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नुक्कड़ Nukkad

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25 May 2010
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पहले मुक्ति, अब गुलामी की गोली

गीताश्रीपिल का खेल सबको समझ में आ गया है। इनका बहुत बड़ा बाजार है। इसने औरतों को टारगेट किया। पुरुषो ने अपने स्पर्श के आनंद के लिए औरतो को गोली ठुंसाई। वे कंडोम को अपनी राह का रोड़ा मानते हैं। इसीलिए औरतो को मानसिक रूप से तैयार करते हैं कि वे पिल को अपना
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बुर्का से मुक्ति का समय

एक कविता की पंक्तियां याद आ रही है...तेरे माथे पे ये आंचल बहुत ही खूब है, तू इस आंचल का एक परचम बना लेती तो अच्छा था....।यह पृथ्वी पर बुर्का से मुक्ति का समय है। हमने अपने घूंघट उतार फेंके हैं। हमारे सिरों से आंचल खिसकर हमारी मुक्ति का परचम बन गया है।
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शब्दों का सिरा

विपिन चौधरीदिन-रात शब्दों की श्रृंखालाओं से साक्षात्कार के बावजूद कुछ शब्द ऐसे भी हैं जो जब भी सामने आते हैं, हर बार नये सिरे से सोचने पर मजबूर कर देते हैं। ऐसे ही दोशब्द आते हैं- नारीवादी और शील-अश्लिल के बीच का भेद। तीन चार दिनोंके अंतराल में एक बार
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त्वरित प्रतिक्रिया, कल्बे जव्वाद के बयान पर

राजनीति नही, घर संभालें महिलाएंगीताश्रीलगता है शिया धर्मगुरु कल्बे साहब का दिमाग खराब हो गया है। तभी वे भयानक किस्म के बयान दे रहे हैं। इनको अपने दिमाग का इलाज कराना चाहिए। उनके मुताबिक औरतें घर संभालें और राजनीति मर्दो की बपौती बनी रहे। सवालिया दिमाग
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पारो ही पारो है जहां

गीताश्रीहाल ही में सहारा में एक खबर पढी, जो देश के बाकी अखबारो के लिए शायद उतनी बिकाउ खबर ना रही होगी। खबर थी, हरियाणा में मिली बालिका वधू नौ दिनों से गायब थी। यह मामला सबसे पहले सहारा समय पर उजागर हुआ तब जाकर मुकदमा दर्ज हो पाया। उसके परिजन कहते फिर रहे
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औरतों की ऐसी-तैसी करने वाले कबीर

कबीरदास को अब तक हम सब एक संत कवि के रुप में जानते रहे हैं, लेकिन कबीर का एक नया रुप भी है. स्त्रियों को गरियाते, उनकी लानत मलामत करते कबीर... धमकाते हुए कबीर कि अगर तुमने अपनी आजादी या चुनाव या स्वेच्छा की बात सोची भी तो पीट-पीट कर नीली कर दी जाओगी...
Feb 23 2010 11:35 AM
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सलाखो के पीछे कैद स्वाधीनता

नीलाभइरादा तो आज था कि अभय ने अपने ब्लौग-- निर्मल आनन्द-- में जो सवाल उठाया है : हिन्दी में सितारा कौन है ? -- उस पर कुछ विचार किया जाये, लेकिन आज एक ऐसी बात हुई कि आप से किसी और विषय की चर्चा करने को मन हो आया है.आज हमारी युवा मित्र सीमा आज़ाद और उनके
Feb 20 2010 10:01 PM
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औरत कैसी औरत है

इश्किया देखने के बाद आकांक्षा पारे ने जो सवाल उठाए हैं उस पर कई कमेंटस आए...प्रतिभा जी ने भी कुछ लिखा है। बहस पर नई रोशनी डालता हुआ उनका लेख .यहां पेश हैं। इश्किया में इस्तेमाल गालियों पर बहुत बहस हुई..अखबारों में लेख लिखे गए, चैनलों पर बहसें हुईं...मगर
Feb 14 2010 09:04 PM
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पहले औरत होकर तो देखें

फिल्म इश्किया देखने के बाद.....आकांक्षा पारे'मैं औरत होता तो पता भी नहीं चलता की परी हूं या तवायफ। यह गाली किसे है? औरत को या औरत के रूप में तवायफ को? या फिर दोनों को ही। क्योंकि कुछ लोगों को तो फर्क शायद नजर ही आता हो। दफ्तर में किसी से हंस कर बात कर
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सितमगर पर नकेल....

