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08 Mar 2010
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पिया संग खेलूँ होली- उस्ताद रशीद खां

आज ’संगीत’ पर राग बसंत में एक बंदिश- उस्ताद रशीद खां की आवाज़ में (सौजन्य यूट्यूब से)- होली के अवसर पर।  राग बसंत का परिचय आप संगीत के इस पोस्ट पर देख सकते हैं।
 
मानसी
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Feb 28 2010 07:24 AM
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राग पूरिया धनाश्री

तीव्रास्तु नि ग मा यस्यां कोमलौ धैवतरिषभौ।पांशा संवादि ऋषभा, सायं पूरियाधनाश्रीका॥--राग चन्द्रिकासारराग पूरिया धनाश्री की विशेषतायें- १)  थाट- पूर्वी२) वादी- संवादी- पंचम व षडज३) जाति- संपूर्ण संपूर्ण४) कोमल स्वर- ऋषभ, धैवत     
 
मानसी
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भारतीय शास्त्रीय संगीत

भारतीय संगीत का अभिन्न अंग है भारतीय शास्त्रीय संगीत। आज से लगभग ३००० वर्ष पूर्व रचे गए वेदों को संगीत का मूल स्रोत माना जाता है। ऐसा मानना है कि ब्रह्मा जी ने नारद मुनि को संगीत वरदान में दिया था। चारों वेदों में, सामवेद के मंत्रों का उच्चारण उस समय के
 
मानसी
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नानक भजन - राजन साजन मिश्र

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर नानक भजन, पं. राजन-साजन मिश्र द्वारा गाया, प्रस्तुत है-
 
मानसी
Dec 29 2009 11:56 AM
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शुभ दीपावली- राग दीपक

दीवाली के अवसर पर राग दीपक में सितार, शुजात खां से सुनिये। राग दीपक के बारे में ये कहानी प्रसिद्ध है कि इसे जब तानसेन ने गाया था, और उनके शरीर में आग जितनी गर्मी पैदा हो गई थी तब उनकी बेटी ने मल्हार गा कर उन्हें शांत किया था। राग दीपक का शुद्ध रूप अब
 
मानसी
Dec 29 2009 11:56 AM
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जय जय दुर्गे -राग दुर्गा- राजन साजन मिश्र

मुल्तानी राग को आगे बढ़ाने से पहले, ये पोस्ट नवरात्रि के अवसर पर कर रही हूँ। राग दुर्गा में गाया हुआ, ताल एकताल, छोटा खयाल, मध्यलय में ,बनारस घराने के पं. राजन-साजन मिश्र की आवाज़ में उनका सुप्रसिद्ध, स्थाई- जय जय दुर्गे माता भवानी सब जगत को दुख हरणी अ
 
मानसी
Dec 29 2009 11:56 AM
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मुल्तानी में बंदिश

पिछले पोस्ट में मुल्तानी राग के मूलभूत बातों को हमने जाना और आलाप किया। आइये अब मुल्तानी का गाना सीखें। ये बंदिश मेरी गुरु श्रीमति विमल सोनी जी से मुझे मिली थी। जैसा सीखा था वैसा ही पेश कर रही हूँ। हो सकता है किन्हीं और उस्तादों ने इसे गाई भी हो, अलग
 
मानसी
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राग मुल्तानी:

इस पोस्ट में राग मुल्तानी पेश है। *नीचे आप जहाँ भी ~ चिन्ह देखें, ये मीड़ दर्शाने के लिये है। *और ( ) खटका दिखाने के लिये। अर्थात अगर (सा) दिखाया गया है तो इसे 'रे सा ऩि सा' गाया जायेगा। राग परिचय : थाठ : तोड़ी वादी : प संवादी : सा जाति : औडव-संपूर्ण आ
 
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सरस्वती स्तोत्र (श्लोक)

किसी भी कर्यक्रम की शुरुआत आज भी भारत में देवी सरस्वती को नमन करके किया जाता है। प्रस्तुत है ये श्लोक जो हम बचपन में स्कूल के कार्यक्रमों में गाते थे। Get this widget | Track details | eSnips Social DNA
 
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राग भूपाली -आगे (बंदिश सिखाने की कोशिश)

इस लेख में जल्द ही राग भूपाली को गा कर सिखाया जायेगा। कुछ तकनीकी वजहों से यहाँ पर पोस्ट की गई आवाज़ को मिटाया गया है। असुविधा के लिये खेद है। गायक को कुछ बातों पर ध्यान देना चहिये । जैसे कि कुछ रागों के स्वर एक ही होते हैं मगर भिन्न स्वर समुह के प्रयो
 
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राग भूपाली (बंदिश और परिचय)

राग भूपाली में बंदिश गाने से पहले निम्नलिखित आवश्यक जानकारी को पढ़ें: छोटा खयाल गाने की विधि: किसी भी राग में कोई भी बंदिश गाने से पहले उस राग विशेष का समां बाँधना ज़रूरी होता है। इसलिये, आरोह, अवरोह, पकड़, आलाप आदि गा कर राग को स्थापित किया जाता है। फि
 
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संगीत संबंधी कुछ ज़रूरी परिभाषायें -२

