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मुसाफ़िर

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25 Apr 2010
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अमेरिकन लाठी का जोर(सीनाजोरी)और भारतीय आनंद जान की बदकिस्मती...

मशहूर फैशन डिजाईनर आनंद जान के केस के लूपहोल्स के बारे में मैंने अपने कुछ दिन पहले के पोस्ट में जिक्र किया था,कि किस तरह से अमेरिकन न्याय-व्यवस्था आनंद के मामले में दोहरा चरित्र अपना रही है और बिना उसके पक्ष को सुने-समझे सज़ा दे चुकी है.यहाँ तक कि जिस
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
Apr 25 2010 04:55 PM
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आसमान में हिस्सेदारी की कवायद (मरते आदिवासी)*(मनोज कुमार 'तपस')

विकास की अंधी दौड़ के कारण हज़ारों आदिवासी बदहाली के शिकार होते जा रहे हैं.हालात यह है कि आदिवासियों के पास मूलभूत सुविधायें तक नहीं हैं और इन्हें सरेआम मारा जा रहा है.हर बार माओवादियों का मुद्दा उठते ही आदिवासियों का सवाल सामने आता है और सता के गड़रिये
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
Apr 24 2010 04:44 PM
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तुम्हें जन्मदिन मुबारक हो-खाली पेट मुस्कान से.

मैं जानता हूँ,सचिन.आज तुम्हारा जन्मदिन है.बहुत बधाईयाँ मिलेंगी तुम्हें,यहाँ,वहाँ इधर उधर से भी /पर वह दुआएं नहीं पहुँच पाएंगी तुम तकजिनको दिन भर के मर-खपने के बाद भीएक अदद सौ का नोट नहीं मिल पाताजिन घरों में बच्चों को गीला भात नमक-हल्दी मिलकर खिला दिया
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
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अब चौथा रंगमंच-मचान (यानि "पड़ोस का रंगमंच")

एक समय रंगजगत पर बादल सरकार ने तीसरे रंगमंच से रंगजगत का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया था.पर हमारे इस चौथे किस्म के रंगमंच का आधार कोई थ्योरी नहीं है बल्कि नाटी-प्रदर्शन का एक अनूठा प्रेक्षागृह है.यह 'मचान'थियेटर है यानी terrace theatre /theatre on rooftop
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
Apr 19 2010 10:46 PM
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प्रेम का इस्तीफा..(मनोज तापस की कविता)

हाँ !मुन्ना भाई,आप ठीक कहते हैं-प्रेम से इस्तीफा नहीं दिया जा सकता.कमबख्त इस कलम से जब भी,प्रेम का इस्तीफा लिखने बैठता हूँ.तो लिख बैठता हूँ,प्रेम पत्र. कभी-कभी मन करता है,ढेर सारी गालियाँ लिख पोस्ट कर दूँ उस पते पर,लेकिन लिख बैठता हूँ,प्रेम कविता फिर.कल
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
Apr 19 2010 06:43 PM
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लोक कवि महेंद्र शास्त्री-जन्मदिवस विशेष

भोजपुरी लेखकों में महेंद्र शास्त्री का नाम महत्वपूर्ण है.वे भोजपुरी के आरंभिक उन्नायकों में से थे.उन्होंने भोजपुरी -लेखन और आन्दोलन -दोनों ही क्षेत्रों में काम किया.उन्होंने हिंदी में भी लिखा है परन्तु उनका श्रेष्ठ लेखन भोजपुरी में ही आया.उनका मूल्यांकन
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
Apr 16 2010 01:23 PM
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अतिशय प्रयोगों की बलिवेदी पर-1084 की माँ.

ऐसा कई बार होता है कि निर्देशक नाटक में अपनी क्षमताएँ दिखाने के लिए कई नयी चुनौतियां लेते हैं और लेने लगे हैं और इसके लिए नए-नए प्रयोग भी कर रहे हैं.दरअसल,यह लेखक के concept को संप्रेषित करने के स्थान पर अपने कलात्मकता को दिखाना होता है यानी यह अपने
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
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न्याय के पक्ष में भारत सरकार का दोहरा मानदंड-आनंद जान बनाम अन्य

