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Dr. Ahmad Ali Barqi Azmi

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09 May 2010
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माँ की ममता का नहीँ कोई शुमार

माँ की ममता का नहीँ कोई शुमारडा. अहमद अली बर्क़ी आज़मीमाँ की ममता का नहीँ कोई शुमारमाँ है सन्ना-ए-अज़ल का शाहकारमाँ से है गुलज़ार-ए-हस्ती मेँ बहारमाँ है ऐसा गुल नहीँ है जिसमेँ ख़ारमाँ का कोई भी नहीँ नेअमल बदलयह हक़ीक़त है सभी पर आशकारमाँ है वह
 
Dr. Ahmad Ali Barqi Azmi
May 09 2010 07:20 PM
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तरही ग़जल :कौन चला बनवास रे जोगी

तरही ग़जलकौन चला बनवास रे जोगीडा.अहमद अली बर्क़ी आज़मीप्रीत न आई रास रे जोगी ले लूँ क्या बनवास रे जोगीदर-दर यूँ ही भटक रहा हूँआता नहीँ क्यों पास रे जोगीरहूँ मैं कब तक भूखा प्यासा आ के बुझा जा प्यास रे जोगीदेगा कब तू आख़िर दर्शनमन है बहुत उदास रे जोगीकितना
 
Dr. Ahmad Ali Barqi Azmi
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आई होली ख़ुशी का ले के पयाम

आई होली ख़ुशी का ले के पयामडा अहमद अली बर्क़ी आज़मीआई होली ख़ुशी का ले के पयामआप सब दोस्तोँ को मेरा सलामसब हैँ सरशार कैफो मस्ती मेँआज की है बहुत हसीँ यह शामसब रहेँ ख़ुश युँही दोआ है मेरीहर कोई दूसरोँ के आए कामभाईचारे की हो फ़जा़ ऐसीबादा-ए इश्क़ का पिएँ
 
Dr. Ahmad Ali Barqi Azmi
Feb 28 2010 08:18 PM
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डा.अहमद अली बर्क़ी आज़मी की प्रदूषण पर कविताय़ेँ

डॉ. अहमद अली बर्क़ी आज़मी का परिचय शहरे आज़मगढ़ है बर्क़ी मेरा आबाई वतन जिसकी अज़मत के निशां हैं हर तरफ जलवा-फ़ेगन मेरे वालिद थे वहां पर मरक़ज़-ए अहले- नज़र जिनके फ़िक्रो-फ़न का मजमूआ है `तनवीरे- सुख़न' नाम था रहमत इलाही और तख़ल्लुस `बर्क़' था ज़ौफ़े
 
Dr. Ahmad Ali Barqi Azmi
Dec 29 2009 11:45 AM
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आनंदम् का एक वर्ष पूरे - 12वीं काव्य गोष्ठी

आनंदम् का एक वर्ष पूरे - 12वीं काव्य गोष्ठी हर महीने के दूसरे रविवार को आयोजित होने वाली आनंदम् की 12वीं काव्य गोष्ठी पश्चिम विहार में जगदीश रावतानी आनंदम् के निवास स्थान पर 12 जुलाई, 2009 को जनाब ज़र्फ़ देहलवी की अध्यक्षता में संपन्न हुई। कहना न होग
 
Dr. Ahmad Ali Barqi Azmi
Dec 29 2009 11:45 AM
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जगदीश रावतानी - ९वि आनंदम काव्य घोष्टि-Ahmad Ali Barqi Azmi With Jagdish Rawtani Reciting Ghazal

आनंदम काव्य गोष्टी १२ तारीख को जगदीश रावतानी के निवास स्थान पर संपन हुई । इसमे शरीक कविगणों के नाम है : अनुराधा शर्मा , संजीव कुमार , सक्षर्था भसीन , मुनवर सरहदी, दरवेश भरती, मनमोहन तालिब, ज़र्फ़ देहलवी, डॉ विजय कुमार, शिलेंदर सक्सेना , प्रेम सहजवाला
 
Dr. Ahmad Ali Barqi Azmi
Dec 29 2009 11:45 AM
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जन्म दिन पर शुभ कामनाऐँ

दे रहा हूँ जन्म दिन की आप को शुभ कामना गुलशन-ए- उम्मीद यूँ ही आपका फूले फले आप जो चाहेँ मुयस्सर हौ ख़ुदा के फ़ज़्ल से आपके गुलज़ार-ए-हस्ती मेँ हमेशा गुल खिले शुभ चिंतक डा.अहमद अली बर्क़ी आज़मी Dr.Ahmad Ali Barqi Azmi http://aabarqi.blogspot.com http:
 
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भर दे दिल मेँ यह दिवाली आपके ख़ुशियोँ के रंग : डा. अहमद अली बर्की आज़मी

भर दे दिल मेँ यह दिवाली आपके ख़ुशियोँ के रंग : डा. अहमद अली बर्की आज़मी भर दे दिल मेँ यह दिवाली आपके ख़ुशियोँ के रंग आपके इस रंग मेँ पडने न पाए कोई भंग जो जहाँ हो उसको हासिल हो वहाँ ज़ेहनी सुकून दूर हो जाए जहाँ से बुगज़, नफरत और जंग अपने दिल को साफ र
 
