MERE SAPNE MERE APNE's Image

MERE SAPNE MERE APNE

http://nitishraj30.blogspot.com/
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
13 Jun 2010
कुल प्रविष्टियां
140
पाठक भेजे
8322
पसंद
695
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
59.44
पसंद करें
1
नापसंद करें

ये हुई ना बात

कल पूरा दिन बहुत उतार-चढाव के साथ बीता। पूरे दिन में सिर्फ एक बार, ऐसा वक्त आया जब एक सवाल ने कुछ राहत दी या यूं कहूं कि खुश किया। मेरे जाननेवाले और अधिकतर मेरे दोस्त जब भी कहीं फंसते हैं खासकर खेल के मामले में तो मुझ से पूछ ही लेते हैं। शाम मेरे एक
 
Nitish Raj
पसंद करें
5
नापसंद करें

अब जोश और रोमांच के साथ जागो पूरी रात

बचपन से ही आदत रही देर रात तक जग कर पढ़ने की। वहीं दूसरी तरफ घर में किसी को भी देर रात जगने की आदत नहीं थी। सब के सब जल्द सो जाते थे। वहां वो सोते यहां पर मेरा जगना और लगभग कई बार तो सुबह तक पढ़ना जारी रहता था। याद है वो रातें जब मैं पढ़ा करता था।पर हर
 
Nitish Raj
टैग: maradona
पसंद करें
3
नापसंद करें

हमारे अंदर का सबसे बड़ा जानवर ‘कौन’?

जितने मनुष्य उतनी शख्सियत, उतने चेहरे। सबका रहन-सहन अलग, नजरिया अलग, पहचान अलग। रोज ना जाने कितनी शख्सियत आंखों के आगे से गुजर जाती हैं। हर दिन हमें तरह-तरह के लोग रास्ते में टकराते हैं। जितने तरह के लोग उतने ही तरह के व्यक्तित्व। सभी की अपनी एक अलग
 
Nitish Raj
टैग: anger
पसंद करें
5
नापसंद करें

क्या लोगों ने ‘उसे’ ठीक पीटा?

उस समय मेरे मुंह से सिर्फ ये ही शब्द निकले....ओह माई गॉड। उसे बुरी तरह से पीट रहे थे लोग। हर आता-जाता दो-चार तो कम से कम लगा ही देता, जहां दिल चाहता वहां मारता। कोई-कोई तो मन भरकर मारता और कुछ तो तब तक मारते जब तक कि खुद के हाथ-पैर दुखने ना लग जाएं। सुना
 
Nitish Raj
टैग: भीड़
पसंद करें
2
नापसंद करें

'ये यंगिस्तान की हार नहीं है...'

यंगिस्तान की हार, यंगिस्तान को धूल चटा दी, यंगिस्तान इसे एक सबक समझे, और ना जाने क्या-क्या सलोगन सुनने में आ रहे हैं। कल से ही कई लोगों की जुबान पर ये बात आ रही थी और आज सुबह अधिकतर अखबार इसी पटे हुए हैं। पर मेरा सवाल ये है कि क्या सचमुच में यंगिस्तान की
 
Nitish Raj
टैग: dhoni
पसंद करें
2
नापसंद करें

’हूं...दीज आर फ्रॉम ओल्ड ईरा, विथ द सेम ओल्ड थिंकिंग’।

हर दिन की तरह आज भी दौड़ते-भागते मेट्रो में कदम रखा तो भीड़ होने के बावजूद सीट कब्जाने में मैं कामयाब हो गया। बिना वक्त गंवाए मैं रोज की तरह किताब के काले अक्षरों में गुम हो गया। मैं पन्ने दर पन्ने पलट रहा था, और मेट्रो, स्टेशन दर स्टेशन भागी जा रही थी।
 
Nitish Raj
पसंद करें
2
नापसंद करें

धीरे-धीरे एक आदत की ओर...

