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09 May 2010
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प्रकृति की अमूल्य रचना है पक्षी

(विश्व प्रवासी पक्षी दिवस पर विशेष) - अनिल गुलाटीपूरे विश्व में पिछले 30 सालों में पक्षियों की 21 प्रजातियां लुप्त हो गई, जबकि पहले औसतन सौ साल में एक प्रजाति लुप्त होती थी।यह आंकड़ा भले ही हमें आश्चर्य में डाल दें, पर यह सच है। यदि हम जल्द ही इन्हें
 
आशेन्द्र सिंह
May 09 2010 11:31 AM
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आँखों को बेनूर कर रहा पानी

लेखक: मीनाक्षी अरोड़ाजन्मजात अंधापनबिहार के भोजपुर जिले के बीहिया से अजय कुमार, शाहपुर के परशुराम, बरहरा के शत्रुघ्न और पीरो के अरुण कुमार ये लोग भले ही अलग-अलग इलाकों के हैं, पर इनमें एक बात कॉमन है, वो है इनके बच्चों की आंखों की रोशनी। इनके साथ ही सोलह
 
आशेन्द्र सिंह
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इतिहास से आदमी को अलग नहीं किया जा सकता

इतिहास से आदमी को अलग नहीं किया जा सकता . इतिहास का काम नायक खलनायक तय करना नहीं । इतिहास अतीत की पुनर्रचना है . देश और दुनिया में शिक्षकों का पतन हो रहा है मनुष्य एक सांस्कृतिक और एतिहासिक प्राणी है। यह अपने आत्मगत अनुभव के साथ वस्तुगत नतीजे निकालता
 
आशेन्द्र सिंह
Dec 29 2009 11:47 AM
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श्रद्धांजलि सभा 23 को

देश की आज़ादी के लिये अपने प्राण न्यौछावर करने वाले बलिदानी शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को उनके बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि देने हेतु एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन "युवा संवाद" की ओर से ग्वालियरके सात नंबर चौराहे पर स्थित भगत सिंह की प्रतिमा के समक्
 
आशेन्द्र सिंह
Dec 29 2009 11:47 AM
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दिल्ली में ना होने का मतलब !

दिल्ली क्या छूटी अपनों ने तो जैसे बिसरा ही दिया। मोहब्बती दोस्त हों या साहित्यकार मित्र, पत्रकार परिवार के सदस्य हों या एनजीओ बिरादरी के सखा, अब हर कोई क्रमशः भूलता जा रहा हैं । कभी -कभार कुछ लोगों का फ़ोन गलती से आ भी जाता है तो बस वही एक सवाल कहाँ
 
आशेन्द्र सिंह
Dec 29 2009 11:47 AM
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सुना है...

ग्वालियर दैनिक भास्कर से राज एक्सप्रेस में कूच कर गए कुछ लोगों से त्रस्त हो कर भास्कर ने कुछ और लोगों की छटनी करना शुरू कर दिया है. इस में कई महारथियों के चपेट में आने की संभावना है. वहीँ दूसरी और पत्रिका के ग्वालियर संस्करण के खतरे को भापते हुए भास्
 
आशेन्द्र सिंह
Dec 29 2009 11:47 AM
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"किरण-2008" आयोजन

सामाजिक संस्था "परवरिश" के तत्वावधान में मानसिक एवं शारीरिक रूप से निःशक्त बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति 3 दिसम्बर को की जाएगी. इन बच्चों को समाज की प्रमुख धारा से जोड़ने के उद्देश्य से गत 3 सालों से कार्यरत "परवरिश" संस्था के इस
 
आशेन्द्र सिंह
Dec 29 2009 11:47 AM
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युवा दख़ल का नया अंक

दोस्तों युवा संवाद,ग्वालियर अपना मासिक बुलेटिन "युवा दखल" का नया अंक '' वैश्विक आर्थिक संकट और भारत'' पर आधारित विशेषांक होगा। हम इसमे अमेरिका से आरम्भ होकर दुनिया भर में फैल चुके आर्थिक संकट के विविध पहलुओं और भारत पर उसके वर्तमान तथा भावी प्रभावों
 
आशेन्द्र सिंह
Dec 29 2009 11:47 AM
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अपनाभाई नेता बन गया

क्या होती है दोस्ती कैसे पहुचते है अपने ऊँचाईयों पर. देखें मानववाणी का नज़रिया
 
आशेन्द्र सिंह
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ज्ञानपीठ समाचार

ज्ञानपीठ समाचार का नया अंक मिला है। यह भारतीय ज्ञानपीठ प्रकाशन के विक्रय विभाग का मासिक बुलेटिन है। भारतीय साहित्य में हो रही गतिविधियों एवं भारतीय ज्ञानपीठ के नए-पुराने प्रकाशनों की जानकारी व समीक्षा के लिए यह एक उपयोगी बुलेटिन है। बुलेटिन में कुछ क
 
आशेन्द्र सिंह
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विश्वास की स्याही...

