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आलोक वार्ता

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31 Dec 2009
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शहरों के बच्चे ज्यादा तेज क्यों ?

दरअसल इस ब्लॉग पर मैं समसामयिक विषयों पर विचार व्यक्त करता रहता था, मगर समसामयिक घटनाओं में ऐसी-ऐसी उथल-पुथल मचने लगी कि वक़्त की राजनीति मेरे समझ से बाहर हो गयी। अब भला इतने लोग इस्तीफे-उस्तीफे दे रहे हैं, कहीं भी कुछ भी हो रहा है, अब कैसे समझ में आए
 
आलोक कुमार
Dec 29 2009 11:51 AM
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आतंक का रूप, कितना कुरूप

पिछले ४८ घंटों से पूरा मुंबई आतंक के साए से सहमा हुआ है, और उस साए को पूरी तरह से हटने का अब भी इंतजार कर रहा है । इस वक़्त माहौल में दहशत दिखता है तो सड़कों पर सूनापन सा, लोगों ने अपने टी.वी.चैनल पिछले दो दिनों से बंद नहीं किया है और कुलाबा और नरीमन
 
आलोक कुमार
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बुद्धिमता

बुद्धिमता' एक बहुत ही अच्छा शब्द है, सम्भव है कि इससे आप भी परिचित होंगे, शायद इस शब्द से आपका भी कोई रिश्ता हो । पर मुझे इससे अपने रिश्ते होने पर बराबर शक रहा है , शायद यही कारण है कि इसपर आज एक पोस्ट भी लिखने जा रहा हूँ । कारण ये है कि बचपन से आजतक
 
आलोक कुमार
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धुम्रपान पर प्रतिबंध का नियम कितना प्रभावकारी

आज बापू के जन्मदिवस की शुभकामनाओं में समूचे देश को एक नियम का सौगात मिला है और हम उस नियम का स्वागत करते हैं। आज से सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करना कानूनी तौर पर अपराध माना जायेगा और धूम्रपान करने वालों को २०० रूपये जुर्माना भी हो जायेगा। अपने फिक
 
आलोक कुमार
Dec 29 2009 11:51 AM
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सी.ई.ओ. की हत्या एक उभरती चेतावनी

आज की एक ख़बर ने भारतीय उद्योग जगत का चेहरा दुनिया में शर्मशार किया है। अगर किसी कारखाने में व्यवस्था और कामगारों के बीच हाथापायी भी हो जाए तो ये उस देश की उद्योग नीति की कमजोरी को उजागर कर देती है परन्तु यहाँ तो मामला हत्या की हो गयी है। जिस तरह राज
 
आलोक कुमार
Dec 29 2009 11:51 AM
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दिल्ली पुलिस के जज़्बे को सलाम !!

हिन्दुस्तान के दिल दिल्ली को धमाकों से घायल करने वाले आतंकी चैन से नहीं रह सके। दिल्ली के सपूत पुलिसवालों ने उन आतंकियों का जीना जिस तरह से हराम कर दिया है वह आनेवाले समय में किसी भी आतंकी का हौसला पस्त कर देगा। जिस तरह से दिल्ली पुलिस चुन-चुन कर आतं
 
आलोक कुमार
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सिमी के साहस की सीमा चरम पर

सिमी जिसे अब तक सारे लोग मात्र छात्र-संघ या गुट समझकर ढील देते रहे, आज उसका साहस चरम सीमा तक पहुँच गया है। भारत की राजधानी दिल्ली में धमाके करने के लिए कितने साहस और पागलपन की जरूरत है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। दिल्ली में धमाका करने का मतलब एक आ
 
आलोक कुमार
Dec 29 2009 11:51 AM
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जयाजी के हिन्दी प्रेम को चुकानी पडी महंगी कीमत

सचमुच जयाजी को अगर ये पता रहता कि उसे और अमिताभ को उसके हिन्दी-प्रेम की इतनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी तो वह भी हिन्दी के वजाय अंगरेजी से ही काम चला लेती। अब एक स्टार होने का मतलब ये नहीं कि उसे ग़लती करने का अधिकार भी न हो । क्योंकि मैं तो अक्सर ये गलती
 
आलोक कुमार
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बाढ़ से बिलखता बिहार