एनआऱआई दुल्हे का सपना ज्यादातर भारतीय लड़कियां देखती है...पंजाब इस मामले में सबसे आगे है..जहां मां बाप की ही नजर रहती है विदेशो में रहने वाले लड़को पर। प्रवासी लोगो की नजर रहती है भारतीय लड़की पर. अपने बेटे का ब्याह भारत में करना चाहते हैं ताकि भारतीय
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कितनी गुलामी और कब तक..

प्रज्ञा पांडेकितनी गुलामी सहनी है स्त्री को .. सिर को कितना झुकाना है .. कब तक ..किस सीमा तक ? क्या तब तक जब तक कि वह टूट न जाये मिट न जाए? और पुरुष को कितना गर्वोन्नत होना है? वे पुरुष हैं कमाते हैं खिलाते हैं जिलाते और हम बेकार हैं ! हमारे पास किस
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नीत्शे, देवता और स्त्रियां

प्रतिभा कटियारमैं ईश्वर में विश्वास नहीं कर सकता. वह हर वक्त अपनी तारीफ सुनना चाहता है. ईश्वर यही चाहता है कि दुनिया के लोग कहें कि हे ईश्वर, तू कितना महान है. - नीत्शेनीत्शे ने यह किन संदर्भों में कहा होगा नहीं पता लेकिन मुझे यह कथन स्त्री विमर्श के
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नए साल की ढेरो शुभकामनाएं

दोस्तोंबस एक सप्ताह और...ब्लाग से दूरी। फिर लौट कर इसी दुनिया में आना है। नीत्शे के बाद टूर शुरु जो अभी तक जारी है...। सोचा, आप सबको नए साल की शुभकामनाएं देते चले..आप जश्न में डूबे होंगे..मै भी जश्न मना लूं..कहीं दूर..कोलाहल से...जहां प्रकृति की घनेर
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हमेशा तारीफ सुनना चाहता है ईश्वर

नीत्शे के बहाने मनुष्य की प्रवृत्तियों को याद करते हुए...क्योंकि हम लोग भी हमेशा अपनी तारीफ सुनना चाहते है... शायद ईश्वर होना चाहते हैं. नभाटा पढते हुए नीत्शे का पुराना राग फिर नजरो के सामने से गुजरा...और कई चेहरे झिलमिलाए। हम जिस व्यवस्था में जी रहे
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अब मर्दों की भी एक रौनक गली

शिखा गुप्तालास वेगास(अमेरिका) की रंगीनियत के किस्से दुनिया को पता है। कहते हैं, जो कहीं नहीं होता, वो वहां होता है...वहां गैर कानूनी कुछ भी नहीं। कैसीनो से लेकर देह व्यापार तक..यानि कुछ भी..कोई भी शय। जिनकी जेब गरम रहती है उनके लिए वह स्वर्गगाह है। ल
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ईश्वर के देस में असुरक्षित लड़के

वह काले-चमकीले रंगत और मिचमिची आंखों वाला बच्चा था। उसके होश उड़े हुए थे। एजेंट ने लगभग उसे दबोच रखा था। मैडम जी..देखिए, ऐसे लड़के मिलेंगे सेवा के लिए। जब तक आप चाहे पास रखें। काम की गारंटी मैं लेता हूं, हर तरह का काम करेगा, अभी नया है...आप सिखा देना
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आधी दुनिया का एक अंधेरा कोना