ग्वालियर शहर में रहते हुए डॉ. आशीष द्विवेदी ने पत्रकारिता शिक्षण में खासा योगदान दिया है। इन दिनों डॉ. द्विवेदी सागर में पत्रकारिता का एक संस्थान इंक मीडिया स्कूल ऑफ़ जर्नलिज्म के नाम से चला रहे हैं। इंक मीडिया स्कूल ऑफ़ जर्नलिज्म के विद्यार्थियों का
 
आशेन्द्र सिंह
Dec 06 2009 01:14 PM
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मीडिया मूल्यों पर निगरानी

कमल दीक्षित का नाम देश के गिनेचुने फीचर विशेषज्ञों में शुमार किया जाता है। पत्रकारिता और पत्रकारिता शिक्षण से लेकर पत्रकारिता को धर्म बनाने व उसके मूल्यों की रक्षा के लिए श्री दीक्षित ने कई ऐसे प्रयास किये हैं जो मील का पत्थर साबित हुए हैं। सोसायटी ऑ
 
आशेन्द्र सिंह
Dec 06 2009 01:14 PM
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आगे बढ़ मर्दाना लिख

हमारे एक अज़ीज हैं शिवप्रताप सिंह जी , पत्रकारिता के साथ-साथ साहित्य (पढने और लिखने) में भी ख़ासा दख़ल रखते हैं आज उनसे बात हो रही थी मैंने इन दिनों अपने उदास रहने का जिक्र उनसे किया। उन्होंने अपनी एक रचना सुनते हुए मेरे हौसले को बढ़ाया । शिव ने यह रचना
 
आशेन्द्र सिंह
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एक प्यार ही तो

बड़ी छोटी उम्र में सौंदर्यबोध हो गया था। कोर्स के अलावा सबकुछ पढने -लिखने का शगल था। बीए कर रहा था उन्ही दिनों हिन्दुस्तान पटना (2 जनवरी 1997) के अंक में रमेश ऋतंभरा की कविता पढ़ी । मन को छूने वाली थी। कविता यहाँ प्रस्तुत है - एक प्यार ही तो एक दिन में
 
आशेन्द्र सिंह
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झारखरिया बने विशेष संवाददाता

दैनिक भास्कर ग्वालियर ने अपने ग्वालियर संस्करण में चार पदोन्नतियां की हैं. भास्कर ग्वालियर को लम्बे समय से बतौर चीफ रिपोर्टर अपनी सेवाएं दे रहे रवींद्र झारखरिया को विशेष संवाददाता बनाया गया है. वहीं दिनेश गुप्ता को चीफ रिपोर्टर और प्रवीण चतुर्वेदी एव
 
आशेन्द्र सिंह
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अपनीबात...

अहम पर स्वयं (संयम) की जीत के पर्व दशहरा की हार्दिक शुभकामनायें.
 
आशेन्द्र सिंह
Sep 28 2009 02:26 PM
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एक ग्रीन लाइट के इंतज़ार में

शिरीष खरे मुंबई के फ़ुटपाथों पर न जाने कितनी बार रेड लाइट ग्रीन लाइट में बदलती है, और ग्रीन लाइट , रेड लाइट में.... लेकिन इन ट्रैफिक लाइट के नीचे अपनी ज़िन्दगी गुजर रहे लाखों बच्चों और महिलाओं को आज भी अपनी जिंदगी में एक ग्रीन लाइट होने का इंतज़ार है.
 
