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मेरी कविताएँ [Meri Kavitayen]

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17 Jun 2010
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निर्वात

हर साल की तरह इस बार भी गरमी अपने पूरे शबाब पर है.फ़िर वही चिर परिचित धूल भरी गरम हवाएं.समाचारों में देख रहे हैं कि भारत में तो बारिशें खूब हो रही हैं .कुछ महीने पहले यहाँ भी हुई थी बारिश एक पूरा दिन !दो तीन दिन  लगातार होती तो कम से कम ये सड़कें
 
अल्पना वर्मा
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बंज़र हथेलियाँ

बंज़र हथेलियाँ --- एक रोज़ उग आये थे कुछ लम्हेखुद ब खुद हथेलियों पर
 
अल्पना वर्मा
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वक्त का बायस्कोप

जब भी खुद से रूबरू होने का दिल करता है,घर की छत पर जाती हूँ ,टहलती हूँ ......छत से देखूं तो एक तरफ दौड़ती भागती सड़कें दिखती हैं और दूसरी ओर है कब्रिस्तान.छत से वहाँ मुझे सिर्फ बहुत से पत्थर दिखाई देते हैं जो स्मृति चिन्ह जैसे लगाये हुए हैं.सब से बेखबर
 
अल्पना वर्मा
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अधूरी तहरीर

पिछली पोस्ट पर आये आप सभी के विचार ,सलाह और सुझावों का दिल से आभार.आप की कही हर बात मेरे लिए महत्वपूर्ण है और सभी के विचारों को और अपना भी मत ध्यान में रखते हुए क्या निर्णय ले पाए हैं..२-३ महीने में बता सकूंगी.माहोल को बदलते हुए एक नज़्म कहने की कोशिश
 
अल्पना वर्मा
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भागें भी तो कब तक और कहाँ तक?

अनिश्चितता मतलब ‘कुछ भी निश्चित नहीं ‘...अपनी जड़ों से कट कर पौधा भी समय लेता है नयी ज़मीं पकड़ने में .इंसान में अपनी मिटटी से दूर हो कर भविष्य के प्रति जो अनिश्चितता पैदा हो जाती है उसका निदान हर किसी को आसानी से नहीं मिलता.खाड़ी देशों में आये प्रवासी
 
अल्पना वर्मा
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तीन पन्ने

[चित्र साभार - गूगल ] वक़्त को कई बार रूप बदलते देखा है.आज कल कुछ ज्यादा ही साफ़ और करीब दिखाई देता है.उसका रूप पहले की तरह नर्म और स्नेहमयी नहीं है,एक हाथ में नियम काएदे की लिस्ट और दूसरे हाथ में एक मीज़ान लिए रहता है. ये शायद मेरा मन ही है जो वक़्त की
 
अल्पना वर्मा
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छलक छलक जाएँ बदरा से रंग

कई दिनों से धूल भरी आंधियां चल रही थीं.एक दम से गरमी बढ़ गयी थी लेकिन कल रात हुई बरखा रानी ने मौसम ही बदल दिया.सुबह भी बादल जैसे थे.भारत में होली का मौसम है ,माहोल है.मुझ से कल ही एक टिप्पणी में यह पूछा गया थाकि हम यहाँ कैसे होली मनाते हैं?तो.... यहाँ
 
अल्पना वर्मा
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Feb 28 2010 07:26 PM
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होती ही क्यूँ हैं अपेक्षाएँ?

[श्री प्रकाश गोविंद जी की बनाई पेंटिंग साभार]हाल ही में प्रेम दिवस पर श्री शरद कोकस जी की एक कविता पढ़ी-उसके इस एक अंश से न जाने कितने विचार मन में उठने लगे.बरसों बाद भीखत्म नहीं होती अपेक्षाएँशुभकामनाओं की तरह अल्पजीवी नहीं होती अपेक्षाएँपलती रहती हैंसमय
 
अल्पना वर्मा
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Feb 19 2010 12:39 PM
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राग खमाज में ठुमरी[पंडित उपेन्द्र भट] और मिस्र का लोक नृत्य

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अल्पना वर्मा
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'फसाना-ए-शब-ए-ग़म'

