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08 Mar 2010
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"मुझे अपनाया है"

"तुम ने मुझे अपनाया है"" और"मेरी कायनात को .............मेरी खुशी को गम को,"और"मेरी हयात को.......अब तो खुशी से,जीना भी आसान हो गया ...."तुम ने"जो अपना हाथ दिया मेरे हाथ को ".........
 
seema gupta
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"नयी"

"नयी" "ज़िंदगी" हो तुम्हारे साथ नयी,दिन नया हो हमारी रात नयी..... पिछली बातों को भूल जाएँ हम,जब भी हो बात सारी बात नयी....... अब न आयें वो दिन गुज़र जो गए,हर घड़ी हो तुम्हारे साथ नयी........ हम पुराने रिवाज ठुकरादें,सारे रिश्तों की सारी जात नयी ........
 
seema gupta
टैग: sahityakunj
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"यूँही बस

"यूँही बस "तुम मुझ से बोलती रहीं ...चुप चाप यूँही बस,जख्मो पे हाथ फेरती चुपचाप यूँ ही बसक्यों लग रहा है दिल को तुम हो आसपास ही ,आ जाओ मेरे सामने ... चुप चाप यूँ ही बस.कुछ तो ज़रूर है जो हमे हो रहा है यूं,तुम ही ज़रा बताओ ना ... चुप चाप यूँ ही बस.तुमको भी
 
seema gupta
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"आज"

आज" जैसे कुछ दिल बदल गया हो आज, यार ख़ुद से बहल गया हो आज, तुम अगर सुन नही रहे हो बात, मेरा दिल क्यूँ मचल गया हो आज ? क्या पता खत लिख नही पाता, या नई चाल चल गया हो आज, क्यूँ ये मौसम भी खुशगवार नही, हवा का रुख बदल गया हो आज ! एक नशा था उतर नही पाता, त
 
seema gupta
Dec 29 2009 11:48 AM
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"तुम्हें पा रहा हूँ"

तुम्हें पा रहा हूँ" तुम्हें खो रहा हूँ तुम्हें पा रहा हूँ, लगातार ख़ुद को मैं समझा रहा हूँ.... ना जाने अचानक कहाँ मिल गयीं तुम, मैं दिन रात तुमको हे दोहरा रहा हूँ........ शमा बन के तुम सामने जल रही हो, मैं परवाना हूँ और जला जा रहा हूँ .... तुम्हारी ज
 
seema gupta
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"निगाहे-नाज़"

निगाहे-नाज़" बेज़ारी जान की थी या, किसी गम की गीरफ्तारी थी, अंधेरी रात मे भी, " रोशन रूखे- यार देखा" शायद ये निगाहे-नाज़ की, " बीमारी थी" (बेज़ारी - उदासीनता ) (रूखे- यार - प्रेमिका का चेहरा) (निगाहे-नाज़ - चंचल आँख) http://vangmaypatrika.blogspot.com/200
 
seema gupta
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"गीत"

गीत" मैंने जो गीत तेरे प्यार की खातिर लिखे आज दुनिया की नज़र उनका पता पाएगी, किस तरह चाहा है पूजा है सराहा है तुम्हें प्यार की दुनिया में तारीख लिखी जायेगी.. तेरे चेहरे की तमानत ये सदा देती है प्यार खिलता है तो चेहरे से अयाँ होता है कोई जब जन्मो के रि
 
seema gupta
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"तेरा ना होना"

तेरा ना होना" तेरा ना होना सर्पदंश सा विषैला सांसे भरता "जीवित " एक अभिशाप
 
seema gupta
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"तु जो मिल जाए"

तु जो मिल जाए" "कब से खोजूँ तुझे, गलियों में औ चौराहों पर, तू जो मिल जाए, तेरे शहर... को अपना कह दूँ रवाना हो चला है वक्त, जनाज़े की तरह, दे ज़रा वक़्त, के फिर से... तुझे मिलना कह दूँ मेरी जाँ याद तेरी, आ के है तड़पाती बहुत, तू जो ,मिलती है हक़ीक़त... क
 
seema gupta
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'यह हमारा प्रण है !"

