POEM OF SOUL's Image
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01 Jan 2010
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जो दे मन को विश्वास नया

धुली-धुली सी सुबहकोहरा कुछ, कुछ हटा हुआबादलों के बीच से सूरज की चमकती किरणें,भर दें एक अहसास नयाजो दे मन को विश्वास नया।नव वर्ष के मौके पर सभी को मेरी तरफ से हार्दिक बधाई।नव वर्ष मंगलमय हो।आपका अपना नीतीश राज
 
Nitish Raj
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निशान ‘ताज’ की दीवार का

धर्म का ना जात का हजारों के आघात का क्यों पनप रहा ये ज़हर इंसानी जज़्बात का। करता है छेद लाखों दिल में मेरे, जब भी देखता हूं निशान ‘ताज’ की दीवार का। आपका अपना नीतीश राज (फोटो साभार-गूगल)
 
Nitish Raj
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मेरे चमन को लगी ये किसकी नजर

मेरे चमन को लगी ये किसकी नजर, किसने फैलाई दहशत की आग, गुलशन मेरा खामोश कर दिया, फैला के हर जगह, खौ़फ की हवा। आज तड़के आए थे सब अपने, पूछने मेरे दिल का हाल, अपने ही लगे गुनहगार मुझे, अपनों पर ही न किया ऐतबार। ऐ खुदा, ऐ मौला, ऐ परवरदिगार मेरे, बख्श मेर
 
Nitish Raj
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एक कमरा छोटा सा, मेरा अपना

एक कमरा छोटा सा, अपना सा, कुछ चुनिंदा किताबें इधर भी, उधर भी, कुछ पन्ने यहां भी, वहां भी। एक सपना लिए हुए कुछ मेरे मन के कुछ उन के, जो इसमें पहले रह चुके उन चुनिंदा लफ्जों के बीच, मेरा बिस्तर। बिस्तर पर मैं, तकिया-चादर लगाए, सिरहाने से उठता धुआं एश्ट
 
Nitish Raj
Dec 29 2009 11:52 AM
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क्या कहूं अनजान हूं पर

क्या कहूं अनजान हूं, पर जानना चाहता हूं मैं, जानना चाहता हूं, कि, तुम क्या सोचती हो? उस बारे में, जिस बारे में, मैं, अभी तक अनभिज्ञ हूं उस पीड़ा के बारे में, जिसकों सहा है सिर्फ नारी ने। वो दर्द होता है अपना, पर, उसकी महक होती सब जगह उसकी महक से महकत
 
Nitish Raj
Dec 29 2009 11:52 AM
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“...तो कोई बात थी”

तेरी जुल्फ मेरे शयानों पर होती तो कोई बात थी। तेरा हाथ, मेरे हाथ में होता तो कोई बात थी। तुम कदम चंद कदम साथ चली होती तो कोई बात थी। मयखाना ना सही, तुम साथ होती तो कोई बात थी। आज अकेला चला हूं, गर तुम साथ चलती तो कोई बात थी। आपका अपना नीतीश राज फोटो
 
Nitish Raj
Dec 29 2009 11:52 AM
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बुराई पर अच्छाई की जीत का त्योहार-दशहरा

बुराई पर अच्छाई की जीत के पावन पर्व पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। आप और आपके परिवार के लिए ये त्योहार खुशियां लेकर लाए। दशहरा आप सभी के लिए मंगलमय हो। आपका अपना नीतीश राज
 
Nitish Raj
Sep 28 2009 05:11 AM
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शुभ नवरात्र-मां को करें प्रसन्न-मां सिद्धिदात्री

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। आज नवरात्र के नवें दिन पूजा होती है आदिशक्ति के नवें रूप सिद्धिदात्री की। आठ सिद्धियां देने वाली मां सिद्धिदात्री को शाकम्भरी देवी के नाम से भी जाना जाता हैं
 
Nitish Raj
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शुभ नवरात्र-मां को करें प्रसन्न-मां महागौरी

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।आज नवरात्र का आठवां दिन है और आठवें दिन पूजा होती है मां महागौरी की। आठवीं शक्ति का रूप महागौरी जो हरती हैं सभी के कष्ट। मां महागौरी का वर्ण पूर्णत: शंख और चंद्रमा के
 
Nitish Raj
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Sep 26 2009 06:51 AM
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शुभ नवरात्र-मां को करें प्रसन्न-मां कालरात्रि

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।आज नवरात्र का सातवां दिन है और सातवें दिन पूजा होती है मां कालरात्रि की। कालरात्रि मां जिनका रूप बड़ा ही भयानक है पर जो भी उनकी पूजा करता है उसको हमेशा फल प्राप्त
 
Nitish Raj
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Sep 25 2009 06:06 AM
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शुभ नवरात्र-मां को करें प्रसन्न-मां कात्यायनी