बिहार में कोसी के तांडव का प्रकोप भुगत रहा एक गाँव. जिस तरह ये मकान और पेड़ पानी में डूबे हुए हैं उससे हम इस वक्त बिहार में बाढ़ की भयावहता की कल्पना कर सकते हैं। अभी तेज बरसात रुक भी नहीं रही है और कोसी का जलस्तर भी बढ़ रहा है । ये सोचना मुश्किल हो र
 
आलोक कुमार
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कोसी का पागलपन

बिहार की अद्भुत नदी कोसी अब पूरी तरह पागल हो गयी है। और इसके पागलपन का इलाज केन्द्र या राज्य सरकार के पास कब आएगी ये पता नहीं । फिलहाल पते की बात ये है कि कोसी का जलस्तर अब भी बढ़ता जा रहा है और बिहार में सियासी लोग राजनीति से बाज नहीं आ रहे हैं। मुझ
 
आलोक कुमार
Dec 29 2009 11:51 AM
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कितने सारे आय.आय.टी.!!!

ये कहानी थोडी ऎसी है कि एक बार मंत्रीजी को सपने में साक्षात भगवान के दर्शन हो गए। भगवान उनसे पूछ बैठे कि आख़िर उन्होंने दुनिया को दिया ही क्या है। मंत्रीजी तपाक से बोल पड़े:- सात आय. आय .टी. । सुबह नींद से जागकर मंत्रीजी को शंका हुई कि कहीं उसने भगवान
 
आलोक कुमार
Dec 29 2009 11:51 AM
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अर्थ खोता हुआ आज का जीवन

आज हम जीवन-मूल्यों को तो भूल ही चुके हैं, अब जीवन के मूल्य को भी भूलने लगे हैं । आज ही समाचारों से पता चला कि पुणे में एक २५ वर्ष के नवयुवक ने अपने कार्यालय से कूदकर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या तो अब आम बात हो गयी है, मगर वो आई.आई.टी. का पूर्व छात्र थ
 
आलोक कुमार
Dec 29 2009 11:51 AM
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रामू की नयी चलचित्र से प्रभावित थे आतंकी

अहमदाबाद में पिछले दिनों हुए जानलेवा बम धमाकों को अंजाम देने वाले आतंकी रामगोपाल वर्मा की नई चलचित्र 'कान्ट्रेक्ट ' से प्रभावित थे । चलचित्र के अन्तिम दृश्यों में खलनायक एक सिलसिलेवार बम-धमाकों की योजना बनाता है । वो योजना बहुत ही खौफनाक थी, जिसे नाय
 
आलोक कुमार
Dec 29 2009 11:51 AM
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पानी-पानी होती मुंबई की सड़कें

चौंकिये मत, सचमुच इस वक़्त मुंबई की सड़कें पानी-पानी हो रही है । ऎसी बात नही है कि सड़कों ने कोई गुनाह किया हो और मुझे ऐसा कहना पड़ रहा है , दरअसल ये तो घनघोर बरसात की करतूत है । मानसून की मुसलाधार बौछार ने मुंबई के सड़कों का नजारा ही बदल कर रख दिया है
 
आलोक कुमार
Dec 29 2009 11:51 AM
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सिलसिलेवार धमाकों से त्रस्त है नगर-जीवन

अभी बंगलौर में बम धमाकों की चीख थमी नहीं थी कि अहमदाबाद के सिलसिलेवार धमाकों ने पूरे देश को दहला कर रख दिया । काफी सोच-समझ और सतर्कता से किया गया ये कांड निश्चित रूप से हमारी सुरक्षा समीतियों के लिए एक काला अध्याय छोड़ता है । अभी हाल ही में जयपुर में
 
आलोक कुमार
Dec 29 2009 11:51 AM
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मासूम मन में अपराध की घुसपैठ

मैं बच्चों के मासूम मन की बात कर रहा हूँ । आजकल अधिकांस बच्चे अपने ज्यादातर समय टी०वी० देखकर बिताया करते हैं। वैसे भी अब इस विज्ञान-जगत में सामाजिकता इतनी संकुचित हो चुकी है कि लोग अकेला रहने में ही स्वतंत्रता का अनुभव करते हैं । और इसका असर बच्चों प
 
आलोक कुमार
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अंतर्जाल पर सिमटती भावनाएं

सचमुच आज विज्ञान और तकनीकी ने इस तरह हमपर अधिकार कर लिया है कि हम भावनाओं को बिल्कुल ही भूलते जा रहे हैं । मगर भावना कुछ ऎसी चीजों में आ जाती है जिसे मनुष्य खुद से जुदा नही कर सकता । और हाँ इसे हम अलग नही कर पाए हैं बल्कि हमारी भावनाओं को तकनीक ने उध
 
