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कहानी...सबकी..

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27 Mar 2010
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चंडीगढ़ जज मामले का जिन्न फिर से बाहर...

चंडीगढ़ जज मामले का जिन्न फिर से बाहर...चंडीगढ़ जज घूस मामले का जिन्न कब्र से फिर बाहर निकल गया है. विवादों में घिरे जज निर्मल यादव फिर से कानून की पेचीदी गलियों में फंस गयीं हैं, जिनसे बाहर निकलना आसान नहीं है. कुछ महीने पहले जस्टिस निर्मल यादव का
 
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सब जगह चुप, चुप्प

सब चुप्प...!ज़ुबां चुप, लब चुप, आंखें चुप, सांसे चुप, हम तुम, तुम चुप,च च च..चुप, चुप चुप..... सब जगह चुप, चुप्पयह चुप्पी जान ले लेगी ...तोड़ दे यह चुप और कब तक बढेगा यह चुप्पगाँव में जब बढ़ गया चुप्प तो शहर आया शहर में भी बढ़ गया चुप्प यहाँ, वहां, कहाँ
 
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Jan 25 2010 05:39 PM
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हरियाणा में हलकान विपक्ष--- ब्रज मोहन सिंह हरियाणा में पिछले ३० साल से सियासत तीन लालों के इर्द-गिर्द घूमती रही है।बंसीलाल और देवीलाल अब रहे नहीं। भजनलाल भी अपने समय के लाल बुझक्कड़ हैं लेकिन अब उनका सिक्का नहीं चलता। सिक्का तो छोडिये अब उनसे उनका घर
 
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लब क्यों "आज़ाद" हैं तेरे ? OR BLOODY I DON'T CARE! स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आज़ाद साहिब आज़ाद ख़यालात के व्यक्ति है। पढ़े-लिखे हैं, बातचीत में अंग्रेजी का इस्तेमाल ज़्यादा करते हैं। लेकिन ऐसा नहीं लगता कि वो जुबान के भी धनी हैं. उनके कई प्रेस कांफ्रेंस
 
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Dec 29 2009 11:43 AM
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खान=मुस्लिम=संभावित आतंकी? ये एक अमेरिकी तरीका है, जिसके हिसाब से हजारों खानों के नाम अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के डाटा बेस में कैद हैं। खान नाम का कोई परिंदा भी अगर अमेरिका की सर ज़मीन से होकर गुजरता है तो उसे रोककर पुछा जाता है कि आप कौन हैं, खान ह
 
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Dec 29 2009 11:43 AM
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फैज़ अहमद फैज़ की यह शानदार कविता पाकिस्तान में उस समय गायी गयी जब वहां जिया उल हक का आतंक था...इकबाल बालो की आवाज़ में यह कविता ज़रूर सुने.. लाज़िम है की हम भी देखेंगे... वोह दिन की जिसका वादा था, जो लोहे अज़ल में लिखा है, जो जुल्मो सितम के कोहे गरां,
 
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Dec 29 2009 11:43 AM
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वोट फॉर इंडिया.... आज सारी राजनितिक पार्टियाँ अपने मतलब की बातें कर रही है...उन्हें हमारा वोट जो चाहिए। इससे ज़्यादा उन्हें हमसे कोई वास्ता नही है। वोट लिया उसके बाद पहचाने नही जायेंगे। अपने इलाके में नज़र नही आएंगे। यह बाद सिर्फ़ कांग्रेस और बीजेपी क
 
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Dec 29 2009 11:43 AM
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फ़िल्मी पर्दे और हकीक़त का पंजाब पंजाब में किसी भी राजमार्ग की यात्रा कर लें, आपको यकीन हो जायेगा कि जिस सूखे की बात राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में की जा रही है, उसका नामोनिशान नहीं है पंजाब में। पिछले दिनों मैनें चंडीगढ से भठिंडा तक का रास्ता सडक मार्ग से
 
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जब आँखें टीवी पर उह-आह सुनकर खुली सुबह मेरी आंखें खुली TV पर उह-आह-आह सुनकर हुयी। रामपुर से सांसद जयाप्रदा बैलगाड़ी से बाढ़ प्रभावित इलाके का दौरा कर रही थी। गाड़ी हिचकोले खा रही थी। हो सकता था कि गाड़ी अगर डूब जाती तो सांसद भी बह जाती.तैरना नहीं आता था,
 
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यादों के ज़ख्म दिखते कहाँ हैं ? ********************** तुम मुझे याद आती हो सावन की तरह भादो की तरह गुजरे हुए मौसम की तरह ************* तुम मुझे याद आती हो दिल की तड़पन की तरह बचपन की तरह ********************* कह दो कि नहीं जायेंगे सावन की तरह भादो की तरह
 
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कब तक खाप का कलंक ढोएगा हरियाणा ?