सुप्रीम कोर्ट ने भले ही तल्ख होकर केंद्र सरकार को कहा कि वह अगर दुनिया के सबसे प्राचीनतम धंधा यानी वेश्यवृति को नहीं रोक सकती तो क्यों नहीं उसे कानूनी मान्यता दे देती है। वैध हो जाने के बाद कमसेकम उनकी हालत तो सुधर जाएगी। अभी तो सरकार ना ही इस पर रोक
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आउटलुक (हिंदी-अंग्रेजी) का सेक्स सर्वे

आधुनिकता को तेजी के साथ आगोश में लेते दिल्ली से सटे गुडग़ांव शहर में 32 साल के युवा ईशान अवस्थी का मानना है, 'पश्चिमी लिबास और मूल्यों वाली महिलाओं की ओर मैं ज्यादा तेजी के साथ आकर्षित होता हूं, बजाय परंपरागत भारतीय महिला के। वहीं पटना के पुनाईचक में
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गोवा की संस्कृति खतरे में

गोवा ही करता रहेगा मेजबानीअभिनेत्री नंदिता दास ने उबाल खाकर बयान दिया कि एक ना एक दिन अपना फिल्म समारोह विश्वस्तर का जरुर हो जाएगा। काफी हद तक सचाई बयान कर गईं। जिस तरह से फिल्म समारोह निदेशालय और गोवा इंटरटेनमेंट सोसाइटी के बीच तालमेल हुआ वो एक अच्छ
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विवादो के साए में उत्सव

इस साल अपनी उम्र के चालीसवें साल में प्रवेश कर गया अंतराष्ट्रीय फिल्म समारोह लेकिन विवादों ने अभी तक इसका दामन नहीं छोड़ा है। अभी तक इस पर अपरिपक्व होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। समारोह में शामिल कुछ महत्वपूर्ण हस्तियों को यह आशंका सता रही है कि कहीं
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पैशन आफ लाइफ

गोवा में अंतराष्ट्रीय फिल्म समारोह में अबकि कई फिल्में देर तक याद रह जाने वाली हैं। वे आपके जेहन में घुस कर बैठ गई हैं, जैसे मेरे। मैं दिल्ली लौट आई मगर उनके किरदार मेरे जेहन में कुबुला रहे हैं। शायद मैं लंबे समय तक इन्हें झटक नहीं पाऊंगी। हमें शायद
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मां बनिए या फाइटर पायलट

गीताश्रीपुरुषवादी सोच का फरमान आ चुका है...अगर मां बनना है तो फाइटर प्लेन उड़ाने का सपना भूल जाइए। वायु सेना महिलाओ को फाइटर पायलट बनाने की योजना पर विचार तो कर रही है लेकिन सशर्त्त। इसमें शर्त्त ये है कि यह मौका उन्हीं महिलाओं को मिलेगा जो एक तय उम्
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प्रेम में वासना

कृष्ण बिहारीमैं इसे कभी स्वीकार नहीं कर सकता कि प्रेम में वासना का कोई स्थान नहीं है. मैं न स्वयं से झूठ बोल सकता हूं और न दूसरों से. प्रेम में आदर्श और अशरीरी जैसी स्थिति की जो लोग वकालत करते हैं, वह मेरी समझ में केवल लाचारी है. हमारे देश में चूंकि
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क्या पुरुष दाता है और स्त्री याचक

गीताश्रीलव गुरु की प्रेमिका का महान लेख मेरे सामने हैं। इनके ब्लाग और एक अखबार में छपा हुआ। तमाम महिला संगठनो और महिला आंदोलनो को मुंह चिढाता हुआ. उसे व्यर्थ साबित करने पर आमादा। स्त्रियों ने अपने अधिकारो के लिए अब तक जितनी लड़ाईंयां लडी और सशक्तिकरण
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चित्रलेखा, पाप और प्रेम

