ज्ञानघर's Image

ज्ञानघर

http://gyanghar.blogspot.com/
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
11 Jun 2010
कुल प्रविष्टियां
47
पाठक भेजे
2350
पसंद
55
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
50.00
पसंद करें
0
नापसंद करें

बिहार मे पूरबी की खोज

पूरबी गीत-संगीत मुझे अच्छा लगता है। वह मुझे बेचैन करता है। कोई पूरबी गाना चले, तो रुककर मैं सुनता हूं। महुआ चैनल की कृपा से कभी-कभी पूरबी सुनने को मिल जाता है, लेकिन मेरी इच्छा है कि पूरबी गानों की एक पूरी सीडी या डीवीडी रखूं। इस बार बिहार यात्रा के
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
टैग: बिहार
Jun 11 2010 07:21 PM
पसंद करें
2
नापसंद करें

इंतहा हो गई

हां, बदल रहा है बिहार, लेकिन समय की परवाह बहुत जरूरी है। बिहार में एक बड़ा तबका समय की कोई परवाह नहीं कर रहा है। ताकतवर लोग समय को अपने हिसाब से हांकना चाहते हैं, शायद यह भी एक कारण है, बिहार के पिछडऩे और बदनाम होने का। अमर उजाला के दिनों में मैंने देखा
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
पसंद करें
1
नापसंद करें

बंद पड़ी मिल

हर बार चाहता हूंचुपचाप निकल जाना,लेकिन हाहाकार लिएलौटता हूं हर बार।बंद पड़ी मिल मेंगरीबी की चुड़ैलें बेखौफ नाचती हैं।अभाव के विजयी भूतही...ही...ही...करते हैं।बंद सूता मिल के एक पोर्च मेंवर्षों से खड़ी है अकेली गाड़ी,कब के भाग गए ड्राइवरभाग गई सवारी।हर
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
टैग: कविता
पसंद करें
1
नापसंद करें

बिहार से फिर लौटकर

मेरे बचपन का बिहार अर्थात गर्मी की छुट्टियों वाला बिहार, पके आम, घोड़ागाड़ी, बैलगाड़ी, खेत-खलिहान, बंसवारी, बगीचों, अनथक धमा-चौकड़ी वाला बिहार, गांव के साप्ताहिक बाजार वाला बिहार, गांव के सुन्दर मंदिर वाला बिहार। अब पीछे छूटता जा रहा है। मैं उसे पकड़
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
टैग: गांव
पसंद करें
1
नापसंद करें

विदा आचार्य

अतुलनीय संत आचार्य महाप्रज्ञ का निर्वाण केवल श्वेताम्बर तेरापंथ ही नहीं, वरन पूरे राष्ट्र व विश्व के लिए एक अपूरणीय क्षति है। आज संसार आध्यात्मिकता के एक ऐसे 'लाइट हाउस से वंचित हो गया है, जिसने संसार रूपी अथाह समुद्र में अपने पवित्रतम उजास से लगभग
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
पसंद करें
3
नापसंद करें

बाबा रे बाबा

उत्तर से दक्षिण तक एक- एक कर बाबाओं की पोल खुल रही है, उनके चारित्रिक दामन पर दाग सामने आ रहे हैं या कहा जाए कि कुछ बाबाओं ने बाबा होने को अविश्वसनीय होने की हद तक ला खड़ा किया है...संसार ही बाजार है और बाजार ही संसार है। संसार या बाजार में किसी भी चीज
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
पसंद करें
0
नापसंद करें

कुम्भ अर्थात कलश

मानव ने अपने प्रयोग के लिए भांति-भांति के पात्र बनाए, विशाल कड़ाह से छोटे से चम्मच तक सैकड़ों प्रकार के पात्र, परन्तु सृष्टि के आदि से आज तक जो सबसे सुन्दरतम, सहज व सरल पात्र बना है, वह है कलश। एक ऐसा पात्र जिस पर ऋषियों का भी हृदय आ जाता है। कमंडल हो या
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
टैग: कुम्भ
Mar 07 2010 02:44 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

साधुओं को गाली क्यों?