खाप नहीं बनायेगा कल का भारत !खाप जब कोई तुगलकी फैसला लेता है, तो हमारी प्रतिक्रिया यही होती है कि सरकार क्यों नहीं कुछ करती है? न्यायपालिका क्यों नहीं कुछ करती है? हमें लगता है कि समाज ६ ठी सदी में वापस जा रहा है। सभ्य समाज की कुछ ऐसी ही प्रतिक्रिया
 
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शहीद उधम सिंह आज भी ज़िंदा हैं। इनकी शहादत के 69 साल पूरे हो गए। इनके जज़्बे को पूरे देश का सलाम। १९१९ में जलियाँवाला बाग़ में हुए कत्लेआम का बदला लेने के लिए उधम सिंह अमेरिका, जर्मनी और बाकी देशों में भेष बदलकर रहे। आखिरकार ३१ जुलाई, १९४० को जनरल डायर को
 
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सबके लिए धरम-करम का अपना नज़रियासबके लिए धर्म की परिभाषा अलग-अलग है। ज़रूरी नही कि आप तीर्थ स्थलों का दर्शन करें, दो डुबकी लगा बस हो गया। आपको परमिट मिल गया, फ़िर आप पाप करते रहें आने आने वाले कई सालों तक। कतई नही।हम हजारों सालों से यहाँ आते रहे हैं,
 
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Jul 31 2009 08:41 AM
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अब ये तालिबानी पंच और कितना खून करेंगे ?आज सुबह-सुबह एक बुरी और मनहूस ख़बर मिली। गोत्र विवाद के चलते एक प्रेमी को हरियाणा के सिंहवाल गाँव में पीट-पीट कर मार दिया गया। अब तक तो शायद इस ख़बर को आपने न्यूज़ चैनलों में देख ही लिया होगा। घटना ह्रदय विदारक थी।
 
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Jul 23 2009 08:05 PM
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इस खाप पर बहस हो।

बहुत हो गया. एक बहस होनी चाहिए। एक सार्थक बहस होनी चाहिए खाप पंचायत को लेकर। हरियाणा के झज्जर में एक आग सुलग रही है। पंचायत इस बात पर आमादा हैं कि रविंदर और शिल्पा अपनी शादी तोड़कर तलाक़ ले लें। दरअसल दोनों एक ही गोत्र से हैं, इसलिए दोनों भाई बहन हुए
 
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वो खुशबू पीछे रह गयी आसमान पर ये बादल घनेरे हैं ... कुछ बूँद भी झर चुके हैं मैं तेरे आँचल की छाया में बैठा हूँ , आ ँख मूंदे। खुशबू जो सालों पहले छोड़ आया था मेर े अन्दर समा रही है ... यकायक मेरा - तेरा रिश्ता भी तो पुराना है जब उमड़ते - घुमड़ते बादल क
 
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अब तो हरा हरा दिख रहा है... कांग्रेस के लोक सभा चुनाव में छाने के बाद अब शेयर मार्केट में हरियाली ही हरियाली दिख रही है। हमारा मन भी तो हरा हो गया।सारे चैनल का मन हरा हो गया।सारे रिपोर्टर और एंकर के चेहरा पर भी स्माईल आ गया। ऐसे ही खुशी बरक़रार रखिये
 
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अगर तीसरा मोर्चा बना ले सरकार?? ज़रूरी नही कि इस दफा मनमोहन सिंह ही प्रधान मंत्री बने। ज़रूरी नही कि आडवानी का प्रधानमंत्री बनने का सपना भी पूरा हो। तीसरी पार्टियाँ काफी सीटें जीत रही हैं। ऐसे में मुलायम, मायावती, लेफ्ट, जयललिता सब प्रधानमंत्री बनाना
 
