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ब्रेक के बाद

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08 Mar 2010
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हे पुरुष, आओ कुछ प्रायश्चित कर लें

भारतीय नारी क्या है- सीता, सावित्री या द्रौपदी। राधा या मीरा। वह शिव की पार्वती है या फिर विष्णु की लक्ष्मी। कई चेहरे लेकिन कहानी लगभग वही। सीता जो पति
Mar 07 2010 06:34 AM
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हुसैन साहब आपने गलती तो की है

ट्विटर आजकल फैशन में है। मैंने भी सोचा कुछ ट्विटरबाजी हो जाये। सो हुसैन पर लिख बैठा कि 'उन्होंने कट्टरपंथियों से लड़ाई नहीं लड़ी जैसे शाहरुख ने लड़ी और इसकी
Feb 28 2010 06:38 AM
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बीजेपी में बदलाव– एक छलावा, एक हकीकत

चुनाव के ठीक पहले मैंने लिखा था कि देश की फिजा बदल रही है और समाज भी, ऐसे में चुनावों को पुराने अंदाज और तरीके से समझने की कोशिश बड़ी
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बहुत पछताओगे ठाकरे

माई नेम इज खान। एक फिल्म। विचाराधाराओं के जलजले मे फंसे मुसलमानों की कहानी। आतंकवाद के झंझावात में फंसे एक समुदाय और धर्म की कहानी। एक मुसलमान को जमीन की
Feb 14 2010 04:54 AM
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अब तेरा क्या होगा शिवसेना

एक बड़ी बात हुई है। शिवसेना ने पहले 'सामना' में लिखा कि वो शाहरुख का विऱोध नहीं करेंगे लेकिन थोड़ी सुबह चढ़ते ही खबर आई कि शिवसेना ने पलटी मार
Feb 07 2010 05:21 AM
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थैंक यू रामू

'हाऊ ऑनेस्ट इज द फिल्म', उस अजनबी लड़के ने मुझसे ये सवाल किया। मैंने बचने की कोशिश की। उसने फिर पूछा 'हाऊ ट्रू इज द फिल्म'। अमिताभ बच्चन की फिल्म
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भाई तू तो ये गल मत कर

'ओए मनिंदर, तू तो ऐसी गल मत कर, शर्म कर।' प्यार भरी ये झिड़की जहीर अब्बास की थी। और वो कह रहे थे भारत के पूर्व टेस्ट क्रिकेटर मनिंदर सिंह
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‘पॉलिटिकल’ मुलायम का अमर प्रेम

बात पुरानी है। एस.पी. सिंह तब मेरे एडीटर थे। एक दिन मुलायम सिंह के किसी मामले पर समाजवादी पार्टी का रिएक्शन चाहिए था। मैं उत्साही रिपोर्टर भागकर अमर सिंह की
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‘न्यूज चैनल्स’–शर्म के एब्सर्ड ...

टीवी के बारे में किसी ने कहा है कि जब बच्चों के गली में निकलने पर पाबंदी होती है तब वो उसे दुनिया भर की सैर कराता है। और मैकलुहान
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आल इज वेल आमिर

आमिर को देखा था, मिला कभी नहीं था। सोचता था, ये छुटकू कमाल होगा। सो 'तारे जमीन पर' की रिलीज पर जब इंटरव्यू करने मुंबई पहुंचा तो थोड़ा हैरत में
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सचिन महानतम नहीं हैं

किसी ने मुझसे पूछा था कि क्या सचिन भारत के महानतम बल्लेबाज हैं ? मैंने कहा -"नहीं," सज्जन ने पूछा "क्यों ?" मैंने कहा- "इसके हजारों कारण हो सकते हैं
Dec 29 2009 11:53 AM
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एक गुलाम की जीत

चलिये आप से एक सवाल करते हैं। विश्वास मत से किसको फायदा हुआ? कौन जीता? कौन हारा? आप सोच रहे होंगे क्या बकवास कर रहा हूं? यकीन मानिये मेरा ऐसा
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कुट्टी, पीएम साहब आप मुस्कुराए क्यों?

