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08 Mar 2010
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Anwar Qureshi

उसकी स्याही का लिखा,मिटाने में लगा हूँ यारों...तक़दीर जिसे कहते है,आसमां पर लिखी जाती है ...!
 
Anwar Qureshi
Mar 07 2010 01:15 AM
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Anwar Qureshi

जब जुनू हो मंजिल को करने का हासिल... मील के पत्थर से कोई दोस्ती करता नहीं..... !
 
Anwar Qureshi
Feb 16 2010 11:31 PM
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b.j.p में केंद्रीय नेतृत्व परिवर्तन,छत्तीसगढ़ में रमन संकट ?

लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद अब बी.जे.पी में चाल, चरित्र और चेहरा बदलने की कवायत तेज़ हो गयी है जिसके चलते बी.जे.पी ने सबसे पहले वो चेहरे ही बदल डालें है जिनकी वजह से पिछले चुनाव में उन्हें हार का मुँह देखना पड़ा है, पार्टी के शीर्ष नेता लालकृष्ण
 
Anwar Qureshi
Feb 12 2010 11:34 AM
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मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहता हूँ !!!

पापा कहते है बड़ा नाम करेगा , बेटा हमारा ऐसा काम करेगा , ...मगर ये तो कोई न जाने के मरी मंजिल है कहाँ .... इस गीत को जिस किसी ने भी लिखा है सच में बहुत खूब लिखा है , हर पिता का सपना होता है के उसका बेटा पढ़ लिख कर बड़ा आदमी बने , खूब नाम कमायें , कोई
 
Anwar Qureshi
Dec 29 2009 11:51 AM
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देश की बदलती राजनीति की नई तस्वीर !!!

देश बदल रहा है , देश की राजनीति भी बदल रही है , कभी नेताओं की पहचान खादी से हुआ करती थी लेकिन अब स्वरुप बदलता जा रहा है , कभी नेता जनता की आवाज़ हुआ करता था अब भीड़ में एक चर्चित चहरा बन कर रह गया है , अब का नेता आदर्शों की बातें नहीं करता , वो दूसरो
 
Anwar Qureshi
Dec 29 2009 11:51 AM
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ऐं ज़िन्दगी ...

ऐं ज़िन्दगी , तू मुझे कहीं दूर लेके चल ! जहाँ सिर्फ़ मैं हूँ , और मेरी तन्हाई हो ! न कोई रौशनी , न कोई परछाई हो ! ऐं ज़िन्दगी तू मुझे कहीं दूर लेके चल !! मुझे दुनिया का नहीं , अपनों से डर है , हज़ार चहरे है लेकिन , हमदर्द कोई नहीं है ! कुछ है अगर तो
 
Anwar Qureshi
Dec 29 2009 11:51 AM
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मेरे मन को भाया , मैं कुत्ता काट के खाया ...

दिल्ली में लावारिस कुत्तों को खाना खिलने पर जुर्माना किए जाने की ख़बर ने मुझे कुत्तों पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया है , अब बेचारे वफादार इमानदार बेजुबान लावारिस कुत्तों का क्या होगा ? खाना नहीं मिलने पर वो कहीं भूक हड़ताल पर तो नहीं बैठ जायेंगे ? इस
 
Anwar Qureshi
Dec 29 2009 11:51 AM
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भारत हमको जान से प्यारा है ...

मुझे गर्व है के मैं भारत में जन्मा हूँ , वो भारत जिसने बिना किसी भेद भाव के , न किसी जात पात के , मुझे स्वीकार किया है , आज़ाद भारत की आज़ाद हवाओं में खुली साँस लेकर मेरी छाती और भी चौड़ी हो जाती है , मेरा बचपन इसकी सोंधी मिट्टी के बीच गुज़रा जिसकी खुशबु
 
Anwar Qureshi
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भोक्वाये ब्लागर कृप्या ध्यान दें .....

क्या आप के ब्लॉग को कोई नहीं पढ़ रहा है ? २ क्या पढ़ने के बाद कोई टिपण्णी नहीं कर रहा है ? ३ क्या आप को लगने लगा है के आप को लिखना नहीं आता है ? ४ क्या आप को लगता है के आप से अच्छा स्त्रियाँ लिखती है ? ५ क्या आप को लगता है के सारी टिप्पणियाँ स्त्रियाँ
 
Anwar Qureshi
Dec 29 2009 11:51 AM
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चिकनी चिकनी प्यारी प्यारी ...

दुबली पतली नाज़ुक नाज़ुक चिकनी चकनी प्यारी है , गोल गोल सी बड़े बड़े से हाथों में नहीं आती है , छोटा सा एक छेद है बीच में उसमे ऊँगली भी नहीं जाती है , लेकिन प्यारी सच कहता हूँ कितने रंग दिखाती है , जैसे ही आता है चुनाव तेरी मांग बढ़ जाती है , अपने इस छो
 
Anwar Qureshi
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खबरी चैनलों की माँ की ..बिप ...