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जूते की मनोदशा..... *जूता फेंकने के लिए जूते का मंहगा होना ज़रूरी नही...... *जूते के बदले चप्पल से भी काम चलेगा *जूता लगे तो भी ठीक, न लगे तो भी ठीक....दोनों ही हालत में काम करता है. *जूता फेंकने के लिए निशाना ज़रूरी नही.. *ज्यादातर निशाने से बाहर गय
 
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त्रस्त है लोकतंत्र

वोट मांगने के लिए निकल पड़ी है..... नेताओं की जमात... सफ़ेद कुरते-पायजामे में लम्बी कारों में नतमस्तक हर दरवाज़े पर रुकता है उनका कारवां पूरब से पश्चिम से उत्तर से दक्खिन से आकर हर जगह धुल ही धुल नज़र आता है और कलरव। कोलाहल में मुद्दे खो जाते हैं गरीब, म
 
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ज़रा सोचिये, ज़रा जूता तो खोलिए... सोचिये क्या होगा जब आपको कहा जाएगा कि आप कृपया जूता उतारकर प्रेस कांफ्रेंस में जायें। मैं तो धार्मिक बातों में टांग नही अडाता लेकिन मुझे दुःख है कि आने वाले दिनों में हम पत्रकार जूता पहनकर पत्रकार सभा में नही जा सके
 
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पॉश इलाके में रहता हूँ..

मैं एक बड़े मकान में रहता हूँ जहाँ बड़े-बड़े कमरे हैं कमरे के साथ बाथ रूम भी है बाथ रूम में झरने भी चलते हैं। बड़ी बड़ी खिड़कियाँ है हवा सांय सांय चलती है सामने चमकती सड़क है, जहाँ गाडियां सरपट दौड़ती है... शहर का पॉश इलाका है लोगों से मिलता हूँ तो कह
 
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वरुण क्या अब भी गांधी हैं ?

बहस चल पड़ी है कि वरुण गाँधी की पहचान क्या है? क्या हैं वरुण? एक हिन्दू, एक पारसी, एक सिख या और कुछ। लेकिन ये तय है कि वोह एक महात्मा तो कतई नहीं हो सकते, भले ही उनके नाम के पीछे गाँधी शब्द जुडा हुआ है। मशहूर लेखक अनिल धारकर ने कुछ दिनों पहले वरुण गाँ
 
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शर्मनाक है चुप हो जाना

रामजी की चिडिया राम जी का खेत खा ले चिडिया भर-भर पेट... बचपन से यह कविता मैं पढ़ रहा हूँ, जिसमें किसानो की सहृदयता को दिखाया गया है। किसानो को वाकई में एक चिडिया तक की फ़िकर है। लेकिन बात काफी पुरानी हो गयी है। किसान सबका पेट भरता है..लेकिन किसानो की फ़
 
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अब सरदार मनमोहन सिंह बोलेंगे...

हम बोलेगा तो बोलोगे कि बोलता है सबकी सुन ली। अब प्रधान मंत्री के बोलने की बारी है। हम जानते हैं कि मनमोहन सिंह ज़्यादा बोलते नही हैं। बोलते हैं तो सब सुनते हैं। यह वाकया हम देख चुके हैं बीते कुछ सालों में। दरअसल सियासत में बोलना मजबूरी हैं। आप बोलते
 
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हमार लइकी चिन्हात नाही.....

जय हो। मिर्जापुर की पिंकी ऑस्कर जीत गयी. उसकी माँ को नही पता ऑस्कर क्या होता है। लेकिन उससे अच्छा लगा की उसकी बेटी को सभी देख रहे थे। उसकी बेटी आज पहचान में नही आ रही थी. पिंकी ऑस्कर की चकमक देखकर खिलखिला रही थी। कल तक उसकी तरफ़ कोई देख नही रह रहा था
 
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कहाँ भूला....कुछ तो नही..

हमारे सपने तलाश लाते हैं वही पुराने दोस्त वही पुराने घर.. वही बाग़ बगीचे वही पुराने इमली के पेढ़ वही पुराने हमसफ़र वही... मास्टर साब के हाथों पिटने की सज़ा वही बसों के पीछे झूलकर स्कूल जाना, रस्ते में लोगों को मुंह चिढाना वही साइकिल से गिर कर घुटने का
 
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हम बदलते क्यों हैं...? कई दिनों के बाद आज धूप खिली है... बारिशों में जैसे मन का मैल धुल सा गया है धूप गुनगुनी हो गयी है... कई दिनों के बाद हवा में गर्मी बढ़ गयी है... और जैसे आसमान का किनारा भी नज़र आने लगा है... कितना क़रीब... कई दिनों के बाद मौसम कित
 
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कभी तितली कभी मच्छर बम....

