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आखिर हमारे चाहने वाले कहाँ गए
रोशन थे आँखों में, वो उजाले कहाँ गएआखिर, हमारे चाहने वाले कहाँ गएरिश्तों पे देख, पड़ गया अफवाहों का असरवाबस्तगी के सारे हवाले कहाँ गएगम दूसरों के बाँट के, खुशयां बिखेर देंथे ऐसे कितने लोग निराले, कहाँ गएआग़ाज़ अजनबी की तरह, हमने फिर कियाकाँटे मगर दिलों से
May 26 2010 06:45 PM


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