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मेरे गीत !

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18 Jun 2010
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मुझे ब्लाग जगत ने क्या क्या दिया -सतीश सक्सेना

बहुत कुछ दिया है ब्लाग जगत ने हमें ! अजनबी मगर आपस में समान रूचि वाले लोगों में जो अपनापन और प्यार इस आभासी जगत में पाया जाता है अन्यंत्र शायद दुर्लभ है ! ब्लाग जगत ही एक ऐसा स्थान है जहाँ एक छोटे से कसबे में रहने वाला ब्लागर, आसानी से उच्च पदस्थ
 
सतीश सक्सेना
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खुशदीप सहगल और अजय कुमार झा, एक आदर्श - सतीश सक्सेना

खुशदीप सहगल को पढना हमेशा सुखद ही होता है , अपने मक्खन की तरह मस्त रहने वाले, जी टीवी में सीनियर प्रोडयूसर ,खुशदीप सहगल पर ईश्वर की ख़ास मेहरवानी है कि गर्व उनके आस पास कहीं नज़र ही नहीं आता ! हर एक साथ खड़े खुशदीप भाई, आज की दुनिया में, अजीव चीज़ लगते
 
सतीश सक्सेना
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क्या इस टिप्पणी को हम कुछ समय याद रख पायेंगे ?? - सतीश सक्सेना

गिरिजेश राव का यह कमेंट्स अपने आप में पूरी पोस्ट है जो उन्होंने अजीत गुप्ता की एक पोस्ट बताओ भारतीयों तुम्हारे पास क्या है ? पर किया है, जिसमें वे देशवासियों से दुखित मन से एक सवाल करती हैं ! "हमारे पास है: मानव मल से गंधाते सड़क , गलियाँ धूल धक्कड़
 
सतीश सक्सेना
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भुखमरी से लड़ते शहरोज़ की मदद करें ! - सतीश सक्सेना

सय्यद शहरोज़ कमर, एक बेहतरीन देशभक्त, लेख़क, सम्पादक, का हाल का उनके ताज़ा लेख से लगता है हर कलाकार,लेख़क की कहानी कह रहा है ! प्रकाशकों के अन्याय, आम जनता,और खुद मीडिया की उपेक्षा के शिकार ये कलम के धनी लोग क्या काम करें कि दो जून इज्ज़त के साथ रहना
 
सतीश सक्सेना
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एक विश्वास यह भी - सतीश सक्सेना

डिस्नेलैंड पेरिस के अन्दर ही एक होटल में ठहराना हुआ था , नाश्ते के समय साथ एक यूरोपियन दम्पति भी अपने लगभग डेढ़ साल के बच्चे के साथ नाश्ता कर रहे थे ! नाश्ते के दौरान माँ ने अपने बच्चे की कोई मदद नहीं की और मैं अपना नाश्ता भूल उस नन्हे स्मार्ट का नाश्ता
 
सतीश सक्सेना
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जीना इसी का नाम है - सतीश सक्सेना

आज सुबह मोहल्ले में एक स्वर्गीय मित्र के बेटे को काफी दिन बाद देखा तो रुक गया , लगा कि अस्वस्थ है तो स्नेहवश पूछ बैठा, क्या बात है ? "अब उमर भी तो हो चली है " यह जवाब था उस ४१-४२ वर्षीय जवान का , सुनकर मैं काफी देर तक सोच रहा था कि यह धीर गंभीर लड़का
 
सतीश सक्सेना
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यूरोप ट्रिप,दिल्ली -फ्रेंकफर्ट -विएंना -सतीश सक्सेना

गौरव और गरिमा दोनों में होड़ रही कि पापा मेरे एड ऑन कार्ड ( गौरव का अमेक्स प्लेटिनम और गरिमा का अमेक्स गोल्ड कार्ड ) से ही खर्चा करें ! मेरे इन इंटरनॅशनल कार्ड्स को शीघ्र बनवाने में ,मेरी बेटी द्वारा किये गए प्रयत्नों के फलस्वरूप ,यात्रा से ठीक पहले मेरे
 
सतीश सक्सेना
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वजन कम रखने का तरीका -सतीश सक्सेना

पिछले कई सालों से निम्न चतुर्दिवसीय विधि अपनाता रहा हूँ और मुझे अपना वजन घटाने में हमेशा कामयाबी मिलती है ! जनरल मोटर्स का ७ दिन वाला मशहूर फार्मूला मैं अक्सर ४ दिन में तोड़ देता हूँ ...२-३ किलो कम ! कमाल की कामयाबी मिलती है हर बार ! पहले दिन केले को
 