आज दोपहर दैनिक भास्कर की खबर पढ़कर मैं थोडा चौंका.खबर थी-'दुबई में हत्या के आरोप में मौत की सज़ा पाने वाले पंजाब और हरियाणा के विभिन्न जिलों के १७ युवकों के मामलों को लेकर ६ अप्रैल को विदेश मामलों की सचिव दिल्ली जा रही हैं.विदेश राज्यमंत्री परनीत कौर ने
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
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रेतीली सफलता का ब्रेकडाउन -राँग टर्न

ब.व.कारंत ने एक इंटरव्यू में रंजीत कपूर के बारे में कहा था-'शुरू से लगता था,इसमें दम है.अब भी लगता है,अगर निखरता तो बहुत अच्छा लगता."रंजीत कपूर के नए नाटक 'राँग टर्न' के बारे में यही लगता है की काश थोडा और निखरता तो अच्छा होता.कपूर mass audience के
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
Apr 03 2010 06:08 PM
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मैथिली मेरी माँ और भोजपुरी मौसी है-पद्मश्री प्रो.शारदा सिन्हा.

शारदा सिन्हा ना केवल बिहार बल्कि पूर्वी उत्तर प्रदेश और विश्व भर में जहां कहीं भी हमारे गिरमिटिया पूरबिया कौम है उनके लिए एक पारिवारिक सदस्य सरीखा नाम है.शारदा सिन्हा नाम सुनो तो लगता है अड़ोस-पड़ोस की बुआ,ताई,या मौसी है.ये मैं नहीं कह रहा बल्कि उन अनेक
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
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भोजपुरी की 'मदर इंडिया'-"धरती मईया".......

'जाके ससुरारिया गरब जन करिह सबके बिठा के पलक कोठे रखिह बड़के आदर दिहा छोट के सनेहवा इहे बा सकल जिनगी के हो सनेसवा दुनु कुल के इजत रखिह बोलिहा जन तींत बोलिया..' पैदा होते ही परंपरा से भर दिए गए इसी भाव-बोध के साथ एक लड़की,उसी तरह विदा होकर मायके से ससुराल
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
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भोजपुरी की पहली फिल्म-गंगा मईया तोहे पियरी चढईबो

'गंगा मईया तोहे पियरी चढईबो'को भोजपुरी की पहली फिल्म होने का गौरव प्राप्त हैi इस फिल्म के निर्माता विश्वनाथ प्रसाद शाहाबादी तथा निर्देशक कुंदन कुमार थे.साथ ही,संगीत का जिम्मा चित्रगुप्त का था और फिल्म के गीतों को लता मंगेशकर,सुमन कल्याणपुर,मो.रफ़ी,उषा
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
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एक बढ़िया निर्देशक की कमज़ोर प्रस्तुति-'माहिम जंक्शन'

कमानी सभागार में उपस्थित लगभग सभी सहृदयों के दिमाग में यही बात घूम रही होगी कि क्यों आखिर वह माहिम जंक्शन देखने आया.मेरे पास दो वाजिब कारण था.पहला ये कि इस प्ले में मेरा जूनियर 'शिवम् प्रधान'काम कर रहा था और दूसरा यह कि मैं हिंदी सिनेमा के सत्तर के दशक
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
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उनकी आवाज़ अधरतिया की आवाज़ थी-भिखारी ठाकुर

भि‍खारी ठाकुर बीसवीं शताब्‍दी के सांस्‍कृति‍क महानायकों में एक थे। उन्‍होंने अपनी कवि‍ताई और खेल तमाशा से बि‍हार और पूर्वी उत्‍तरप्रदेश की जनता तथा बंगाल और असम के हि‍न्‍दीभाषी प्रवासि‍यों की सांस्‍कृति‍क भूख को तृप्‍त कि‍या। वह हमारी लोक जि‍जीवि‍षा के
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
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सरहद पार मर रहा है संगीत ...

आज सुबह के अखबार में पढने को मिला ,कि'पाकिस्तानी अधिकारियों ने मशहूर और हर दिल अज़ीज़ ग़ज़ल गायक ज़नाब गुलाम अली साहब को इंडिया आने से रोक दिया है'-इस ख़बर से जितना झटका मुझे लगा उससे अधिक गुलाम अली साहब की बात दिल को चीर गई-'मैं सदमे की हालत में हूँ,म
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
Dec 29 2009 11:45 AM
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एक फ़साना हबीब -अना तनवीर

