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लाइट ले यार !

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19 Apr 2010
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कौन हैं ये लोग ? - सतीश सक्सेना

डॉ अनवर जमाल का यह प्रश्न  @ सतीश जी ! मैंने आपसे कल पूछा था कि ' जब कोई इस्लाम या कुरान पर नाहक इल्ज़ाम लगाएगा . क्यूँ मोहतरम, तब तो आप मुझे बोलने का हक देंगे ?'लेकिन आपने कोई जवाब नहीं दिया . क्यूं ? हम दोनों ही इस महान देश के नागरिक हैं ,
 
सतीश सक्सेना
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डॉ अनवर जमाल ! कृपया ऐसा न लिखें !

डॉ अनवर जमाल ! आपने प्रतिक्रिया वादियों को जवाब देने के नाम पर जो ब्लाग बना रखा है ! मेरी राय में वह सिर्फ दूसरों की धार्मिक भावनाओं का उपहास बनाने का एक साधन मात्र है चूंकि आपने कई बार मुझे आदरपूर्वक संबोधित करते हुए सम्मानित किया है अतः
 
सतीश सक्सेना
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आपकी पवित्र आस्थाओं का मजाक कौन उड़ा रहा है ? - सतीश सक्सेना

"आखि़र इस क़हतुर्रिजाल अर्थात इनसानों के अभाव के दौर में , मुसलमानों से नफ़रत करने को ज़माने का दस्तूर बन जाने के दौर में कोई एक आदमी तो है जिसे नफ़रत ने अभी तक अन्धा नहीं बनाया है , जिसके दिल में मुहब्बत और हमदर्दी है , जिसका ज़मीर ज़िन्दा है । जो अमन
 
सतीश सक्सेना
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डॉ अनवर जमाल, को एक ख़त, भाई की तरफ से ! - सतीश सक्सेना

आप विद्वान् हैं, आप संयत हैं अनवर भाई और और मैं आपका आदर, आपसे कम नहीं करता हूँ , मुस्लिम धर्म का उतना ही आदर करता हूँ जितना स्वयं के धर्म का जो मेरे रगों में बसा हुआ है ! मैं अक्सर अपने उन साथियों  से पूंछता हूँ शक करने से पहले , एक
 
सतीश सक्सेना
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डॉ अनवर जमाल ! फिरदौस के लेख के साथ आपने न्याय नहीं किया !

डॉ अनवर जमाल,आप ब्लाग बनाते समय क्या यही कहने चले थे ? ...मुझे विश्वास नहीं  होता  ....आपने मेरे बारे में कई बार बड़े आदर सूचक शब्दों का प्रयोग किया है  जिससे मैंने अपने आपको सम्मानित महसूस किया है ,मगर फिर भी मैं बड़े खेद के साथ
 
सतीश सक्सेना
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अविनाश वाचस्पति - राजीव तनेजा गैंग से सावधान !

                          बहुत खतरनाक गैंग है , आप इनकी शक्लों पर न जाइये घर बुलाते हैं ..बड़े प्यार से खाना खिलाते हैं ..और जब आपका मन प्रसन्न हो जाता है तब रसगुल्लों की
 
सतीश सक्सेना
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ब्लाग जगत से अधिक उम्मीदें न रखें ! - सतीश सक्सेना

अलका जी !सरवत जमाल को दोस्त ही नहीं बनाता तो अच्छा था कम से कम यह तकलीफ तो नहीं होती , निर्मला कपिला जी की बात समझ आयेगी या नहीं मैं नहीं जानता मगर उन्हें यह बतलाइयेगा कि इस ब्लाग जगत में लोगों को बहुत याद रखने की आदत नहीं है  ! कुछ दिनों
 
सतीश सक्सेना
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किसी नारी के संग सिनेमा जाने का दिल करता है !

अपने किशोरावस्था के दिनों की यादें, लगभग बीस साल पहले लिखी इस हास्य रचना के जरिये ताजा हो  जाती हैं , आपको मुस्कराने हेतु नज़र है !सोचता था बचपन से यारबड़ा कर दे जल्दी भगवानमगर अब बीत गए दस सालजवानी बीती जाये यार ,किसी नारी के संग सिनेमा जाने का दिल
 
सतीश सक्सेना
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ओ अफसर के शाही कुत्ते !

