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नयी प्रविष्टी लिखी
08 Mar 2010
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प्रिया शर्मा की कविता

यह कविता जयपुर से प्रिया शर्मा ने भेजी है। यह उनका पहला प्रयास है, इसलिए इसमें हो सकता है कि कहीं कच्चापन नजर आए, लेकिन यह रचना एक संभावना जगाती है। चलना सीखने से पहले सभी लडख़ड़ाते हैं। दुआ कीजिए कि ये साहित्य संसार में ये अपना एक मुकाम बनाएं। इनकी और भी
 
shivraj gujar
Feb 27 2010 05:59 PM
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मै जानता हूं

हमें पता थाहम हो नहीं सकेंगेएक-दूजे केफिर भीफूट ही गईं कोंपलेंप्यार की।बिछुडऩे का गमरुला जाता था जब कभीतुम कहती थीचिंता मत करोकहीं भी हो मेरा ब्याहमैं अपने उनकोले आऊंगी उसी शहरजहां तुम रह रहे होंगेमजे की बात देखोतुम्हारी डोली जिस शहर में आईनौकरी मुझे भी
 
shivraj gujar
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गुडिय़ा का ब्याह

दोपहर का वक्त था। रोज की तरह चिड़कली छोटी बहन पंखी के साथ मिलकर अपनी गुडिय़ा का ब्याह रचाने में मशगूल थी। पास ही बैठी नाथी देवी रस्सी बटने के साथ-साथ शादी के सभी आयोजनों में शरीक थीं। विदाई की बेला थी। दहेज का सामान रखा जा रहा था। अन्य सामानों के साथ जब
 
shivraj gujar
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कागजी योग्यता

दिल्ली के लिए नयी बस सेवा शुरु होनी थी, लंबा रूट होने के कारन चालक का परफेक्ट होना जरूरी था, इसको देखते हुए परिवहन निगम के अधिकारी ने रिकॉर्ड देख कर ऐसा चालक खोजने के निर्देश दिए जिसका अब तक का सेवा रिकार्ड बिल्कुल कलीन हो, जिस पर कोई चार्ज नही लगा
 
shivraj gujar
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अलविदा

उसने कहामैं जा रही हूंहमेशा-हमेशा के लिएतुमसे दूरबस, जो बचे हैं पलवो गुजार लोहंसी-खुशीमेरे संगक्या-खोयाक्या-पायाइसका हिसाबलगा लेनाकलअभी तो हूं मैं तुम्हारेऔर तुम मेरे साथसुनो,जब मैं चली जाऊंगीतुम उदास मत होनारोना भी मतन घंटों बैठ करडूबते सूरज को निहारने
 
शिवराज गूजर.
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सोचता हूँ भानूमति की तस्वीर ले ही आऊँ

कहीं की ईंट, कहीं का रोड़ा, भानुमति ने कुनबा जोड़ा' भानुमति का यह टोटका काफी पुराना है पर आज भी अचूक है। लोग धड़ल्ले से इसका उपयोग कर रहे हैं। उसने इसका पेटेंट करवा लिया होता तो आज उसकी पीडियों के वारे न्यारे होते. खैर गलती हो गयी उसका क्या रोना. आज री
 
शिवराज गूजर.
Dec 29 2009 11:46 AM
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कवि भवानी प्रसाद मिश्र की रचनाओं की सीडी का लोकार्पण

जयपुर. देश के ख्यातनाम कवि भवानी प्रसाद मिश्र की जयंती रविवार को झालाना संस्थानिक क्षेत्र स्थित प्रोढ शिक्षा समिति के सभागार में मनाई गई। इस मोके पर पदमश्री पंडित विश्व मोहन भट्ट एवं कवि नंदकिशोर आचार्य ने मिश्र की रचनाओँ की सीडी का लोकार्पण किया. मि
 
शिवराज गूजर.
Dec 29 2009 11:46 AM
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पत्रकार चन्द्रशेखर कौशिक का सम्मान

जयपुर . गायत्री शक्तिपीठ वाटिका की ओर से शुक्रवार को दुर्गापुरा स्थित गौ सेवा संघ परिसर में प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस मौके पर पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दैनिक भास्कर के संवाददाता चन्द्रशेखर कौशिक सहित तीस प्रतिभ
 
शिवराज गूजर.
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हर काम की एक उम्र

यह विचार हमें योगेन्द्र पिन्टू ने जयपुर से भेजे हैं
 
शिवराज गूजर.
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सोचता हूँ

सोचता हूँ क्यों न तुम्हारा नाम खुसबू रख दूं, ताकि तुम्हें पुकार सकूं बेहिचक कहीं भी, कभी भी सबके बीच में. मैं कहूँगा खुसबू आ रही है. सब कहेंगे हाँ, आ रही है. मेरा मतलब तुमसे होगा और उनका मतलब............
 