सुबह हर किसी को जल्दी, हर कोई अपने कदमों से तेज, दूसरे से पहले पहुंचने की होड़। एक अजनबी से भी एक अनजाना मुकाबला, आगे निकलने की जद्दोजहद। हर कोई भीड़ का हिस्सा और नहीं भी। एक-दूसरे को धक्का देते, कोहनी से पीछे ढकेलते, आगे बढ़ जल्दी से सीट लपकने की जी जान
 
Nitish Raj
पसंद करें
0
नापसंद करें

दूर बैठे, दूर की सोच

गांव, मेरा गांव। जब भी गांव जाता हूं तो करीब 40-50 किलोमीटर पहले ही वो शहर की पक्की सड़क पीछे छूट जाती है। फिर शुरू हो जाता है सफर कच्ची सड़क का, जिसे बोलचाल की भाषा में खड़ंजा (ईट की सड़क) कहते हैं। फिर शुरू हो जाती है हरियाली और सिर्फ हरियाली। मिट्टी
 
Nitish Raj
पसंद करें
2
नापसंद करें

अब इस फतवे से जगी आस

भारत में 90 फीसदी मुस्लिम छात्र दसवीं तक पहुंचने से पहले ही स्कूल छोड़ देते हैं। शहरों में सिर्फ 1 फीसदी महिलाएं और 3.4 फीसदी मर्द स्नातक हैं। गांवों में मात्र 0.7 फीसदी पुरुष स्नातक हैं और महिलाएं ना के बराबर हैं। आए दिन कोई ना कोई फतवा। कभी इस बात पर
 
Nitish Raj
पसंद करें
0
नापसंद करें

“वो पुरानी खिड़की”-2

अब आगे........कहते हैं कि वक्त हमेशा एक सा नहीं रहता, और उसके लिए वक्त बदल भी गया। मेरे लिए तो वक्त अभी था पर उसका वक्त भी तो मेरा हो चुका था जो मुझसे मेरी ही चुगली कर रहा था और बता रहा था मुझे कि अब मेरे पास भी वक्त नहीं रह गया है। मेरे वक्त ने तो कसम
 
Nitish Raj
टैग: कहानी
पसंद करें
4
नापसंद करें

“वो पुरानी खिड़की”-1

अब आगे.........जेठ के महीने की चिलचिलाती धूप में भी वो हौसला दिखाते हुए मुझसे मिलने पहुंच ही जाती थी मेरे तपते हुए कमरे में। उसके पत्थर फेंकने पर मैं धीरे से बिना आवाज़ किए सीढ़ी नीचे उतार देता और फिर हम दोनों घंटों बैठकर बातें करते रहते थे। कभी इतिहास
 
Nitish Raj
टैग: कहानी
पसंद करें
1
नापसंद करें

ये फैसला तो जरूरी था।

पिछले वर्ल्ड टी 20 में मैंने एक पूर्व क्रिकेटर और चयनकर्ता से पूछा था कि कौन सी टीम सब से प्रबल दावेदार है कप की। उनके जवाब से मैं संतुष्ट नहीं हुआ। मैंने कहा कि पाकिस्तान को आप कम मत आंकिए ये कभी भी उल्टफेर करने का माद्दा रखती है। उनका जवाब क्या था वो
 
Nitish Raj
पसंद करें
2
नापसंद करें

“वो पुरानी खिड़की”

‘वो’ खिड़की, मेरी खिड़की, जो कुछ पुराने जमाने की थी, वहां से सड़क दूर तक दिखती। कोई भी दूर से आता आसानी से खिड़की की सलाखों के बीच से पहचाना जाता। पूरी सड़क दिखा करती थी, हमारा घर या यूं कहें कि ‘उस’ दुमंजले वाली खिड़की सड़क के साथ-साथ थोड़ी सी कर्व में
 
