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मन उवाच.....

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17 Apr 2010
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दर्द भरे अहसास

दर्द मन के लिए तेज़ाब हो, लेकिन अहसासों के लिए खाद का काम करता है। दर्द जितना बढ़े अहसास उतने ही उमड़-घुमड़कर धुआं बन जाते हैं और ढांप लेते हैं सारा रूमानी ज़हान। दिल की बंज़र ज़मीन पर चंद जज़्बात अठखेलियां करते हैं। देते हैं बूता अकड़ अकड़कर। सक़ून की
 
मधुकर राजपूत
Apr 17 2010 07:34 PM
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सिंबोलिक कन्या जिमाई

चैत्र की अष्टमी और नवमी, दोनों दिन देख रहा हूं कि स्लमडॉग, मिलियनेयरों के घर में जाकर जीम रहे हैं। सोसायटी की महिलाओं ने पहले ही व्रत वाले दिन कन्याखोजी दस्तों का गठन कर दिया है। सब कन्या खोजते घूम रहे हैं। तलाश पूरी हो जाने पर पूरी सोसायटी का एक टाइम
 
मधुकर राजपूत
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ओल्ड फैशन मोटापे का अपराधबोध !

होली पर पुराने कपड़ों की ज़रूरत पड़ी। यूं तो दुनिया हमें और हमारे पहनावे दोनों, को ही पुरातनपंथी समझती है, लेकिन कुछ कपड़े अभी भी हमारे लिए नए हैं। नए और पुराने दोनों तरह के कपड़े एक ही हैंगर पर टंगे हैं। भेद बस इतना है कि पुराने कपड़ों पर धूल की कुछ
 
मधुकर राजपूत
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राष्ट्रीय समस्याओं का प्रचारवादी समाधान, वाह आइडिया सर जी

8 फरवरी से अभिव्यक्ति के संदूक पर ताला लटका रखा था। क्योंकि कुछ लोगों के लिए विचार भी छिनैती और उठाईगीरी की चीज़ हैं। कहा जाता है कि विद्या बांटने से बढ़ती है, लेकिन किसी ने ये नहीं बताया कि बांटने से आर्थिक हानि भी होती है। यह तो अब अनुभव से पता लगा।
 
मधुकर राजपूत
Mar 06 2010 10:24 AM
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संगदिल दिल्ली में दिल्लगी

चित्तरकार कई दिन से सड़कों से नदारद थे। गली, मोहल्ले और पार्कों के कोने उनके प्रेम में भीगने को तरस गए थे। सड़कों पर उनकी चप्पलों की रगड़ सुनाई नहीं दी तो चिंता हुई। जा पहुंचा ठौर पर। ज़नाब छाती पर ठुड्डी रखे गदही मुद्रा में सोच रहे थे। होठों पर पान के
 
मधुकर राजपूत
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‘एलीट रद्दी’ की दुर्दशा

एक दौर था जब हम सुबह-सुबह अपने चेहरे के सामने अखबार यूं खोलते थे जैसे कोई हसीना आईना देखती हो। अखबार के पन्ने खड़खड़ाते हुए हमें अपने जागरुक होने का गुमान होता था। सारी दुनिया का जानकारीनुमा टॉनिक हम अल-सुबह गटककर बहसों के लिए पान की दुकानों के अखाड़ों
 
मधुकर राजपूत
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कर्मण्ये वा ‘धिक्कार’ अस्ते !

हे कर्म करने वालों तुम पर धिक्कार है। जीवन को कर्म में गारद कर देते हो। तुम खुद को कर्मशील समझते हो। दुनिया तुमको कर्मकीट समझती है। तुम्हारा काम ही कर्म करना है। इसीलिए तुम दुनिया की निगाह में कीड़ा हो। गीता के उपदेशों को ज़माने ने जीवन में नहीं ढाला,
 
मधुकर राजपूत
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मैं चटक गया हूं, बस ठसक ना लगे

उंगलियां ग्लेशियर में पड़ी हैं। लगता है रज़ाई में किसी ने बर्फ की सिलें रख दी हैं। रात करवटों और ख्यालों में कट जाती है। कभी सर्दी का शुक्रिया अदा करने का मन करता है। कभी बैरन सिहरन को ठंडे होठों से गाली देने का मन करता है। गीली रात बंद रोशनदान में
 