शिवराज गूजर.
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यूँ भी होता है

गोद मैं बच्चा लिए व हाथ मैं झोला लटकाए एक ग्रामीण महिला बस मैं चडी, सीट खाली नही देख एक दम से वह निराश हो गयी, फिर भी जैसा कि बस मैं चड़ने वाला हर यात्री सोचता है कि शायद किसी सीट पर अटकने कीजगह मिल जाए, वह भी पीछे की और चली, तभी उसकी नजर एक सीट पर प
 
शिवराज गूजर.
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वोट जरूर दें

कल लोकतंत्र का महायज्ञ है. इसमें वोट रुपी अपनी आहुति जरूर डालें. यह सोच कर नहीं रुकें कि मेरे एक वोट से क्या होगा. आपका यह एक वोट सरकार बदल सकता है. इसलिए वोट जरूर डालें. हर हालत में अपने वोट देने के अधिकार का प्रयोग करें.
 
शिवराज गूजर.
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इंटरव्यू

अजी सुनते हो घर में घुसा ही था कि श्रीमती जी बोलीं मुन्ना चलने लग गया है. हाँ, फिर ? फिर क्या ? दाखिला नहीं कराना है स्कूल में मैं चौंका, यह नन्ही जान खुली नहीं अभी ढंग से जबान क्या पढेगा ? अजी अभी पढाना किसको है. यह तो रिहर्सल है, स्कूल जाने की और फ
 
शिवराज गूजर.
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मैं कोनसा भाषण सुनने जा रही हूँ......

पानी के छींटे लगते ही मैं हडबडा कर उठ बैठा. इससे पहले कि गुस्से में मेरा तीसरा नेत्र खुलता दोनों नेत्रों के सामने श्रीमतीजी का चेहरा आ गया. बस इतना काफी था, तीसरा नेत्र उनींदा ही रह गया। एक हाथ मैं पानी का लोटा और दूसरा हाथ कमर पर रखे घर की महारानी ख
 
शिवराज गूजर.
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पापा-वापा छोडो

पिंटू बिलकुल अपने दादा पर गया है। अभी छठा साल भी पार नहीं किया है और कितना बड़ा दिखने लगा है. रंगत में तो अपनी मम्मी पर गया है, गोरा चिट्टा.' कुछ दिनों पहले तक ये घरों में चलने वाली आम बातें थीं, जिनके आधार पर संतान की तुलना अपनी पीढी के आनुवंशिक गुण
 
शिवराज गूजर.
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नवसंवत्सर शुभ हो

लिखाड दोस्तों को नवसंवत्सर की शुभकामनायें. आपके जीवन मैं यह हिंदी साल खुशियाँ ही खुशियाँ लेकर आये. हर दिन जब आप आँख खोलें ख़ुशी दस्तक देती मिले.
 
शिवराज गूजर.
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होली मुबारक...... मान लो वरना.......

ब्लॉग जगत के सभी लिखाड़ों होली की बहुत- बहुत मुबारकबाद । होली से पहले इसलिए नही दी किउस समय तो सभी देते हैं । ऐसे में पता नही मेरी मुबारकबाद याद रहती या नही । होली के दिन इसलिए नही दी कि उस दिन आप भी तो ओरों को देने में व्यस्त होंगे । इसलिए अब दे रहा
 
शिवराज गूजर.
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मैं ऐसा क्यों हूँ?

मैं क्यों बदल लेता हूँ भावना किसी के प्रति/ एक क्षण मैं किसी के एक कथन एक कृत्य पर । क्यों भुला देता हूँ उसके पिछले अच्छे काम को । क्यों डांप लेता हूँ उसकी निष्ठा को एक भूल पर । क्यों नही सोचता क्यों किया होगा उसने ऐसा क्या मजबूरी थी उसकी । लालच मैं
 
शिवराज गूजर.
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मेरा शहर

न मात्राओं का गणित है और न ही शब्दों की बंदिश, यह भावनाएं हैं जो चंद लाइनों मैं ब्लॉग पर हैं, इसलिए पड़ते समय भावनाओं को समझें - यह शहर नही है, अब इंसानों का शहर हेवानियत हर और यहाँ आती है नजर बहन- बेटियों की अस्मत घर मैं नही सलामत कत्लगाह बन गया हैअब
 
शिवराज गूजर.
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ऐसी भी क्या जल्दी है

शास्त्री नगर जाने वाली बस देख रामबाग पर खड़े शर्माजी एकदम से अलर्ट हो गए । बस मैं पैर रखने की भी जगह नही थी, ऐसे मैं जब शर्माजी दोड़ कर बस मैं चड़ने लगे तो कंडेक्टर ने उन्हें रोकने की कोशिश करते हुए कहा, बिल्कुल भी जगह नही है भाई साहब । पीछे वाली मैं
 