राजकिशोरभगवतीचरण वर्मा का उपन्यास ‘चित्रलेखा’ कई दृष्टियों से एक मोहक उपन्यास है। इसकी शुरुआत इस प्रश्न से होती है कि पाप क्या है और उत्तर यह निकलता है कि हम न पाप करते हैं और न पुण्य करते हैं, हम केवल वह करते हैं जो हमें करना पड़ता है। जाहिर है, सवाल
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एकल जीवन का मर्म

मैं आफिस के काम से दो दिन की यात्रा पर थी, इधर दिल्ली में यह सम्मेलन हो रहा था। वादा करके भी मैं सम्मेलन की रिपोर्ट आप तक नहीं पहुंचा पाई। हमारी पुरानी मित्र अलका आर्य की पैनी नजर रहती है स्त्री विषयक मुद्दों पर। इस सम्मेलन पर भी उनकी नजर थी। उन्होंन
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एकाकीपन के कुछ साल

करीब चार करोड़ अकेली महिलाएं --आपबीती बताने दिल्ली पहुंची--कुरीतियां थोपे जाने का विरोध--घरेलू हिंसा का चिठ्ठा खोलेंगीअब अकेली रहने वाली महिलाओं ने अपनी चुप्पी तोड़ने का फैसला किया है और एक मंच पर आ पहुंची हैं, जहां से उठाएंगी अपनी आवाज, जो शायद बहरे
Oct 14 2009 07:43 PM
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वेदांता की मौत की चिमनी

छत्तीसगढ़ के बालको में घरों को रौशन करने के लिए बनाई जा रही विशाल चिमनी ने ही सैकड़ों घरों को हमेशा-हमेशा के लिए अंधेरे में डूबा दिया है. इस घटना को दस दिन हो गये हैं लेकिन अब तक 41 मज़दूरों की हत्या की जिम्मेवारी तक तय नहीं हुई है. हालत ये है कि वेद
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नैतिक विश्वास की तलाश में स्त्री-भाषा, खुले हैं सभी दरवाजे

सितंबर से 29 सितंबर के बीच आयोजित सेमिनार--हिंदी की आधुनिकता:पुर्नविचार पर विमर्श के लिए देशभर से अनेको विद्वान शिमला में जुटे हुए हैं।मशहूर ब्लागर, मीडिया विशेषज्ञ विनीत कुमार भी शिमला की गुलाबी ठंड में डटे हुए हैं और लगातार रिपोर्टिंग कर रहे हैं।से
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अपने आसन से वंचित देवता की चीखें

सभी दोस्तो के नाम....ये किसी एक को संबोधित नहीं है। ना ही मेरा व्यक्तिगत प्रलाप है। मेरे लेखों का मेरी निजी जिंदगी की झुंझलाहट से क्या लेना देना..मेरे बारे में बताने के लिए ब्लाग में दिया गया परिचय और मेरा पेशा ही काफी है। मैं जागरुक पत्रकार हूं, आजाद
Sep 24 2009 02:46 PM
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विनीत का पत्र प्रवीण के नाम

प्रवीण जी,स्त्री-मुक्ति को लेकर गीताश्री जो भी कह रही हैं,उसे आप उनकी व्यक्तिगत झुंझलाहट और विचार समझ रहे हैं,ये अकेला वाक्य आपके बौद्धिक दायरे को साबित करने के लिए काफी है। गीताश्री क्या देश और दुनिया की कोई भी स्त्री,स्त्री-मुक्ति के स्वर को मजबूत
Sep 23 2009 10:49 AM
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प्रवीण शुक्ल जी की प्रतिक्रिया

मेरे ताजा पोस्ट नख दंत विहीन नायिका का स्वागत... को लेकर प्रवीण जी की प्रतिक्रिया यहाँ पोस्ट कर रही हूं..। मैं इसका जवाब देना चाहती हूं। जिस मनुस्मृति का हवाला इन्होंने दिया है, उसी के चुनिंदा श्लोक यहां सामने रख कर कुछ सवाल उठाना चाहती हूं..मेरे पोस्ट
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नख दंत विहीन नायिका का स्वागत है....

