12 -13 जून को पटना मे भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई और शायद सभी जानते है कि इसमे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ साथ भाजपा के 6 राज्यों के सीएम भी शामिल हुए .हालाकि लेकिन गुजरात और नरेंद्र मोदी का मसला हमेशा से एक अलग विषय रहा है. 12 जून को
बॉक्स ऑफिस पर जून का पहला हफ्ता प्रकाश झा की "राजनीति" के रंग में सराबोर है। बड़े सितारे, भव्य दृश्य, बड़े-बड़े पोस्टर्स, आकर्षक ट्रेलर्स, जमकर प्रचार ने इस फिल्म को बहुप्रतीक्षित बना दिया था। हफ्ते की शुरुआत में सिनेमाघरों में जमकर बरसी भीड़ इसे सुपरहिट
आखिर सच्चाई जुबां पर आ ही गई किसी ने बिल्कुल सही कहा है हकीकत को ज्यादा दिनों तक आप दबा तक नही रह सकते है और किसी ना किसी बहाने वो आपकी जुबां पर आ ही जाती है. दिल्ली की मुख्यमंत्री पद पर 11 साल से लगातार शोभायमान श्रीमती शिला दीक्षित ने एक निजी चैनल पर
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के नए प्रवेश प्रक्रम के विरुद्ध और पत्रकारिता की पढ़ाई के स्तर को बचाने के लिए हमारी पहल में आपने कल पढ़ा हमारे साथी मलयांचल मिश्रा की अपील को और आज हमें एक पाती भेजी है, ज़ी छत्तीसगढ़ में कार्यरत
प्रिय साथियो,आपको ये जानकर बड़ा ही आश्चर्य व दुख होगा जैसा की मुझे भी हुआ, की हमारे विश्वविद्यालय ने हमारे २ साल की अथक मेहनत व प्रयास को मिटटी में मिलाने की पूरी तैयारी कर ली है! मुझे मालुम है की २ साल जिस परिवार के साथ हमने कुछ दुखद व सुखद पल बिताये है
देश की पत्रकारिता को करीब पिछले 2 दशक से कई जुझारु, उत्कृष्ट और सम्मानित पत्रकार देने वाला भोपाल का हमारा माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय एक नए और तुगलकी फैसले का शिकार हो गया है। पत्रकारिता विश्वविद्यालय में जो नई घटना सामने आई है
श्री श्रीरविशंकर के आश्रम में गोली चली। पिस्तौल की यह गोली करीब सात सौ फीट दूर से चली थी और एक आश्रमवासी का पेंट फाड़ते हुए जमीन पर गिर पड़ी थी। यह गोली अगर लग भी जाती तो कंकर से ज्यादा घाव नहीं करती। मगर अब रविशंकर को जैड प्लस सुरक्षा चाहिए। उनका तर्क
कहां है नक्सलियों के हमदर्द6 अप्रेल 2010 दंतेवाड़ा का ताड़मेटला कांड 76 बेगुनाह सैन्य जवानों की जान, बीजापुर के आवापल्ली 15 एसपीओ सहित 31 बेगुनाह की जान, सुकमा मे विस्फोट करके 30 जवानों की जान , 28 मई झारग्राम के पास रेलवे ट्रेक पर विस्फोट कर 150 से
आज हिन्दी पत्रकारिता दिवस है। 184 साल हो गए। मुझे लगता है कि हिन्दी पत्रकार में अपने कर्म के प्रति जोश कम है। तमाम बातों पर ध्यान देने की ज़रूरत है। उदंत मार्तंड इसलिए बंद हुआ कि उसे चलाने लायक पैसे पं जुगल किशोर शुक्ल के पास नहीं थे। आज बहुत से लोग पैसा
आज बुद्ध जयंती है....हम में से ज़्यादातर इसे शायद केवल इसलिए याद करते हैं क्योंकि कई जगह इस दिन सरकारी कार्यालयों में अवकाश होता है.....चलिए आज एक बार बस एक बार बुद्ध को आंख बंद कर के याद करें और स्मरण करें वो रास्ता...अहिंसा और शांति का जो उन्होंने
अविनाश जी के साथ मैं खड़ा हूं आपके इंतज़ार में....तो मिलते हैं सही वक्त पर...सही जगह...सही इरादों को....सही अंजाम पर पहुंचाने....जाट धर्मशालानांगलोई....बस कुछ ही घंटों बाद....
