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उदास आँखों का ख्वाब

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22 Mar 2010
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ढूँढता हूँ, इक मयखाना...

ढूँढता हूँ, इक मयखाना यहीं कहीं था छलकता हुआ पैमाना यहीं कहीं था लोग आते थे सजदे को दूर-दूर से सुना है - इक बुतखाना यहीं कहीं था जिंदगी से ऊबकर आता था मैं जहाँ वो मेरा ठिकाना यहीं कहीं था कोई पूछे तो कहते थे लोग हाँ, एक दीवाना यहीं कहीं था अभी-अभी रोया
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कहना तो है तुमसे...

कहना तो है तुमसे, डर है- तुम्हें खो न दूँ साथ हो तो हँसी है, फिर कहीं रो न दूँ यकीं मानो मेरा- कुछ तो नहीं मेरे पास देने को वरना कुछ हो मेरे पास, और तुम्हें वो न दूँ तुख्मे-मुहब्बत लिए भटकता फिरता हूँ शहरो-सहरा चैन से कैसे बैठ रहूँ, जब तलक इन्हें बो
Dec 29 2009 11:48 AM
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आज फिर...

आज फिर, एक अनमना-सा अहसास आकर बैठ गया मेरे पास, न जाने कहाँ से एक टुकड़ा खामोशी पसर गई आँखों में और मैंने फिर से अपनी तन्हाई के मासूम-से चेहरे को जी-भर सहलाया था, चेहरा- जिस पर आँसुओं की कुछ सूखी लकीरें थीं अब तक, जैसे अभी-अभी रोकर आई हो! मैं चाहता था
Dec 29 2009 11:48 AM
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तमन्ना ही रही दिल की...

मेरे लिए तुम कभी मेरे पास आते, तमन्ना ही रही दिल की- कोई गीत तुम मेरे लिए भी गाते... जब भी तुम आए कोई और था साथ तुम्हारे- तुम्हारी बातों में, तुम्हारी राहों में तुम उसी के लिए थे हँसते, उसी के लिए मुस्कराते... तुम्हारा हर क़दम उसी के जानिब उठते रहे त
Dec 29 2009 11:48 AM
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ज़िंदगी ने एक रोज़ मुझे...

ज़िंदगी ने एक रोज़ मुझे तेरा पता दिया चंद गुलाब खिले दरम्याँ, साँस-साँस महका दिया क़तरा-क़तरा पिघलता रहा चाँद आँखों में सारी रात तेरी हँसी ने जाने ये क्या गुल खिला दिया ख्वाहिशों की मुंडेर पर पिछली शब कोई परिंदा था इस दर्द से चहका के भरी नींद से जगा द
Dec 29 2009 11:48 AM
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बिखरती जुल्फों के जब...

बिखरती जुल्फों के जब पहरे हो जाते हैं क़ायनात के सारे फूल तेरे चेहरे हो जाते हैं अंगूठे से यूँ ज़मीं को कुरेदा ना करो ज़ख्म दिल के हरे हो जाते हैं नीची निगाहों से दिल पे ना करो चोट जज्बात मेरे और गहरे हो जाते हैं सुना है- इश्क़ में पड़ते हैं जब दो दिल
Dec 29 2009 11:48 AM
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कोशिशें बेहतर, मुसलसल कर...

कोशिशें बेहतर, मुसलसल कर ज़िंदगी मुअम्मा सही, हल कर इस दुनिया में तेरे दुश्मन बहुत हैं ऐ दिल, जरा सम्हल कर ज़िंदगी रेहन न रख अँधेरे के गुम हुआ नहीं है शम्स ढल कर दुनिया खड़ी है इंतज़ार में तेरे दायरे से अपने आ तो निकल कर मुनासिब है एक चाँद हो सब के ल
Dec 29 2009 11:48 AM
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लेकर हाथों में वो आईना...

