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14 Mar 2010
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भगवान बुद्ध यह जूठन आपके लिए

भगवान बुद्ध के प्रति हममें से किसकी श्रद्धा नहीं होगी? शांति और अहिंसा के अद्वितीय उपदेशक के प्रति हर व्यक्ति के मन में स्वाभाविक श्रद्धा होनी ही चाहिए. भारतीय लोग तो बुद्ध के प्रति श्रद्धा दिखाते नहीं थकते. नौजवान पीढ़ी तो खासकर बुद्ध को बतौर फैशन बात
 
संजय तिवारी
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भूख लगे तो अखबार खाइये

क्या अखबार सिर्फ पढ़ने के लिए होता है? आप कह सकते हैं कि अखबार के और भी कई इस्तेमाल हो सकते हैं. मसलन, कागज का थैला बनाने से लेकर कतरन काटकर आर्काईव बनाने तक अखबार के बहुत उपयोग हैं. लेकिन मंबई के डीएनए आफिस में मैंने देखा कि अखबार खाने के लिए भी होता
 
संजय तिवारी
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मावलंकर साहब माफ करना

नई दिल्ली में संविधान क्लब (Constitution Club) जानी मानी जगह है. संसद भवन से थोड़ी ही दूर पर स्थित यह क्लब राजनीतिक गतिविधियों, सेमिनारों, संगोष्टियों का अड्डा है. इसी क्लब परिसर में एक बड़ा सा हाल है जिसका नाम मावलंकर सभागार है. यह मावलंकर कौन थे? आजाद
 
संजय तिवारी
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इंटरनेट हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है

आजादी के आंदोलन में लोकमान्य तिलक ने नारा दिया था कि स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है. और हम इसे लेकर रहेंगे. आजादी के बाद इस नारे में स्वराज शब्द को दायें बाये करके अनेक नारे बना दिये गये जो देश में राजनीतिक आंदोलनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए
 
संजय तिवारी
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नारायणभाई देसाई, गांधी और गांधी शांति प्रतिष्ठान

गांधी शांति प्रतिष्ठान में बापू कथा करने वाले नारायणभाई देसाई. नारायण भाई देसाई गांधी के निजी सचिव रहे महादेवभाई देसाई के बेटे हैं और उन्होंने खुद महात्मा गांधी के साथ दस साल काम किया है. होली के दिन नारायणभाई देसाई दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान में
 
संजय तिवारी
Mar 02 2010 11:04 PM
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पीने का पानी

पीने का पानी. इस एक शब्द में क्या अतिश्योक्ति है? अगर कोई आपसे पूछे कि इस एक शब्द में आपत्तिजनक क्या है तो आप क्या कहेंगे? निश्चित रूप से इसमें आपत्तिजनक कुछ भी नहीं है. पानी होता ही है पीने के लिए. फिर इसमें आपत्तिजनक क्या हो सकता है? फिर भी वह आपसे
 
संजय तिवारी
Dec 29 2009 11:47 AM
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शाही सड़क पर शाही सवारी

रविवार को दिल्ली के राजपथ पर विंटेज कारों की रैली निकाली गयी. Possibly Related Posts: आटो एक्सपो-2008, भैये क्या देख रहे हो?
 
संजय तिवारी
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ब्लागरों के लड़ने झगड़ने की आदत यहां भी नहीं गयी

ब्लाग मीट शब्द को लेकर हिन्दी ब्लागरों ने अक्सर विरोध किया था. आपस की मुलाकात को ब्लाग मीट में तब्दील करनेवाले अनूप शुक्ला ने वास्तव में ब्लागरों को एक दूसरे से मिलने मिलाने का सिलसिला शुरू किया था. वह थोड़ा आगे बढ़ा और भरभराकर गिर गया. लेकिन जो लोग
 
sanjay tiwari
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ब्लागवाणीः आदि, अंत, अनंत…

ब्लागवाणी भी एक प्रयोग ही था. मार्च-अप्रैल 2007 में जब ब्लागवाणी की शुरूआत की गयी थी तो लक्ष्य क्या था? हिन्दी में ब्लाग बढ़ने लगे थे. दिल्ली में सामान्य सा व्यापार करनेवाले मैथिली गुप्त ने सोचा कि हिन्दी के ब्लागों के लिए एक ऐसा एग्रीगेटर होना चाहिए
 
sanjay tiwari
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काली कुतिया अब मां नहीं बनेगी

