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अशांत महासागर

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08 Mar 2010
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ग़ज़ल

मुद्दत बीत गई उनको देखे हुएशब्दों ने आज उनका अक्स घड़ा हैदिल ने चाहा आंखों में समा लूंआंसूओं ने मेरे सिर इल्ज़ाम मढ़ा हैकुछ तो है जो तुझसे भूल हुईक्यों वो तुमसे इतना दूर खड़ा हैतेरी आंखों की झलक थी दुनिया जिसकीआज कहते हैं कि वीराना पड़ा हैकुछ तो ऐसा कर
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युगां दी आवाज़

युगां-युगांतरां तो मैं सुणदा हां इक आवाज़ जो मैनूं कर जांदी है बदहवास इह बलाउंदी है मैनू आपणे कोल जिहनूं सुणदियां मेरी जिंद जांदी है डोल इह लगदी है आवाज़ मैनूं शिव दे पैरां दी जदों उह तांडव है करदा नहीं, नहीं इह तां है कृष्ण दी बंसरी दी आवाज़ उह जदों
Dec 29 2009 11:50 AM
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ख़्वाब

मेरी मां हत्थां दे विच बुणदी ऐ कुझ ख़्वाब पहला ख़्वाब बुणिया सी पुत्त नूं जमण दा दूजा, पुत्त दे अफ़सर लगण दा तीजा ख़्वाब बुणिया सी पुत्त दे सेहरा बझण दा हुण मेरी मां बुणदी ए फिर कुझ कू ख़्वाब उणदी ए उह ख़्वाब दादी बनण दे चक्कदी ए उह कुंडे पोतरे दीयां
Dec 29 2009 11:50 AM
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पीड़

कोई न जाने इश्क़ की ज़ात को न कोई पहचाने तेज़ाब की बरसात को खिला फूल तो है सदा ही महकता कोई न जाने सूखे पत्तों के जज़बात को कोई न जाने दिल की पीड़ को कोई न देखे दिल होए लीरो-लीर को इश्क़ के सागर में लगाते हैं सारे ही डुबकी न कोई पहचाने शिकरे यार को क
Dec 29 2009 11:50 AM
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फ़ासला

दो कू पैर पुट्टे ने ते मैं गया हां रुक नाप रिहा हां धरती ते अंबर विचला फ़ासला दो कू ही बुरकियां ने अजे खादीयां नाप रिहा हां खेतां ते थाली विचला फ़ासला भैण छोटी नूं खेडदियां लिया है चुक नाप रिहा हां मैं खेड ते डोली विचला फ़ासला मां ते दादी नूं मैं गल्
Dec 29 2009 11:50 AM
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इश्क़ ही रब्ब

लोक आखदे इश्क़ है ज़ात रब्ब दी मैं आखदां इश्क़ ही रब्ब हुंदा रब्ब लभदे लोक मंदरा-मसीतां विच बिन वेखे ही रब्ब दा दीदार हुंदा सस्सी लभिया रब्ब विच मरुथलां हीर रांझण रब्ब लई ज़हर प्याला पीता सोहणी महिवाल यार विच झिनाब पाया लैला दे इश्क़ ने मजनूं मलंग की
Dec 29 2009 11:50 AM
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हीर

हीर सियाली कर्मां वाली जिस रांझण ना पाया इक उडारी ऐसी मारी आल्हणा खेड़ियां दे घर पाया बिण रांझण ना जीया जावे जा मौत नूं गले लगाया मैं वी हां इक हीर सलेटी जिस जोगी वर पाया इस जोगी मैनूं कीता कमली सारी उम्र रुलाया अक्खीयां थक्कीयां तक-तक बूहा पर जोगी न
Dec 29 2009 11:50 AM
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मैं वारी जावां

मैं वारी जावां मेरा सज्जन घर आया बांहीं उहदे रंगला चूड़ा जिऊं संध्या दी लाली पैरीं उहदे पाई झांजर उहदी टोर हिरणीयां वाली मैं वारी जावां मेरा सज्जन घर आया अक्खीं उहदे कज्जले दी धारी जिवें रात कोई शगनां वाली मत्थे उहदे टिक्का चमके जिवें चन्न दी चानणी म
Dec 29 2009 11:50 AM
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कौन कहता है...