मधुकर राजपूत
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विकास का पैराडाइम ग्लोबल वॉर्मिंग

शाम की गीली सर्दी में चौक पर दम फूंक हो रही थी कि चित्तरकार हाथ में अंडों की थैली लटकाए खरामा खरामा चप्पल घिसते चले आए। देखते ही पान सने लाल दांत दिखाए और दोस्ती का वज़न मेरे कंधों पर डाल दिया। गले मिल लेने के बाद बोले कहां हो पत्तरकार नज़र नहीं आते।
 
मधुकर राजपूत
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आत्मघाती लो फ्लोर

सुबह-सुबह सूखे नल से जूझकर रात के ठंडे पानी से नहाने का नाच नाचते हुए बस अड्डे पहुंचा हूं। ठंड पर जलवायु परिवर्तन का खासा असर है लेकिन जल निगम की मेहरबानी से मुझे कम सर्दी में ज़्यादा सर्दी का अहसास हो रहा है। कपड़ों के नीचे बदन के रोएं कथक कर रहे हैं।
 
मधुकर राजपूत
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रचनात्मकता का खौफ

बृहस्पतिवार से ग्लोबल होने का अहसास हो रहा है। दरअसल हमारे छोटे से मीडिया संस्थान के एक आला अधिकारी को दुबई से धमकी भरा फोन आया है। कहा गया है कि आतंकियों और भगोड़ों का छवि को ठेस पहुंचाना बंद करो, नहीं तो अंजाम गंभीर होंगे। ये अलग बात है कि हमारे घर
 
मधुकर राजपूत
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एडजस्टेबल गणेश

मनोविज्ञान का मूल नियम सामंजस्य है। इसी नियम के आधार पर आदमी खुद चाहे कभी एडजस्ट न करे, दूसरों को एडजस्ट करने की सलाह देता रहता है। आदमी की इस ‘सलाह कला’, से अब देवता भी अछूते नहीं हैं। गणेश को इंसान ने सबसे ज्यादा एडजस्टेबल नेचर का देवता बना दिया है
 
मधुकर राजपूत
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गीली-गीली छू का अर्थशास्त्र

गीली गीली छू, और रात कट गई। जादू नहीं है। पसीने ने पूरी रात को गीला बना दिया है। चीकट बिस्तर की चादर यूं बदन को चिपट गई जैसे रसखान के दोहों में मिलन के लिए सदियों से तड़प रही थी। लगता है सीली सीली विरहा की रात का जलना वाले गाने का आइडिया भी ऐसी ही कि
 
मधुकर राजपूत
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हार की कसक से ढहता भगवा दुर्ग

लोकसभा चुनाव के पहले लाल कृष्ण आडवाणी की रणनीतिकार टीम को प्रचार के आधुनिक तौर तरीके से पूरा यकीन था कि आडवाणी पी एम इन वेटिंग नहीं रहेंगे। सच में हुआ भी यही। आडवाणी अब इस दौड़ में शामिल नहीं हैं। हालांकि नतीजे उल्टे आए पर सार वही निकला की आडवाणी अब
 
मधुकर राजपूत
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आईपीएल का कोठा

आईपीएल का हल्ला मचा है। टी. वी. ने दुनिया सिर पर उठा रखी है। बहस बहादुरों का मेला लगा है। नए नए जुमले हंसती हसीना एंकर। कुछ रिटायर्ड क्रिकेट खिलाड़ियों के बुढ़ापे की लाठी है आईपीएल। कुछ चुक चुके बल्ला घुमा रहे हैं तो कुछ ऐसे जो ‘क्रिकेट देव सेलेक्टर्
 
मधुकर राजपूत
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कचरा क्रांति !

