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Betuki - Vyang Baan

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25 Jan 2010
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बेतुकीः आओ एक प्लेट शहर खायें

आपने मटर पनीर, कड़ाही पनीर, दम आलू, रोस्टेड चिकन, मटन बिरयानी, मुगलई चिकन, फिश फ्राई, आमलेट, पाव भाजी, चाऊमिन, मसाला डोसा खाया है। बिल्कुल खाया होगा, इसमें सोचने की क्या बात है। अगर आप परफेक्टली बेजीटेरियन हैं तो रोस्टेड चिकन, मटन बिरयान आदि-आदि नहीं
 
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अब कभी डायबिटीज को मत कोसना

अब कभी डायबिटीज को मत कोसना। भगवान हर मर्ज का इलाज पहले कर देता है। चीनी पेट्रोल की कीमत पर हुई तो क्या, डायबिटीज रोगियों की संख्या भी तो बढ़ रही है। रोजाना आप निखालिस चीनी की चाय पीओ पर घर आने वाले मेहमान को दो दाने चीनी डालकर ही चाय पिलाना। चाय की
 
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बेतुकीः अब दूल्हा पिटेगा

एक बहुत पुराना गाना है, देख तेरे संसार की हालत क्या हो गयी भगवान कितना बदल गया इंसान। गीतकार ने नाहक ही भगवान को परेशान कर डाला। अरे जमाना कोई बूंदी का लड्डू थोड़े ही जो हमेशा एक जैसा नजर आयेगा। अरे पहले के लोगों ने जो नहीं किया वह हम भी नहीं करें। य
 
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Dec 29 2009 11:49 AM
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मैं कुत्ताः चमचागीरी कोई हमसे सीखे

यह बहुत पेचीदा प्रश्न हो सकता है कि इंसान प्राचीन चमचा है या कुत्ता। इस प्रश्न का हल भी मुर्गी पहले पैदा हुई या अंडा सरीखा है। हम तो इतना जानते हैं पीढ़ियों से चमचागीरी करते-करते हम कुत्ते परिपक्व हो गये हैं। इसी चमचागीरी का नतीजा है हम शताब्दियों से
 
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नित्य- निरंतर

मानवीय सोच और संवेदनाओं को समर्पित दो लघु कविताएं लिख रहा हूं। लिखने के लिये बार-बार निरंतरता बनाने का प्रयास करता हूं लेकिन हर बार कोई न कोई कारण गैप बना देता है। यों ही मानव क्यों उठा रहा अपनी अर्थी स्व कंधों पर। इस शहर से उस शहर तक अन्जाने खामोश प
 
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Dec 29 2009 11:49 AM
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खंडहर

बहुत दिनों से विवाह समारोहों में व्यस्तता के चलते कुछ लिख नहीं सका। या यों कहें, शादियों में कारगिल सा युद्ध लड़कर ही लुत्फ उठा रहा था। विवाह समारोह भी अब सामान्य नहीं रहे। रिश्तेदारों को बुलाने से लेकर उनको खिलाने तक में बहुत कुछ बदल गया है। एक देहा
 
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Dec 29 2009 11:49 AM
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अपना-अपना कारगिल

दोस्तों बहुत ही विषम परिस्थिति सामने आने वाली है। आओ हम सब मिलकर युद्ध की तैयारी में लग जाएं। जब युद्ध करना ही है तो पहले उसकी ड्रेस का निर्धारण कर लें। सामान्य तौर पर इस युद्ध के लिये लोग सूट का इस्तेमाल करते हैं। जरूरी है कि अपनी-अपनी शादी के सिलाय
 
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Dec 29 2009 11:49 AM
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मैं कुत्ता(4)ः तरक्की के लिये टांग खिंचाई जरूरी

ये बात मुझसे बेहतर कौन जानता है कि कुत्ता आखिर कुत्ता ही होता है। हम लोगों को कुत्ता इसीलिये कहा जाता है क्योंकि हमारी कोई औकात नहीं होती। हमारी औकात नहीं होती इसलिये हम दूसरों की औकात को परखने की कोशिश करते हैं। हमारा यही सगुण आज मानव जाति के उत्थान
 
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Dec 29 2009 11:49 AM
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बेतुकीः मां लक्ष्मी का सालाना निरीक्षण आज

राम-राम सा। आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं। यह पर्व आप सभी के लिये मंगलमय हो। अब कुछ बेतुकी हो जाए। दास जी के पुत्र को एक्जाम में दीपावली का निबंध लिखने को दिया गया। बालक मन ने इतना अच्छा निबंध लिख दिया कि मास्टर जी प्रसन्न हो गये। बोले बेटा
 