शक्ति की पूजा-आराधना का वक्त आ गया है। साल में दस दिन बड़े बड़े मठाधीशों के सिर झुकते हैं..शक्ति के आगे। या देवि सर्वभूतेषु....नमस्तस्ये..नमो नम...। देवी के सारे रुप याद आ जाते हैं। दस दिन बाद की आराधना के बाद देवी को पानी में बहाकर साल भर के लिए मुक्ति
Sep 20 2009 09:22 AM
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औरत के विऱुद्ध औरत

सास बहू से परेशान है, बहू सास से..ये कोई नई बात तो है नहीं। ये सिलसिला प्रेम की तरह ही आदिकालीन है। रिश्ते के साथ साथ ही उसकी जटिलताएं भी पैदा होती हैं। आप लोकगीतो को सुने, लोककथाएं सुने..हरेक जगह आपको सास-बहू रिश्तों की जटिलता का महागान सुनाई देगा।
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नहीं चाहिए घूंघट की आड़

ये कहानी ज्यादातर घरों की है। मध्यवर्गीय परिवारों की कहानी..जो शहर तो आ जाता है लेकिन खुद को शहरी चलन के हिसाब से ढाल नहीं पाता। आधुनिकता और पंरपरा के बीच पीसते हुए इस वर्ग की हालत दयनीय हो उठती है तब जब कोई लड़की या बहू अपने परिवार द्वारा थोपे गए रिवाजो
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बंद समाज में बिना शादी सेक्स का नया चलन

यकीन हो या ना हो, खबर सच है। क्योंकि खबर आई है उसी समाज के एक प्रतिनिधि के कलम से। किसी भी तरह के गैरशरीयत और गैरवाजिब यौन संबंधों पर बारीक और कड़ी नजर रखने वाले इसलामी देश सऊदी अरब में इन दिनों लीव-इन रिलेशनशीप का चलन जोर पकड़ रहा है। इसे तरजीह दे रहे
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भूल जाओ पेट की भूख

मेरे आग्रह पर वरिष्ठ पत्रकार, मशहूर ब्लागर, प्रतिभा कटियार जी ने अपनी प्रतिक्रिया आलेखनुमा भेजा है। अफगानिस्तान का नो सेक्स, नो फूड कानून ही एसा है जिससे कोई भी स्त्री बौखला जाएगी, चाहे वह किसी भी देश की हो। मैं यहां प्रतिभा की इसी सार्थक बौखलाहट को
Aug 27 2009 01:43 PM
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सम्मान से बड़ा नहीं कोई मुआवजा

ये क्या कह रहा है राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग। क्या एक स्त्री की बेइज्जती करने के बाद, उसका रेप करने के बाद, उसका फर्जी एमएमएस और नकली ब्लू फिल्म बनाने और जारी करने के बाद जो उसकी इज्जत के साथ खिलवाड़ होता है उसकी भरपाई चंद रुपये पैसे से की जा सकती है।
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प्रमाण मिल गए आपके गुनाह के सरकार

राष्ट्रीय महिला आयोग को इस बात के पुख्ता प्रमाण मिले हैं कि मध्य प्रदेश के शहडोल में कन्यादान योजना का लाभ देने से पहले जिला प्रशासन ने आदिवासी एवं अनुसूचित जनजाति की युवतियों का कौमार्य परीक्षण करवाया था। आयोग के समक्ष परीक्षण की प्रक्रिया से गुजरने
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हम नहीं, आंकड़े बोलते हैं

एक दिन पहले मैंने पोस्ट लिखा, अगले दिन एक अखबार में एक सर्वे छपा जो मेरी राय को सपोर्ट कर रहा है। मैं यहां उस खबर को ज्यों का त्यों डाल रही हूं, ताकि शादी की उम्र को को लेकर जो भयावह सच है वो सामने आ जाए। सहयोग संस्था के सर्वे के मुताबिक य़ू पी में 62