Nitish Raj
टैग: कहानी
पसंद करें
2
नापसंद करें

वो पुरानी चौखट की याद

उस दिन धूप अच्छी थी ठंड के दिन जो शुरू हो चुके थे। ठंड की धूप बूढ़े हो चुके जिस्म पर पड़ती तो काली-सफेद चमड़ी सिक कर लाल-काली हो जाती। याद है, उस दिन उम्र के सफर में पक चुके दो जिस्म धूप में चमड़ी काली करने के बाद जैसे ही घर की ड्योढ़ी चढ़े थे उसमें से
 
Nitish Raj
टैग: समाज
पसंद करें
-1
नापसंद करें

राहुल और शाहरुख जैसे और दो-तीन जवाब शिवसेना की मुंबई में कब्र बना देगा।

उत्तरभारतीयों के पीछे राज ठाकरे...’खान’ से खुन्नस निकालती शिवसेना....शिवसेना के पीछे बीजेपी-आरएसएस...और अब इनके पीछे युवराज यानी राहुल गांधी। पर कुछ भी हो हार तो यहां बाल ठाकरे और उनके मुद्दे की हुई है।ठाकरे के परिवार की अब वो हैसियत नहीं रह गई है जो कि
 
Nitish Raj
टैग: rahul gandhi
पसंद करें
1
नापसंद करें

राहुल लोकप्रिय कम पर उनके दीवाने ज्यादा हैं।

सुना था कि लोग दीवाने होते हैं पर आज देखा कि दीवानगी क्या होती है। पहले तो मैं ये मानता था कि दीवाने सिर्फ और सिर्फ फिल्मी हस्तियों के ही होते हैं। धीरे–धीरे जानकारी हुई कि फिल्मी हस्तियों से कदम ताल कर रहे हैं क्रिकेटर। पर पहली बार दिखी दीवानगी किसी
 
Nitish Raj
पसंद करें
0
नापसंद करें

स्टोव की गर्मी

फटररररर...फटरररररर....खटररररर...खटरररररर...। ग्लास से बार-बार टकराती चम्मच की खटररररर....खटररररर....। खटररर...खटरररर...होने के बाद तेल में छप्प से एक चिरमिराहट के साथ वो ग्लास को स्टोव पर रखे फ्राइकपेन में उड़ेल देता। अच्छे से सेकना...पर जलाना नहीं और
 
Nitish Raj
टैग: दिल से
पसंद करें
1
नापसंद करें

पैसे के लिए कुछ भी करेगा। कभी ख़फा होगा, कभी खुद मान जाएगा, पर पैसा तो नहीं छोड़ेगा।

आजकल ये बहुत देखने में आ रहा है कि लोग पैसे के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार रहते हैं। कुछ भी मतलब कुछ भी, शायद सब समझ गए होंगे कि इस कुछ भी का क्या मतलब होता है। पहले मैं सोचता था कि ये पैसा तो सिर्फ कॉरपोरेट कल्चर वालों को ही अपने इशारे पर नचाता है। पर
 
Nitish Raj
टैग: ipl
पसंद करें
2
नापसंद करें

’मेरी मर्जी’

’सर, मेरे पास भी वो ही सामान है जो कि उस स्टॉल पर है। आपने मेरा सामान देखा, मुझसे बात की और फिर दूसरे स्टॉल पर जाकर सामान खरीद लिया। जबकि मेरा सामान उसके सामान से क्वालिटी में बेहतर है, फिर भी आपने ऐसा किया। आपने जानबूझकर मेरे साथ ये बुरा व्यवहार किया
 
Nitish Raj
टैग: ipl
पसंद करें
1
नापसंद करें

नव वर्ष मुबारक हो, नए साल पर वापसी

29 सितंबर के बाद से कुछ यूं व्यस्त हुआ कि ब्लॉग पर तब से वापसी संभव ही नहीं हो सकी। काफी दिन से सोच रहा था कि कुछ लिखूं पर लिख नहीं पा रहा था, ना जाने क्यों? सोचता था कि काफी बातें हैं जहन में जिनका वक्ता आ चुका है बिखर कर छप जाने का। तो, चलो वापसी की
 