भाग : सातमैं भी साधुओं को देखकर बहुत डरता था। बचपन में लोगों ने डराया था कि साधु बच्चों को अपने बोरे में भर ले जाते हैं। एक बार तो हमारे भाई साहब और हम साधुओं की टोली देख पेड़ की ऊंची डाल से सीधे नीचे कूद गए थे, गिरते-पड़ते भागे थे, तो साधुओं का इतना आतंक
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
Feb 16 2010 05:17 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

नागाओं का बोलबाला

कुम्भ में हम : भाग - छह ऋषिकेश से लौटते हुए एक जगह रुक जाना पड़ा। पुलिस ने रास्ता रोक रखा था। हरिद्वार की ओर जाने वाले दोनों ही सड़कें अवरुद्ध थीं, क्योंकि पेशवाई गुजरने वाली थी। पेशवाई मतलब नागाओं का जुलूस। पेशवाई गुजरी नहीं, नागाओं का शायद मन बदल गया।
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
Feb 14 2010 02:10 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

पढ़ना-लिखना जरूरी : कुम्भ में हम : भाग- पांच

साधु पढ़े-लिखे होते हैं या नहीं? ज्यादातर तो कम उम्र में साधु बन जाते हैं। औपचारिक शिक्षा नहीं मिल पाती है। पोथी कम पढ़ते हैं, सुनकर ज्यादा जानते हैं और जीवन से सीखते हैं। हरिद्वार में भगवानदास जी से पढ़ाई-लिखाई पर भी चर्चा हुई, उन्होंने स्वीकार किया कि अब
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
टैग: साधु
Feb 14 2010 01:25 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

कहां से आते हैं साधु?

हमारे देश में साधुओं का मजाक उड़ाने की छूट है, तो बड़ी सहजता से उनका मजाक उड़ाया जाता है। ऐसा भी नहीं है, साधुओं का मजाक उड़ाने के खिलाफ कानून बना दिया जाए, स्वयं साधु ऐसे किसी कानून का विरोध करेंगे। कबीर कह गए थे, निन्दक नियरे राखिये। निन्दा भले ही किसी को
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
टैग: साधु
पसंद करें
0
नापसंद करें

नागा साधु हैं, तो हम हैं

कुम्भ में हम : भाग - तीन अगर आपने नागा साधुओं को नहीं समझा, तो आप यह नहीं जान पाएंगे कि हमारे राष्ट्र में सनातन धर्म की रक्षा के लिए कुछ हजार लोगों को क्यों सर्वस्व लुटाना पड़ा था? सचमुच, सच्चा हिन्दुत्व किसी राजनीतिक पार्टी या संगठन के पास नहीं, कुंभ
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
पसंद करें
0
नापसंद करें

इनके राम ऑफलाइन?

इनके राम भला ऑन लाइन क्यों न हों? अब ऑफ लाइन रहने से रामानन्दियों का संसार में गुजारा कैसे चलेगा? इसमें कोई संदेह नहीं कि वे सीधे-सादे और सहज हैं, लेकिन मुझे ऐसा लगा कि अध्ययन व ज्ञान-विज्ञान के बारे में समय के हिसाब से सिद्ध नहीं हैं। मेरा मानना रहा है
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
टैग: राम
Feb 12 2010 04:36 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

कुम्भ में हम

अगर आपने कुंभ नहीं देखा, तो आप यह नहीं जान पाएंगे कि मेला क्या होता है? मेला केवल टिक्की, चाट, समोसे, जलेबी, पिज्जा, बर्गर, झूला, बैलून, चरखी बिकने का स्थान नहीं है। मेला तो व्यापक है। मेला तो जितना बाह्य है, उससे कहीं ज्यादा आन्तरिक है। जो मेला पावन
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
टैग: कुम्भ
Feb 12 2010 04:27 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

संघ को बधाई

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को बधाई। क्षेत्रवाद के खिलाफ उसका आदेश-निर्देश हाले ही बहुत देर से आया है, लेकिन उसे उत्तर भारतीयों की रक्षा के लिए अब अडिग रहना चाहिए। संघ को नया इतिहास लिखना है। अभी तक यही बात इतिहास में दर्ज है कि जब मुम्बई में गरीब उत्तर
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
पसंद करें
1
नापसंद करें