सतीश सक्सेना
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पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर २०१२ में बनकर तैयार हो जायेगा - सतीश सक्सेना

१९७१ की पाकिस्तान वार के समय देश में सनसनी से फ़ैल गयी थी जब अमेरिकन एयरक्राफ्ट कैरियर "एन्टरप्राइज़ " के बंगाल की खाड़ी कि तरफ प्रस्थान करने की खबर सुनी थी ! उन दिनों कहा जाता था कि अकेला "एन्टर प्राइज़" दुनिया के कई छोटे मोटे देशों को जीतने में समर्थ
 
सतीश सक्सेना
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यहाँ इतना द्वेष क्यों ?

ब्लाग पर कुछ लिखने का मन था , सोचता था कि ईमानदारी से कुछ भी लिखा जाये और उससे किसी का कुछ फायदा हो तो शायद यह प्रयास सार्थक हो सके ! मगर आश्चर्य कि लोगों ने इस ईमानदारी पर भी ऊँगली उठाई ! दूसरों के लिए वैमनस्य और शिकायतें लेकर लिखते हम लोग जब अपने कमजोर
 
सतीश सक्सेना
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अपनी माँ को धुंधली यादों में ढूँढता बच्चा - सतीश सक्सेना

"माँ " पर प्रकाशित एक पुरानी पोस्ट दुबारा प्रकाशित कर रहा हूँ ...शायद आप मेरी माँ के बारे में वेदना महसूस कर सकें .... माँ ! यह एक ऐसा शब्द है जो मैंने कभी किसी के लिए नही बोला, मुझे अपने बचपन में ऐसा कोई चेहरा याद ही नही जिसके लिए मैं यह प्यारा सा शब्द
 
सतीश सक्सेना
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ब्लॉग मौन - सतीश सक्सेना

लगभग १५ दिन कीबोर्ड से दूर रहूँगा , शायद ब्लागजगत की टिप्पणियों से और पोस्ट से भी वंचित मैं , कुछ दिन शांत रहकर अपनी मूर्खताओं और कमियों के बारे में सोंचता हूँ जो मैंने ब्लाग लिखते समय को हैं ! कीबोर्ड से दूर रहने के कारण यह और भी आसान होगा ! ब्लाग लेखन
 
सतीश सक्सेना
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समीरलाल, अनूप शुक्ल और ज्ञानदत्त -कहीं आप जाने अनजाने में इनके सैनिक तो नहीं बन गए ? -सतीश सक्सेना

"अनूप भाई ! यह विवाद बेहद खेद जनक है निस्संदेह इससे आप दोनों की, हिंदी समाज की वाकई बेईज्ज़ती हुई है … सवाल आप दोनों का कम और चर्चाकारों का अधिक है, मुझे लगता है कि कहीं न कहीं आप लोगों के प्रसंशकों ने दो अलग खेमें बना डाले हैं, और उन खेमों में आप लोगों
 
सतीश सक्सेना
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एक नन्हे दोस्त का आपरेशन, जिसमें मेरा साथ देने वाला कोई नहीं था - सतीश सक्सेना

उस दिन जब सदा की भांति मैं पार्क में पंहुचा तो हमेशा गेट पर पूंछ हिलाकर स्वागत करते एक दोस्त की कमी महसूस हुई ! वह एक २-३ वर्षीय कुतिया,जिसको मैं मिनी कहता था ,आज दिखाई नहीं दे रही थी ! पार्क में घुसते हुए मेरा स्वागत और जाते समय गेट तक आकर विदाई देना,
 
सतीश सक्सेना
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गोपाल गोडसे के साथ एक दिन - सतीश सक्सेना

कैमरे के साथ की यादें लिखते, गोपाल गोडसे की याद आ गयी ! वह जब भी दिल्ली आते थे मुझे अपना दोस्त कहते हुए मिलना न भूलते !महात्मा गांधी की हत्या में शामिल, इस शख्शियत से पहली मुलाकात ११-३-१९९१ में दिल्ली में हुई थी ! पहली मुलाकात में लगभग ७५ साल का यह
 
सतीश सक्सेना
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निकोन डी -९० की निगाह में, मैं और मेरी गर्ल फ्रेंड -सतीश सक्सेना

फुर्सत का समय ,जो बहुत कम ही मिल पाता है , अक्सर कैमरे के साथ बिताना पसंद करता हूँ ! जीवंत फोटो देखकर लगता है इतनी सुंदर फोटो के लिए जो समय लगा वह व्यर्थ नहीं गया ! साथ का फोटो टिन्नी के साथ का है ! हम दोनों में उम्र का फर्क सिर्फ ५३ साल का है ! मगर फिर
 