आज एक ऐसे साथी की दो कविताएं पढ़वाना चाहते हैं जो कल हम सबको अलविदा कह गया....कविताएं छोटी हैं पर बेहद संवेदनशील हैं, पहले कविता पढ़ें फिर कवि का परिचय भी..... हो सके तो...मेरी रंगीन कब्र पर दीप मत जलाना हो सके तो जीते जी मेरे अंधेरे घर में उजाला कर
27 मई 1964 को दोपहर दो बजकर बीस मिनट पर आल इंडिया रेडियो की विविध भारती पर पर चल रहा गाना अचानक रुका और एक एनाउन्समेंट हुआ कि भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु नहीं रहे .तब लाखों कि भीड़ उमड़ी थी उनकी शव यात्रा में.तब लोगों का कहना था कि जब
रतन टाटा नीरा राडिया का इस्तेमाल कर के द्रमुक कोटे में किसी भी कीमत पर दयानिधि मारन को संचार मंत्री बनने से क्यों रोकना चाहते थे? धीरे धीरे गुप्तचर एजेंसियों के पास इसके सबूत आते जा रहे हैं। दयानिधि मारन करुणानिधि के चचेरे पोते हैं लेकिन उनका यही परिचय
केव्स के वरिष्ठ साथी पूर्णेंदु शुक्ल जी ने एक बेहद छोटी सी पर उतनी ही गहरी कविता लिखी है...नई कविता आप भी पढ़ें......डर...वह बच्चा था और तब उसे हमेशा मरने से डर लगता था....अब... वो बड़ा हो चुका है और... ज़िंदगी से डरता है...पूर्णेंदु शुक्ल(लेखक पत्रकार
कहानी उलझ रही है या सुलझ रही है यह तो आप तय करे। अपना काम आपको तथ्य बताने का है। दूरदर्शन के भूतपूर्व महानिदेशक भास्कर घोष ने एक टीवी चैनल शुरू किया था। नाम है ’’नाइन एक्स’’। चैनल बहुत धूम धड़ाके से शुरू हुआ और इसके पहले संपादक थे- वीर सांघवी। उन्हें
फर्ज़ी सुसाइड नोट?आत्महत्या का नाटक....?हत्या की पूरी तैयारी....???अपनी ही बेटी की हत्या....?उसका कुसूर क्या था....?प्रेम करना....या प्रेम को विवाह में बदलने की इच्छा....और अगर ये हत्या है....तो फिर ये दोहरा हत्याकांड है....निरुपमा की तस्वीर को कम से कम
इतिहास की किताबों को जो मन में आये बक लेने दोअलां फलां चीज़ों के लिएअमुक चमुक को श्रेय देने दोपर...मेरा भी यकीन करोएक बात बतलाता हूँदिल्ली का लाल किलामैंने ही बनाया हैये और बात है किन मैं इसकी गद्दी पर कभी बैठाना इस पर झंडा फहराया हैमेरे नाम पर कोई मार्ग
आईपीएल सीजन 3 के मैदान की जंग खत्म तो हो गई लेकिन असली जंग अभी भी समाप्त नही हुई है और हरेक मंच और हरेक स्तर पर ऐसे चेहरे की तलाश की जा रही है जिसमे पारदर्शिता हो और जिसमे आईपीएल पर लगे धब्बे को नये सिरे से धोने की क्षमता भी हो.सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था
- लेखक : अतुल पाठक, 25-Apr-10बात अक्षय की जो एक बीमारी से पीडित है। बीमारी ने उसे ऐसा जकड़ा कि इलाज में पिता की जीवन भर की पूंजी खर्च हो गई इसके बाद भी वो ठीक नही हुआ क्योंकि तब तब इस बीमारी की सही थेरेपी नही आई थी। अब जबकि बीमारी के इलाज की कारगर पद्धति