देश में खबरी चैनलों की तादात इस तेज़ी से बढ रही है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है के अपने आप को सबसे तेज़ कहने वाला चैनल भी पीछे छुट गया है ? लगातार चैनल आ रहे है और बहस का मुद्दा भी बन गए है , संपादक स्तर के लोग टीवी न्यूज़ चैनलों को अपने सं
 
Anwar Qureshi
Dec 29 2009 11:51 AM
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सूखे पत्तों सी है ज़िन्दगी !!!

पतझड़ में जब मैंने अपने , पच्चीस साल पुरे किये , तब टहनियों से टूट के ज़मी पर आया , आते ही सामना हवाओं से हुआ खूब थपेड़े खाए , जिधर उसने चाह बस चल दिए फ़िर धीरे से बारिश की बुँदे पड़ी उसने थोड़ा सा सुकून पहुँचाया , भिगो करके उसने दी मुझको रहत सोंधी सोंधी
 
Anwar Qureshi
Dec 29 2009 11:51 AM
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सच में बड़ा सुकून पहुचाती हो तुम ...

जब जब तन्हाइयों में तेरा साथ होता है , सच में बड़ा सुकून पहुचाती हो तुम ! कांपते हाथों को तेरा सहारा मिल जाता है , लग के होटों से सारी दूरियां मिटाती हो तुम , सच में बड़ा सुकून पहुचाती हो तुम !! वो कांच के टुकड़ों की चुभन , और प्यार से गर्दन को सहलाना
 
Anwar Qureshi
Dec 29 2009 11:51 AM
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अब के गिरो तो ज़रा संभल के गिरियेगा !

चलते चलते अगर आप के कभी पाँव फिसल जाये इससे पहले कोई देखे आप खुद ही संभल जाएँ या अगर ना संभल सके तो समाज के उस चहरे का मज़ाक बनने के लिए तैयार रहे जो आप को कही दूर टक टकी लगाये देख रहे है , जिसे इस बात में मज़ा आ रहा है की वह इंसान सड़क पर फिसल के गिरा
 
Anwar Qureshi
Dec 29 2009 11:51 AM
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आख़िर क्या है ये ज़िन्दगी ?

ज़िन्दगी की शुरुवात ही न जाने कितनी ख्वाइशों से शुरू होती है , कुछ महलों में सजती है तो कुछ मुफलिसी में , लेकिन ज़िन्दगी जहाँ भी हो कई उम्मीद लेकर आती है , किसी की किस्मत में सारा आसमा है तो किसी की किस्मत में रत्ती भर की ज़मीं भी नहीं ? ज़िन्दगी फ़िर
 
Anwar Qureshi
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भारत में और कितने ९/११ ...

महात्मां गाँधी के सिने में लगी ३ गोलियौं ने इस देश से अहिंसा के अध्याय का अंत कर दिया था ? अहिंसा के सबसे बड़े प्रतिक की हिंसा से मौते शायद देश के भविष्य के लिए एक भयंकर संकेत था ? एक वो दिन था और आज भी एक दिन है जब मुंबई में हुए आतंकी हमलों को हम दु
 
Anwar Qureshi
Dec 29 2009 11:51 AM
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जीवन क्या है ?

दुःख बिना सुख ना भावे , दर्द बिना आराम न आवे ! जो मिल जाये बिन महनत उसका मोल नहीं कुछ होवत है , जोड़ जोड़ के तिनका तिनका ऐसा मन को भावत है !! सागर सागर किस काम का जो प्यास भी ना भुझा पावत है , बूंद बूंद मिल जाये तो मन भर प्यास भुझावत है !! धरती की वि
 
Anwar Qureshi
Dec 29 2009 11:51 AM
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मैं ख़ुदा हूँ ???

धरती पर मनुष्य की उपस्थिति के दिन से ही उसने अपने आस पास के वाता वरण को अपने अनुकूल में करने के लिए न जाने क्या क्या किया , सब कुछ अपनी सुविधा के अनुसार , और सफल भी रहा शायद इश्वर ने उन्हें वो असीम शक्ति प्रदान की जो उसे दुसरे प्राणियों से अलग करती ह
 
Anwar Qureshi
Dec 29 2009 11:51 AM
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ये मेरी ज़िन्दगी ...

ये मेरी ज़िन्दगी बिस्तर की सिलबटों की तरह है , हर रोज़ ये जीती है हर रोज़ ये मरती है ! कुछ ख़ाब से बनते है , बन के टूट जातें है , फ़िर भी ना जाने ये किस आस में जीती है !! कुछ दर्द है हासिल , कुछ तन्हाई का आलम है , हर आहट में ये लेकिन ,किसी का इंतेज़ार क
 
Anwar Qureshi
Dec 29 2009 11:51 AM
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आरज़ू ...