'फसाना-ए-शब-ए-ग़म'----------------------ज़ुर्म-ए-तमन्ना की सज़ायूँ मिला करती है मुझे ,खिंचती हैं रंगे पलकों की,जब दर्द कफस में अंगड़ाईयाँ लेता है,सर्द आहों में दम तोड़ती हैं उम्मीदें,नक्श ज़हन में उभरने लगते हैं,परत दर परत उघड़ती हैं सब यादें,होने लगती
 
अल्पना वर्मा
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जाते हुए लम्हे....एक प्रार्थना

बीतते साल में क्या खोया, क्या पाया ..इसका क्या हिसाब करें?साल शुरू होते ही जो प्रण किये जाते हैं कुछ पूरी होते पाते हैं कुछ नहीं....शुभकामनायें हैं आप सभी के लिए कि आप की हर मनोकामना आने वाले वर्ष में पूरी हो। लेकिन अभी इन जाते हुए इन लम्हों से कुछ क
 
अल्पना वर्मा
Dec 29 2009 10:36 AM
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'अपनी शर्तो पर जीना'

अमल नाम की हमारी एक सहकर्मी थी जो जॉर्डन देश की रहने वाली थी ,जब भी वह स्टाफ रूम में आती तब माहौल ख़ुशगवार हो जाता था.क्योंकि वह बहुत ही हँसमुख स्वभाव की थी.yah uskee khaaseeyat thi ki हमेशा पूरे मेकअप में रहती थी.waise शक्ल सूरत में बहुत ही साधारण ,
 
अल्पना वर्मा
Dec 08 2009 08:46 PM
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'एक सुहाना सफर'

१२ तारीख को बच्चों की परीक्षाएँ ख़तम हो गयी थीं..इसलिए १३ -१४ को कहीं बाहर जाने का कार्यक्रम बनाया जाना था. कहाँ जाएँ ..यह सोचते ही ध्यान आया डिब्बा का . 'डिब्बा 'ओमान देश में एक प्रायद्वीप मुसंदम क्षेत्र का एक शहर है. यह क्षेत्र यु.ए.ई के बॉर्डर पर
 
अल्पना वर्मा
Nov 21 2009 03:19 AM
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'आभासी रिश्ते' और 'तदबीर से बिगड़ी हुई तक़दीर'

वास्तविक जीवन में यूँ तो हर रिश्ते की अपनी एक पहचान होती है उनकी एक नज़ाकत होती है ,अधिकार और अपेक्षाओं से लदे भी होते हैं .एक कहावत भी है 'जो पास है वह ख़ास है'.यथार्थ से जुड़े और जोड़ने वाले इन रिश्तों से परे होते हैं -कुछ और भी सम्बन्ध !जो होते हैं कुछ
 
अल्पना वर्मा
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समय धीरे चलो...

यू.ऐ.ई का प्राकृतिक दृष्टि से सबसे खूबसूरत शहर अलेन जिसका इतिहास पांच हज़ार साल पुराना बताया जाता है.पुरातत्व के महत्व kee वजह से ही नहीं बल्कि यहाँ की जलवायु ,हरियाली ,पानी के प्राकृतिक झरनों और गरम पानी के चिकित्सकीय गुणों वाले प्राकृतिक सोते के कार
 
अल्पना वर्मा
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'रात ग़मे तन्हाई की --चंदा ओ चंदा '

पेश हैं कुछ शेर ..साथ लिखे हैं तो ग़ज़ल जैसी लग रही है....अब जैसे हैं वैसे के वैसे उनके कुदरती रूप में 'आप के सामने हैं. 'रात ग़मे तन्हाई की' ----------------------- ग़मे तन्हाई की रात बहुत गहरी है, बन के ओस मेरे आंसू बिखर जाते हैं. दिल की चोखट पर कभ
 
अल्पना वर्मा
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Oct 21 2009 06:39 AM
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'दीवाली आई है'

एक बरस बीता कर दीवाली आई है,इसी शुभ अवसर पर आप सभी को दीवाली की ढेर सारी शुभकामनायें. ईश्वर करे हर ओर रोशनी केवल इस एक दिन नहीं ,हर दिन रोशनी हर घर आँगन में ऐसे ही जगमगाती रहे. दीवाली आई है ------------------- अमा का तम सघन,बेध रही दीप शिखा, अनगिन कि
 
अल्पना वर्मा
Oct 15 2009 11:21 AM
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घूमे आधी रात को चिडियाघर में!