बात बजट के दिन की है। मंनी कंट्रोल डॉट कॉम ने बजट की राजनीति पर एक लेख लिखने को कहा था। इस लेख को लिखते-लिखते दिमाग मे आया कि लेफ्ट
Dec 29 2009 11:53 AM
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ब्रेक के बाद

इस देश में एक मंत्री हैं जिनको कामधाम कुछ नहीं है। वैसे ज्यादातर मंत्री ऐसे ही हैं। लेकिन इनमें एक खास हैं। नाम बता सकता हूं लेकिन नाम में क्या
Dec 29 2009 11:53 AM
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सचिन और मेरी जिंदगी का चौराहा

जिंदगी के चौराहे कभी-कभी एक नये चौराहे पर ला खड़ा करते हैं जहां से आगे का रास्ता दिखता तो है लेकिन जाना कहां है ये पता नहीं होता। और शायद
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आज की रात...यस वी कैन

आज की रात कुछ लिखने को दिल करता है. आज की रात कुछ कहने को दिल करता है . आज की रात कुछ भी नहीं करने को दिल करता है.
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हमें अपने अंदर के हस्तिनापुर को ...

जिन्हें टीवी पर नाज नहीं है वो आज कहां हैं। ये सवाल मेरे दिल में पिछले एक हफ्ते से घूम रहा है। मन उन टिप्पणीकारों को खोज रहा है जो
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इतिहास के अकेलेपन में आडवाणी की नीच ...

लाल कृष्ण आडवाणी का मैं हमेशा ही आलोचक रहा। उस समय भी जब दिल्ली के तमाम पत्रकार उनके साथ अपने परिचय पर इतराया करते थे और उस वक्त भी जब
Dec 20 2009 07:10 AM
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ये आग बहुत खतरनाक है

तेलंगाना की आग ने एक बार फिर नेहरू जी की याद ताजा कर दी। आंध्र प्रदेश के अलग राज्य बनने के बाद नेहरू जी ने कहा था कि 'हमने बर्र
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थैंक यू आरो! नये अमिताभ के लिये!

सात हिंदुस्तानी का सिपाही और जंजीर का एंग्री यंगमैन जवान हो गया है। नये अंदाज और नये रूप में। उसका नया नाम आरो है। उम्र तेरह साल। बस थोड़ी दिक्तत
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वाजपेयी का मुखौटा या संघ का खिलौना

लिब्रहान कमीशन ने अयोध्या का सच सामने लाने में 17 साल लगाए और इसको लेकर उसकी जी भर के आलोचना की जानी चाहिए। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के बाद ये भी
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नितिन का चुनाव और संघ की शक्ति

नितिन गडकरी बीजेपी के अध्यक्ष बनेंगे। ये खबर कुछ लोगों को चौंका सकती है लेकिन जो संघ को जानते हैं, वो जानते थे कि कुछ ऐसा ही होगा। इसकी बुनियाद
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हमारी आंखों का पूरा ख्वाब है सचिन

जो मुझे जानते हैं उन्हे पता है कि मैं सचिन तेंदुलकर का हमेशा आलोचक रहा। इस वजह से अकसर सहयोगियों से नोकझोंक भी होती रहती है। शायद मैं 'ओल्ड फैशन्ड'
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शिवराज का बिहारी अ-प्रेम और अस्मिता ...

सतना में दिए शिवराज सिंह चौहान के बयान से मैं चौंका। दो कारणों से- एक, शिवराज की ऐसी कोई इमेज कभी रही नहीं। बीजेपी में होने के बावजूद उनकी छवि
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एक पुलिस वाले का सिर कलम या एक ...

अठारह साल की उम्र में मार्क्सवाद से मेरा परिचय नहीं हुआ और न ही किसी वामपंथी से दोस्ती, लेकिन बीस साल की उम्र में जेएनयू की बदौलत इनसे जान पहचान
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लागा बीजेपी को रोग, राम ही करेंगे ...

विजयाराजे सिंधिया बीजेपी की बड़ी नेता थीं और जब तक रहीं तब तक उनका पूरा सम्मान पार्टी ने रखा लेकिन यही वसुंधरा राजे सिंधिया के बारे में नहीं कहा जा
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गजब किया राहुल जो तेरे एजेंडे पर ...