आशेन्द्र सिंह
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पत्रकार व्याख्याताओं की आवश्यकता है

देश के प्रतिष्ठित शारीरिक शिक्षा विवि लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा विवि, ग्वालियर के खेल प्रबंधन एवं खेल पत्रकारिता विभाग में व्याख्याताओं की आवश्यकता है. पत्रकारिता शिक्षा से जुड़े लोग इन पदों हेतु साक्षात्कार दे सकते हैं. साक्षात्कार का आयोजन
 
आशेन्द्र सिंह
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बहन जी बनाम दलित मसीहा

गत लोकसभा चुनाव में भाजपा के साथ-साथ अडवाणी के पी।एम. बनने के सपने पर भी पानी फिर गया. भाजपा अपनी इस पराजय को लेकर अंदरूनी क्लेश से गुजर रही है. उमा भारती का प्रसंग (राजनीति) तो विधानसभा चुनाव में ही ख़तम हो गयी थी। बहन जी यानी उप्र की सीएम मायावती क
 
आशेन्द्र सिंह
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किताबें कुछ कहना चाहती हैं

ह म सब की ज़िन्दगी से किताबों का अन्योन्याश्रित नाता है. किताबों में हमारे ख़्वाब भी रहते हैं और कुछ सूखे हुए गुलाब भी, और बहुत कुछ जिसे आसानी से नहीं कहा जा सकता. सफ़दर हाश्मी साहब की ये कविता आप तक पंहुचा रहा हूँ. किताबें और क्या - क्या कहना चाहतीं ह
 
आशेन्द्र सिंह
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चंदू मैंने सपना देखा

क्रांतिकारी चेतना के कवि बाबा नागार्जुन की कवितायेँ एक ओर जहाँ सहजभाव की द्योतक हैं वहीं आम आदमी की पीड़ा का प्रतिनिधित्त्व भी करती हैं। प्रस्तुत है बाबा की एक चर्चित कविता "चंदू मैंने सपना देखा" चंदू मैंने सपना देखा, उछल रहे तुम ज्यों हिरनौटा चंदू मै
 
आशेन्द्र सिंह
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रवींद्र जैन अब इंदौर में

राजएक्सप्रेस भोपाल के संस्थापक टीम में से एक रहे रवींद्र जैन ने राजएक्सप्रेस इंदौर के स्थानीय संपादक का पद संभाला है. इससे पहले वे ग्वालियर राजेक्स्प्रेस के स्थानीय संपादक रहे . यहाँ उन्होंने लगभग सात महीने तक संपादक का पद संभाला. श्री जैन राज एक्सप्
 
आशेन्द्र सिंह
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'मां' चार कविताएँ

एक) मां ! क्या सूख गया है ? तुम्हारे स्तनों का दूध तुम्हारी आँखों का पानी या तुम्हारी ममता जो - संकट के बादल घिर आये हैं ! (दो) मां ! क्या नहीं है ? वह झूला वह रातें, वे परियां या वह लोरी जो, आखों से उड़ गयी है नींद ...! (तीन) मां ! यहाँ क्या छूटा है
 
आशेन्द्र सिंह
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पत्रकारिता चापलूसी का पेशा नहीं है

पत्रकारिता चापलूसी और टीपने का पेशा नहीं है . आखिर एक दिन तो जीहुजूरी का अंत होता ही है . ग्वालियर के एक दैनिक ने पहले तो मालिक की जी हुजूरी करने वाले संपादक को नौकरी से बर्खास्त कर दिया , लेकिन संपादक महोदय ने अपनी जगह पर आये दूसरे संपादक को ज्यादा
 
आशेन्द्र सिंह
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अपने दिल की कहिए...

बसंत की दस्तक ने एक बार फिर से तन, मन और उपवन में आग लगा दी है। वसुन्धरा के श्रृंगार ने मन में अलसाए प्रेम को फिर से चैतन्य कर दिया है। मै भी छलांग लगाने को तैयार हूँ। 'खुसरो दरिया प्रेम का, उल्टी वा की धार, जो उतरा सो डूब गया, जो डूबा सो पार। मेरे इ
 
आशेन्द्र सिंह
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तीसरा राज्य स्तरीय युवा चिंतन शिविर -2009

विगत वर्षो की तरह इस वर्ष भी "युवा samvad " की विभिन्न जिला इकाईयों द्वारा भोपाल में दिनांक 30,31 जनवरी व 01 फरवरी २009 को आइकफ आश्रम, शाहपुरा झील के पास तीन दिवसीय आवासीय शिविर का आयोजन किया जा रहा है। शिविर के लिये प्रस्तावित कार्ययोजना निम्नानुसार
 
आशेन्द्र सिंह
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शुभकामनाएं

अपनीबात टीम की तरफ से आप सभी को नव वर्ष की हार्दिक और मंगलमयी शुभकामनायें
 
आशेन्द्र सिंह