शीर्षक बिलकुल सही है...आधी रात ही नहीं सुबह दो बजे तक घूम सकते थे..कैसे?? यू ऐ ई की राजधानी अबू धाबी है और अबू धाबी में है शहर अलऍन . फूलों और बागों के इस शहर को यू ऐ ई का सब से सुन्दर शहर माना जाता है. अबूधाबी में होते हुए भी राजधानी से १६० किलोमीटर
 
अल्पना वर्मा
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है धरा की पुकार...

दशहरा पर्व के आते ही ,याद आते हैं बचपन के दिन जब इस त्योहार का ख़ास इंतज़ार होता था.इस दिन हमारे शहर में क्षत्रिय महासभा द्वारा दशहरा मिलन समारोह ,जिसमें सामूहिक शस्त्र पूजन ,परिवारों का मिलना ,साथ खाना और बच्चों द्वारा किया जाने वाला रंगारंग कार्यक्र
 
अल्पना वर्मा
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जाने क्या चाहे मन?

'जाने क्या चाहे मन बावरा' -एक फ़िल्मी गीत की पंक्तियाँ हैं..सुनती हूँ तो सोचती हूँ कि आखिर यह मन है क्या?किसकी परिभाषा मानी जाये..एक मनोचिकित्सक की?या 'कथित मनोरोगी' की?दोनों ही अपने ढंग से इस मन को समझते और समझाते हैं..मैं तो मन को एक पिक्चर puzzle मानती
 
अल्पना वर्मा
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'आस-एक गीत'

३० अगस्त हमारे बच्चों के स्कूल खुल गए.दूसरे सत्र की पढ़ाई शुरू हो गयी.सरकारी स्कूलों में ईद तक की छुट्टी है ही..लोग जो छुट्टी गए थे वापस आ गए हैं ,फिर से पुरानी चहल पहल और रौनक लौट आई..गरमी का वही बुरा हाल है..तापमान दो दिन पहले भी ५० से ऊपर था. स्वाईन
 
अल्पना वर्मा
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'तुम्हारी प्रिया हूँ'

पिछले कुछ दिनों से समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या लिखूं?यूँ तो ब्लॉग पर सूचना पट लगा दिया था कि ब्रेक टाइम है!कुछ परिस्थितियां भी ब्लॉग लेखन के लिए अनुकूल नहीं हो पा रही थीं.ब्लॉग की दुनिया में महीने भर से मेरी अनियमितता बनी हुई थी.अब स्थिति सामान्य हुई है
 
अल्पना वर्मा
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रुदाली,रजनीगंधा और अभिलाषा!

अभिलाषा ------------ गुज़रे पल से पूछते रहते जीवन की परिभाषा क्या है? तौलते रहते खुशियाँ अपनी, लगता एक तमाशा सा है सौदागर सी बातें करते, जान न पाए माशा क्या है! चलता जाए जीवन यूँ ही , रुकने की यह भाषा क्या है? खोज रहे हैं रस्ते सारे, सच मिल जाए आशा क्
 
अल्पना वर्मा
Jul 20 2009 03:52 PM
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राजस्थानी लोकनृत्य और 'बवादी मॉल '

पिछले महीने ही एक नया मॉल हमारे शहर ' अलैन 'में खुला,पहले यहाँ बड़े शौपिंग मॉल दो ही थे -एक अलैन मॉल ,दूसरा अल जिमी मॉल . यह अब तक का सब से बड़ा मॉल है जहाँ ४०० दुकाने हैं और ११०० लोगों तक के खाने का फ़ूड कोर्ट ,८ सिनेमा थिएटर हैं जिस में एक .थिएटर हो
 
अल्पना वर्मा
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कुछ यूँ भी..जानिए यू.ऐ.ई को

आज सुबह सुबह समाचार पत्र देखा -: पहले ही पृष्ठ पर मुख्य खबर थी कि यू ऐ ई में सभी सरकारी और गैर सरकारी स्कूल १ सितम्बर की बजाय ईद की छुट्टियों के बाद खुलेंगे. मीठी ईद संभवत २० सितम्बर के आगे पीछे पड़ेगी और छुट्टियाँ कम से कम ४ दिन की तो होंगी ही...अंदा
 