पिछले दिनों मैं भोपाल स्थित 'इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ' में था और मौका था नया थियेटर के गोल्डेन जुबली वर्ष का.मानव संग्राहलय ने अपने आयोजन "हबीब उत्सव"के तहत दो दिनों का 'सुरता हबीब ' नाम से सेमीनार भी कराया था जिसमें प्रसन्ना.वामन केंद्
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
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"LE JUSTES"by अल्बेयर कामू-हिंसा के रास्ते क्रांति या क्रांति के लिए हिंसा की बहस

बीसवीं शताब्दी के महान चिन्तक और लेखक अल्बेयर कामू के नाटक le justes का हिंदी रूपांतर "न्यायप्रिय"(अनुवाद-प्रो.शरतचंद्रा और सच्चिदानंद सिन्हा)का सफ़ल मंचन पिछले ७-१० अक्टूबर को पटना के कालिदास रंगालय में नत्मंड़प नाट्य-समूह द्बारा किया गया.इस नाटक का
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
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जाति जायेगी गर माद्दा हो..

मैं युवा तुम युवा पर्याप्त है यह परिचय हम दोनों का और इससे पहले कि लोग हमसे हमारी जाति पूछें आओ एक-दूसरे को गले लगा लें. ========================== एक पुराना प्रश्न है- तुम्हारी जाति क्या है ? ज़ाहिर है एक पुराना सा उत्तर भी है. पर अब इस उत्तर को बदलन
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
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'मि.योगी' का जायका ख़राब करेगा -वाट्स योर राशि'

आज हमारे अगल-बगल के सिनेमाघरों में हाई-फाई निर्माता-निर्देशक आशुतोष गोवारिकर की 'वाट्स योर राशि' रिलीज हो गयी है..जैसा कि शुरूआती सिनेडियों ने बताया है ,लगता है आशुतोष इस बार बिना वजह फिल्म बना बैठे हैं.'...राशि' का नाम पहली बार सुनते ही दूरदर्शन के
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
Sep 25 2009 04:13 PM
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"Gloomy sunday"-एक महान हत्यारी कविता.

gloomy sunday वह गीत है,जिसे सुनकर करीब २०० लोगों ने आत्महत्या कर ली थी.इस गीत का लेखक था-हंगरी का "लाजेलो झावोर".झावोर की प्रेमिका ने उसे धोखा दिया और रविवार के दिन जब उसकी शादी का कार्ड लाजेलो को मिला तो उसका दिल टूट गया,तब उसने इस
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
Sep 02 2009 05:06 PM
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कमबख्त फिल्म ...

किसी फिल्म के हिट होने का क्रेटेरिया क्या है या होता है?बहुत संभव है मेरी और आपकी राय लगभग समान हो.बीबीसी हिंदी पर कमबख्त इश्क के हिट होने की खबर है साथ ही यह भी कि अक्षय कुमार ने भव्य पार्टी दी और शाहरुख़ खान को भी पार्टी में बुलाया.यह एक अलग बात है
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
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पीयूष मिश्रा का विडियो साक्षात्कार "www.mihirpandya.com"पर.

गुलाल देखने के बाद जो पीयूष मिश्रा के नए नए मुरीद हुए हैं और वे भी जो रंगमंच के दिनों से ही इस बेहतरीन कलाकार के फन के कायल हैं,उनके लिए एकदम नया और ख़ास विडियो साक्षात्कार मेरे अभिन्न मित्र और आवारा हूँ ब्लॉग के 'मिहिर पंड्या' के वेबसाइट www.mihirpa
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
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राजनीतिक राम के बरक्स पारिवारिक राम की छवि -उत्तररामचरित

रा.ना.वि. के ग्रीष्मकालीन नाट्य महोत्सव के नाटकों पर लिखने की अगली कड़ी में आज भवभूति द्बारा रचित और प्रसन्ना द्बारा निर्देशित नाटक "उत्तररामचरित" के बारे में कुछ. उत्तररामचरित का संस्कृत से हिंदी अनुवाद 'पंडित सत्यनारायण कविरत्न' ने किया है.कविरत्न
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
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जहां मौत एक सहज कविता सरीखी है-राम नाम सत्य है

रेपर्टरी (एन एस डी)का यह नाटक "राम नाम सत्य है"-मूल रूप से मराठी नाटककार 'डॉ.चंद्रशेखर फनसलकर'का लिखा हुआ है.फनसलकर के नाटकों और विशेषकर एकांकियों पर लिखते हुए 'विजय तेंदुलकर' ने लिखा है-"उनके एक-अंकीय नाटकों में थिएटर की संभावनाओं और सीमाओं,दोनों के
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
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लोकधर्मी शैली का सहज नाटक -"सदारमे"(रा.ना.वि.में)