ज्योति बसु का न होना

अन्तिम लाल सलामरविवार, 17 जनवरी को भारतीय वामपन्थ ने अपना सबसे कामयाब क्वलाइट हाउसं गंवा दिया। ज्योति बसु के न होने से अब जो वाम सागर पीछे छूट गया है, उसमें भटकाव की आशंकाएं बहुत बढ़ गई हैं। आज से पहले जब वामपन्थी भटकते थे, तब ज्योति बाबू लाइट हाउस की
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
पसंद करें
1
नापसंद करें

जेपी का गांव

जब भी जयप्रकाश नारायण के बारे में पढ़ता था, मन में यह बात उठती थी कि एक बार उनके गांव जाकर देखना चाहिए। बचपन से ही यह सुनता आया था कि मेरे अपने गांव से जयप्रकाश नारायण का गांव बहुत दूर नहीं है। पिछले साल 28 अक्टूबर को जेपी के गांव जाने का सपना साकार हुआ।
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
पसंद करें
0
नापसंद करें

एक पूज्य से भेंट

नव वर्ष में आकर जब पिछले को देखता हूं, तो सोचता हूं कि आखिर पिछले का क्या अगले में याद रह जाएगा या पिछले का क्या विशेष अगले में साथ रखने योग्य है। अगर किसी एक इंसान की चर्चा करूं, जिससे मैं लगातार मिलना चाहूंगा, तो वो हैं जगदगुरु रामनरेशाचार्य जी। हत्
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
पसंद करें
0
नापसंद करें

कोई नहीं तुम जैसा

मेरा man तैयार नहीं हो रहा था कि अपनी एक प्रिय संगीत हस्ती पर लिखे शब्दों को ब्लॉग पर दूँ , जब से ब्लॉग शुरू किया सोचता ही रहा माइकल पर लिखूंगा, लेकिन लिखा तब जब माइकल नहीं रहे और वह भी सम्पादकीय के लिए, देर से ही सही सम्पादकीय के कुछ अंश यहाँ पेश है
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
पसंद करें
0
नापसंद करें

वो हमें धोखा देंगे

नेता अपनी-अपनी मूंछें दुरुस्त कर रहे हैं और उनके पैरों में विचारधारा औंधेमुंह गिरी पड़ी है। छोटे दल विचारधारा को गदगद भाव के साथ बुरी तरह कुचल रहे हैं और बड़े दल भी मौका खोज रहे हैं, सत्ता करीब नजर आए, तो विचारधारा को दुलत्ती जमाकर कुर्सी पर विराजमान ह
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
पसंद करें
0
नापसंद करें

माइक पाण्डेय और विश्व जल दिवस

माइक पाण्डेय मतलब पर्यावरणविद्, ग्रीन ऑस्कर विजेता, कैमरामैन, फिल्मकार, अर्थ मैटर्स जैसे सफल कार्यक्रम के निर्माता, निर्देशक, एंकर। उन्होंने पर्यावरणविद के रूप में सबसे ज्यादा काम किए हैं। कैमरा या स्पेशल इफेक्ट का काम तो उनके निर्देशन में उनकी टीम ह
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
पसंद करें
1
नापसंद करें

फिर अधर में नतीजे

झारखण्ड मे जो चुनाव नतीजे आये है, उनसे चिंता बढ़ गयी है। किसी भी पार्टी को अकेले बहुमार नहीं मिलना एक बड़ी चिंता की बात है। राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा के साथ ही अगर झारखण्ड में चुनाव हुए होते तो बीजेपी को फायदा हो सकता था। लोकसभा चुनाव के समय बीजेप
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
टैग: चुनाव
पसंद करें
3
नापसंद करें

सिंपल की स्पेशल यादें

मेरे साथ बड़ी मुश्किल है, जितना मैं वर्तमान में जीता हूं, उतना ही अतीत में और भविष्य की चिंता का दौर शुरू करने के बारे में केवल सोचता रहता हूं। पिछले दिनों कुछ फालतू की व्यस्तताएं रहीं, कुछ थोपी गईं, तो कुछ ओढ़ी हुईं। मौका ही नहीं मिला, कई ऐसी घटनाएं न
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
पसंद करें
0
नापसंद करें