यह हमारा प्रण है !! दिनेशराय द्विवेदी जी द्वारा प्रेरित
 
seema gupta
Dec 29 2009 11:48 AM
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भरोसे से

भरोसे से" वक्त के जंगल के ये झंखाड़, और वो झाड़ियाँ साफ़ दिखने में ख़लल डालें, जो बनकर गुत्थियाँ चंद क़दमों पर नज़र आएँगे, फिर से हम ज़रूर बस भरोसे से हटाना है, तुम्हें बेज़ारियाँ......... (बेज़ारियाँ = विमुखता, क्रोध, नाख़ुशी) http://vangmaypatrika.blogsp
 
seema gupta
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"नज़र "

नज़र " आग फैली इधर से उधर लग गयी, मेरे घर पे किसी की नज़र लग गयी.. दिल में मायूसियों ने है घर लिया, अब दुआ भी होने बेअसर लग गयी...
 
seema gupta
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शीशा-ऐ-दिल

शीशा-ऐ-दिल" ये माना शीशा-ऐ-दिल , रौनके-बाज़ारे- उलफ़त है ! मगर जब टूट जाता है, तो क़ीमत और होती है !! http://hindivangmay1.blogspot.com/2008/11/blog-post_7851.html
 
seema gupta
Dec 29 2009 11:48 AM
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जाने जिगर

जाने जिगर" ' राह पे पथरा के बर्फ सी जम गयी नजर , जाते- जाते किस अदा से ढा गया था वो कहर, ना देखा पलट के और ना की कोई फिकर , कहता था जो मुझे कभी अपनी 'जाने जिगर '
 
seema gupta
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'सौगात'

सौगात' थका थका हर दिन का लम्हा , काली अंधियारी रात मिली , तार तार कुछ टुकडों मे दामन, बिखर गई जो भी सौगात मिली हसने रोने मे फर्क करें क्या दोनों संग आंसू की बरसात मिली कोई सखी ना संगी साथी किस्मत में तन्हाई की बारात मिली जीवन का मकसद तो समझ ना आया ,
 
seema gupta
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इल्जाम

इल्जाम" लगता है जैसे हर एक वार सरेआम है मुझपर, एक खुशी नही गम देने का ही काम है मुझपर हर लफ्ज तेरा यह कहता के संगदिल है तू, दिन से भी कहीं भारी अब शाम है मुझपर जीने का सहारा था एक दामन तेरा जाना, तार तार कर डाला ये भी इनाम है मुझपर दिल दे भी दिया हमन
 
seema gupta
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इंतज़ार

इंतज़ार" "तुझको है इंतज़ार लफ्जों का, हम तेरा इंतज़ार करते हैं दिल पे एक बोझ सा हमारे है, कह के कुछ अश्कबार करते हैं लफ्ज़ पूरे कहाँ हैं कहने को, हम तुझे इतना प्यार करते हैं अब तखय्युल मैं तुम ही बसते हो, हम जो बातें हज़ार करते हैं तेरे होटों को है सलाम
 
seema gupta
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"तेरी याद में"

तेरी याद में" तेरी ग़ज़लों को पढ़ रहा हूँ मैं , और तेरी याद में शिद्दत है बहुत जैसे तुझसे ही मिल रहा हूँ मैं, और तेरे प्यार में राहत है बहुत वो तेरे वस्ल का दिन याद आया, मुझ पे अल्लाह की रहमत है बहुत तुझसे मिलने को तरसता हूँ मैं, मेरी जान तुझ से मुहब्
 
seema gupta
Dec 29 2009 11:48 AM
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गम-ऐ-बेवफाई

गम-ऐ-बेवफाई" ज़ख्म हूँ रिसता रहूँगा , रग -ऐ -लहू मे उतर जाऊंगा, गम-ऐ-बेवफाई से उपजा हूँ , ये ना सोच के भर जाऊंगा...
 
seema gupta
Dec 29 2009 11:48 AM
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"तेरी चाहत"

तेरी चाहत" तेरी हर अदा पे मुझे बस प्यार आता है, जब मेरे साथ तू होती है करार आता है.. तेरी आँखें है सनम, या के हैं जाम-ऐ-शराब, तेरी नज़रों को मैं देखूं तो खुमार आता है.. तू मेरे सामने है, ख्वाब हो , बेदारी हो, अपनी बांहों में लिए तुझ को चला जाता हूँ..
 