हजारों करोड़ की बातें हो रही है। लाखों करोड़ के सौंदे हो रहे हैं। करोड़ों रुपए के एडवांस इनकम टेक्स भरे जा रहे है। चियरगर्ल्स नाच रही है। देर रात तक पार्टियां हो रही है। प्राइवेट जहाज उड़ रहे है। टीवी चैनलों पर पैसे की बारिश हो रही है। मल्टीप्लेक्स
न संतान का...न सम्पत्ति का...न यश का...न श्रेय का...दुनिया में सबसे बड़ा कोई सुक अगर है तो बस मूर्ख बने रहने का सुख है। आप माने न मानें मूर्ख दिखने और बने रहने में (मूर्ख होने में नहीं) जो अद्बुत सुख है वो दुनिया के किसी भी विलास-ऐश्वर्य मे नहीं है।
रईस खानदान का एक आदमी था। चार साल पहले बैंकों का उधार चुकाने और आयकर देने के लिए भी उसके पास पैसे नहीं थे। बैंकों ने उसे असंभवन देनदार यानी डिफॉल्टर करार दे दिया था। वही आदमी इस साल सिर्फ एडवांस इनकम टेक्स के तौर पर ग्यारह करोड़ रुपए जमा कर चुका है। अपना
क्या अंतिम संस्कार भी जोर शोर से होता हैंमित्रो, आज 20 अप्रेल और पूरे 14 दिन हो गये -6 अप्रेल 2010 का दिन देश के साथ साथ 76 परिवारों के लिए भी कहर बनकर टूटा जब दंतेवाड़ा के ताड़मेटला के जंगल मे नक्सलियों ने एम्बुस लगाकर 76 जवानों को मौत के घाट उतार दिया.
शशि थरूर की कुर्सी जानी ही थी सो चली गई। और कोई मौका होता तो ललित मोदी बहुत बड़े हीरो के तौर पर सामने आते। लेकिन एक केंद्रीय मंत्री को उनके लगाए आरोपों की वजह से जाना पड़ा इससे ललित मोदी की मुसीबत असल में और बढ़ गई है। बीसीसीआई के सामने साधारण विकल्प है कि
रक्तरंजित दंतेवाड़ा और हत्यारे नक्सलींएक साल से भी कम वक्त मे नक्सली ने एक बड़ी वारदात को अंजाम देते हुए 76 जवान को मौंत के घाट उतार दिया. 6 अप्रेल 2010 छत्तीसगढ़ के इतिहास की सबसे रक्तरंजित सुबह बनकर आयी जब पूरी दुनिया ने नक्सलवाद का सबसे क्रूरतम और
ममता बनर्जी ने आज स्टेशन पर पानी की बोतले ६ से ७ रूपए करने को कहा है. स्टेशन पर जहां पीने की कई टंकिया होती तो जरूर है पर पानी कितना साफ़ होता है और क्या व्यवस्था होती है ये भारतीय रेल का हर मुशाफिर जनता है.ऐसे में सहारा केवल पानी की बंद बोतले ही बनती है
फिर पंछी इकट्ठे हो रहे हैं...कहां...अरे वहीं जहां से उन्होंने उड़ना सीखा था...और उड़ना शुरू किया था...कल यानी कि 4 अप्रैल 2010 को माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय पूर्व छात्र मिलन का कार्यक्रम आयोजित कर रहा है....जी हां कई सारे कनिष्ठ
गुजरात दंगे के बाद जिस तरह से नरेंद्र मोदी और गुजरात की गलत छवि पूरी दुनिया मे पेश की गई वो राजनीतिक के धुरंधर खिलाड़ियों को अपनी दुकान चमकाने मे भले मदद करता हो लेकिन यह गुजरात की 5.50 करोड़ जनता के साथ अन्याय है... क्योकि उसी मोदी को दो बार भारी बहुमत
गुजरात दंगे के बाद देश के तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग और बेशक मीडिया के लोगो ने गुजरात की जनता और वहां की छवि को बिना किसी अवसर गंवाये बदनाम करने की कोई कसर नही छोड़ी. और कुछ लोगो ने तो यहां तक कह दिया कि तरक्की और प्रगति अपनी जगह है लेकिन मोदी के खून से