नवरात्र के छठे दिन पूजा होती है कात्यायनी मां की। सच्चे मन से की जाए मां कात्यायनी की पूजा तो निर्बल भी बलवान हो जाता है और फिर किसी तरह की कमी नहीं रहती। इनके पूजन से अद्भुत शक्ति प्रदान होती है और दुश्मनों का संहार करने में जो सक्षम होती है। माना जाता
 
Nitish Raj
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शुभ नवरात्र-मां को करें प्रसन्न-मां कूष्मांडा

नवरात्र में मां की पूजा करने के कई अलग-अलग तरीके और अलग-अलग विधान होते हैं। कुछ भक्त मां को पूजा अर्चना करके तो कुछ उपवास रख कर अपनी भक्ति-भाव प्रदर्शित करते हैं। नवरात्र के चौथे दिन पूजा होती है कूष्मांडा देवी की। ये है मां दुर्गा के नौ रूपों में से
 
Nitish Raj
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शुभ नवरात्र-मां को करें प्रसन्न-मां स्कंदमाता

नवरात्र के पांचवें दिन पूजा होती है स्कंदमाता की। मां का हर रूप शक्ति का रूप है और उनके हर रूप में बसे हैं हजारों चमत्कार। पांचवें दिन पूजा होती है मोक्ष के द्वार खोलने वाली माता स्कंदमाता की। स्कंदमाता परम सुखदायी है। मां की भक्ति पाने के लिए इस मंत्र
 
Nitish Raj
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Sep 24 2009 01:04 PM
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शुभ नवरात्र-मां को करें प्रसन्न-मां चंद्रघंटा

मां को प्रसन्न करने के लिए गायत्री मंत्रों की बात तो हम कर चुके हैं। मां शक्ति का रूप हैं। मां की पूजा करने से सारी श्रृष्टि धन्य हो जाती है। मां को प्रसन्न करने के लिए मां के भक्त उनकी उपासना करते हैं। मां के अनेकों रूपों में से एक हैं चंद्रघंटा मां का
 
Nitish Raj
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Sep 24 2009 01:00 PM
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शुभ नवरात्र-मां को करें प्रसन्न

मां के नौ रूपों की पूजा और उन पूजा को करने के साथ ही नवरात्र में मां के मंत्र काफी लाभप्रद होते हैं। नवरात्र के मौके पर मां को प्रसन्न करने के कुछ मंत्र आपके लिए। ये मंत्र देते हैं आपको एक नया विश्वास और मां का संपूर्ण साथ और आशीर्वाद। हर रोज इन मंत्रों
 
Nitish Raj
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Sep 23 2009 11:37 AM
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अब सब फसाना है

दोपहर की धूप से बचने मेरे कमरे मे आना वो तेरा एक बहाना था। पास तुम तो थी वरना सब अफसाना था। तेरी जुल्फों की छांव में तेरी गोद में सर रखना वो तेरा एक बहाना था। पास तुम तो थी वरना सब अफसाना था। मेरे बालों को सहलाना साथ मेरे हमेशा रहना वो तेरा एक बहाना
 
Nitish Raj
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कहां फना होगया....।

कहां फना होगया....। वो ढलती शामें जब आती थी शबाब पर तब होता था मिलना हमारा-तुम्हारा। कहां खो गया....। वो ढलती रातें जब होती थी उफान पर वो छलकाना जाम हमारा-तुम्हारा। कहां गुम हो गया....। लालिमा लिए आसमां ढलती रात के साए में तेरे आंगन में, होता था साथ
 
Nitish Raj
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तेरे सिवा कोई और नहीं...

तेरा साथ रहा है ऐसे विष रस भरा कनक घर जैसे सारी दुनिया कहे जहर है मैं पी जाऊं मीरा जैसे। प्यार किया है मैंने ऐसे राधा, श्याम को चाहे जैसे, विरह में तेरे जलती हूं ऐसे बिना राम के सीता जैसे। तेरे सिवा कोई और नहीं है, और किसी को चाहूं कैसे। (ये कविता मे
 
Nitish Raj
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फिर आज मिले, बिना आहट

मिले तो हैं, पहले भी हम, फिर आज मिले, बिना आहट, जिंदगी और हम। जिंदगी ने पूछा मुझसे, आकर दबे पांव। क्यों उदास बैठा, कहां फंसी तेरी, जिंदगी की नाव? मैं, एक भंवर की तरह लाखों सवालों से घिरा, जिंदगी की तलाश में भटकता रहा, मंजिल की राह में। कब होगी मुकम्म
 
Nitish Raj
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वो...नहीं आएगी...