आसमां सी आरज़ू है , ख़ाब से हालात हैं ! जीने की है तमन्ना , थमी थमी सी सासं है !! फिरता हूँ मैं दर बदर , मिलता नहीं है आसरा ! इस ज़मी पर आशियाने , की मुझे तलाश है !! सारा शहर है बेरहम , कोई नहीं मेरा अपना ! काफ़िले में नज़रों को मेरी , मेरे अपनों की तला
 
Anwar Qureshi
Dec 29 2009 11:51 AM
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मुझे श्रधांजलि दीजिये ...

जन्म -३०.०८. ७८ से ... ... ... अत्यंत दुःख के साथ ये सूचित करना पड़ रहा है की मैं अनवर कुरैशी आत्मज ...श्री ए जे कुरैशी , का आज के दिन जीवन का एक महत्त्वपूर्ण वर्ष और कम होने जा रहा है , इस दुखद समय में आप सभी ब्लागर साथियों के निवेदन है आप सभी इस ब्ल
 
Anwar Qureshi
Dec 29 2009 11:51 AM
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कलंकित गाँधी !!!

छत्तीसगढ़ की राजनीती की नई खरपतवार बन कर उभरे राजनांदगाव के पूर्व सांसद , या यूँ कहिये की संसद में सवाल पूछने के बदले घुस लेते रंगे हाथ पकड़े गए व पार्टी से निष्कासित किए गए माननीय सांसद प्रदीप गाँधी जी की पार्टी में पुनः वापसी हो गई है , शायद पार्टी
 
Anwar Qureshi
Dec 29 2009 11:51 AM
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लूट सको तो लूट लो ...

फोकट का सामन है भैय्या , लूट सको तो लूट लो ! खुली हुई दूकान है भैय्या , लूट सको तो लूट लो !! ना इसमें कोई मिर्च है , ना है कोई मसाला , ना अखछर की पहचान है इसमें ! ना शब्दों की वर्ण माला , बिखरा हुआ सामन है भैय्या , लूट सको तो लूट लो !! गुमसुम गुमसुम
 
Anwar Qureshi
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पत्नी केयर टेकर पति उसका मालिक ?

स्त्री के अनेक रूप हम सभी ने अपने जीवन में देखे है , माँ , बहन , पत्नी , बेटी , ये सभी पात्र पुरूष के जिवन से होकर कभी ना कभी ज़रूर गुज़रते है , और ये सभी जीवन में एक विशेष महत्व रखते हैं , स्त्री हमेशा से ही बलिदान का वो चहरा रही है जिसने हालात के स
 
Anwar Qureshi
Dec 29 2009 11:51 AM
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चलिए ...ज़मी पर ख़ुदा ढूँढ़ते है !!!

मैं... एक दिन कुछ अपनी ज़िन्दगी से परेशां ...अपनी किस्मत का हिसाब किताब कर रहा था , हज़ारो सवाल मेरे इर्द गिर्द घूम रहे थे और मुझे चिढ़ा रहे थे बार बार मुझसे ये कहते ...आख़िर मैं ही क्यूँ ? हमेशा मेरे साथ ही ऐसा क्यूँ होता है ? ये तकलीफें ये मुसीबते हम
 
Anwar Qureshi
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ज़िन्दगी ....

ज़िन्दगी शब्द ही अपने आप में बहुत प्रभावित करेने वाला शब्द है इसे जानने की कोशिश तो सभी ने की है लेकिन इसे समझना बड़ा ही कठिन है ?...इस सरल से शब्द के पीछे इंसान की सारी ज़िन्दगी के राज़ छुपे हुए होते है ...इंसान ज़िन्दगी से सब कुछ चाहता है ...हर छोट
 
Anwar Qureshi
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मुझे ख़बर नहीं ...

भारत में हुए २६/११ के आतंकी हमले के बाद मिले सबूत में पाकिस्तान का हाथ होने की पुष्ठी से भारत ने पाकिस्तान पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है , वहीं चौतरफा दबाव के चलते पाकिस्तान ने भी आतंकी संगठनो पर शीकंज़ा कसना शुरू कर दिया है ॥लेकिन मुझे ख़बर ही नहीं .
 
Anwar Qureshi
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चहरा ..चहरे पर ...चहरा ...???

तेज़ी से भागती हुई ज़िन्दगी में न जाने कितने चहरे देखें होंगे ... सड़क पर ...चौक ..चौराहों पर ..या किसी बाज़ार पर ...हर चहरा जैसे कुछ कह रहा हो ...कोई अपना कोई अनजाना सा ...किसी चहरे पर खुशी ...तो किसी पर शिकन ...कुछ मजबूर ..तो कुछ लाचार ...कुछ दर्द को
 
Anwar Qureshi