सतीश सक्सेना
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मातृदिवस पर आइये माँ को याद करें -सतीश सक्सेना

अविनाश वाचस्पति का यहाँ लिखा पहला लेख "माता पिता की उंगली श्रष्टिनियंता की होती है " का शीर्षक पढ़ कर ही आँखों में आंसू छलछला उठे, मैंने यह ऊँगली कभी नहीं पकड़ी ! मैंने अपने बचपन में क्या गुनाह किया था कि परमपिता ने यह कठोर कदम उठाया ! शायद धर्म विवेचन
 
सतीश सक्सेना
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चला बिहारी ब्लागर बनने ....सतीश सक्सेना

आप जो भी हैं मगर अपनी तमाम मानवीय कमजोरियों के बावजूद यहाँ लिखते हुए हजारों से, वाकई अच्छा और कुछ अलग सा लिखते हो अतः आप कम समय में ही अपनी अलग पहचान बनाने में समर्थ हुए हो ! चूंकि ब्लागजगत में कमेंट्स की इज्ज़त अधिक होने के कारण कोई किसी का लिखा ध्यान
 
सतीश सक्सेना
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मेरी नयी फोटो मशीन Nikon SLR - D90 -सतीश सक्सेना

बहुत वर्षों के बाद एक अच्छे कैमरे से फोटो खींचना एक सुखद अनुभव रहा ! बचपन से पापा की फोटोग्राफी से प्रभावित ,गौरव ने जब यह कैमरा ख़रीदा तो चेहरे से खुशी और उत्तेजना साफ़ झलक रही थी ! पावरफुल ऍफ़ १.४ लैंस , ऍफ़ १८-२०० जूम लैंस के साथ यह कैमरा किसी भी
 
सतीश सक्सेना
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क्या मिलिए ऐसे लोगों से जिनकी फितरत छिपी रहे ......सतीश सक्सेना

"इंशा अल्लाह -आप प्यारे से मासूम मनई हैं ,मुझे पसंद हैं ! आधी दुनिया में होते तो अब तक कम से कम एकाध बार लाईन भी मार चुके होते ...इसी पसंद के कारण " डॉ अरविन्द मिश्रा का दिया हुआ उपरोक्त सर्टिफिकेट मानवीय कमजोरियों के होते अच्छा लगा, अरविन्द जी का कथन है
 
सतीश सक्सेना
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हमारा लेखन और ब्लाग जगत !

मुझे याद है, शंकित होने पर समाधान के लिए हमारा पहला प्रश्न "यह कहाँ लिखा है " होता था ! हमें अखबार में लिखे अनजान लेख़क के कहे पर अखंड विश्वास रहता था और हर उस सुझाव और समस्या समाधान पर एक श्रद्धा भाव रहता था जो प्रिंट मीडिया से मिलता था, हमारे देश में
 
सतीश सक्सेना
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क्या लिख रहें हैं आप ?? -सतीश सक्सेना

अगर किसी लेख़क के व्यवहार और व्यक्तित्व के बारे में जानना हो तो उसके कुछ लेख ध्यान पूर्वक पढ़ लें , उस व्यक्ति की मानसिकता और व्यवहार आपको उसके लेखन में से साफ़ साफ़ दिखाई देगा ! लोगों को प्रभावित करने के लिए लिखे लेखों पर चढ़ा कवर, थोडा ध्यान से पढने पर
 
सतीश सक्सेना
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आभूषण रहित धरा को कर क्यों लोग मनाते दीवाली ? -सतीश सक्सेना

कितने कवियों ने मौसम की गाथा गायी कविताओं मेंअब मौसम पर कविता लिखते लेखनी ठहर क्यों जाती है बरसों बीते , दिखती न कहीं हर ओर छा रही हरियाली अब धुआं भरे इस मौसम में क्यों लोग मानते दीवाली ? धरती की छाती से निकली सहमी सहमी कोंपलें दिखे काला गहराता धुआं
 
सतीश सक्सेना
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मैं कभी मंदिर नहीं जाता , मगर गर्व है कि मैं हिन्दू हूँ !- सतीश सक्सेना

मेरा आज का संस्मरण ! ३ बजे की धूप में , कार स्टेपनी के पहिये के पंक्चर ठीक कराने एक दुकान के सामने गाड़ी रोक , देखा भयंकर गर्मी में दुकान में एक आदमी सो रहा था ! होर्न सुनकर धूप में बाहर आते उस व्यक्ति से, में उसका रेट पूंछा ! साहब २० रुपया !सोते हुए
 