कौन कहता है कांटे प्यार नहीं करते कोई कम्बख़त फूलों से पूछकर तो देखे कौन कहता है हवाएं आगोश में नहीं भरतीं कोई पेड़-पौधों से पूछकर तो देखे कौन कहता है पत्थर धड़कते नहीं कोई शिल्पकार बनकर तो देखे कौन कहता है समुद्र रोता नहीं कोई साहिल पर बैठ उसके आंसू
Dec 29 2009 11:50 AM
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प्यार

कौन कहता है कांटें प्यार नहीं करते कोई कम्बख़त फूलों से पूछकर तो देखे
Dec 29 2009 11:50 AM
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तेरा चेहरा

तेरा चेहरा देखूं तो मेरा दिन निकले तेरे सुर्ख़ गाल देखूं तो सुरमयी शाम ढले तेरे घने बाल जैसे काले बादल बहकें तेरे तीखे नैन जैसे बिजली चमके तू चले तो तेरी चाल मेघ राग कहे तेरा चेहरा देखूं तो मेरा दिन निकले।
Dec 29 2009 11:50 AM
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आंसू

बसंत आया फूलों पर छाया यौवन का ख़ुमार ओंस की बूदों में नहाए फूल बाट जोह रहे हैं प्रेमी की भंवरा आया ओंस की बूंदें बन गईं फूल के आंसू फूल ने प्रेमी को आलिंगन में लिया और भूल गई कि क्षणभर प्यार कर चला जाएगा सदा-सदा के लिए और उसके पास रह जाएंगे आंसू
Dec 29 2009 11:50 AM
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चाय की दुकान

आफिस के सामने मंगल की चाय की दुकान जहां मिटती है थकान चलिए काली जी पीते हैं चाय क्यों न थोड़ी सी थकान मिटाएं जहां सुनाई देता है गिलासियों का संगीत सुनते ही सांस हो जाती है शीत दुकान के पीछे है कबाड़खाना जहां होता है कबाड़ियों का आना जाना कहने को तो ह
Dec 29 2009 11:50 AM
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वो मेरे साथ थी

कौन है मेरा अपना जाने कब से खोज रहा हूं अभी तक नहीं मिला मुझे लगा मेरी मां है मेरी अपनी नहीं वो तो चली गई पता नहीं कहां हवा में है या धरती में मुझे लगा शायद मेरे पिता हैं मेरे अपने नहीं, वो भी तो मुझे मां की ही तरह छोड़ गए थे मुझे लगा शायद मेरे भाई-ब
Dec 29 2009 11:50 AM
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क्या बताऊं

क्या बताऊं इन आंखों ने क्या मंज़र देखा धरती के सीने में उतरता खंजर देखा जिस धऱती पे थे उगते फूल शफ़ा के उस धरती पे लहू का समंदर देखा क्या पूछते हो, क्यूं आंखें नम हैं उस समंदर को भीतर उफनते देखा दिल से हल्की सी इक आह निकली आह को बवंडर में बदलते देखा
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हंजू (आंसू)

रड़कीयां अक्खां थिड़के हंजू डिगदे धरत दी छाती ते न इह मिट्ठे न इह लूणे इह ने दर्द विहूणे करदां हां अरजोई कोई बक्शे मेरे हंजुआं नूं दंदासा जां कोई मारे मेरे नैणां ते दर्दां दा गंडासा करदा है दिल कोई मारे अक्खां विच सीखां तत्तीयां करके न इह रड़कन न इह
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आशिकों का कारवां

आशिकों का कुछ यूं कारवां बनता रहा जैसे शमां पे परवाना पिघलता रहा सूरज की अगन को पाने के लिए कुकनूस सदियों से राख बनता रहा चांद को ही पाना है चकोर का सबब इसीलिए वो रातभर भटकता रहा बाहें खोले बैठी है समुद्र में सीप बारिश का एक तुपका सीप में ढलता रहा यू
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इश्क़

न जीण दी सुध न मरण दी चाह इह इश्क़ बड़ा है बेपरवाह इह वसिया मेरी रूह दे अंदर जो डंगदा है मैनूं हर साह न इश्क़ दी है कोई जात पात है इश्क़ दा रब्ब इश्क़ ही आप जा इश्क़ नहा जा इश्क़ ही पा जा इश्क़ कमा जा इश्क़ ही खा जे बुल्लिया तूं इश्क़ न करदा रहिंदा व
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तड़प