Nitish Raj
टैग: blog
पसंद करें
8
नापसंद करें

भारत में पाकिस्तान से ज्यादा पाकिस्तानी रहते हैं।

बहुत सोचने के बाद तकरीबन दो दिन सोचने के बाद मैंने ये फैसला किया कि इस बात को सब के साथ शेयर करूं। हमारे देश की किस्मत ही है कि यहां रहने वाले ही उसकी पीठ में खंजर भोंकते हैं। ये हमारे देश में रहने वाले कुछ लोगों की फितरत है कि जिस थाली में खाते हैं
 
Nitish Raj
पसंद करें
1
नापसंद करें

ब्लॉगवाणी बंद नहीं हो सकता!

ब्लॉगवाणी बंद होगया। सुनो ब्लॉगवाणी बंद होगया। ’ ’ नहीं...नहीं ये नहीं हो सकता। ’ ’ नहीं, ये हो गया है देखो ये पूरा एक पन्ने का लव लैटर। जिसमें पसंद को लेकर बवाल की बात कही गई है। उस कारण से ये बंद किया गया है। ’ बेगम के ये कहने की देर थी कि तुरंत उठ
 
Nitish Raj
टैग: BLOG
पसंद करें
0
नापसंद करें

क्यों नहीं 26/11 मुंबई हमले पर पाक मंत्री की ललकार के जवाब में वन-टू-वन करते पी चिदंबरम।

हाल ही में पाकिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्री रहमान मलिक ने इस्लामाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलेआम भारत के गृहमंत्री पी चिदंबरम को ओपन डिबेट के लिए ललकारा। मुंबई हमलों पर बोलते हुए रहमान मलिक ने साफ तौर पर ये कहा कि 26/11 के मसले पर भारत
 
Nitish Raj
टैग: pakistan
Sep 14 2009 01:36 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

कल खुशी पर भारी पड़ा गम।

कहीं खुशी, कहीं गम, ये ही हाल रहा दो दिन के बारे में कहूं तो। दिल्ली में बारिश ही बारिश। हरियाणा से यमुना में पानी भी छोड़ा गया जिसके कारण दिल्ली में बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं। पता नहीं कितने सालो बाद ऐसी बारिश हुई है। शायद 98 में दिल्ली में ऐसा ही एक
 
Nitish Raj
टैग: srilanka
पसंद करें
0
नापसंद करें

क्यों है हमारा कानून इतना लचीला? क्यों अपील करने पर दोषी को बाइज्जत बरी कर दिया जाता है?

आश्चर्य होता है मुझे कि हमारा कानून इतना लचीला क्यों है। क्यों एक तरफ हमारा कानून एक आरोपी को दोषी ठहराकर फांसी और दूसरे ही पल उसी आरोपी को बाइज्जत बरी कर देता है। या तो पहले वाली अदालत ने गलत फैसला दिया या फिर दूसरी अदालत याने की ऊपरी अदालत ने गलत फैसला
 
Nitish Raj
टैग: koli
Sep 11 2009 09:49 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

एंबुलेंस, ट्रैफिक और जिंदगी की कश्मकश

घर की सोसायटी से निकलते ही कुछ दूरी पर बाएं होते ही ट्रैफिक से सामना हो ही जाता है। रेंगती हुई चलती गाड़ियां ऐसे जैसे कोई अजगर शिकार निगलने के बाद धीर-धीरे रेंग कर किसी सुरक्षित स्थान पर लहराकर जा रहा हो। एनएच की राह पकड़ते-पकड़ते ही कई गाड़ी वाले अपना
 
Nitish Raj
पसंद करें
0
नापसंद करें

बेगम और बेटे ने मिलकर मेरे इस ‘खास’ दिन को बेहद ‘खास’ बना दिया।

Normal 0 MicrosoftInternetExplorer4 /* Style Definitions */ table.MsoNormalTable {mso-style-name:"Table Normal"; mso-tstyle-rowband-size:0; mso-tstyle-colband-size:0; mso-style-noshow:yes; mso-style-parent:""; mso-padding-alt:0in 5.4pt 0in 5.4pt;
 
Nitish Raj
टैग: blog
पसंद करें
0
नापसंद करें

इन बहकते कदमों का दोषी कौन?