कलिकाल में एक राजा था। हर राजा की तरह उसे भी यही ग़ुमान था कि उसे भगवान ने शासन करने के लिए पैदा किया है। लुई सत्रहवां नाम का वो राजा फ्रांस नाम के राज्य का शासन चलाता था। उसके नाम से ही उसकी पीढ़ियों की शिक्षा और शब्दकोश ज्ञान के बारे पता लग जाता है
 
मधुकर राजपूत
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चिट्ठी की बरसी

खास काम के खास दिन मुकर्रर करने का सिलसिला पश्चिम से चला आ रहा है, लेकिन भारत में खास दिनों का खास महत्व है। वहां काम के लिए दिन तय हैं, यहां जयंती, बरसी, अधिवेशन जैसी चीज़ों के लिए दिन तय होते हैं। कल 7 दिसंबर को लेटर डे था। सुनकर हंसी आ गई। भारतीयत
 
मधुकर राजपूत
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झूठमेव जयते !

समाज बदल रहा है, प्रगति और आधुनिकता के रास्ते पर तेज़ सफर शुरू कर चुका है। सच से पर्दा उठ गया है। धर्मशास्त्रों ने तमाम फंसाए रखा। हजारों साल तक झांसे में रखा। अब प्रगतिशील दुनिया समझदार हो गई है। सब जान चुके हैं कि झूठ बराबर सांच नहीं और सांच बराबर
 
मधुकर राजपूत
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उफ्फ! ये जो है ज़िंदगी

एक झुका हुआ सिर फुटपाथ पर निढाल चेहरे पर निराशा और हाल-बेहाल सिगरेट से ऊर्जा का कश खींचता अपनी निराशा को सींचता सुलगती सिगरेट के अंगारे में उम्मीद तलाश रहा था उड़ते धुंए को ज़िदगी का ‘प्रोपेलर’ समझ रहा था फिर, बुझते अंगारे में मंद पड़ी उम्मीद को जूते
 
मधुकर राजपूत
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दर्द में डूबी हिंदी

मैं हिंदी हूं। मेरे नाम पर, हिंदी हैं हम वतन हैं, हिंदोस्तां हमारा रचा गया। काल के कपाल पर मैंने इतिहास और साहित्य रचा। अपने शब्दों से कवि पैदा किए। मेरे भीतर हिन्दुस्तान की संस्कृति समाई है। मैंने लोगों के भीतर हिन्दुस्तान को आज़ाद कराने का जज़्बा भ
 
मधुकर राजपूत
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गधा चिंतन

एक बड़ी संज़ीदा ख़बर पढ़ी। गधे ख़त्म हो रहे हैं। कमजोर और बोझ ढोकर अपंग हो चुके गधों को अब यूथेन्सिया का इंजेक्शन देकर मारा जा रहा है। अब कुछ दिनों बाद शायद किसी गली नुकक्ड़ पर लतियाने के लिए खड़े न मिलें ! ऐसा हुआ तो कई कहावतें मर जाएंगी। गधा हमारी
 
मधुकर राजपूत
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ब्रांड आतंकवाद

एक ब्रांड आंतकी से टकराव हो गया। हमारी मुलाकात तो पुरानी है लेकिन मुझे ब्रांड की चोट नई-नई लगी है। मेरी तंगहाली के चंद आखिरी रुपयों की क्लासिक रेग्युलर सिगरेट होठों में भींचे, ब्रांड आतंकी मुझे ब्रांड का मर्म समझा रहा है। हम तो यही पीते हैं। इसका स्व
 
मधुकर राजपूत
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सपनों का, 'स्टेयरकेस'

संघर्ष, ज़िंदगी की आपाधापी के बीच जीने की जद्दोज़हद और किलस के बीच लाचारी में जब इच्छाओं का दम घोंटना पड़े जब अभाव खाली आंतों में गुड़क-गुड़क बोले जब बोझिल मन किसी नाबदान की पुलिया पर बैठा दे जब एक प्याला चाय दिन भर की भूख सुड़क ले आंखों से बहते कीचड
 
मधुकर राजपूत
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...और बदल गईं चिट्ठियां

रात नींद नहीं आई तो कुछ लिखने बैठ गया। एक अजीब सा अहसास आजकल घेरकर रखता है। सोचा उसे कागज पर आकार दे दूं। एक चिट्ठी लिखने उठ बैठा। फिर ये सब चिट्ठियां याद आ गईं। दिमाग विचार मथता रहा और नतीजा ये निकला। चिट्ठियां भी अब कारोबारी हो गईं कॉरपोरेट तल्खियो
 