सतीश सक्सेना
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सूना मंदिर - सतीश सक्सेना

बरसों पूर्व लिखा गया एक बहुत पुराना गीत आपको पढवाना चाह रहा हूँ , कृपया ध्यान रखें मेरे गीतों में शायद शिल्प का कोई स्थान नहीं मिलेगा क्योंकि गीत शिल्प का मैं बिलकुल जानकार नहीं हूँ , जो भाव मन में उठे वे ही लिखे गए ! अतः विद्वान् जनों से क्षमा प्रार्थी
 
सतीश सक्सेना
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कुरआन शरीफ पर कुछ भी लिखने को मेरी कलम नहीं चलती -सतीश सक्सेना

विधर्मियों के लिए, हज़ारों वर्ष पूर्व की परिस्थितियों में लिखी गयीं , अन्य धर्मों की पवित्र पुस्तकें पढ़कर, उनकी मज़ाक बनाना बेहद आसान हो जाता है , और आजकल यह कुछ तथाकथित विद्वानों की मेहनत के कारण और भी आम होता जा रहा है ! मैंने जब ब्लागिंग शुरू की थी
 
सतीश सक्सेना
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ज़न्नत और दोज़ख - सतीश सक्सेना

आज सुबह सुबह प्रवीण शाह का एक लेख के ज़रिये धार्मिक असलियत जान भौचक्का सा रह गया ! यह जानकारी किसी के लिए भी नयी नहीं होगी मगर शायद हम लोग उसपर ध्यान नहीं देते हैं ! प्रवीण भाई ने शायद साफ़ साफ़ हमें बताया कि धर्म से हमें क्या मिल रहा है ...... ऐसा होगा
 
सतीश सक्सेना
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आज किसी की रक्षा करने , साईं तुझे मनाने आया !

वर्षों पहले जब इस महानगर में कदम रखा था तो एक सीधे साधे लड़के राकेश से, एक ही कार्यालय में कार्य करने के नाते मित्रता हुई, और उसने रहने के लिए घर की व्यवस्था कराई ! उसके बाद बहुत सी यादें, एक दूसरे की शादी में योगदान...... दुःख के समय में साथ....मुझे याद
 
सतीश सक्सेना
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होमिओपैथी और आपकी असाध्य बीमारियाँ -सतीश सक्सेना

आदरणीय दिनेश राय द्विवेदी द्वारा लिखित क्या होमिओपैथी अवैज्ञानिक है ? पोस्ट पर बड़ी मनोरंजक प्रतिक्रियाएं पढने को मिलीं कुछ लोगों को होमिओपथी पर भरोसा था और कुछ इसे नितांत झोला छाप विद्या बता रहे थे ! कल यही मैंने अपने मित्र आदरणीय डॉ अमर कुमार , को कहने
 
सतीश सक्सेना
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वहीं रचा जाता है गीत -सतीश सक्सेना

वर्षों पहले कुछ दोस्तों की चलते फिरते फरमाइश रहती थी कि कोई गीत अभी लिख कर दिखाओ और मैं हमेशा मना करने पर मजबूर होता था कि कम से कम मेरे लिए यह संभव ही नहीं है ,कविता और गीत लेखन न कभी सीखा और न सीखना चाहता हूँ , जो मन में भाव उठाते हैं कभी कभी गीतों का
 
सतीश सक्सेना
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ये पुरुष -सतीश सक्सेना

मैं जब भी मेट्रो से नॉएडा से आफिस जाते हुए,एक बात अक्सर नोट करता हूँ उसे लेकर जो कुछ दिमाग में आया वह "मानसिक हलचल "करने के लिए स्वाभाविक था ! सोचा क्यों न आप सबसे बाँट लूं ! अधिकतर जगह पर खड़ी महिलाओं के सामने बैठे पुरुषों को गहरी नींद आ रही होती है ,
 
सतीश सक्सेना
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हमारे आसपास ये "रिटायर" लोग -सतीश सक्सेना

पहली मुलाक़ात खुशदीप सहगल से सर्व प्रेमी अविनाश वाचस्पति के यहाँ हुई थी ! उनसे थोड़ी देर बात करके लगा कि जैसे यह एक मिनी ब्लागर मीट न होकर सत्संग हो गया हो ! मुहल्ले के वृद्धों के वारे में कुछ करने का सुझाव, खुशदीप सहगल से पाकर लगा कि संत नगर के संत के
 