कुछ दिनों से  घुटन से लग रही है ! बेशर्म डाकुओं के बीच काम करना असहनीय होता जा रहा है  !  अफ़सोस तब होता है जब मामूली चोर  अमीर बनकर हम जैसे फकीरों को चोर समझने लगते हैं , ऐसे में प्रतिकार करना आवश्यक हो जाता है , अन्याय सहना
 
सतीश सक्सेना
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हम महिला विषयों पर न लिखें ? - सतीश सक्सेना

डॉ अरविन्द मिश्रा का एक चुभता हुआ कमेंट्स मेरा ध्यान उनकी ओर खींच ले गया है  " चलिए आप उदासीन और तटस्थ रहकर इसी तरह बीच बीच में आकर अपनी घोर चिंता व्यक्त करते रहा करिए -ब्लागजगत का जो होना है वह तो हो ही जाएगा "   और मुझे लगा कि जैसे
 
सतीश सक्सेना
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रंग बरसे भीगे चुनर वाली रंग बरसे ... सतीश सक्सेना

होली के अवसर पर हर वर्ष की तरह कुछ मित्रों के घर और परिवार में होली मिलने और खेलने जाता रहा हूँ, जब भी बाहर निकलने की सोचता हूँ तो अक्सर उदासीन होता हूँ, मगर बाहर जवानों की भीगती हुई टोली और जोश देखकर मूड बनते देर नहीं लगती और बाकी
 
सतीश सक्सेना
Mar 01 2010 02:15 PM
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आइये सफल ब्लागर बनने के कुछ गुर आपको भी सिखाएं !

सबसे पहले अपना मूल्य समझो और मान लो कि तुम सबसे अच्छे ब्लागर हो , इसके बाद एक लिख्खाड को  छांट लो  जो तुम्हारे ब्लाग पर कोई कमेंट्स न देता हो !इस लिक्खाड़ की नवीनतम पोस्ट पर जो कुछ भी लिखा हो उसके विरोध में  एक
 
सतीश सक्सेना
Feb 26 2010 10:14 PM
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हम और तुम !

लगभग २० वर्ष पहले लिखी एक रचना ज्यों की त्यों प्रस्तुत कर रहा हूँ , पत्नी को मनाने की असफल कोशिश करता एक बेचारे पति  का यह चित्रण बहुत स्थानों पर आज भी वास्तविकता है ....तुम मेरे दिल की रानी हो मैं तेरे दिल का कचरा हूँ ,पति ढूँढा
 
सतीश सक्सेना
Feb 24 2010 11:51 AM
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सुमन वर्षा !

"आपका nice मैं भी अपनाना चाह रहा हूँ  ! सप्ताह में कम से एक दिन हम लोग nice  से काम चलायें , यह सुमन जी की ईजाद  के प्रति एक इन्साफ होगा और उन्हें लोकप्रियता भी मिलेगी !"उपरोक्त सुझाव कमेंट्स के जरिये आज मैंने अनिल पुसाद्कर के ब्लाग पर दिए
 
सतीश सक्सेना
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ताऊ की दुकान से सावधान !

ताऊ  की दुकान से सावधान ! लिखने का मतलब यह बिलकुल नहीं लें कि मैं ताऊ की बेईमानियों का खुलासा करने जा रहा हूँ , मेरा कोई दिमाग ख़राब नहीं है कि ताऊ की चालाकियों का पर्दाफाश करने की हिम्मत करुँ  मुझे खूब पता है  कि  नियम नंबर ६ के
 
सतीश सक्सेना
Feb 20 2010 10:38 AM
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चाँद पर मेरी प्रापर्टी और उड़नतश्तरी !

"Approximately 250 very well celebrities as well as 2 former US presidents are now extraterrestrial property owner at moon." आसानी से विश्वास नहीं होता कि कोई कम्पनी  अंतर्राष्ट्रीय नियम और कानूनों का फायदा उठाते हुए
 
सतीश सक्सेना
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हमारी ५५ साला फोटू और ये जले हुए कमेंट्स ..

सर्वत भाई के मेरे गीत पर किये गए  कमेंट्स  !" दुबारा आ गया हूँ, वसंत पंचमी की मुबारकबाद देने-एक दिन बाद. हम भारतीय विलम्ब से काम करने में माहिर हैं.एक जरूरी बात कहनी थी, बुरा न मानियेगा.....क्या किसी साउथ इंडियन फिल्म में खलनायक की भूमिका
 
सतीश सक्सेना
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पता नहीं क्यों खाते पीते, पढने की बातें, होती हैं !

डी पी एस ग्रेटर नॉएडा के, एक क्षात्र, रानू , जो कि, पढने लिखने में बहुत अच्छे होने के साथ साथ, खाने पीने में, भी मस्त हैं, के मन की बातें यहाँ दे रहा हूँ ! जब भी हम सब साथ साथ , खाने पर एक साथ बैठते तो बच्चों से उनके भविष्य की चर्चा तथा क्लास में उनक
 
सतीश सक्सेना
Dec 29 2009 11:57 AM
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आजकल की सीख !

एक मित्र की सुनाई हुई एक सीख आज तक भुला नही हूँ ! प्रस्तुत है ! मांगी चीज कभी न दीजै , जब मांगे तबही दे दीजै ना ही चोरी ना ही पाप , भूल जाए तो रक्खो आप !
 