Dr. Ahmad Ali Barqi Azmi
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DR.Ahmad Ali Barqi Azmi Reciting His Ghazal At a Mushaira in Ghalib Academy New Delhi on 16th August 2009

DR.Ahmad Ali Barqi Azmi Reciting His Ghazal At a Mushaira in Ghalib Academy New Delhi on 16th August 2009http://www.youtube.com/watch?v=35XdsUekwpk Video Link To Listen To this ghazal
 
Dr. Ahmad Ali Barqi Azmi
Aug 19 2009 05:33 PM
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غزل سرائی :ڈاکٹراحمدعلی برقی اعظمی

غزل سرائی :ڈاکٹراحمدعلی برقی اعظمی
 
Dr. Ahmad Ali Barqi Azmi
Aug 12 2009 04:04 PM
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یوم مادر:Mother’s Day

یوم مادر:Mother’s DayDr.Ahmad Ali Barqi AzmiYaum e maader sabhi manaate hainMaan ki azmat ke geet gaate hainMaan hai jinke wajood ki zaaminMaan ko aksar woh bhool jaate hainMaan ki mamta jahaan mein hai anmolMuft mein jisko sab ganwaate hainMaan ne ki
 
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GHAZAL : Qalb Hai Mera Ishq Se Sarshaar

GHAZAL : Qalb Hai Mera Ishq Se SarshaarDR.AHMAD ALI BARQI AZMIQalb hai mera ishq se sarshaarKis tarah iska main karoon izhaarKuchch bhi sunne ko jo na ho tayyarUs se hai arz e mudd’aa bekaarJabhi iqraar hai kabhi inkaarUske tarz e amal se hoon bazaarKab
 
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غزل:بربادیوں کا جشن مناتا چلا گیا

GhazalDr. AHmad A'li Barqee AA'z^meea'hd-e-wafaa maiN jitnaa nibhaa taa chalaa gayaautnaa hee mujh se door woh jaataa chalaa gayaathaa mere dil meiN jo woh sunaataa chalaa gayaamehr-o-wafaa ke geet maiN gaataa chalaa gayaalekin huwaa nah us peh kisee
 
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Ghazal:Ahmad Ali Barqi Azmi

GHAZALDr.AHMAD ALI BARQI AZMIHai uski fitrat mein bewafaaii woh jab bhi milta hai be rukhi sePasand hai usko khud numaaii lagao usko nahin kisi seWoh baitha rahta hai yunhi gum sum main dekhta hoon yeh bebasi seKahoon to kise kahoon yeh us se raha kare
 
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غزل :مزاج یاربرھم ھو نہ جائے Ghazal:Mizaj e Yaar Barham Ho Na Jaye

غزل :مزاج یاربرھم ھو نہ جائےGhazal:Mizaj e Yaar Barham Ho Na JayeDr.Ahmad Ali Barqi AzmiTawajjuh aapki kam ho na jayeMizaj e yaar barham ho na jayeJo hai shama e shabistan e mohabbatKahin lau uski maddham ho na jayeJunoon e shauq mein mujhko yeh dar
 
Dr. Ahmad Ali Barqi Azmi
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Ghazal :Aao husn e yaar ki batein karein

GhazalAhmad Ali Barqi AzmiAao husn e yaar ki batein kareinIshq ke izhaar ki batein kareinKuchch lab o rukhsaar ki batein kareinPyar aur takraar ki batein kareinSaaz e dil woh jiski tu mizraab hoSaaz ke us taar ki baatein kareinDaastan e zindagi ke kyon
 
Dr. Ahmad Ali Barqi Azmi
Mar 27 2009 09:31 PM
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आई होली ख़ुशी का ले के पयाम

आई होली ख़ुशी का ले के पयाम डा अहमद अली बर्क़ी आज़मी आई होली ख़ुशी का ले के पयाम आप सब दोस्तोँ को मेरा सलाम सब हैँ सरशार कैफो मस्ती मेँ आज की है बहुत हसीँ यह शाम सब रहेँ ख़ुश युँही दोआ है मेरी हर कोई दूसरोँ के आए काम भाईचारे की हो फ़जा़ ऐसी बादा-ए इश
 
Dr. Ahmad Ali Barqi Azmi
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Poetic Compliment To Janab Abdul Rehman

मिर्ज़ा ग़ालिब की भूमिका मे श्री अब्दुल रहमान की तस्वीर देख कर डा. अहमद अली बर्क़ी आजमी मोहतरम रहमान फ़खक़रे रोज़गार हैँ यह तस्वीरेँ नेहायत शानदार है नुमायाँ आपका ज़ौके सलीम फ़न्ने अक्कासी का हैँ यह शाहकार मिर्ज़ा ग़ालिब होते गर इस दौर मेँ करते गुलहा
 
Dr. Ahmad Ali Barqi Azmi