बेगम ने फोन पर बताया कि, ‘सोसायटी में कुछ हलचल हो रही है और शायद पुलिस भी पहुंची हुई है’। मैं सैलून में सेविंग करवा रहा था। अमूमन मैं सेविंग घर पर ही करता हूं। एक तरफ जल्दी-जल्दी सेविंग हो रही थी और दूसरी तरफ मेरे दिमाग में कई बातें चल रही थीं। सैलून से
 
Nitish Raj
टैग: बच्चे
पसंद करें
0
नापसंद करें

चलो देख के अच्छा लगा कि मेरे देश में भी लोग फुटबॉल के दीवाने हैं। विलेन बना हीरो।

Normal 0 MicrosoftInternetExplorer4 /* Style Definitions */ table.MsoNormalTable {mso-style-name:"Table Normal"; mso-tstyle-rowband-size:0; mso-tstyle-colband-size:0; mso-style-noshow:yes; mso-style-parent:""; mso-padding-alt:0in 5.4pt 0in 5.4pt;
 
Nitish Raj
Sep 01 2009 03:24 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

सावधान! आप कार खरीदने तो नहीं जा रहे गर जा रहे हैं तो इसे पढ़ते जाइए।

कुछ दिन पहले की बात है लगभग महीने भर पहले की, मेरे एक जाननेवाले के साथ कुछ ऐसा हुआ जिसे मैंने क्या कभी मेरे जाननेवालों में से किसी ने नहीं सुना या देखा था। तभी से मैंने सोच लिया था कि इस बारे में जरूर से लिखूंगा और सबको आगाह करूंगा। मेरे जाननेवाले एक
 
Nitish Raj
टैग: theft
पसंद करें
0
नापसंद करें

11 दिन के बीते पन्ने

आखिरकार दो दिन के इंतजार के बाद हमारे कंप्यूटर के डॉक्टर साहब आए और फिर आते ही बेचारे को इंजेक्शन। पर इस बार एक ही इंजेक्शन में ठीक। जो 1 जीबी की रैम लगाई गई थी उसमें ही प्रोब्लम थी। जैसे ही बदली गई रैम कंप्यूटर जी दुरुस्त। बहरहाल, इस बीच कुछ मुद्दे ऐसे
 
Nitish Raj
टैग: australia
Aug 28 2009 04:00 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

कंप्यूटर जी ने लटकाया, 1 से 7 फिर 11।

14 अगस्त को पोस्ट डाल के कहीं जाना था तो निकल गया। कंप्यूटर शट डाउन कर चुका था तो सोचा कि चलो आज़ादी की बात कल ही करूंगा। जब अगले दिन कंप्यूटर खोला तो थोड़ी ही देर बाद एक छोटी सी विंडो आई और उसमें एक एर्रर लिखा हुआ था। जब तक उसे एर्रर को पढ़ पाता तब तक
 
Nitish Raj
Aug 26 2009 06:04 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

रात की काली चादर, वो घुप अंधेरा और वो कमरा और उसमें टिमटिमाती बत्तियां-3

अब आगे...हमने टाइगर बीयर ऑर्डर की और उसी काउंटर पर एक कौना पकड़ लिया और हल्के-हल्के कदमों से थिरकते रहे पर सिर्फ जब कि कोई हमें देखता तब वर्ना पब कल्चर।हमारे दोस्तों में जिनके साथ उनकी बैटर हाफ थीं वो लगे थिरकने। उस पब में धीमी लाइट पर लाउड म्यूजिक और
 