शिवराज गूजर.
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यूँ भी होता है

गोद मैं बच्चा लिए व हाथ मैं झोला लटकाए एक ग्रामीण महिला बस मैं चडी, सीट खाली नही देख एक दम से वह निराश हो गयी, फिर भी जैसा कि बस मैं चड़ने वाला हर यात्री सोचता है कि शायद किसी सीट पर अटकने कीजगह मिल जाए, वह भी पीछे की और चली, तभी उसकी नजर एक सीट पर प
 
शिवराज गूजर.
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अब तो शिकवा न करना मुझसे

पैदा होते ही लग जाता है ठप्पा जिस पर मनहूस का भेदभाव बरता जाता है जिसकी परवरिश मैं हर पल हर जरूरत के लिए मारना पड़ता है मन को बदन पर चुभती अनगिनत आँखें भूखे गिद्ध की तरह अपनों की परायों की हर कदम पर बंदिशें उम्र के फेलाव के साथ बढता, बंदिशों का सिलसिल
 
शिवराज गूजर.
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गीत

गाँव से मेरा ख़त आया है पढके यार सुनना तुम कैसे है घरवाले मेरे सबका हाल बताना तुम माँ -बापूजी लिखते हैं कैसे हो लाल हमारे तुम दूर हो हमसे तो क्या बेटे यादों मैं पास हमारे हो तुम हम तो सब खुस हैं यहाँ पर लिखना हाल तुम्हारा तुम गाँव से ............. बह
 
शिवराज गूजर.
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उम्मीद और सपने

दो चीजें पीछा करती हैं हमेशा इंसान का उम्मीद और सपने सपने होते हैं उसके अपने उमीदें होती हैं उससे दूसरों को दम तोड़ देते हैं सपने हमेशा उमीदों के आगे क्योंकि वक़्त लगता है सपनों के पूरे होने मैं जबकि उमीदें साथ होती हैं हरपल जो अहसास कराती हैं उसे अपने
 
शिवराज गूजर.
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चार लाइने

बेखयाली में ही सही आप कुछ कदम तो चले शायद अपने बीच के फासले यू ही मिट जायें शिवराज गूजर
 
शिवराज गूजर.
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दुनियादारी

ना थारी छे, ना म्हारी छे या दुनिया भाया दारी छे गरज पड्यां सूं गुड बण ज्या काम निकलता ही खारी छे या दुनिया...... आंटी मैं पीसा हो तो जग बण जावे भाएलो लक्ष्मीजी जद घर छोड़े कुण नाती, कुणकी यारी छे या दुनिया...... पूत कमाऊ हो घर मैं तो सबने लगे प्यारो स
 
शिवराज गूजर.
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वाह प्रीतो

अभिनेत्री प्रीटी जिंटा ने अपने जन्मदिन पर ऋषिकेश के मदर मिरेकल सकूल की ३४ लडकियॊं कॊ गॊद लिया है उनका यह कदम इसलिए भी महत्वपूरण हॊ गया है कि ये सभी लडिकयां अनाथ हैं समाज के लिए किया गया उनका यह यॊगदान अनुकरणीय है उम्मीद की जानी चाहिए कि दूसरे अभिनेता
 
शिवराज गूजर.
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सलाम गणतंत्र

गणतंत्र दिवस की सबको शुभकामनायें, गर्व करें की हम भारतीय हैं , और संकल्प लें की हम अपने देश के कानून की इज्जत करेंगे और इसकी गरिमा बनाये रखेंगे,
 
शिवराज गूजर.
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रिश्ते की आड़

मंगेतर कह कर मीना ने जिससे मिलवाया था पिछली राखी पर वह उससे राखी बंधवाने आया था, समझदानी मैं बात घुसती नही देख मैंने पूछा, ये कैसी सगाई है इस साल का मंगेतर पिछले साल का भाई है, वो बोली तू भी ना शिवराज कुछ नही समझता वो तो एक दिखावा था ताकि उस रिश्ते क
 
शिवराज गूजर.
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लोकल भाषा भी जानें

शहर मैं आने के बाद गाँव वाले भी शहर के रंग मैं रंग जाते हैं, यहाँ तक की उनका बोलना -चलना और रहन -सहन का डंग भी पूरी तरह बदल जाता है, ऐसे मैं उनके सहर वाले घर शिवराज पैदा होने वाला बच्चाभी पूरी तरह शहरी ही होता है, जब वे गाँव जाते हैं तो अजीब -अजीब सव
 
शिवराज गूजर.