seema gupta
Dec 29 2009 11:48 AM
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खुदगर्ज

खुदगर्ज" उसकी खैरियत की ख़बर हो जाती मुझको, एक बार अगर मेरे हालत का जयाजा लेता... बडा ही "खुदगर्ज" रहा था वो हर तकाजे मे, "मुझे गुमान हो उसकी सलामती का भी " वो कैसे मगर इतना भी मेरा एहसान लेता? http://vangmaypatrika.blogspot.com/2008/09/blog-post_20.
 
seema gupta
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तुम्हारी याद है

तुम्हारी याद है " एक तरफ़ तुम हो तुम्हारी याद है, दूसरी जानिब ये दुनिया है कोई बरबाद है, तीसरी जानिब कोई मासूम सी फरियाद है . वस्ल के लम्हों में भी तनहा रहे, तुम को गुज़रे वक्त याद आते रहे, तुम से मिल कर भी तो दिल नाशाद है ...... दर्द-ओ-गम की ताब जो न
 
seema gupta
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"अपलक"

अपलक" बिना झपकाए मैं, अपलक देखूं, तुम को देखने की, अपनी ललक देखूं
 
seema gupta
Dec 29 2009 11:48 AM
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"जूनून-ऐ-इश्क"

जूनून-ऐ-इश्क " जूनून की बात निकली है तो मेरी बात भी सुन लो, जूनून-ऐ-इश्क सच्चा है तो फिर हारा नहीं करता मुक़द्दस है जगह वो क्यूंकि घर माशूक का है वो, कोई मजनूँ कभी भी अपना दिल मारा नहीं करता तजस्सुस यह के वोह बोलेगा सच या झूट बोलेगा जूनून में रह के क
 
seema gupta
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"शबे-फुरकत"

शबे-फुरकत" " शबे-फुरकत थी , "और" जख्म - पहलु में, कोहे - गम ने की , शब- बेदारीयाँ हमसे... (शबे फुरकत- विरह की रात , कोहे - गम- दुःख का पहाड़ , शब - बेदारीयाँ - रात को जागना )
 
seema gupta
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मेरे पास

मेरे पास" रूह बेचैन है यूँ अब भी सनम मेरे पास, तू अभी दूर है बस एक ही ग़म मेरे पास रात दिन दिल से ये आवाज़ निकलती है के सुन आ भी जा के है वक्त भी कम मेरे पास तू जो आ जाए तो आ जाए मेरे दिल को करार, दूर मुझसे है तू दुनिया के सितम मेरे पास दिल में है मेर
 
seema gupta
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"मैं"

मैं " कलमों के टूटे ढेर थे मैं छेड़ता रहा, लफ्जों के हेर फेर ने समझा नहीं मुझे.... कच्ची थी सोंधी ख़ाक में मैं बोलता रहा , चाकों के एतबार ने चूप्का किया मुझे... लौहएमकान का का राज़ था क्यों फाश हो गया , कुत्बों के इन्तखाब ने रुसवा किया मुझे ... .. खार
 
seema gupta
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"अपनी कहानी"

"अपनी कहानी" अपनी कहानी उसकी ज़ुबानी सुनता हूँ, मेरी कहानी जग ने जानी सुनता हूँ सारे जगत में फैल गयी उसकी खूशबू, महक रही है रात की रानी सुनता हूँ एक बार फिर दिल के टुकडे कर जायेगी आ जायेगी जब याद पुरानी सुनता हूँ और नही कुछ एक मोहब्बत का अरमां है बहु
 
seema gupta
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" मैं दूंढ लाता हूँ"

" मैं दूंढ लाता हूँ" अगर उस पार हो तुम " मैं अभी कश्ती से आता हूँ ..... जहाँ हो तुम मुझे आवाज़ दो " मैं दूंढ लाता हूँ" किसी बस्ती की गलियों में किसी सहरा के आँगन में ... तुम्हारी खुशबुएँ फैली जहाँ भी हों मैं जाता हूँ तुम्हारे प्यार की परछाइयों में रु
 
seema gupta