फुल्लां नाल घिरया कंडा कंडे नाल अटकी बूंद बूंद आखे मैनूं गल नाल ला लै धरतिए, मैं रही शदाइयां झूम जद असमानों उत्तरी तैनूं मिलने दा चाअ तैनूं मिलने दी तांघ विच दिता सब गुआ तैनूं मिलने दे चाईं गई कंडिया विच घिर आ ना छडदै ततड़ा कंडड़ा नाले सोखे धुप बेपरव
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नाराजग़ी

पता नईं क्यों मेरा इह दोस्त नाराज़ रहिंदा है कदी इह चुप कर जादां है, कदी चुप कीते ही आवाज देंदा है कदी करदै ग़ुज़ारिश मैनूं इह चुप कीते हस्सण दी कदी इह मेरे सुन्ने हासियां नूं अहसास देंदा है कदी इह पूंजदा ए अथरू मेरे आपणे हत्थां नाल कदी इह रोण विच वी
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मेरा डर

मेरा इह डर मैनूं जीण नहीं दिंदा खाण नहीं दिंदा, पीण नहीं दिंदा मैनूं डराउंदे ने मेरे इह साह जिहड़े आउंदे ने बेपरवाह इक लम्मा हौका हां मैं भरदा फिर वी रहना हां मैं डरदा कदी डरदा हां उडदे परिंदियां कोलों कदी डरदा हां रब्ब दे बाशिंदियां कोलों डर आउंदा ह
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नज़म- शब्दां दी मरहम

न मेरी नज़्म दी बंदिश न मेरी ग़ज़ल दी है बहिर इह दुनिया ज़ख़्म है देंदी इह शब्द मरहम ने धरदे है सियाही जद कदी मुकदी तां मेरे पीड़ है उठदी इउं लगदा है जिवें मेरे हत्थां ते पैर कोई धर दे मैं जद लिखदां हां तां वरका वी मैनूं सीस है देंदा इन्हां शब्दां दे
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आस (उम्मीद)

इह अक्खां कद तक खुल्लीयां रक्खां दुनिया वसदी बहुत, मैंनू तेरीयां रक्खां दीदे मेरे इऊं लगदे जिवें कोई वीरान सड़क दिल मेरे विच हाले वी पैंदी तेरे नां दी रड़क इह अक्खां कद तक खुल्लीयां रक्खां दुनिया वसदी बहुत, मैंनू तेरीयां रक्खां हर आऊंदे जांदे राही चो
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तलाश

ख़ुद नूं ही ख़ुद दी तलाश मार गई मैंनू इह शराब बेहिसाब मार गई पी के ख़ुद नूं टोल्ह रिहा हां ना जाणे किस नाल बोल रिहा हां लभदा हां ख़ुद नूं गिलासां विच मैं कदी लभदा हां रंग-बिरंगे लिबासां विच मैं लभदा हां लोकां दियां अक्खां विच मैं कदी लभदा हां गलियां
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जब से तुम हो गई

ये आंखें है पत्थराई अच्छी लगती है तन्हाई जब से तुम हो गई... ये दुनिया है इक मेला भीड़ में हूं फिर भी अकेला जब से तुम हो गई... अश्क बहाते हैं ये नैन अब न दिल को मेरे चैन जब से तुम हो गई... न चिड़िया करती मुझसे बातें अब न फूल ही मुझको भाते जब से तुम हो
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अक्ख दा हंजू

मेरी अक्ख दा हंजू वी करदा है मेरे नाल बातां याद कराउंदा है मैंनू ओह मेरीयां विसरीयां यादां अक्ख दे हंजू चों ही मैंनू दिसदा उसदा परछावां इह मरजाणा भुलण न देंदा मैं उस नूं किवें भुलावां मैं चोहंदा हां इह सुक जावे इह सुक जावे, इह मुक जावे तां जो मैंनू फ
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दिल दा सेक

मेरे जिस्म दी अगन दे अंदर धुखदा है मेरा दिल दिल दा महरम वाजां मारे इक वारी आके मिल अक्खां चो वगदे अथरू वी लगदे ने जिऊं लावा इक वारी आके मिल जावे दिल दा सेक वखावां दिल मेरा ही दिल मेरे नूं अंदरो-अंदरी खाई जावे पर मिलने दी आस न छडी शायद कदी मिल जावे