सतीश सक्सेना
Dec 29 2009 11:57 AM
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केशव से !

१६ जुलाई १९९३ को लिखी यह हास्य कविता, स्कूल जीवन में एक बहुत मजाकिया दोस्त, की यादों पर आधारित है ! बदायूं के उन दिनों की याद आते ही चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती है , एक शब्द चित्रण दे रहा हूँ ! तेरा क्या बुरा किया मैंने, तुम मुझको क्यों पिटवाते हो ! व
 
सतीश सक्सेना
Dec 29 2009 11:57 AM
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ऐसा क्यों होता है ?

बाग़ के उस झुरमुट में प्रेयसी का बाप देख ह्रदय बैठ जाता है बदन कंपकपाता है , ऐसा क्यों होता है ! अंधियारी बाँहों में मरघट की राहों में रूपसी को देख यार साँस फूल जाता है , ऐसा क्यों होता है !
 
सतीश सक्सेना
Dec 29 2009 11:57 AM
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शुब्बी की ससुराल !

हाल न जाने क्या होना है शुब्बी की ससुराल का दिखने में तो छोटी हैं लेकिन बड़ी सयानी हैं कद काठी में भारी भरकम मां की राज दुलारी हैं नखरे राज कुमारी जैसे इनकी मस्ती के क्या कहने एक पैर पापा के घर में एक पैर ननिहाल है दोनों परिवारों में यह अधिकार जमाये प
 
सतीश सक्सेना
Dec 29 2009 11:57 AM
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कविता लेखन

देवी जी ने मूड बनाया कविता लिखतीं कचरे पे ! कागज कलम उठा कर उसने करी चढाई कचरे पे चार दिनों से यारो घर में भोजन बनता कचरे सा कविता बने यथार्थ वादी, घर को बदला कचरे सा कचरे-वालों को बुलवाने बेटा भेजा कचरे पर ! इंटरव्यू देने को आए सड़े भिखारी कचरे से !
 
सतीश सक्सेना
Dec 29 2009 11:57 AM
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हम और तुम !

तुम मेरे दिल की रानी हो मैं तेरे दिल का कचरा हूँ पति ढूँढा है लक्ष्मीवाहन तुम हो देवी सौभाग्यवती तुम हो खिचडी में घी जैसी मैं चटनी जैसा दिखता हूँ मैं हूँ कैसा नादान प्रिये कैसे समझाऊँ प्यार प्रिये तुम हो बिल्कुल जीनत अमान मैं प्राण सरीखा दिखता हूँ तु
 
सतीश सक्सेना
Dec 29 2009 11:57 AM
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शिक्षक

पढाएँ कक्षा में मन मार बेचते शिक्षा खुले बाज़ार पुराने गुरुकुल के वे गुरु और ये गुरु के नाम कलंक हमारा अपने सिर के बाल नोचने का दिल करता है ! किसी घटिया दिल का उपहास उड़ाने का दिल करता है !
 
सतीश सक्सेना
Dec 29 2009 11:57 AM
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आधुनिक नेता

बने फिरते गाँधी के शिष्य आचरण पर देते व्याख्यान सुरा सुंदरियों में है मस्त, देश के नेता बने महान भरे चौराहे इनको जूत लगाने का दिल करता है ! किसी घटिया दिल का उपहास उड़ाने का दिल करता है!
 
सतीश सक्सेना
Dec 29 2009 11:57 AM
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रसिक लाल

लड़कियां घूरें आँखे फाड़ उम्र में लगते बाप समान न आता मर्यादा का ध्यान हमारे मन में उठें ख़याल किसी के गंजे सर पर हाथ फिराने का दिल करता है ! किसी घटिया दिल का उपहास उड़ाने का दिल करता है !
 
सतीश सक्सेना
Dec 29 2009 11:57 AM
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बसंती !

इस ब्लाग को बनाने की आवश्यकता तब हुई जब अपनी लिखी हुई कुछ हास्य कविताओं को छपवाने का विचार आया ! १८ - १९ साल पहले , बहुत लाइट मूड में लिखे गए, उन हास्य मुक्तकों का ख्याल आ ते ही मेरा ध्यान एक चंचल लड़की के अक्सर बोले गए एक वाक्य " लाइट ले यार " पर चल
 
सतीश सक्सेना
Dec 29 2009 11:57 AM
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प्यार करना सीखें - गूफी से !

मुझे अब यह याद भी नही कि मेरी माँ कौन थी और उसका दूध कैसा था, जब से आँख खुली, अम्मा के हाथ से ही खाना मिलता रहा है, और अप्पा के पैरों में बैठना अच्छा लगता है ! मैं एक पल के लिए भी आपको अपनी आंख से ओझल नही होने देना चाहता, आपसे थोडी भी दूरी मेरे लिए ब
 
सतीश सक्सेना
Dec 29 2009 11:56 AM
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ये रिश्ते खून के .....

