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शहर भोपाल
मंज़ूर एहतेशामयह बड़ी लाचारी है कि खुद अपनी बात किये बिना आप अपने शहर को याद नहीं कर पाते। सिर्फ़ इतना ही नहीं, खुद तक पहुँचने के लिए पहले आपको अपने बुजुर्ग़ों की उँगली पकड़ना पड़ती है और बुज़ुर्गों का ज़िक्र उत्तर-आधुनिक आख्यान-सा लगता है, जो कभी-कभी, मन को
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Jun 10 2010 12:45 PM


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