लेकर हाथों में वो आईना पूछते हैं मुझसे मेरी ज़िंदगी का मायना पूछते हैं रोशनी अपने हिस्से की उन्हें दे चुका फिर भी किसे कहते हैं चाहना- पूछते हैं इस मासूमियत को आखिर क्या कहिए क्यूँ भूल गया हूँ मैं हँसना, पूछते हैं जिन लबों ने कभी आने को कहा नहीं उन्ही
Dec 29 2009 11:48 AM
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कहने को कह गए कई बात...

कहने को कह गए कई बात ख़ामोशी से कटते-कटते कट ही गई रात ख़ामोशी से न शोर-ए-हवा, न आवाज़-ए-बर्क़ कोई निगाहों में अपनी हर दिन बरसात ख़ामोशी से शायद तुम्हें ख़बर न हो लेकिन यूँ भी बयाँ होते हैं कई जज्बात ख़ामोशी से दिल की दुनिया भी कितनी ख़ामोश दुनिया है किसी
Dec 29 2009 11:48 AM
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लेकिन!

मैं सोचता था- तुम्हारे होठों के खुलते-बंद होते सीपियों में मुस्कुराहटों के अथाह मोती हैं शायद तुम उनमें से कुछ मुझे भी दोगे... शायद मैं उन्हें लेते-लेते थक जाऊँगा, पर वो कभी ख़त्म न होंगे... लेकिन, मुझे क्या पता था- कि एक दिन जब तुम चले जाओगे वो... त
Dec 29 2009 11:48 AM
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वस्ल के दिन याद आए...

वस्ल के दिन याद आए, हिज़्र की रातें याद आईं तुम याद आए तो न जाने कितनी बातें याद आईं पहरों-पहर पहलू में जब खामोश धड़कते थे दो दिल चुपचाप-सी पहले-पहल की वो मुलाकातें याद आईं बूँद-बूँद रूह को भिंगोने की ख़्वाहिश रखती हों जैसे तेरे गुनगुनाते लबों से नज़्मो
Dec 29 2009 11:48 AM
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प्यास का समन्दर है के...

प्यास का समन्दर है के समन्दर की प्यास है एक दिल है मेरा और वो भी उदास है मुद्दत से एक क़तरा खुशबू आँखों में है एक दर्द-सा कहीं दिल के आस-पास है अपने ही लहू से तर कोई गुलाब हो जैसे तमन्ना के खूँ से तर दिल का लिबास है बतौर इल्ज़ाम ही सही मगर सच कहते हैं
Dec 29 2009 11:48 AM
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अज़ीब दिल है...

अज़ीब दिल है, दर्दे-दिल को ढूँढता है कोई मक़तूल अपने क़ातिल को ढूँढता है सरे-शाम से चरागे-चश्मे-नम लिए एक मुसाफिर अपनी मंजिल को ढूँढता है कभी अपने खाली हाथ देखता है तो कभी गुज़श्ता उम्र के हासिल को ढूँढता है उठकर चला तो आया अपनी रौ में मगर रह-रहकर तेरी
Dec 29 2009 11:48 AM
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अश्क़ नहीं वो...

अश्क़ नहीं वो ख़्वाब है आँखों में महका हुआ कोई गुलाब है आँखों में ज़र्रा-ज़र्रा नूर की बारिश है एक क़तरा माहताब है आँखों में प्यार के फलसफे, प्यार की बातें प्यार की खुली किताब है आँखों में रूह हो जैसे प्यास की एक शमाँ प्यासी-प्यासी-सी आब है आँखों में
Dec 29 2009 11:48 AM
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तुम आए...

तुम आए, दिलजोई हुई मुस्कुरा पड़ी आँख रोई हुई महक उठीं कलियाँ जज्बात की शबनमे-अश्क़ से धोई हुई मचल-मचल गईं आज हसरतें दिल की सोई हुई शमए-आरजू थी दिल में बुझी-बुझी, खोई हुई सोचते रहे ता-उम्रे-फ़िराक़ खता कब हमसे कोई हुई रो-रोकर तुम्हारी याद में अफ़साने हुए
Dec 29 2009 11:48 AM
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वफ़ा मिली ना...