तुम्हे याद हो या ना याद हो

भारत राष्ट्र के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने कहा था, "सच्ची स्वतंत्रता के लिए अपनी जरूरतों को कम करना चाहिए।" उन्होंने अपने जीवन में जरूरतों को इतना कम कर लिया कि उनके बारे में यह आम धारणा बन गई कि वे गरीब परिवार से आए थे। वास्तव में वे अमी
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
पसंद करें
0
नापसंद करें

बेमिसाल अमिताभ

उम्र के 68वें साल में प्रवेश कर चुके अमिताभ ऐसी बेमिसाल हस्ती हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है। भारत में शायद किसी भी जीवित हस्ती के जन्मदिन पर इतना धूमधड़ाका नहीं होता है। गैर-सरकारी स्तर पर ही सही, अमिताभ का जन्मदिन साल दर साल
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
Oct 14 2009 07:41 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

नवमी पर मां के लिए

लड़कियां और नदियां -------- उनके मन में डर की सीढ़ियां हैं जो हर बार कुछ ऊंची हो जाती हैं उन्हीं पर चढ़ती-उतरती रहती हैं लड़कियां उनके रास्तों में बांधों की ऊंचाइयां हैं जो हर बार कुछ बढ़ जाती हैं, उन्हीं ऊंचाइयों से ढहती-सिमटती रहती हैं नदियां २ लड़कियां
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
पसंद करें
0
नापसंद करें

हमारे मिलने से

( मित्रों के लिए )वे दूर-दूर तक नहीं थे,पल भर पहले,अचानक आते, घुमड़ते,चमकते,गरजते और बरसते हैं बादलदम धरती है धरती चैन लेता है मौसमहमारे मिलने सेगौर करो, बहुत कुछ होता है।देह पर तन आती छायाबहार की मोहक मायाझूमते पेड़, बलखाती डालियां,आनंद से कांपती
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
टैग: kavita
Sep 20 2009 03:17 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

रियलिटी शो - इतिहास, नक़ल और बाज़ार

दुनिया में रियलिटी शो से जुडे़ कुछ महत्वपूर्ण वर्ष व दास्तान1948 - दुनिया का पहला रियलिटी शो अमेरिका में एलन फन्ट द्वारा निर्मित हुआ, जिसका नाम कैंडिड कैमरा था। यह एक तरह से प्रेंक रियलिटी शो था, जो पूर्व में कैंडिड माइक्रोफोन के नाम से रेडियो पर
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
Aug 23 2009 02:29 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

फिर जिन्ना पर आया प्यार

हमारे देश में कुछ नेताओं का चिंतन इतना फिजूल है कि इससे केवल उनका बौद्धिक विलास झलकता है और यह भी जाहिर होता है कि वे जमीनी हकीकत से कितने कटे हुए हैं। आज अनेक समस्याएं विकराल रूप ले चुकी हैं, लेकिन इन नेताओं का शर्मनाक अतीत में झांकने का शौक देश की आम
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
पसंद करें
1
नापसंद करें

चाणक्य की कोरी यादें

बजट में गांवों और किसानों का खूब जोर चला है। गांवों के लिए इतना कुछ दिया गया है कि अगर तंत्र ईमानदारी हो, तो एक ही बजट राशि से गांवों का कायापलट हो सकता है। कागज पर नरेगा की सफलता से उत्साहित केन्द्र सरकार ने नरेगा के लिए आवंटित धन को 144 प्रतिशत बढ़ा
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
पसंद करें
2
नापसंद करें

रेलवे में भी मजहब की पूछ?

मदरसा छात्रों को मुफ्त मासिक टिकट देने का फैसला कितना सही है? यह एक विचारणीय प्रश्न है। क्या यह रेलवे में धर्म आधारित रियायत की शुरुआत नहीं है? क्या यह कदम एक नए तरह के झमेले की शुरुआत नहीं करेगा? अगर हम गंभीरता से देखें, तो यह एक नया ताला खुलवाने जै
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
टैग: मदरसा
पसंद करें
5
नापसंद करें

ताड़ी लीजिए...ताड़ी..?

छपरा से बलिया के बीच रिवीलगंज नामक एक स्टेशन पड़ता है, इसे गौतम स्थान भी कहते हैं। किसी समय यहां गौतम ऋषि का आश्रम हुआ करता था, आज यहां उनका एक मंदिर है। यही वह जगह है, जहां राम ने पाषाण बनी ऋषि पत्नी अहल्या का उद्धार किया था। हनुमान का भी जन्म यहीं ह
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
पसंद करें
0
नापसंद करें

ये किसकी बदबू है?