नरहरी शास्त्री जैसे विख्यात और 'श्रीकृष्ण लीला ,कंसवध चरित्र,महात्मा कबीरदास,जालंधर,श्री कृष्णभूमि परिणय ,अदि पौराणिक नाटकों के लेखक की ही रचना है -'सदारमे'.जो आजकल राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के ग्रीष्मकालीन नाट्य महोत्सव में रंगमंडल द्वारा खेला जा रहा
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
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आचार्य तार्तूफ़.. रा.ना.वि.रंगमंडल की उम्दा प्रस्तुति.

आचार्य तार्तूफ़'मशहूर फ्रांसीसी नाटककार 'मौलियर' के विख्यात हास्य चरित्र 'तार्तूफ़'का आचार्य तार्तूफ़ के रूप में भारतीय अवतरण है.सत्रहवी शताब्दी के इस नाटक को वर्तमान समय से जिस तरह से जोड़ा गया है वह वाकई कमाल का है और इसका श्रेय भी सबसे अधिक इसके न
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
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रा.ना.वि.में "ग्रीष्मकालीन नाट्य समारोह २१ मई से १७ जून तक..

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी हमारी गर्मियों को बेहतरीन बनाने के लिए अपने बेहतरीन नौ नाटकों के साथ फिर उपस्थित है.पेश है आपकी सुविधा हेतु समय-सारणी और अन्य विवरण
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
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'मेरी स्वाभाविकता'-(रत्नेश विष्वक्सेन की कविता)

रत्नेश विष्वक्सेन रांची कालेज (रांची)में हिंदी के लेक्चरार हैं.अपने आसपास और खुद पर बीतती चीज़ों के ऊपर नितांत निजी तौर पर उन्होंने बहुत कुछ लिखा है,वे अपनी लिखनी खासकर कविता के क्षेत्र में अपने तक ही तब रखा करते थे(मैं उनके स्नातक के दिनों की बात कर
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
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'जाति ही पूछो साधू की'-विजय तेंदुलकर (रा.ना.वि.में)एक उम्दा प्रदर्शन

विजय तेंदुलकर के व्यंग्य नाटक "जाति ही पूछो साधू की"देखते हुए,हरिशंकर परसाई की 'काक झकोरे'में संकलित एक व्यंग्य रचना 'होना एक इंटरव्यू का'बरबस ही याद आती है.ऐसा किसी साहित्यिक मेल के कारण नहीं बल्कि कथ्य के प्रस्तुति के लिहाज़ से.किसी भी नौकरी में अप
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
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सपनों की कब्रगाह है-बॉलीवुड..

इस मायानगरी में कई पहुंचे पर हर जुम्मे चढ़ते-उतारते सूरज के साथ ही अपने वजूद को बनाते-तलाशते खो गए"- कुछ को उनकी मन-माफिक ज़मीन नहीं मिली कुछ को सही पहचान.जज्बे और जीवट वाला यहाँ फिर भी रुके और खुद को बनाने की जुगत में लगे रहे.यह बात तो सभी को मालुम
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
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पुते हुए चेहरों का सच..-"गुलाल"

भूल जाइए कि,हिंदी फिल्मों का मतलब पेड़ों,सरसों के खेतों और बल्ले-बल्ले ही है.अनुराग कश्यप जैसे नयी पीढी के निर्देशकों ,फिल्मकारों ने हिंदी सिनेमा में एक ऐसी लहर पैदा की है ,जिससे जोहर,चोपडा की मार से डरे दर्शकों को एक नयी सुकून मिलती दिख रही है.साल के
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
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बस यही बचे थे?अब हाय-तौबा क्यों?

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के निजी वस्तुओं की नीलामी की खबरें पिछले कई दिनों से सूचना-तंत्रों की सुर्खियों में थी.पता नहीं हर बार ऐसे मामलों पर हमारी गवर्नमेंट को क्या हो जाता है.शायद किसी कंट्री में ऐसा नहीं होता होगा जहां उसके फादर ऑफ़ द नेशन के साथ
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
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नौटंकी वाया रिक्शा-शो....जय हो...