सतीश सक्सेना
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कहाँ हैं आप सब ? ब्लाग जगत के समस्त बड़े छोटों से विनम्र अपील - सतीश सक्सेना

कहाँ हैं आप सब ? क्यों नहीं बोल रहे इस अघोषित शीतयुद्ध पर ? घर में कभी शांति नहीं हो सकती जब तक बच्चों के वैमनस्य पर बड़े खामोश बैठे राहें ! यहाँ पर बड़ों से तात्पर्य उम्रदराज होने से नहीं बल्कि समझ और परिपक्वता से है ! आपस में एक दूसरे को बुरा भला कहते
 
सतीश सक्सेना
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हिंदुस्तान का दूसरा बेटा - II - सतीश सक्सेना

डॉ अनवर जमाल , यहाँ पर कोई तंगदिल आकर, अगर कोई आप लोगों की भावनाओं का मज़ाक उडाता है तो उसके कमेंट्स छाप दें और उसे कुछ न कहें तो निश्चित ही आपका मान होगा लोग आपका नाम इज्ज़त से ही लेंगे ! आप अपनी मान्यताओं की खूबियों को दुनिया को बताएं और लोगों का
 
सतीश सक्सेना
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याद तो फिर भी आओगे - सीमा गुप्ता !

पंकज सुबीर की पहचान शक्ति की तारीफ़ करनी होगी ! सीमा गुप्ता के कविता संकलन की पहली लाइनें ही दिल छू गयीं और इस लेख का शीर्षक बन गयीं ! कुछ लम्हे पर पंहुचते ही महसूस हो जाता है कि आप किसी असीमित क्षमता के धनी ,भावुक कलाकार के घर आये हैं ! इस रचना में
 
सतीश सक्सेना
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अम्मा , भीख मांगने आती है !

योगेन्द्र मौदगिल कहने को तो हास्य कवि हैं मगर जब भी मैंने उन्हें पढ़ा , हर बार एक एक प्रभाव एक छाप रह गयी दिल पर ! गज़ब की धार है उनकी रचनाओं में ! आज उनकी एक सूक्ष्म रचना पढी तो यह दो लाइनें ही हिला गयीं ! " चौराहे की मिटटी को भई जम कर लज्जा आती है
 
सतीश सक्सेना
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डैथ ट्रेप : जब मेरा पूरा परिवार मौत से बाल बाल बचा था ! - सतीश सक्सेना

वह रात मेरे परिवार के लिए जीवन की सबसे बुरी रात थी और शायद उस दिन हमें किसी अद्रश्य शक्ति ने बचा लिया था अथवा आज यह लिखने को भी नहीं बचते ! जून १९८८ की रात , नॉएडा में पूरी रात बिजली नहीं थी ११-१२ बजे तक तो पसीने से भीगे हुए जागते रहे, दोनों बच्चों (गौरव
 
सतीश सक्सेना
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ब्लाग जगत में ऐसे लोग भी हैं - स्नेही राज भाटिया

राज भाई ! १५ -३० मई में एक मित्र के साथ विएंना में, उनके बेटे के घर रहूँगा ! इन १५ दिनों यूरोप घूमने का प्लान है , जिन जगह जाने का मन है वे प्राग , बुडापेस्ट , स्वित्ज़रलैंड , और इटली हैं यूरेल टिकेट लेने की सोच रहे हैं ! क्या यह कम समय में संभव और ठीक
 
सतीश सक्सेना
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आपके १८ वर्षीय बच्चे का आत्म विश्वास - सतीश सक्सेना

१८ वर्ष होने के अपने मायने हैं , वयस्क होते ही कानून से कुछ अधिकार अपने आप मिल जाते हैं ! इस उम्र तक आते आते बच्चों की अपेक्षाएं भी बढ़ी होती हैं ! माँ बाप के उचित सहयोग से बच्चों में आत्मविश्वास और अपने बड़ों के प्रति आदर भावना विकसित होनी स्वाभाविक
 
सतीश सक्सेना
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हिजड़े - क्या आपने कभी इनके बारे में सोचा है ? -सतीश सक्सेना

शादी विवाहों और ख़ुशी के अवसरों पर अकसर मनचाहे पैसे न मिलने पर जवान चलाते हिजड़े आपको अवश्य याद होंगे १ हर ५-१० वर्षों में इन अवसरों पर अक्सर इनके द्वारा की गयी बेहूदगियों से आपका मन भी अवश्य खराब हुआ होगा ! मगर क्या आपने कभी इनके बारे में सोचने के लिए
 
सतीश सक्सेना