मातृत्व एक ऐसी सौगात है जो हर जीव योनि को समान सुख देती है. मां का अपने शिशु से रिश्ता उस जीव योनि के स्वभाव से निर्धारित होता है. लेकिन हर जीव योनि में एक बात समान होती है कि मातृत्व के बिना संपूर्णता और संतति दोनों ही बधित हो जाते हैं. इंसान का बुद्धि
 
संजय तिवारी
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भाजपा नेताओं का मक्काः झंडेवालान

संघ का दिल्ली कार्यालय राजनीतिक गतिविधियों का गहरा अड्डा बन चुका है. जब से केन्द्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार आयी संघ कार्यालय पर लाल बत्तियों की आवाजाही बढ़ गयी. इसका असर यह हुआ कि रानी झांसी रोड पर इस लंबे चौड़े भूखण्ड पर सरगर्मियां बढ़ गयी हैं.
 
संजय तिवारी
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सन 2052 का एक दिन-3

सूचना तकनीकि का बैलगाड़ी युग आज मैं जब यहां खड़े होकर पीछे देखता हूं तो लगता है कि चार दशक पहले हम किस तरह सूचना के बैलगाड़ी युग में जी रहे थे. भारी भरकम कम्प्यूटर और लैपटाप को हम उन दिनों सूचना तकनीकि का औजार घोषित कर उसका महिमामंडन किया जाता था. मह
 
sanjay tiwari
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मीडिया जगत में विस्फोट

खबर देने का व्यावसायिक कार्य अब विधिवत उद्योग की शक्ल अख्तियार कर चुका है. पिछले साल प्राइस वाटरहाउस कूपर्स की रिपोर्ट में कहा गया था कि मीडिया उद्योग 2012 तक एक लाख करोड़ की इंडस्ट्री हो जाएगा. इस उद्योग में फिल्म से लेकर समाचार परोसने तक सबकुछ शामि
 
sanjay tiwari
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समलैंगिकता के सवाल पर संघवाले चुप क्यों हैं?

संघ की एक प्रातःकालीन शाखा में स्वयंसेवक दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि समलैंगिक होना अपराध नहीं है. उसके इस फैसले के बाद पूरे देश में साफ तौर पर लोग तीन हिस्सों में बंट गये. एक वह जो इसका समर्थन कर रहा है. ऐसे लोगों की तादात बहुत थोड़ी लेकिन शक्ति
 
sanjay tiwari
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इस देश में कितने गे हैं?

गे संबंधों को जायज ठहराने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर का नजारा देखने लायक था. घोषित गे एक दूसरे से गले मिल रहे थे. पत्रकार उनको कवर कर रहे थे और ऐसे बहुत सारे वकील कैमरे में अपना चेहरा पहुंचाने के लिए आस पास मंडरा रहे थे. लेकिन यह सब बहुत देर नहीं
 
sanjay tiwari
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चारे पासे सुख हूण किसी ने ना दुख हूण

घोर कलियुग में अगर कोई गाते-बजाते आपको यह सुनाए तो अचानक ही उस ओर ध्यान जाता ही है. 3.27 मिनट का एक छोटा सा वीडियो बाबा नानक से प्रार्थना कर रहा है कि सबको खुशी देना. जिनके पास घर नहीं है, उन्हें घर देना. जिनके पास खाने को अन्न नहीं है उन्हें अन्न दे
 
sanjay tiwari
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दुनिया के सभी संजय तिवारी एक हो जाएं

दुनिया में कितने संजय तिवारी हैं? हजारों में तो होंगे ही. अपने गांव के बगल में ही एक संजय तिवारी हुआ करते थे. सालों से उनसे मुलाकात नहीं हुई. सुना है गांव में ही रहते हैं. लेकिन आज ऐसे ही फेशबुक पर संजय तिवारी खोजा तो 93 संजय तिवारी मिल गये. अच्छी सं
 
संजय तिवारी
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मेरे पास इंटरनेट है, और आपके पास क्या है?