अपने एक दोस्त और संपादकीय सहयोगी से बात हो रही थी। वो राहुल गांधी से थोड़े नाराज नजर आ रहे थे। कारण, राहुल का ये कहना कि हमें पाकिस्तान पर
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संघ का संकट और पटेल-नेहरू से सबक

इतिहास इंसानों से बनता है लेकिन उसमें इंसानों की तरह अहं नहीं होता। ये सबक इतिहास ही देता है इसलिए इतिहास सत्य की खोज के साथ-साथ बदलता रहता है। इतिहास
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बीजेपी का दुश्मन मुसलमान नहीं, ...

बीजेपी की हालत बुरी है ये किसी से छुपा नहीं है। लेकिन आरएसएस उसके घाव में मिर्च डालकर उसका दर्द बढ़ा रहा है। संघ के बड़े नेता एम जी वैद्य
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कांग्रेस की फैक्ट्री से निकला नया ...

आशीष नंदी बड़े विद्वान हैं और उनकी बहुत इज्जत है। चुनावों की समीक्षा करते हुए उन्होंने लिखा कि बीजेपी और दूसरी पार्टियों को उनका दंभ यानी "एरोगेंस" ले डूबा। उनकी
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जिसे नाज है पाटलिपुत्र पर वो चाणक्य ...

एक पुरानी कहावत है जब रोम जल रहा था तो नीरो बंसी बजा रहा था। बीजेपी संकट के दौर से गुजर रही है और पार्टी में चाणक्य कहलवाने के शौकीन
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अतीत से टूटता कनेक्ट और चुनाव के 10 ...

बड़े चुनाव देखे और किए लेकिन ऐसा चुनाव नहीं देखा। किसी को कुछ पता नहीं, कोई कुछ भी कहने को तैयार नहीं। कोई आज कांग्रेस की सरकार बना रहा है
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नयी राजनीति और केचुली छोड़ता देश

राजनीति की जमीन पर अभी धूल बहुत है। पार का आसमान दिखाई नहीं दे रहा है। चारों तरफ अनिश्चितता है। सिर्फ कयासों के पर फड़फड़ा रहे हैं। चुनावों की रेलमपेल
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सपनों की सींग पर सरपट दौड़ता राजकुमार

राहुल गांधी अब महाराज बनने को पूरी तरह से तैयार हैं। दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस इस बात की चुगली करती है। सोनिया ने इस चुनाव में अपने आप को
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मुस्लिम पॉलिटिक्स और मुलायम, लालू ...

करीब छह महीने पहले की बात है। देवबंद स्कूल और जमीत-ए-उलेमा-ए-हिंद के नेता और सांसद महमूद मदनी से बात हो रही थी। बातों-बातों में बात निकली तो बात मुस्लिम वोटरों
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शिवराज या फिर मोदी?

गाली-गलौच के बीच आम धारणा यही बनती है कि ये राजनीति अपने लायक नहीं है। यहां सभ्य पढ़े लिखे लोगों के लिए जगह नहीं है। राजनीति करने के लिए किसी
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पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त...

तीसरे मोर्चे के योद्दा इस बार काफी उत्साह में नजर आ रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि बिल्ली के भाग से छींका इस बार फूट सकता है। लेकिन इनके निशाने
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युवराज के सपनों में पलती कांग्रेस

बात काफी पुरानी है। पत्रकारिता में नया-नया रंगरूट आया था। एक हिंदी दैनिक के ब्यूरो चीफ अक्सर हमारे दफ्तर आया करते थे। एक दिन बातचीत में मेज ठोंकते हुए काफी
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जॉर्ज समाजवाद के कैंसर

पिछले हफ्ते नीतीश कुमार का इंटरव्यू कर रहा था। मैंने पूछा -ये क्या मजबूरी है कि कल्याण सिंह के साथ मुलायम सिंह यादव और नीतीश कुमार के साथ आडवाणी नजर
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विचारधारा की जिद और बीजेपी की मुश्किल

अभी सोच ही रहा था कि खबर आ गयी कि वरुण गांधी पीलीभीत से ही लड़ेंगे। खुद पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने ऐलान कर दिया। कुछ समझा और कुछ नहीं