते हैं। ठीक उसी तरह हैं राजनेता। ये कहते कुछ हैं और करते कुछ और। राजनेताओं ने देश की क्या हालत कर दी है, यह किसी से छिपा नहीं है। चाहे वह छोटा नेता हो या बड़ा। मंत्री हो या केंद्रीय मंत्री। सब एक
 
सचिन मिश्रा
Dec 29 2009 12:02 PM
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देर से क्यों जागी सरकार?

केंद्र सरकार को जो कदम बहुत पहले उठा लेना चाहिए था, उसे उठाने में इतनी देरी क्यों की? जब जम्मू जल रहा था, तब भी केंद्र काफी समय तक हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा और अब मुंबई में उत्तर भारतीयों पर राज ठाकरे के समर्थक जो कहर बरपा रहे हैं, क्या वह किसी से छिपा
 
सचिन मिश्रा
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राज : ये कैसे काज?

इस बार गलती हुई सो हुई ! रेलवे को भविष्य में भर्ती करते समय सिर्फ महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे के समर्थकों के बारे में विचार करना चाहिए!! पूरे देश में चाहे वह सरकारी हो या निजी नौकरी सिर्फ राज के समर्थकों को ही मिलनी चाहिए!!! प्र
 
सचिन मिश्रा
Dec 29 2009 12:02 PM
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ये ड्रामा क्यों ?

राजनीति का विकास विरोधी जो रूप इन दिनों रायबरेली में देखने को मिल रहा है क्या वह ठीक है? आखिर कांग्रेस और बसपा क्या साबित करना चाहती है। रेल कोच फैक्टरी को लेकर क्यों सियासी ड्रामा चल रहा है? चूंकि रायबरेली सोनिया गांधी का चुनाव क्षेत्र है, और अपने क
 
सचिन मिश्रा
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क्योंकि तू बेकसूर है

दिल्ली इतनी महफूज न होती तो फिर क्यों दहलती आतंकी पहले ई-मेल करते हैं फिर फोन करते हैं मगर वो नहीं जागते हैं तब विस्फोट करते हैं बेकसूर निशाना बनते हैं फिर अफरा-तफरी मचती है तब उनकी नींद खुलती है और चौकसी बढ़ती है फिर बयानबाजी शुरू होती है कोई कहता ह
 
सचिन मिश्रा
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कुछ तो शर्म करो

दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा डेंगू के शिकार अपने बेटे के लिए तो खून नहीं दे पाए, मगर देश के लिए अपनी जान दे दी। मगर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन [संप्रग] अध्यक्ष सोनिया गांधी को इस शहीद (मोहन चंद शर्मा) को श्रद्धांजलि देने तक के लिए समय नहीं
 
सचिन मिश्रा
Dec 29 2009 12:02 PM
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तमाशबीन बने रहेंगे सफेदपोश

बड़े मियां वे दिल्ली दहलाते रहे ये पोशाक बदलते रहे वे दर्द से कराहते रहे ये केश संवारते रहे फिर भी उन्हें मिली क्लीन चिट मिलती भी क्यों ना चुनाव में होना जो है हिट छोटे मियां पहले राज्य सरकारों को कोसने से थे थकते नहीं अब कहते हैं एक अरब अवाम की सुरक
 
सचिन मिश्रा
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सत्ता की लालसा

सत्ता रूपी सुख है ही ऐसा जो एक बार इसे भोग ले, उसका जी इस सुख को बार-बार भोगने के लिए मचलता है। ठीक यही हाल भाजपा का है। वह सत्ता में आने के लिए बहुत जल्दी में है। इसके लिए वह कुछ भी कर गुजरने को आतुर है। लेकिन पार्टी की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि किस
 
सचिन मिश्रा
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मंत्री जी का कमाल

मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव क्या करीब आए नेता और मंत्री भी आम जन के पास आए जनता को सौगातें देने की मची होड़ इसीलिए ये मेहनत कर रहे हैं जीतोड़ कृषि व सहकारिता मंत्री गोपाल भार्गव का कमाल एक दिन में ग्यारह सौ शिलान्यास कर मचाया धमाल इसलिए नहींकि क्ष
 
सचिन मिश्रा
Dec 29 2009 12:02 PM
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कुछ तो शर्म करो?

जिनके घर शीशे के होते हैं, वो दूसरों के घर पत्थर नहीं फेंका करते...मगर उन्हें कौन समझाए? क्या वह नहीं जानते कि हमाम में सभी नंगे हैं? जब खुद का दामन ही पाक-साफ न हो तो दूसरे को कैसे खराब कहा जा सकता है। क्या राजनीति अब सिर्फ बदले की भावना तक ही सीमित
 
सचिन मिश्रा
Jul 31 2009 12:52 AM
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कसूर किसका

मायावती तो मायावती हैं, लेकिन रीता बहुगुणा जोशी भी शायद अपने पिता स्व हेमवती नंदन बहुगुणा के आदर्श भूल चुकी हैं। उत्तर प्रदेश में हंगामा मचा हुआ है। प्रदेश राजनीति के उच्च पदों पर आसीन दो महिला राजनेताओं के बीच छिड़ी जंग ने आज संसद तक को ठप कर दिया। ए
 
सचिन मिश्रा
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हादसा या लापरवाही?

अगर पिछले हादसों से सबक लिया होता तो क्या रविवार को फिर राष्ट्रीय राजधानी में सेंट्रल सेक्रेटरिएट-बरदपुर मेट्रो रेल खंड के जमरूदपुर में लेडी श्रीराम कालेज के नजदीक निर्माणाधीन मेट्रो रेल पुल के दो खंभों के बीच का हिस्‍सा गिरता। हादसे में छह मजदूर चिर
 
सचिन मिश्रा
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अकड़ किस बात की प्यारे

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ शायद यह भूल गए हैं कि पड़ोसी मुल्क ने जब-जब यहां के लोगों पर कहर बरपाया, तब-तब उसे मंुहतोड़ जवाब दिया गया। उन्हें खेमकरण और कारगिल की मार भी याद नहीं रही, तभी तो कहते हैं कि 'मुझे नहीं लगता कि पाक पर भारत ह
 
सचिन मिश्रा