आलोक कुमार
Dec 29 2009 11:51 AM
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कहानी जिन्दगी की

कहानी- ये शब्द सुनते ही आपके मन में पात्र और घटनाएं याद आ जाती है । सचमुच कुछ पात्र और घटनाओं का सामंजस्य ही कहानी का निर्माण करता है । कुछ मनगढ़ंत तो कुछ कहानी वास्तविक भी होती है जो किसी जीवन से संबंध रखती है । इसका मतलब ये कह सकते हैं कि कहानियां
 
आलोक कुमार
Dec 29 2009 11:51 AM
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स्वर्ण जयंती

इस साल हमारा संस्थान स्वर्ण जयंती मना रहा है ,पूरे पचास वर्ष जिसमें उसने सफलता के कई कीर्तिमान स्थापित किये हैं। और आज विश्व भर में अपनी उच्च तकनीकी के लिए जाना जाता है । नेहरु जी ने जो पचास वर्ष पहले एक सपना देखा था उसे हमने साकार कर दिखाया । ये स्व
 
आलोक कुमार
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मेरी लेखन रूचि

मैं जब भी लिखने कुछ बैठता हूँ ,समझ नहीं पाता हूँ की आख़िर लिखूं क्या ? कोई कविता या कहानी ,कोई व्यंग या कोई लेख । कुल मिलाकर समझ लीजिये की पूरे ऊहापोह में रहता हूँ और मूझे सबसे ज्यादा डर रहता है आलोचकों की टिप्पणियों से । पता नहीं कब किस बात को लेकर
 
आलोक कुमार
Dec 29 2009 11:51 AM
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सुपरमैन का IIT में आरक्षण

मैं सुपरमैन हूँ और भारत सरकार से IIT में आरक्षण के लिए आवेदन कर रहा हूँ। मैं बड़े समय से पूरी दुनिया में 'crime fight' कर रहा हूँ, पर कोई नौकरी नही लगी है। सुना था IIT में admission के बाद नौकरी मिल जाती है, मगर JEE में पास होना थोड़ा मुश्किल है। इसीलिए
 
आलोक कुमार
Nov 15 2009 03:56 PM
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मुझे आश्चर्य है इस कलम पर

कभी-कभी मुझे इस कलम पर आश्चर्य होने लगता है। जो बात मुझे भी पता नहीं रहती है,उसे भी ये लिख देती है, व्यक्त कर देती है। कभी-कभी तो बहुत आश्चर्य हो जाता है, जो ये कलम लिख देती है वह होने लगता है। हँसिये-हँसिये आपको लग रहा होगा कि ये पागल लेखक अपनी फंता
 
आलोक कुमार
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विदेश मत जाओ पारो

मेरी प्रिये पारो बहुत बहुत प्यार!! मैं देवदास हूँ, सब कुशल-मंगल है, आशा करता हूँ कि तू भी कुशल ही होगी। चुन्नीलाल कल मदिरालय में मिला था, मुझसे कह रहा था कि पारो हारवर्ड कालेज पढने लंदन जा रही है। सुनकर मुझे बहुत दुःख हुआ, और इसी दुःख में बहुत सारा म
 
आलोक कुमार
Oct 14 2009 07:49 PM
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कवि /कलाकार अक्सर अपने पुराने ेप्रदर्शन की ही पुनरावृति करते हैं

पता नही ऐसा क्यों, मगर आप कितने भी बड़े कवि को बड़े-बड़े मंचों पर सुनेंगे तो यही लगेगा कि वे पुराना प्रदर्शन ही दोहरा रहे हैं। हाल ही में जो कवि-सम्मलेन हुआ था उनके कलाकार पहले भी सन्स्थान में आए हुए थे, सब बातें नई और चुटीली कर रहे थे लेकिन कविता वह
 
आलोक कुमार
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सोचने के लिए हम किस भाषा का प्रयोग करते हैं?

मैं जानता हूँ कि आपका जवाब हिन्दी ही होगा और हो सकता है कि आप हिन्दी में ही सोचते हों मगर क्या इसका मतलब हम ये मान लें कि हम अपनी मातृभाषा में ही सोचते हैं। बहुदा मैंने बहुत लोगों के मुंह से ये कहते सुना है कि अमुक भाषा से तो मुझे सम्बन्ध रखना ही है,
 
आलोक कुमार