मधुकर राजपूत
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ओबामा के लंबे पैर, छोटा व्हाइट हाउस

साम्राज्यवादियों की नज़र पुराने ज़माने से भारत पर रही है। हूण, शक, मुगल और अंग्रेज अपनी ये तमन्ना पूरी भी कर गए। हालिया दिनों में चीन टेढ़ी नज़र जमाए है। हमारे राजनयिकों की हांफनी चढ़ी है। यूएन को पटाओ, चीन को समझाओ, पाकिस्तान के आतंकवाद से पल्ला छुड
 
मधुकर राजपूत
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ब्लू फिल्म का संस्मरण

जैसे दांत का दर्द डेंटल एंड मेंटल पेन दोनों होता है ठीक उसी तरह ऑफिस की मानसिक थकान शारीरिक थकान के ऊपर हावी रहती है। यही वज़ह है कि ऑफिस से 8*10 के आशियाने में पहुंचते ही दिमाग को गिरवीं रखकर सोने का मन करता है। ये कवायद शुरू ही की थी, दरवाजे पर ठक-
 
मधुकर राजपूत
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ग्लोबल दीवाली की साजिश

दीवाली ग्लोबल हो गई। भारत की सौ करोड़ से ज्यादा आबादी इसी बात पर सीने को गुब्बारा सा फुलाए घूम रही है कि व्हाइट हाउस को एक काले राष्ट्रपति ने भारतीय दीवाली के दीयों से जगमगा दिया। जिसने हम पर तीन शताब्दियों तक राज किया वो दस निचली गली (10 डाउनिंग स्ट
 
मधुकर राजपूत
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न्यूज़रूम का समग्र शब्द

कुछ शब्द अपने आप में उतने समग्र होते हैं जितनी अमेरिका की समग्र परीक्षण प्रतिबंध संधि भी नहीं बन पाई। सर्वसारसहित, सारगर्भित और संपूर्ण शब्द। कहीं भी फिट करो चल निकलते हैं। आज-कल एक ऐसा ही शब्द खूब जोर शोर से हमारे न्यूज़रूम में प्रचलित हुआ है। हालांकि
 
मधुकर राजपूत
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नियोक्ता से अपील!

निजी कंपनी में कर्मचारी और मैनेजमेंट का रिश्ता वैसा ही है जैसे जनता और सरकार का। कल्याण के फॉर्मूले होते हैं अमल नहीं। योजना है लेकिन अमलीजामा हरचरना के सुथन्ने की तरह फटा है। लोकतंत्र की ज़मीन पर सरपट दौड़ते और फलते-फूलते कॉरपोरेट में भी सामंती विचा
 
मधुकर राजपूत
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ठेले पर डेटोनेटर

दसवीं क्लास में पढ़ा था। ठेले पर हिमालय। धर्मवीर भारती ने बड़े ही रोचक ढंग से शुरूआत की थी। शीर्षक पढ़कर लगा था कि कि हंसते-हंसते पेट में बल पड़ जाएंगे, लेकिन उम्मीदों से अलग हिमालय की बर्फ में शांति की खोज लिए लेखक कौसानी जा पहुंचा। पहले पैराग्राफ न
 
मधुकर राजपूत
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केवट की मौत से उजागर हुए पाठ

तीन दिन ठांय ठूंई हुई। चित्रकूट की दीवारों पर गोलियों से फाइन आर्ट बना दी यूपी पुलिस ने। स्पाइडर मैन की तरह छतें फांदता हुआ घनश्याम केवट पुलिस की टोपी के नीचे से तिड़ी हो लिया। चित्रकूट राम का अस्थाई निवास पता रहा है और यहीं घनश्याम केवट ने पुलिस के
 
मधुकर राजपूत
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बढ़ा मंत्रिमंडल, घटी हिस्सेदारी

लो बन गई सरकार। सिपहसालारों ने काम काज-संभाल लिया। 1952 से तरक्की की राह पर चले देश को पांच साल तक अब ये रास्ता दिखाएंगे। घपलों घोटालों के रास्ते तरक्की की तरफ बढ़ता हमारे देश की बागडोर अब नए योद्धाओं के हाथ आ गई है। मनमोहन सिंह के सिपहसालारों में कु
 