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Dec 29 2009 11:49 AM
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अप्रेरक प्रसंगः दास न रहे उदास

भ्रष्टाचार की मूर्ति दास जी नित्यकर्म के बाद जैसे ही चिलमन से बाहर आये चमचे दहाड़ मारते उनकी तरफ दौड़ पड़े। दास जी ने तनिक प्यार से पूछा, भैये चमचों क्या परेशानी है। दो-तीन-चार नम्बर के काम के धनी चमचे ने मुंह खोला, महाराज महंगाई मार रही है। दास जी न
 
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लगे रहो राज भाई

राज भाई, यों ही लगे रहना। किसी से डरने की जरूरत नहीं। आखिर किसकी मजाल जो तुम्हारी बिना बाल की मूंछ टेड़ी कर सके। राजेश खन्ना का गाना नहीं सुना, कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना। छोड़ो बेकार की बातों में, बीत न जाए रैना। तुम तो पुरानी कहावत के
 
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Dec 29 2009 11:49 AM
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अप्रेरक प्रसंगः दोस्त वही जो प्रभावशाली

एक समय की बात है, दास जी अपने सरकारी बंगले के गार्डन में ध्यानस्थ बैठे थे। चारों ओर शांत मुद्रा में चमचे उनके इस रूप को देखकर गार्डन-गार्डन हो रहे थे। चारों ओर चमचों की बढ़ती भीड़ देख दास जी ने आंख खोल दीं। प्रसन्न मुद्रा में बोले, चमचों आज क्या समाच
 
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Dec 29 2009 11:49 AM
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मैं कुत्ता(3)- क्षेत्रवाद हमारी पहचान

दोस्तों बहुत दिनों के बाद मुलाकात हो रही है। हम कुत्तों की आदत ही कुछ ऐसी है कि जहां एक बार पंजों से मिट्टी उड़ाकर बैठे तो झपकी लग ही जाती है। खैर बात हो रही थी हमारी कुत्तानीयत की। अरे जब इंसानों की नीयत को इंसानीयत कहते हैं तो कुत्तों की नीयत को और
 
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Dec 29 2009 11:49 AM
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पुज गये महाशय

पुज गये महाशय। सौभाग्य की बात है हर विलुप्त प्राय वस्तु की तरह आपका का भी एक दिन आ ही जाता है। सुबह से इठलाने का आनंद ही कुछ निराला है। शाम हुई और भूखी-प्यासी पत्नी ने जब चंद्रमा को याद किया तो आप साक्षात सिर से पांव तक कांप गये होंगे। जब पत्नी ने आप
 
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Dec 29 2009 11:49 AM
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बेतुकीः फिर निपट लिये रावण जी

फिर निपट लिये रावण जी। आपके सालाना निपटान दिवस पर आपके पुतले खूब धू-धू कर जले। अरे आपको साक्षात निपटाने की तो किसी में हिम्मत है नहीं। आपके पुतले को जलते हुए देखकर ही अपन तो पुरुषार्थ दिखा देते हैं। भाई दसानन किसी जमाने में आपके दस सिर हुआ करते थे। आ
 
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Dec 29 2009 11:49 AM
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मृग मारीचिका

दुनियां के इस रेगिस्तान में ये मेरे निसां आंधी के इक झोंके में मिट जाएंगे। फिर रह जायेगी इक सूनी जमीं और चतुर्दिशा में बढ़ता अंजान लोगों का काफिला जो छूना चाहता है वह मृग मारीचिका जिसकी तलाश में मैंने उम्र तमाम की। और न जाने कितने लोग दफन हैं इस रेगि
 
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बेतुकी - बहुत याद आती है तुम्हारी

कसम से, तुम्हारी बहुत याद आती है। बिल्कुल हर्ट से कह रहा हूं। यों भी कह सकता हूं, तुम्हारी याद में आंसू बहा रहा हूं। अपने प्रियजनों की तरह हर साल तुम्हारी याद करता हूं। दर्जन, दो दर्जन लोगों से तुम्हारी तारीफ भी करता हूं। पर मुकेश का एक गाना मेरे रग-
 
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Dec 29 2009 11:49 AM
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अप्रेरक प्रसंगः कपड़ों से फर्क पड़ता है

कुछ समय पहले ही बात है। दास जी अपने सरकारी बंगले के अंतःपुर में विश्राम कर रहे थे। आस-पास चमचों की चटर-पटर रोजाना की भांति ही माहौल को चमचामय बनाने में सफल हो रही थी। प्राचीन समय के इद्रलोक की भांति ही अप्सराएं भी वहां मौजूद थीं। सोमरस का पान करते हु
 