मित्रो, पिछले 8 साल मे भारत की राजनीति जिस घटना ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया वो 27 फरवरी 2002 को गोधरा मे घटी ट्रेन हादसे और उसके बाद भड़के दंगे भी है. जिसकी आड़ मे राजनीति होती रही है और उन तमाम लोगो ने अपनी रोटियां सेकी है और सिर्फ
अमिताभ बच्चन और गांधी परिवार के बारे मे मैने पहले भी लिखा है लेकिन हमे लगता है कि जिस तरह से अमिताभ बच्चन को अपमानित होना पड़ा है उससे तो यह लगता है कि अभी और बहुत कुछ लिखा जाना बाकी है क्योकि सवाल देश के उस महान कलाकार का है जिसे करोड़ो लोग अपना भगवान
अमिताभ ये भी कहा कि वो गुजरात क्या वो किसी भी राज्य का प्रचार करने को तैयार है तो हमे यह समझ मे नही आता कि क्यो बच्चन से कांग्रेसियों को नाराजगी है. खैर उनके नाराजगी की परवाह भारत की जनता नही करती है उन्हे नाराज होने दीजिए जनता इन्हे ज्यादा भाव नही देने
दरअसल कांग्रेस के लिए अमिताभ बच्चन को अपमानित करने का यह मामला पहली बार नही है.जब दिसम्बर 2003 मे गोआ मे फिल्म समारोह की शुरूआत होनी थी तो अमिताभ बच्चन को मुख्य अतिथि बनाया गया था लेकिन कांग्रेस को यह कभी भी पसंद नही था कि उसके शासित राज्य में अमिताभ
सदी के महानायक अमिताभ बच्चन और उस पर महाराष्ट्र के सीएम के चेहरे पर चिंता की लकीरेजिस तरीके से कांग्रेस अमिताभ बच्चन को अपमानित कर रही है वो किसी भी दृष्टिकोण से जायज कहा जा सकता है . कांग्रेस को एतराज इस बात से है कि चुंकि वे गुजरात के ब्रांड एम्बेस्डर
पत्नी कहती है पति सेतुम पागल तो नहीं हो?इसके जवाब में पति मुस्कुराता हैयहाँ तक कि पत्नी को बाहों में लेकरचूमने लगता हैबाकी उनके बीच क्या होता है या क्यानहीं होता हमें नहीं मालूमपति कहता है फ़िर से प्लीज़ मुझे पागल कहो नइस बार पत्नी सिर्फ़ मुस्कुराती हैऐसे
“ज़िन्दगी लम्बी नहीं, गहरी होनी चाहिए” – रौल्फ वाल्डो इमर्सन क्योंकि ज़िन्दगी जीने में और जीवित रहने में बहुत बड़ा अंतर है * जब तक जियें तब तक सीखते रहें - हमेशा नया कुछ सीखने और पढने में हम जितना समय और ऊर्जा लगाते हैं वह हमारे जीवन को रूपांतरित करता
यह वो आखिरी ख़त है जो भगत सिंह ने २२ मार्च १९३१ को यानि की फांसी के एक दिन पहले अपने साथियों को लिखा था ..........22 मार्च,1931साथियो,स्वाभाविक है कि जीने की इच्छा मुझमें भी होनी चाहिए, मैं इसे छिपाना नहीं चाहता। लेकिन मैं एक शर्त पर जिंदा रह सकता हूँ,
विवेक मिश्र अपनी जिन्दगी का एक बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा,तुमने योग्यता अर्जित करने में लगा दिया,इस दौरान तुममे कई कुंठाओ ने घर किया ,जिसे तुम समझ न सके अब तुन्हारी योग्यता दो पन्नों में फनफनाने लगी,कुछ और लोग जो अब तुम्हारे योग्यता के दो