वो आएगी, जरूर आएगी, उसके आने से पहले हवा मुझ तक, उसकी महक लाएगी। जैसे, बच्चे तक, आती मां की महक। जब भी कोई आहट होती दिल कहता, अब तो तुम ही हो बिस्तर पर पड़े-पड़े, दिमाग भी कहता अब तुम ही हो, तुम ही तो हो। दरवाजे पर होती आहट तुम ही तो होगी पर...ये...ह
 
Nitish Raj
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समय की पहचान

आसमान में सूरज अपनी बिना आहट की गती से चलता हुआ, वहीं, अन्दर कमरे में, घड़ी की सुईयां आहट करती हुईं, सन्नाटे को चीरती हुई, टक...टक...टक... आसमान से गिरती दूरियों को भेदती गर्म तबे की लौ, सुइयां टक...टक...करती हुई दोनों निरंतर चलते हुए मार्गदर्शित करत
 
Nitish Raj
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दबे पांव...दूर कहीं

तुम कहती हो, तुम्हारे हाथों की लकीरों में मैं नहीं। मैं कहता हूं, मेरे मुकद्दर की लकीरें सिर्फ तेरी हैं। तेरे ख्वाबों में, मैं ना सही मगर, मेरे ख्वाब में, सिर्फ तुम ही तुम हो। तुम गुजर गई, मेरे पास से, तो यूं लगा मुझे, कि जिंदगी गुजर गई, दबे पांव...द
 
Nitish Raj
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कहीं तुम आ तो नहीं गई।

हर आहट, एक-एक आहट एक दस्तक, कई आवाज़े दूसरी मंजिल पर पहुंचती सड़क से गुजरने वाले रिक्शो पर लगे घुंघरुओं की आवाज़। दूर से, दूर तक सुनाई देती, एक-एक आहट। दूसरी मंजिल पर सुनाई पड़ती सड़क से गुजरने वालों की आहट, उनकी पदचाप। हर एक आहट बुलावा देती,एक भ्रम
 
Nitish Raj
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फिसले छलनी से

यह एहसास हुआ है यूं ही इन दिनों, अचानक, दुनिया कुछ दिनों में बीसवीं सदी की केंचुली को उतार फेंकने वाली है। हर कोई बीसवीं सदी से छुटकारा पाने को उतारु है, जैसे, कोई, अपने मैले-कुचले कपड़ो से। मैं तो नहीं था तब जब आई थी बीसवीं सदी, कुछ लोग उठा लाए थे,
 
Nitish Raj
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जी लो, जिंदगी एक बार फिर।

तुम चुप क्यों हो, क्यों हो उदास तुम, कहां चली गई है हंसी तुम्हारी। पहले तो हंसती थी तुम, तुम करती थी खूब बातें, बोलती, तो चुप ना होती थी तुम। माना चांद पर दाग है तुम्हारे चेहरे पर ना था कोई दाग अब क्यों मुरझा गया है फूल ये। मेरे लिए ना सही खुश रहो खु
 
Nitish Raj
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ओ... ऊपर वाले कर रहम

हर तरफ हाहाकार, चित्कार भूख से तड़पते लोग, खुद को बचाने की तड़प अपनों को बचाने की जद्दोजहद, पहले खुद को बचाएं या उनको या सुनें अपने अंतरमन को, हर तरफ है तड़प। गुम हुईं बच्चों की किलकारी उनके रोने से कांपता है दिल पर अब तो वो रोते भी नहीं सिसकियों में
 
Nitish Raj
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पीछे छोड़ आई थी, ‘वो’, मेरे लिए सब

अकेली जिंदगी की उधेड़बुन, और दो जिंदगी को जोड़ने वाली फेरों के समय हाथों से बनी वो गांठ लगी चुन्नी। वो जो मेरे लिए सारी जिंदगियों को पीछे छोड़ आई थी सिर्फ एक जिंदगी के लिए। उसकी आंखें, लगी रांहों पर राहों में से निकलती एक राह, जिसका इंतजार तकती एक र
 
Nitish Raj
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“अपनी...कुछ निशानी दे दो”

शिकवे और गिले करते रहे हम अपने आप ही से लड़ते रहे हम, तुमने भी नहीं कही कुछ अपनी हमें भी गिला कि न कह सके कुछ हम अपनी। इप्तदा से ही इज़हारे दिल किया हमने, इंतहा तक करार न कर सके तुम। रहा जिंदगी का सफर कुछ यूं जैसे कहीं पर जर्जर झूलता पुल, हर कदम डरत
 
Nitish Raj
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"तुम आज भी हसीन हो"

कौन कहता है कि तुम हसीन नहीं, तुम आज भी हसीन हो, मेरी आंखों से एक बार देखो तो। अब भी दीवाना हूं मैं, उन अदाओं का, जुल्फों का, उन आंखों का, उस मुस्कुराहट का, जिसने तब भी लूटा था मेरी रातों की नींद को। कौन कहता है कि तुम हसीन नहीं। आज भी अच्छी लगती है
 
Nitish Raj