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Dec 29 2009 11:49 AM
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क्षणिकाएं

कशमकश मैं हूं कि नहीं जीवन इसी कशमकश में बीत जाएगा सोचता हूं कुछ करूं अपने अस्तित्व का आभास खुद करूं दूसरों को करा दूं सहारा बन सकूं किसी बेसहारा का उतार फेंकूं ये लिबास पाखंडों के पर क्या मैं यह कर सकूंगा शायद हां या नहीं जीवन इसी कशमकश में बीत जाएग
 
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Dec 29 2009 11:49 AM
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राधा रानी का मना जन्मदिन

भादौं की मस्ती मथुरा में पिछले दिनों छायी रही। जन्माष्टमी के बाद आठ सितम्बर को मथुरा के मंदिरों में कृष्ण प्रिया राधा रानी का जन्मदिवस मनाया गया। राधा रानी की जन्म स्थली रावल में राधा जी का दुग्धाभिषेक हुआ। इससे एक दिन पहले सात सितम्बर को बरसाना के श
 
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Dec 29 2009 11:49 AM
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मैं कुत्ताः अगले जनम मोहे कुत्ता ही कीजो

एक बहुत पुराना गाना है, रास्ते का पत्थर किस्मत ने मुझे बनाया। अपने धरम पाजी बड़े सेड-सेड मूड में यह गाना गा रहे थे। आज उसी तर्ज पर अपना चीकू भी कुछ सेड मूड में किकिया रहा था। अरे चीकू, वही मोहल्ले का सबसे सीधी पूंछ वाला कुत्ता। आते-जाते हर कोई उसके ल
 
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काश अपन दस साल नये माडल होते

पता नहीं कब छह महीने बीत गये। ये मत समझना मैंने आपको याद नहीं किया। जब-तब आप लोगों के संदेश देख लेता था और अपने पुराने लेख पढ़ लेता था। हकीकत में कहूं तो कुछ आलस, कुछ व्यस्तता और कुछ देश की बिजली ने हमें इस हालत में पहुंचा दिया। रात को जब भी साढ़े ग्
 
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जय भ्रष्टाचार, जय भाई-भतीजावाद

भैये उडन तस्तरी। आपने पुरानी कहावत सुनी है, जो बोले सो कुंडी खोले। अरे पार्टी कार्यालय की कोई समस्या नहीं है इसे आपके यहां बना देंगे। ऐसा भी हो सकता है अपनी पार्टी का कारपोरेट कार्यालय आपके घर बन जाए। आप सोच रहे होगे, कारपोरेट कार्यालय की क्या जरूरत
 
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आओ, पार्टी-पार्टी खेलें

दोस्तों, फोकटियों का मेला शुरू हो गया। अब न रहेगी मंदी और न नजर आयेगी बेरोजगारी। रोजाना दारू पी जाएगी और धड़ल्ले से बेरोजगारी दूर की जाएगी। वो तो आयोग विलेन बन गया वर्ना भाई लोगों के पास बांटने के लिये बहुत धन है। अरे पांच साल तक कमीशन यूं ही थोड़े ह
 
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होली के रंग

होली का त्यौहार अन्य त्यौहारों से पूरी तरह अलग है। पूरे भारत में जैसे होली मनायी जाती है उससे अलग होती है बृज की होली। बृज में होली के अनेक रूप सामने आते हैं। बरसाना में राधा रानी और उनकी सहेलियों के स्वरूप में श्रीजी धाम वृंदावन की हुरियारिनें नंदगा
 
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बेतुकीः अगला आस्कर फिर ले आओ

भैये देश को पहली बार आस्कर मिला। ये मानो पहली बार इसकी पुरस्कार की जुगा़ड़ हुई। अपने आमिर भाई को पहले ही आस्कर मिल जाता पर उन्हें फिल्म बनाने का सलीका नहीं आया। अरे भाई अंग्रेजों के मात्र गेम में ही उन्हें गंवार हरा दें और वो तुम्हें आस्कर देंगे। लोग
 
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बसन्त

सुन चांदनी मेरे आंगन में सांझ ढले रात में छिपकर किरणों से रवि की तू एक बार आना। ओ बदरिया मेरी राह में सूरज की आड़ में मोरों की झनकार लिए तुम मिल जाना। ऐ हवा मेरे गांव की चौपाल पर फागुन की रात में महक लिये साथ में तू चली आना। अरे बसन्त चांदनी रात में
 
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