कोई शक नहीं, पिछड़े हुओं को हर कोई लतियाता है। मिसाल के लिए बिहार आने-जाने वाली ट्रेनों को देख लीजिए। या तो पूरी ट्रेन फटीचर होगी या फिर एक-दो ऐसी बॉगी जोड़ दी जाएगी कि उसमें सवार लोग पछताते-रोते-गरियाते मजबूरन सफर तय करेंगे। सहरसा-अमृतसर जनसेवा एक्सप्
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
पसंद करें
0
नापसंद करें

नतीजों की गूँज

पंद्रहवें लोकसभा चुनाव के नतीजों ने इतना चौंका दिया है कि कई नेताओं को धरातल पर आने में वक्त लग जाएगा। न तो कांग्रेस ने ऐसी जीत की कल्पना की थी और न भाजपा ने ऐसी हार का अंदाजा लगाया था। देश में खुशनुमा माहौल का अंदाजा लगाया जा सकता है, लोग इस बात से
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
पसंद करें
1
नापसंद करें

एक दलाल पर फिर मेहरबानी

ओतावियो के को गैर-जमानती वारंट से मुक्ति न केवल शर्मनाक, बल्कि हमारे देश की कानून-व्यवस्था पर एक तमाचा है। बोफोर्स सौदे में 64 करोड़ की दलाली लेने संबंधी आरोप कभी राजीव गांधी पर ढंग से नहीं चिपका, जनता उन्हें आज भी एक साफ नेता के रूप में याद करती है,
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
पसंद करें
1
नापसंद करें

क्या- क्या बेचेगी पुलिस ?

हमारी पुलिस में भ्रष्टाचार इस कदर बढ़ गया है कि पुलिस सुरक्षा का अहसास कराने की बजाय भय का अहसास कराने लगी है। जयपुर में एक सिपाही ने ड्यूटी लगाने के बदले रुपये लेने के गोरखधंधे का भंडाफोड़ कर दिया है। पुलिस में ड्यूटी का बिकना जितना शर्मनाक, उतना ही द
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
पसंद करें
0
नापसंद करें

यादों को किसने रोका है

ताउम्र हमको इक यही अफसोस रहेगा कि हम न मुस्कुरा सके आपकी तरह। सुरों और गीतों का अंबार था लगा, पर हम न गुनगुना सके आपकी तरह। (मुझे अपने कुछ पुराने शेर याद आ गए, जो कॉलेज के अंतिम दिनों में लिखे गए थे। उसे मैंने अब यों पूरा किया है - आज भी बातें पुरानी
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
टैग: शेर
पसंद करें
1
नापसंद करें

आईपीएल क्यों नहीं?

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने आईपीएल टूर्नामेंट विदेश में कराने का जो फैसला लिया है, वह अभी अंतिम भले न हो, लेकिन आयोजन विदेश में होता है, तो भारत के लिए दुखद होगा। जब तमाम देशों के क्रिकेट खिलाड़ी भारत में खेलते हैं, तो जाहिर है, देश का सम्मान बढ़ता
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
पसंद करें
2
नापसंद करें

जम्हूरियत की किरकिरी

आतंकवादियों या कट्टरपंथियों से मुकाबले के लिए जिस तरह की छवि के नेता होने चाहिए, वैसे नेता पाकिस्तान में नहीं हैं। जब कोई दागदार नेता मुल्क का नेतृत्व करता है, तो जाहिर है, उससे देश को अंतत: घाटा होता है और गलत काम करने वाले लोगों का मनोबल बढ़ता है।
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
पसंद करें
2
नापसंद करें

वाह सोना वाह

सोने का भाव (प्रति 10 ग्राम 31/3/1925 : 18 रु 12 आने 31/3/1940 : 36 रु 8 आने 31/3/1951 : 98 रु 31/3/1960 : 111 रु 14 आने 31/3/1975 : 540 रु। 31/3/1980 : 1330 रु। 31/3/1990 : 3209 रु 31/3/1995 : 4675 रु। 21/2/ 2009 : 15780 रु ------------------ ------
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)