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महकते रंग गुल में........
महकते रंग गुल में, गुलज़ार होते हैं,मचलते ख़्वाब, स्वप्न के पार होते हैं,ना जाने क्यों, मोहब्बत इम्तहां लेती, जो भी डूबते इसमें, वही कुर्बान होते हैं,बङी खूबी से गिरते हैं, ये पतझङ के जो पत्ते हैं,नाम पत्ता रखा इनका,रंग खो कर भी सवरते हैं,जाम कोई भी हो
Jun 13 2010 04:14 PM


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