अपने भाई समान मित्र की पत्नी का आपरेशन होना है, उन्हें खून देने की व्यवस्था करने का निर्देश मिला जान, परिजनों ने खिसकना शुरू कर दिया, मेरे दोस्त को पहले से ही अपना एनेमिक होना याद आ गया और उनके हट्टे कट्टे भाई को उनकी ६५ वर्षीया माँ ने रोक लिया कि उस
 
सतीश सक्सेना
Dec 29 2009 11:56 AM
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हम बुलबुल मस्त बहारों की, हम बात तुम्हारी क्यों मानें ?

जब से व्याही हूँ साथ तेरे लगता है मजदूरी कर ली बर्तन धोये घर साफ़ करें बुड्ढे बुढ़िया के पैर छुएं, फूटी किस्मत, अरमान लुटे, अब बात तुम्हारी क्यों माने ? ना नौकर हैं, न चाकर हैं न ड्राईवर है, न वाचमैन, घर बैठे कन्या दान मिला ऐसे भिखमंगे चिरकुट को, चौकीद
 
सतीश सक्सेना
Dec 29 2009 11:56 AM
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दर्द दिया है तुमने मुझको दवा न तुमसे मांगूंगा !

समझ प्यार की नही जिन्हें है समझ नही मानवता की जिनकी अपनी ही इच्छाएँ तृप्त नही, हो पाती हैं ! दुनिया चाहे कुछ भी सोचे कभी न हाथ पसारूंगा ! विस्तृत ह्रदय मिला इश्वर से सारी दुनिया ही घर लगती प्यार नेह करुना और ममता मुझको दिए विधाता ने यह विशाल धनराशि प
 
सतीश सक्सेना
Dec 29 2009 11:56 AM
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हम अपनी शिक्षा भूल चले !

बहुत दिन से इच्छा थी कि मैं अपने संक्षिप्त ब्लाग अनुभवों के बारे में लिखूं ! सो लिख डाला ! मेरा एक ही अनुरोध है कि "लाइट ले यार" ! कुछ मनमौजी थे, छेड़ गए ! कुछ कलम छोड़ कर भाग गए कुछ संत पुरूष भी पतित हुए कुछ अपना भेष बदल बैठे , कुछ मार्ग प्रदर्शक, भाग
 
सतीश सक्सेना
Dec 29 2009 11:56 AM
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हम बात तुम्हारी क्यों मानें ?

कुछ रंग नहीं, कुछ माल नहीं कुछ मस्ती वाली बात नही कुछ खर्च करो, कुछ ऐश करो कुछ डांस करें, कुछ हो जाए ! जब मौज नहीं कोई धूम नहीं , तब बात तुम्हारी क्यों माने ? क्या कहते हो ? क्या करते हो है ध्यान कहाँ ? कुछ पता नहीं ना टाफी है, ना चाकलेट , ना रसगुल्ल
 
सतीश सक्सेना
Dec 29 2009 11:56 AM
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उड़नतश्तरी का जन्मदिन !

प्रेरणा श्रोत राकेश खंडेलवाल गीतकार की कलम से पता चला कि समीर लाल का जन्म दिन है ( २९ जुलाई- आगे का राकेश जी ने भी नहीं बताया .......), तो बहुत भला लगा , आज ब्लाग जगत में हर किसी का उत्साह वर्धन का श्रेय सिर्फ़ समीर लाल जी को ही जाता है ! ईश्वर उन्हे
 
सतीश सक्सेना
Dec 29 2009 11:56 AM
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उड़नतश्तरी मुझे दिला दे !

यह हास्य गीत उस अनुभव के आधार पर लिखा गया है, जो मुझे यहाँ ब्लाग जगत में आकर मिला है ! अपने अपने को लोकप्रिय बनाने के लिए लोग क्या नही करते हैं, दूसरों की कीमत पर अपने को आगे बढ़ने की चेष्टा और अपनी विद्वता की धाक ज़माने के प्रयत्न में कितने ही अच्छे
 
सतीश सक्सेना
Dec 29 2009 11:56 AM
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क्या आप अपनी दशा (या दुर्दशा) पर खुल कर हंसते हैं ?

ब्लाग जगत में हास्य की याद आते ही भाई बृजमोहन श्रीवास्तव की एक रचना याद आजाती है जिसमें उन्होंने अपनी पत्नी ...( या भगवान जाने किसके लिए ....?) के लिए लिखा था ! "इस पर प्रिये तुम हो , गम हैं , उस पार तो कुछ अच्छा होगा " बेचारे पति की यह बेबसी और फिर
 
सतीश सक्सेना