घुमक्कड़'s Image

घुमक्कड़

http://dhaba.blogspot.com/
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
05 Feb 2010
कुल प्रविष्टियां
13
पाठक भेजे
467
पसंद
2
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
35.92
पसंद करें
1
नापसंद करें

किसने चुराया इब्नेबतुता का जूता.

इश्किया फिल्म के गाने इब्न बतूता पर विवाद हुआ है.पेश है सर्वेश्वर जी एक कविता इब्नबतूता का जूता.इब्नबतूता का जूता.इब्नबतूता पहन के जूता निकल पड़े तूफान मेंथोड़ी हवा नाक में घुस गयीघुस गई थोड़ी कान मेंकभी नाक को, कभी कान को मलते इब्नबतूताइसी बीच में निकल
 
अनिल दुबे
पसंद करें
0
नापसंद करें

सबसे बडा लोकतंत्र, वोटतंत्र या नोटतंत्र ?

२२ जुलाई २००८ का दिन भारतीय लोकतंत्रीय इतिहास का सबसे काला दिन। भारतीय लोकतंत्र का मंदिर कहे जाने वाली संसद में बहस चल रही होती है।संप्रग सरकार के मुखिया मनमोहन सिंह द्वारा पेश किये गये विश्वास मत पर बहस। अचानक चारो ओर नोट ही नोट दिखाई देखने लगते हैं
 
अनिल दुबे
Dec 29 2009 11:57 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

इंसानियत के नाते

इनसे मीलिये.ये हैं जुगल केवट और मुरलीधर केवट. मध्यप्रदेश के टिकमगढ ज़िले के जतारा प्रखंड में बंधा गांव के रहने वाले ये दोनो भाई आज एक मिसाल बन गये हैं। जब पूरा बुंदेलखंड पीने के पानी के लिये तरस गया था इन भाईयों ने गांववालों को पानी पिलाने के लिये ना
 
अनिल दुबे
Dec 29 2009 11:57 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

सबसे सेक्सी जीव कौन?

आज मैं अपनी एक महिला सहयोगी के साथ कैंटीन में चाय पी रहा था।कुछ कुछ बातें हो रही थीं। तभी उन्होनें कहा, "पता है सबसे सेक्सी जीव कौन है?" मैनें खुब सारे जीवों के नाम गिनाये। तब मुस्कुराते हुए उन्होनें कहा ,"तुम नहीं समझ पाओगे। जानते हो सबसे सेक्सी जीव
 
अनिल दुबे
Dec 29 2009 11:57 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

जूदेव के कुत्ते

क्या आप दिलीप सिंह जूदेव को जानते हैं? ये वही जूदेव हैं जो अपने छत्तिसगढ के कुछ इलाकों में अपने घर वापसी(पुनर्धमांतरण) कार्यक्रम को लेकर चर्चा में रहे हैं.इसके अलावा तहलका के स्ट्रींग आपरेशन में जूदेव को पैसा लेते हुए दिखाया गया था.उसमें जूदेव को यह
 
अनिल दुबे
Dec 29 2009 11:57 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

मोदी जीता था मोदी जीता है और मोदी जीतते रहेंगे

आज गुजरात में मोदी की जीत पर तमाम बातें हो रही हैं. तथ्यों की चीर फाड हो रही है. कई कारण गिनाये जा रहे हैं. कोई सोनिया गांधी के मौत के सौदागर वाले भाषण को दोषी बता रहा है कोई गुजरात के विकास के माडल को जिम्मेदार ठहरा रहा है.कोई कुछ और.लेकिन एक बात मै
 
अनिल दुबे
Dec 29 2009 11:57 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

घर भी छूटे और घाट भी !

मुहल्ले में जाति के उपर चल रही बहस के बीच में मैने भी कुछ कहा था एक पत्र के माध्यम से. इसके बाद दिलीप भाई ने उस पत्र क जवाब भी दिया.उस पर मुझे कुछ कहना था. मैने उसे सीधे अविनाश दादा के पास भेज दिया. हालांकि उन्होनें उसे पोस्ट तो नहीं किया हां मोहल्ले
 
अनिल दुबे
Dec 29 2009 11:57 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

दुबेजी का पत्र

मुहल्ले में बहुत दिनों से एक दुबेजी पर चर्चा हो रही थी.वो दुबे जी लैट्रीन साफ़ करते हैं.मुझे भी मिल गये.उन्होनें मुझे मुहल्ले वालों के नाम एक पत्र दिया. कहा कि इसे सही जगह पहुंचा दें.मैने उस पत्र को मुहल्ले के लोगों तक पहुंचा दिया है.लेकिन आप भी उसे द
 
अनिल दुबे
पसंद करें
0
नापसंद करें

घुमक्कड़

आज सुबह आफ़िस पहुंच कर ज्योंहि आनलाईन हुआ,मेरा ध्यान एक दोस्त के स्टेटस मैसेज पर गया.खुबसूरत पंक्तियां थीं.उन्होनें बताया कि ये कविता अमेरिकन कवियत्री एडना विंसेंट मिले ने लिखा है.मिले को पहली ऐसी महिला होने का गौरव प्राप्त है जिसे पुल्तिज़र पुरस्कार म
 
अनिल दुबे
Dec 29 2009 11:57 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

भारतीय लोकतंत्र की तस्वीर

सपने हमारी आंखों ने भी देखे थे
 
अनिल दुबे
Dec 29 2009 11:57 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

लापोड़िया की राह

राजस्थान में एक गीत बहुत ही मशहूर है। इस गीत का मतलब है... धरती पानी के लिए प्यासी है और उसने अपने पतिदेव इंद्र को बुलावा भेजा है। इंद्रदेव आते हैं और अपनी प्रेयसी का प्यास बुझाते हैं। लेकिन कभी कभी इंद्रदेव रूठ जाते हैं। धरती की प्यास नहीं बुझ पाती
 
अनिल दुबे
Dec 29 2009 11:57 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

स्वांतः सुखाय...

बहुत दिन पहले की बात है जब हमने भी अपना एक ब्लाग बनाया.सोचा जब भी मैं कहीं कुछ नहीं कह पाउँगा,ब्लाग पर कहूंगा. कहने को बहुत कुछ था मेरे पास लेकिन, मैं ये सोचता था कि पढेगा कौन? साथ में कस्बे वाले रविश कुमार की तरह मुझे भी लिखने से ज्यादा मह्त्वपूर्ण
 
अनिल दुबे
Dec 29 2009 11:57 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

दोपहर के अलसाये पल

तुम्हारी समँदर -सी गहरी आँखों में, फेंकता पतवार मैं, उनींदी दोपहरी में - उन जलते क्षणों में, मेरा ऐकाकीपन और घना होकर, जल उठता है - डूबते माँझी की तरह - लाल दहकती निशानीयाँ, तुम्हारी खोई आँखों में, जैसे "दीप ~ स्तंभ" के समीप, मँडराता जल ! मेरे दूर के
 
अनिल दुबे
Dec 29 2009 11:57 AM