कभी सुना है तितली बम क्या होता है ?? कभी सुना था मच्छर बम क्या होता है ? चौंकिए नही मैंने भी नही सुना था। लेकिन टीवी पर जब से तालिबान का जंग चल रहा है। नए-नए जुमले गढे जा रहे हैं। जंग को और अधिक रोमांचक बनने के तरीके निकाले जा रहे हैं। अभी रात के १०
 
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गाज़ा और दुनिया के तमाम भूखे बच्चे...

नीचे एक पत्र है, जो गाजा में रह रहे एक बच्चे ने इस्राइल के अपने दोस्त के नाम भेजा है। पत्र मर्मस्पर्शी है। गाजा में युद्ध की विभीषिका इस कदर है कि इसमें बच्चे सबसे ज़्यादा शिकार हो रहे हैं। ऐसा तो हर युद्ध में होता है जहाँ कहीं भी हिंसा होती है। बच्च
 
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सबके लिए क्या अलग-अलग कानून होगा ?

ऐसा कोई कानून नही है, जो कहता हो की आपको ईमानदार होना ही चाहिए, लेकिन अगर आप बेईमानी करते हैं, तो आपको बख्शा नहीं जाएगा...कानून आपसे निबट लेगी। अगर आप भारतीय दंड संहिता की बात करें आम लोगों के लिए यह बात १६ आने सच है। {Chief Justice of US Supreme Cou
 
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ओबामा@चेंज.कॉम

रात भर जग कर बराक ओबामा का शपथ ग्रहण देखता रहा. पूरी दुनिया देख रही थी। मैं कोई अकेला नही था। अश्वेत लोगों की आँखों में खुशी के आंसू थे। अश्वेतों के साथ वहां के श्वेत भी नाच रहे थे. एक दूसरे को चूम रहे थे. रात भर मौज मस्ती चलता रहा. एक अंडरडॉग अफ्रीक
 
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ज़रदारी से बड़ा लुच्चा कौन होगा?

ज़रदारी मुंबई हमले के बाद कितनी बार झूठ बोल चुका है, इसकी गिनती वोह खुद भूल चुका होगा। ज़रदारी को याद दिलाना होता है कि दो दिन पहले उसने क्या बोला था। दुनिया को बताने के लिए पाकिस्तान ने कहा कि मौलाना मसूद अजहर पाकिस्तान में नज़रबंद है। दो दिन बाद कह
 
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भारत को ऑस्कर नही चाहिए!!! दोस्तों मुझे बहुत खुशी हुयी जब सारे न्यूज़ चैनल पर ये दिखाया जा रहा था कि ऐ. आर. रहमान को "स्लम डॉग मिलियनर "में संगीत देने के लिए गोल्डन ग्लोब अवार्ड से नवाजा गया। मेरा सीना भी फूल गया था। लेकिन अब वापस मेरा सीना पचक गया..
 
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तेल के खेल में सरकार चित्त !!!

कहाँ है सरकार? क्या कर रही है? क्या हो रहा है पूरे मुल्क में? सरकार है भी या सो रही है। मालूम नही। मुझे तो लगता है कि यह किसी लड़ाई से कम नही है..!!! सडकों पर अफरा-तफरी फैली है। हर कोई कहता है टैंक फुल कर दो। टैंक फुल कर दो। कौन है इस अफरा तफरी के लिए
 
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मुझे ऐक्ट्रेस नही, डॉक्टर बनना है पापा....

मेरी बेटी मुझसे अक्सर सवाल करती है, कि हर दिन टीवी चैनलों पर आतंकवादी क्यों आते रहते हैं, हथियार लेकर, उनकी कौन सी दुनिया है, जहाँ से वो आते हैं, हमारी दुनिया को बर्बाद करने, क्या दुश्मनी है उनको हम सबसे, पूछती है...पापा वोह भी तो हमारी तरह ही हैं...
 
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