मधुकर राजपूत
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......अब इंतजार बदहाली का

लोकतंत्र का महापर्व बीत गया। चुन लिए हमने अपने ही हाथों पांच साल तक लूटने वाले चोर। चोर वोट की अमानत को अपने कब्जे में लेने के बाद साहूकार बन गए हैं। सांसत में फंसी सांस को चैन दे रहे हैं। आराम कर रहे हैं। जनता की चिरौरी करके थक चुके अपनी थकान उतार र
 
मधुकर राजपूत
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कांग्रेस के बदलते समीकरण

सत्ता का सेमिफाइनल यानी चौथे चरण का मतदान नज़दीक आते-आते राजनीतिक गहमागहमी तेज़ होती जा रही है। चुनाव से पहले एनडीए की दरारें उभर कर आईं थीं तो चुनाव के दौरान यूपीए भी दरकता दिखाई दे रहा है। यूपीए को मजबूती देने वाले कई दल चुनाव के दौरान छिटककर उससे
 
मधुकर राजपूत
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कुंवारेपन के किले की दरकती दीवार

वैसे मैं पहले भी ठीकठाक ही दिखता था, लेकिन पिछले कुछ दिनों से मेरे चेहरे से कुछ ज़्यादा ही नूर टपकने लगा है। मुई नौकरी मिलते ही छोकरी वालों ने घर के आंगन में कदमताल करके ग़र्दो-ग़ुबार उड़ा रखा है। इतना छैला-बांका हो गया हूं कि सब की निगाह में किरकिरी
 
मधुकर राजपूत
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महिला दिवस या ढकोसला?

मंत्रालयों से लेकर जिला मुख्यालयों और गोष्ठियों में पहले राष्ट्रीय महिला दिवस की रवायत पूरी कर दी जाएगी। ठोस दिखने वाले हकीकत में उड़ते-उड़ते विचार होंगे। वैसे ही जैसे कागजों में द्रुत गति से चलता महिला विकास। योजनाओं, कार्यक्रमों से महिला विकास के द
 
मधुकर राजपूत
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घटती जमीन, घुटता किसान, संपत्ति का मौलिक अधिकार

याचिकाकर्ता संजीव कुमार अग्रवाल ने एक नई बहस छेड़ दी है। अब देखना है कि उनकी याचिका पर विचार करने और कानून मंत्रालय की दलील सुनने के बाद उच्चतम न्यायालय क्या आदेश जारी करता है? कानून मंत्रालय को जारी किए गए नोटिस के जवाब से इस केस को कोई दिशा जरूर मि
 
मधुकर राजपूत
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कांग्रेस नीत यूपीए की खुल गई पोल!

फरवरी को संसद में अंतरिम बजट पेश करते हुए प्रभारी वित्त मंत्री संसद में कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ होने का दावा कर रहे थे और उन्हें उम्मीद है कि इस बार फिर जनता कांग्रेस को दिल्ली दरबार सौंपेगी। संप्रग सरकार ने आम आदमी के हित के नाम पर पहले से चल
 
मधुकर राजपूत
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जय हो! की जय

इक्यासिवें ऑस्कर अवॉर्ड्स में पहली बार भारतीयों ने धाक जमा दी। बेस्ट फिल्म स्लमडॉग मिलेनियर ने इतिहास रचते हुए आठ ऑस्कर पर कब्जा किया। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर की बच्ची पर आधारित एक शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री फिल्म स्माइल पिंकी को भी बेस्ट शॉर्ट
 
मधुकर राजपूत
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यार में रब दिखने के फायदे

धुन तो अच्छी है, लेकिन मुझे सोचने पर मजबूर कर देती है। हर तरफ से गाहे-बगाहे कान में पड़ ही जाती है। “तुझमें रब दिखता है यारा मैं क्या करूं, सज़दे सर झुकता है यारा मैं क्या करूं”। खूब कही है शायर ने। यार में भगवान का दिखना, है तो कुछ अजीब मगर फायदे बह
 
मधुकर राजपूत