Nitish Raj
टैग: engagement
पसंद करें
0
नापसंद करें

रात की काली चादर, वो घुप अंधेरा और वो कमरा और उसमें टिमटिमाती बत्तियां-2

अब उससे आगे...मुझे रास्ता पता नहीं था तो मैं अपने उस दोस्त की कार के पीछे लग लिया जिसने पब का आइडिया दिया था। वो शूमाकर का भाई था पिछले जन्म में शायद, इतनी तेज गाड़ी मैंने कभी नहीं चलाई। जिमखाना से हम साकेत करीब १० मिनट के अंतराल में ही पहुंच गए। पर
 
Nitish Raj
टैग: engagement
पसंद करें
0
नापसंद करें

रात की काली चादर, वो घुप अंधेरा और वो कमरा और उसमें टिमटिमाती बत्तियां।

जब मेरे दोस्त का फोन आया तो मैं ऑफिस में काम के बीच में फंसा मुस्कुराने की कोशिश कर रहा था। एक ही शहर में, एक ही दफ्तर में होकर भी महीनों हो जाते हैं मिले कुछ दोस्तों से।हाल-चाल जानने के बाद उसने पूछा, ‘कब फ्री होगा और रात में क्या कर रहा है’।‘9 तो बज ही
 
Nitish Raj
टैग: engagement
पसंद करें
0
नापसंद करें

ट्रैफिक की पों...पों...और मेरा मन गीला-गीला।

ऑफिस से घर पहुंचने की जल्दी, घर के रास्ते पर गाड़ियों का शोर और जगह-जगह से उड़ती धूल। रास्ते में बस...किसी कार....या थ्री व्हीलर का बिना बात बजता हॉर्न, बार-बार बजता हॉर्न लगता कि क्या चालक बहरा है या हमें बहरा समझ रखा है या हमें बहरा करने पर तुला हुआ
 
Nitish Raj
टैग: बस
पसंद करें
0
नापसंद करें

ये इबादत नहीं है...शक्ति प्रदर्शन का एक जरिया है।

कल रात 11 बजे जब मैं ऑफिस में था तब एक खबर आई कि दिल्ली में दो आतंकवादियों को धर दबोचा गया है। पहली नजर में लगा कि 15 अगस्त से पहले तो गिरफ्तारी लाजमी है ही और वैसे भी खुफिया तंत्र ने दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस से पहले अलर्ट जारी कर रखा है। फिर ख़बर में
 
Nitish Raj
टैग: धर्म
पसंद करें
0
नापसंद करें

आज के दिन का ना खत्म होने वाला इंतजार....--2

...........मेरी चचेरी बहन, पूरे खानदान के नौ भाइयों की इकलौती बहन। इस बार सभी नौ भाइयों की कलाई सूनी.....इस बार नहीं, शायद हर बार।कितने मजबूर होते हैं हम, कई बार कुछ भी नहीं कर पाते। सिर्फ कठपुतलियों की तरह इधर से उधर होते रहते हैं। हमारे अपने दुख के उस
 
Nitish Raj
टैग: rakhi
Aug 05 2009 03:55 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

आज के दिन का ना खत्म होने वाला इंतजार....

जब मैं छोटा था शायद ७-८ साल का, तब से करीब २० साल की उम्र तक मुझे अच्छी तरह से याद है मैं इस त्यौहार पर किसी का इंतजार करता था। घर के दरवाजे पर झूलते हुए, पीछे से मम्मी की डांट, जब तक दरवाजा टूट नहीं जाएगा तब तक यूं ही राह तकता रहोगा। कभी सीढ़ियों पर बैठ
 
Nitish Raj
टैग: rakhi
पसंद करें
0
नापसंद करें

अभी राखी के स्वयंवर का पार्ट २ बाकी है

दर्शक तैयार रहें ड्रामा क्वीन के नाटकों के लिए और साथ ही इलेश परुजनवाला को भी ये नहीं समझना चाहिए कि राखी सावंत उनकी हो गईं क्योंकि फिल्म तो अभी बाकी है मेरे दोस्त...।चौदह हजार लोगों की याचिकाओं में से सिर्फ सोलह लोगों को चुना गया था और उन सोलह लोगों में
 
Nitish Raj
टैग: media