सोमवार की शाम को दूरदर्शन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों द्वारा अपनी-अपनी पार्टी के लिए वोट मांगते देखा. यह एक पुरानी परंपरा है जो दूरदर्शन में संभवतः अस्सी के दशक से चली आ रही है. आमचुनाव के वक्त दूरदर्शन सभी राष्ट्रीय दलों को एक निश्चित स
 
sanjay tiwari
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हिन्दी में जी मेल

गूगल गणराज्य का नया उपकरण अब आपके हाथ में है. हिन्दी में ईमेल करने की हसरत आप अब पूरी कर सकते हैं और वह भी बिना किसी झंझट के. अगर आप जीमेल का प्रयोग करते हैं तो आजकल आपके ईमेल बाक्स के ऊपर Type in Indian languages दिख रहा होगा. उस पर क्लिक करते ही आप
 
sanjay tiwari
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फिर अविनाश डाल पर

हिन्दी ब्लाग मोहल्ला के माडरेटर अविनाश दिल्ली लौट आये हैं. अविनाश से अपना परिचय ज्यादा पुराना नहीं है. जब ब्लाग जगत में आया तो मोहल्ला ब्लाग ने आकर्षित किया था. इसका कारण यह था कि शुरूआती दिनों में ही स्तरीय सामग्री का ब्लाग लगा. उसकी वैचारिक बाध्यता
 
neerajdoshi
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अभिव्यक्ति की चरम अवस्था

अभिव्यक्ति की चरम अवस्था क्या होती है? वह कितनी स्थूल या फिर कितनी सूक्ष्म होती है? आपको जानकर आश्चर्य होगा कि अभिव्यक्ति का चरम मौन होता है. अभिव्यक्ति का हर प्रकार चरम पर पहुंचकर मौन धारण कर लेता है. ध्वनि का सिद्धांत भी यही कहता है. जब हमारी ग्रहण
 
sanjay tiwari
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इंटरनेट मुक्ति का माध्यम है और यह मौत के बाद मिलेगी

ब्लाग बनाना अब बहुत आसान काम है. वेबसाईट बनाना भी कोई मुश्किल काम नहीं है. हिन्दी में काम करना और लिखना भी बहुत आसान है. सब आसान है तो फिर मुश्किल क्या है? कोई शक नहीं कि अभी इंटरनेट का विस्तार अपनी शुरूआती अवस्था में है. कुल छह करोड़ उपभोक्ताओं की ज
 
sanjay tiwari
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पत्रकार बातूनी क्यों होते हैं?

मेरे मन में यह सवाल बार-बार आता है कि पत्रकार बातूनी क्यों होते हैं? क्या पत्रकारों को इतनी बात करनी चाहिए जितनी आजकल के तथाकथित पत्रकार करते है? जबसे विस्फोट.कॉम शुरू किया है, इसी एक बात ने मुझे सबसे ज्यादा परेशान किया है. मेरे संपर्क में जितने भी ल
 
neerajdoshi
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विस्फोट.कॉम को चाहिए निहंग पत्रकार

चौदहवीं लोकसभा के संग्राम का बिगुल बजने ही वाला है. चुनाव आयुक्तों के विवाद के बीच चुनाव कराने की सरगर्मी शुरू हो गयी है. लेकिन सवाल यह है कि इस आम चुनाव में वेब और वेब पत्रकारों की क्या भूमिका होगी? विस्फोट.कॉम इस आम चुनाव में डिजिटलट मीडिया के जरिए
 
visfot
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वेब पत्रकारिता के संदर्भ में कुछ बातें

अब लोग जिक्र करने लगे हैं कि वेब का इस्तेमाल पत्रकारिता के तौर पर किया जा सकता है. अगर हम हिन्दी वेब को पत्रकारिता के तौर पर इस्तेमाल करना चाहते हैं तो सबसे संभावनायुक्त कौन लोग हो सकते हैं? मेरी नजर में हिन्दी ब्लागर सबसे अधिक संभावना से युक्त हैं क
 
neerajdoshi
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मैं तो कुछ नहीं बोलूंगा

एन्ड्रू और जो कह रहे हैं कि खुशी सस्टेनबल होनी चाहिए. कैसे? अपने आस-पास उपजा अन्न खाओ. बड़ी खुशी मिलती है. फासिल फ्यूल (पेट्रोल आदि) के कारण ऐसी सुविधा मिल गयी है कि आदमी अपने आस-पास का अन्न खाना भूल ही गया है. The fact that fast food and ready meals
 
neerajdoshi
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नाजायज लाईव कवरेज बंद होना चाहिए

मिनट दर मिनट गोलियों की आवाज से केवल मुंबई के होटल ही नहीं बल्कि पूरा देश (शायद दुिनया भी) सुन रही है. यह बात सही है कि पूरा देश इस समय वहां अटका हुआ है जहां देश के जवान आतंकियों से लोहा ले रहे हैं. लेकिन इलेक्ट्रानिक मीडिया जिस तरह से घटनाओं की लाईव
 
sanjay tiwari