थाट - सप्तक के १२ स्वरों में से ७ क्रमानुसार मुख्य स्वरों के समुदाय को थाट कहते हैं। थाट से राग उत्पन्न होते हैं। थाट को मेल भी कहा जाता है। थाट के कुछ लक्षण माने गये हैं- १) किसी भी थाट में कम से कम सात स्वरों का प्रयोग ज़रूरी है। २) थाट में स्वर स्व
 
मानसी
Dec 29 2009 11:56 AM
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संगीत संबंधी कुछ ज़रूरी परिभाषायें -१

आइये अब संगीत संबंधी कुछ परिभाषाओं पर ध्यान दें। संगीत- बोलचाल की भाषा में सिर्फ़ गायन को ही संगीत समझा जाता है मगर संगीत की भाषा में गायन, वादन व नृत्य तीनों के समुह को संगीत कहते हैं। संगीत वो ललित कला है जिसमें स्वर और लय के द्वारा हम अपने भावों को
 
मानसी
Dec 29 2009 11:56 AM
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सात स्वर, अलंकार और हारमोनियम

भारतीय संगीत आधारित है स्वरों और ताल के अनुशासित प्रयोग पर। सात स्वरों के समुह को सप्तक कहा जाता है। भारतीय संगीत सप्तक के सात स्वर हैं- सा(षडज), रे(ऋषभ), ग(गंधार), म(मध्यम), प(पंचम), ध(धैवत), नि(निषाद) अर्थात सा, रे, ग, म, प ध, नि सा और प को अचल स्व
 
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संगीत

इस नये चिट्ठे को शुरु करने का उद्देश्य है उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत के विभिन्न रागों पर जानकारी को एक जगह एकत्र करना। कुछ स्वतंत्र बंदिशें व समय-समय पर भजन/ग़ज़ल/गीत आदि की बंदिशों को भी इस चिट्ठे पर प्रकाशित किया जायेगा। हिन्दी में सवरलिपि को कैसे
 
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राग यमन- परिचय और दो बंदिश

राग यमन-प्रथम पहर निशि गाइये ग नि को कर संवाद ।जाति संपूर्ण तीवर मध्यम यमन आश्रय राग ॥राग का परिचय -1) इस राग को राग कल्याण के नाम से भी जाना जाता है। इस राग की उत्पत्ति कल्याण थाट से होती है अत: इसे आश्रय राग भी कहा जाता है (जब किसी राग की उत्पत्ति उसी
 
मानसी
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चैत में गाई जाने वाली चैती

चैत्र के महीने में गाई जाने वाली उप-शास्त्रीय संगीत में एक प्रकार की बंदिश है चैती। इसमें रामा शब्द का प्रयोग बार बार होता है और इसमें कोयल की कूक, विरह, प्रेम, साजन से प्रेम निवेदन, और कई बार राम जी का वर्णन होता है। क्योंकि चैत्र मास में होली आती ह
 
मानसी
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नवरात्रि पर भवानी दयानी और राग भैरवी का परिचय

नवरात्रि के अवसर पर प्रस्तुत है राग भैरवी पर आधारित परवीन सुल्ताना द्वारा गाया विख्यात- भवानी दयानी... आइये इस सुंदर भजन को सुनने से पहले राग भैरवी के बारे में जानें- रे ग ध नि कोमल राखत, मानत मध्यम वादी। प्रात: समय जाति संपूर्ण, सोहत सा संवादी॥ इस र
 
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दो बंगला होली गीत- अजय चक्रवर्ती और मानवेन्द्र/श्यामल मित्र

इस पोस्ट में होली के अवसर पर दो बंगला होली गीतों का आनंद लीजिये- पहले पंडित अजय चक्रवर्ती की आवाज़ में- होली खेलीछे श्याम कुंज कानने फिर कई रागों का मिश्रण इस गीत में। बसंत राग की छाया में रचा गया ये गीत मानवेन्द्र मुखर्जी और श्यामल मित्र की आवाज़ में
 
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बसंत

बसंत द्वार पर खड़ा है। ऐसे में सुनते हैं ये मधुर राग पं. राजन साजन मिश्र की आवाज़ में। संक्षिप्त परिचय राग बसंत - "दो मध्यम कोमल ऋषभ चढ़त न पंचम कीन्ह। स-म वादी संवादी ते, यह बसंत कह दीन्ह॥ आरोह - सा ग, म॑ ध रें॒ सां, नि सां। अवरोह - रें॒ नि ध॒ प, म॑ ग
 
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राग मुल्तानी आवाज़ में सिखाने की कोशिश

पिछले दो पोस्ट में राग मुल्तानी की लिखित रूप से पूरी जानकारी दी गई थी और बंदिश भी लिखी थी। ये बंदिश मुझे मेरी गुरु श्रीमती सोनी से मिली थी। राग मुल्तानी को एक कठिन राग माना गया है और उसकी कुछ विशेषतायें होती हैं जो किसी अन्य राग से उसे पृथक करती हैं।
 
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राग मुल्तानी गा कर समझाने की कोशिश

पिछले दो पोस्ट में राग मुल्तानी की लिखित रूप से पूरी जानकारी दी गई थी और बंदिश भी लिखी थी। ये बंदिश मुझे मेरी गुरु श्रीमती सोनी से मिली थी। राग मुल्तानी को एक कठिन राग माना गया है और उसकी कुछ विशेषतायें होती हैं जो किसी अन्य राग से उसे पृथक करती हैं।
 
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