अल्पना वर्मा
Jul 02 2009 04:21 PM
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जेठ दुपहरी

स्कूलों में गरमी की छुट्टियाँ शुरू,कल बच्चों का ओपन हाउस था...मतलब उनकी परीक्षा के परिणाम आए थे। और इन छुट्टियों के साथ शुरू हुआ लोगों का अपने अपने देश जाने का सिलसिला.हम तो इस बार भारत नहीं जा रहे हैं। बस अब सिलसिला शुरू होगा मिलने मिलाने का...गल्फ
 
अल्पना वर्मा
Jun 25 2009 04:55 PM
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बरखा और बाँवरी

भारत में ग्रीष्मावकाश के बाद नए सत्र में स्कूल खुल रहे हैं और यहाँ स्कूल के पहले सत्र की परिक्षाओं के बाद २२ जून से गरमी की दो महीने की छुट्टियाँ शुरू हो रही हैं और छुट्टियों में बच्चों को व्यस्त रखना एक बड़ी चुनौती होती है. जब दुबई fesitival सिटी[शौ
 
अल्पना वर्मा
Jun 18 2009 12:34 PM
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अमलतास के पीले झूमर-कविता के बारे में ज़रूरी सूचना

ज़रूरी सूचना-- एक ब्लॉग पर मेरी एक पुरानी कविता ' अमलतास के पीले झूमर '-'अमलतास के झूमर ,naam se कल प्रकाशित की गयी है- जिसे अल्पना वर्मा की नई कविता के शीर्षक के साथ प्रकाशित किया है--जो कि सर्वथा गलत है. यह कविता नयी नहीं है दो साल पुरानी है.और' अन
 
अल्पना वर्मा
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समय का भंवर--'चिट्ठी न कोई संदेस'

अक्सर सभी के साथ ऐसा होता होगा जब अपनी राह चलते चलते हम ठिठक कर रुक जाते हैं,मुड कर देखते हैं ,कोई नज़र आता नहीं ...कितने लोग सफ़र में साथ चले तो थे मगर वे अपनी अपनी राह पर ऐसे गए कि फिर कभी मिले ही नहीं. एक ग़ज़ल आनंद बक्शी साहब की लिखी हुई--'चिट्ठी
 
अल्पना वर्मा
Jun 07 2009 01:30 PM
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कुछ ख्याल और 'पूछते हो तो सुनो'-

गरमी इस बार भी अपनी हदों को पार किये जा रही है.कल भी पारा ५० से ऊपर ही था.धूल भरी गरम खुश्क हवाएं दिन भर कहर ढाती हैं.सुबह ९ बजे के बाद नलों में आते पानी को हाथ लगा नहीं सकते. इतना गरम हो जाता है!हर साल अल शहर यू.ऐ.ई का सब से गरम शहर होता है इस बार भ
 
अल्पना वर्मा
May 28 2009 08:32 PM
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रेखा--एक कहानी

भारत में आज कल गर्मियों की छुट्टियाँ चल रही हैं.यहाँ अभी स्कूल चल रहे हैं और पहले सत्र की परिक्षाएं नज़दीक आ रहीहैं.[जून के पहले हफ्ते से परिक्षाएं आरंभ हैं.उस के बाद जुलाई-अगस्त ग्रीष्मावकाश होगा.] इसी के चलते आजकल मेरी ,समय के साथ रस्साकशी चल रही ह
 
अल्पना वर्मा
May 22 2009 11:43 AM
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एक फौजी अफसर जो बना महान संगीतकार

एक फौजी जो बना महान संगीतकार-मदन मोहन कोहली ------------------------------------------------------- पहले जब कभी मैं गाने सुनती थी तब कभी गीतकार और संगीतकार के नामों पर गौर नहीं किया करती थी. सिर्फ याद रहता था गाने वाले और फिल्म का नाम.इत्तिफाक से एक
 
अल्पना वर्मा
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'प्रतीक्षा'