कल अपने समाजवादी नीतिश कुमार जी "slumdog.."देखने गए.आज के सभी अखबारों की सुर्खियों में उनकी रिक्शानशीन मुस्कुराती हुई तस्वीर छाई हुई है.साथ ही,इस फिल्म के बारे में उनके उदगार भी कि"मैं ज़रा भुसकौल छात्र हूँ इसलिए अब तक फिल्म नहीं देख पाया था.अब इनको
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
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हंसिकाएं..कुछ हल्के-फुल्के पल.

जीवन में हंसने के मौके खुश रहने के मौके बड़े कम हैं.इसी तंगदिली के वक़्त तन्हादिली के वक़्त आपके चेहरों पे एक मुस्कान देता हूँ.कुछ देर के लिए कम-से-कम ये हंसी आपको सुकून दे. "एक बहु और एक सास उनके पुत्र थे -श्री प्रकाश बैठे थे उदास ,अचानक माँ ने कहा-
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
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देखी ज़माने की यारी..कुछ किस्मत की ..(वाया-शफीक सलाम बॉम्बे फेम)

ऑस्कर अवार्ड के बाद चहुँ-ओर जय हो की धूम मची हुई है.slumdog .. से लेकर smile pinki के बाल कलाकारों की तारीफों में सभी ने कसीदे गढ़ डाले हैं.मुम्बई के स्लम में रहने वाले उन बच्चों के लिए राज्य सरकार ने मकान देने की घोषणा कर डाली है..पिंकी हम सब के लिए
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
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भावी ब्यूरोक्रेट्स के दिमाग में घुसा गोबर

कल से डीयू के क्रिश्चियन कालोनी में एक नौटंकी शुरू हो गयी है.जैसा कि आप सभी जानते हैं पटेल चेस्ट का यह इलाका मशहूर है इस बात से कि यहाँ से छोटे-छोटे शहरों से पढ़ कर आये बच्चे प्रशासनिक सेवाओं में जाने के लिए जी-तोड़ मेहनत करते हैं.शायद इसीलिए इस जगह को
 
मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
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अपने भीतर के काले बन्दर को देखने की कमज़ोर कोशिश...दिल्ली-६

दिल्ली-६ कई मायनो में ख़ास फ़िल्म होते-होते रह जाती है.यह अक्सर होता है कि जब कोई निर्देशक एक बढ़िया फ़िल्म दे देता है तब उससे दर्शकों की उम्मीदें अधिक बढ़ जाती हैं.क्योंकि तब वह अपना एक दर्शक वर्ग बना चुका होता है.'रंग दे बसंती'से राकेश ने हिन्दी सिन
 
मुन्ना पांडेय(कुणाल)
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"जय हो"- रहमान,गुलज़ार साहब ,और रेसुल...

ऑस्कर अवार्ड्स का पिटारा खुल गया है और 'slumdog...'ने ८ मूर्तियाँ अपने हिस्से में डाल ली हैं.वाकई यह बहुत बड़ी खुशखबरी है कि भारतीय पृष्ठभूमि की ये कहानी दुनिया भर में पसंद की गई है.सभी चैनल वाले चीख-चीख कर बता रहे हैं कि भारतीय सिनेमा जगत में कमाल हो
 
मुन्ना पांडेय(कुणाल)
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यह एक्सटेंसन है देवदास का-देव डी

याद कीजिये जब आंखों में आँसू भरकर जाते हुए देवदास से चंद्रमुखी पूछती है-'फ़िर कब मिलना होगा?'-और देवदास इस बात को कहता है कि यदि अगला जन्म होता है तो मैं तुमसे दूर नहीं रह पाऊंगा '-संवाद कमोबेश ऐसा ही है -देवदास मर जाता है प्रेम की कसक दिल में लिए। पा
 
मुन्ना पांडेय(कुणाल)
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मिस्टिक हिमालय में "चोपता"की चांदनी रात ...

गढ़वाल वैसे तो अनेकानेक सुंदर-सुंदर जगहों से भरा पड़ा है। पर हम जिस जगह की बात कर रहे हैं वह चोपता है। चोपता गोपेश्वर से ३८ किलोमीटर की दूरी पर केदारनाथ वन्य -जीव प्रभाग के मध्य स्थित एक छोटी किंतु बेहद ही खूबसूरत जगह है। यहाँ पहुँचने के दो रास्ते हैं
 
मुन्ना पांडेय(कुणाल)