माँ की ममता का नहीँ कोई शुमारडा. अहमद अली बर्क़ी आज़मीमाँ की ममता का नहीँ कोई शुमारमाँ है सन्ना-ए-अज़ल का शाहकारमाँ से है गुलज़ार-ए-हस्ती मेँ बहारमाँ है ऐसा गुल नहीँ है जिसमेँ ख़ारमाँ का कोई भी नहीँ नेअमल बदलयह हक़ीक़त है सभी पर आशकारमाँ है वह
तरही ग़जलकौन चला बनवास रे जोगीडा.अहमद अली बर्क़ी आज़मीप्रीत न आई रास रे जोगी ले लूँ क्या बनवास रे जोगीदर-दर यूँ ही भटक रहा हूँआता नहीँ क्यों पास रे जोगीरहूँ मैं कब तक भूखा प्यासा आ के बुझा जा प्यास रे जोगीदेगा कब तू आख़िर दर्शनमन है बहुत उदास रे जोगीकितना
आई होली ख़ुशी का ले के पयामडा अहमद अली बर्क़ी आज़मीआई होली ख़ुशी का ले के पयामआप सब दोस्तोँ को मेरा सलामसब हैँ सरशार कैफो मस्ती मेँआज की है बहुत हसीँ यह शामसब रहेँ ख़ुश युँही दोआ है मेरीहर कोई दूसरोँ के आए कामभाईचारे की हो फ़जा़ ऐसीबादा-ए इश्क़ का पिएँ
डॉ. अहमद अली बर्क़ी आज़मी का परिचय शहरे आज़मगढ़ है बर्क़ी मेरा आबाई वतन जिसकी अज़मत के निशां हैं हर तरफ जलवा-फ़ेगन मेरे वालिद थे वहां पर मरक़ज़-ए अहले- नज़र जिनके फ़िक्रो-फ़न का मजमूआ है `तनवीरे- सुख़न' नाम था रहमत इलाही और तख़ल्लुस `बर्क़' था ज़ौफ़े
आनंदम् का एक वर्ष पूरे - 12वीं काव्य गोष्ठी हर महीने के दूसरे रविवार को आयोजित होने वाली आनंदम् की 12वीं काव्य गोष्ठी पश्चिम विहार में जगदीश रावतानी आनंदम् के निवास स्थान पर 12 जुलाई, 2009 को जनाब ज़र्फ़ देहलवी की अध्यक्षता में संपन्न हुई। कहना न होग
आनंदम काव्य गोष्टी १२ तारीख को जगदीश रावतानी के निवास स्थान पर संपन हुई । इसमे शरीक कविगणों के नाम है : अनुराधा शर्मा , संजीव कुमार , सक्षर्था भसीन , मुनवर सरहदी, दरवेश भरती, मनमोहन तालिब, ज़र्फ़ देहलवी, डॉ विजय कुमार, शिलेंदर सक्सेना , प्रेम सहजवाला
दे रहा हूँ जन्म दिन की आप को शुभ कामना गुलशन-ए- उम्मीद यूँ ही आपका फूले फले आप जो चाहेँ मुयस्सर हौ ख़ुदा के फ़ज़्ल से आपके गुलज़ार-ए-हस्ती मेँ हमेशा गुल खिले शुभ चिंतक डा.अहमद अली बर्क़ी आज़मी Dr.Ahmad Ali Barqi Azmi http://aabarqi.blogspot.com http:
भर दे दिल मेँ यह दिवाली आपके ख़ुशियोँ के रंग : डा. अहमद अली बर्की आज़मी भर दे दिल मेँ यह दिवाली आपके ख़ुशियोँ के रंग आपके इस रंग मेँ पडने न पाए कोई भंग जो जहाँ हो उसको हासिल हो वहाँ ज़ेहनी सुकून दूर हो जाए जहाँ से बुगज़, नफरत और जंग अपने दिल को साफ र
DR.Ahmad Ali Barqi Azmi Reciting His Ghazal At a Mushaira in Ghalib Academy New Delhi on 16th August 2009http://www.youtube.com/watch?v=35XdsUekwpk Video Link To Listen To this ghazal
یوم مادر:Mother’s DayDr.Ahmad Ali Barqi AzmiYaum e maader sabhi manaate hainMaan ki azmat ke geet gaate hainMaan hai jinke wajood ki zaaminMaan ko aksar woh bhool jaate hainMaan ki mamta jahaan mein hai anmolMuft mein jisko sab ganwaate hainMaan ne ki
GHAZAL : Qalb Hai Mera Ishq Se SarshaarDR.AHMAD ALI BARQI AZMIQalb hai mera ishq se sarshaarKis tarah iska main karoon izhaarKuchch bhi sunne ko jo na ho tayyarUs se hai arz e mudd’aa bekaarJabhi iqraar hai kabhi inkaarUske tarz e amal se hoon bazaarKab
GhazalDr. AHmad A'li Barqee AA'z^meea'hd-e-wafaa maiN jitnaa nibhaa taa chalaa gayaautnaa hee mujh se door woh jaataa chalaa gayaathaa mere dil meiN jo woh sunaataa chalaa gayaamehr-o-wafaa ke geet maiN gaataa chalaa gayaalekin huwaa nah us peh kisee
GHAZALDr.AHMAD ALI BARQI AZMIHai uski fitrat mein bewafaaii woh jab bhi milta hai be rukhi sePasand hai usko khud numaaii lagao usko nahin kisi seWoh baitha rahta hai yunhi gum sum main dekhta hoon yeh bebasi seKahoon to kise kahoon yeh us se raha kare
غزل :مزاج یاربرھم ھو نہ جائےGhazal:Mizaj e Yaar Barham Ho Na JayeDr.Ahmad Ali Barqi AzmiTawajjuh aapki kam ho na jayeMizaj e yaar barham ho na jayeJo hai shama e shabistan e mohabbatKahin lau uski maddham ho na jayeJunoon e shauq mein mujhko yeh dar
GhazalAhmad Ali Barqi AzmiAao husn e yaar ki batein kareinIshq ke izhaar ki batein kareinKuchch lab o rukhsaar ki batein kareinPyar aur takraar ki batein kareinSaaz e dil woh jiski tu mizraab hoSaaz ke us taar ki baatein kareinDaastan e zindagi ke kyon
आई होली ख़ुशी का ले के पयाम डा अहमद अली बर्क़ी आज़मी आई होली ख़ुशी का ले के पयाम आप सब दोस्तोँ को मेरा सलाम सब हैँ सरशार कैफो मस्ती मेँ आज की है बहुत हसीँ यह शाम सब रहेँ ख़ुश युँही दोआ है मेरी हर कोई दूसरोँ के आए काम भाईचारे की हो फ़जा़ ऐसी बादा-ए इश
मिर्ज़ा ग़ालिब की भूमिका मे श्री अब्दुल रहमान की तस्वीर देख कर डा. अहमद अली बर्क़ी आजमी मोहतरम रहमान फ़खक़रे रोज़गार हैँ यह तस्वीरेँ नेहायत शानदार है नुमायाँ आपका ज़ौके सलीम फ़न्ने अक्कासी का हैँ यह शाहकार मिर्ज़ा ग़ालिब होते गर इस दौर मेँ करते गुलहा