पिछली पोस्ट में एक कविता प्रकाशित की थी- 'बेरोजगार' . उसकी बहुत ही सुन्दर व्याख्याएं भी आयीं और साथ ही आया प्रकाश गोविन्द जी का एक प्रश्न भी --- 'कि आप तो खुद इस स्थिति से नहीं गुजरी होंगी फिर आप ने एक बेरोजगार की स्थिति को कविता में कैसे चित्रित कर
 
अल्पना वर्मा
May 07 2009 05:56 PM
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रुके रुके से क़दम और बेरोज़गार

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में आज तीसरे चरण के मतदान हो रहे हैं.इन चुनावों के माहोल की गरमी हो या मौसम की गरमी .दोनों ही पूरे जोरों पर हैं.मौसम का अभी यह हाल है ,ना जाने अगले दो महीने और कितनी गरमी बढ़ जायेगी! स्वतंत्रता के इतने वर्षों बाद भी द
 
अल्पना वर्मा
Apr 30 2009 01:29 PM
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उम्मीद देश की

कविताओं के मिजाज़ में थोडा सा परिवर्तन करते हुए,आज एक बाल गीत प्रस्तुत है जिसे समूह गीत की तरह भी गाया जा सकता है.इसे मैंने सरल शब्दों में लिखा है.यह लय बद्ध है जहाँ लय में अस्थायी विराम है ,वहां कोमा दिया गया है.मैं अभी इसे रिकॉर्ड कर के नहीं दे पा
 
अल्पना वर्मा
Apr 21 2009 03:51 PM
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पाती नेह की

यह चित्र मुझे कल एक मित्र द्वारा भेजी ईमेल में मिला.इस ईमेल के अनुसार ,इस में उत्तरी ध्रुव पर सूर्य अस्त होते दिखाई दे रहा है.चंद्रमा धरती के सब से नज़दीक है.चंद्रमा के नीचे छोटी सी गोल आकृति सूर्य की है.यह सच में एक अद्भुत नज़ारा है.मगर यह सच नहीं है
 
अल्पना वर्मा
Apr 14 2009 02:02 PM
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'आत्मदाह'

मदन मोहन जी एक महान संगीतकार थे..उनके संगीतबद्ध गीत मुझे बहुत अच्छे लगते हैं.आज उन्हीं का एक गीत ले कर आई हूँ...लेकिन उस से पहले प्रस्तुत है यह कविता...'आत्मदाह' जिस में है कुछ विवशता,कुछ बेचैनी - वक़्त की एक चाल और - बंध गया , हाथों की उन लकीरों में
 
अल्पना वर्मा
Apr 02 2009 03:09 PM
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अहसास-एक ग़ज़ल

मार्च ५,२००९ को यहाँ एक मुशायरा हुआ था जिसमें तमाम यू.ऐ.ई से शायर आमंत्रित थे. इस मुशायरे में पाकिस्तान और हिंदुस्तान के शायरों ने अपनी रचनाएँ पढीं. मुझे भी इस मंच से पढने का मौका मिला. जो ग़ज़ल मैंने वहां पढ़ी थी..आप के समक्ष प्रस्तुत है. अहसास -----
 
अल्पना वर्मा
Mar 24 2009 04:02 PM
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सप्रेम समर्पित आप सभी को ब्लोगपरिवार का सर्वप्रथम युगल गीत

सप्रेम समर्पित आप सभी को ब्लोगपरिवार का सर्वप्रथम युगल गीत ---------------------------------------------------------------------- कल ताऊ जी की शनिचरी पहेली कुछ कठिन हो गयी थी..मुझे सच में अच्छा नहीं लगा.बहुत से प्रतिभागी नाराज भी होंगे मुझ से ,गुस्सा
 
अल्पना वर्मा
Mar 15 2009 04:04 PM
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रंगों की फुहार

होली का त्यौहार नज़दीक आ रहा है.इसी अवसर पर प्रस्तुत है एक रंग बिरंगी कविता और होली की ढेर सारी शुभकामनाएँ-: रंगों की फुहार ------------- बहे बसंती बयार , आया होली का त्यौहार, हरसू छाई बहार ,उडे रंगों की पतंग. गौरी करके सिंगार ,मांगे प्रीतम का प्यार,
 
अल्पना वर्मा