वफ़ा मिली ना प्यार मिला ज़िंदगी में मिला भी तो क्या मिला ज़िंदगी में न दोस्त, न हमदम, न हमनवा कोई करें तो किससे करें गिला ज़िंदगी में दर्द के फूल, दर्द की कलियाँ दर्द का ही बाग़ खिला ज़िंदगी में बहुत-बहुत तो मिला नहीं थोड़ा भी थोड़ा-थोड़ा ही बहुत मिला ज़िंदगी
Dec 29 2009 11:48 AM
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दर्द भरे गीत...

दर्द भरे गीत गुनगुनाता हूँ मैं मेरी आदत है, दर्द में चैन पाता हूँ मैं कभी तन्हाई ने गले लगाया था मुझको अब तन्हाई को गले लगाता हूँ मैं अजीब हालत है- दिल की ही सुनता हूँ दिल को ही अपनी बात सुनाता हूँ मैं सुना था- किसी के रोने पर हँसती है दुनिया लो अब र
Dec 29 2009 11:48 AM
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बड़ी वफ़ा से...

बड़ी वफ़ा से निभा रहे थे तुम, थोड़ी-सी बेवफाई कर दी क्या आलम था तेरे उन्स का, और तुम्हीं ने जगहंसाई कर दी दश्ते-फ़िराक़ में छोड़ कर तन्हा, तुम न जाने कहाँ गुम हुए वाह मेरे रहनुमा! क्या खूब तुमने मेरी रहनुमाई कर दी मुजस्सिम हँसी बनकर आये थे मेरी जिंदगी में
Dec 29 2009 11:48 AM
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जब तेरी नज़रों का...

जब तेरी नज़रों का नूर था, मैं कितना मगरूर था अब लगता है दो दिन का बस वो तो एक सुरूर था दरअस्ल एक सपना था, पलकों से फिसल गया आँख खुली तो पाया- मैं तुमसे बहुत, बहुत दूर था दर्द की जागीर से जाने कब एक क़तरा निकल गया अश्कों को सम्हाल रखूँ, इतना भी ना शऊर
Dec 29 2009 11:48 AM
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कुछ तुम भी मगरूर थे...

कुछ तुम भी मगरूर थे, कुछ मैं भी मगरूर था अगरचे ना तुम मजबूर थे, ना मैं मजबूर था एक जिद के झोंके ने दो कश्तियाँ, मोड़ दीं दो तरफ वरना दूरियों का ये ग़म किस कमबख्त को मंजूर था खतामंदी का अहसास दफ़न किये हम अपने सीने में कहाँ तक बहलायें दिल को, सब वक़्त
Dec 29 2009 11:48 AM
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बहुत रोयेंगे हम...

बहुत रोयेंगे हम तुम्हें याद करके देखेंगे हर चेहरे में तेरा चेहरा ईजाद करके और करेंगे भी क्या तेरे बगैर हम बैठे रहेंगे मुद्दतों दिल नाशाद करके वक्ते-बेरहम से किया करेंगे सवाल क्या मिला उसे यूँ हमें बरबाद करके जीस्ते-नाशाद को बहलाएँगे तो कैसे मिलेगा भी
Dec 29 2009 11:48 AM
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मुहब्बत के ये पल...

मुहब्बत के ये पल याद रखना हम हों ना हों कल, याद रखना तन्हाई में जब कभी आयेगा ख़याल भीगेंगे आँखों के कँवल, याद रखना मेरी दुनिया, मेरी ज़िंदगी- तुम्हीं से हुई है मुकम्मल, याद रखना पहनोगे जब भी मेरी यादों के लिबास हवा उड़ाएगी आँचल, याद रखना मैं याद रखूँगा
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टूट कर बिखरा, तारा था कोई...

टूट कर बिखरा, तारा था कोई दिल भी मेरा बंजारा था कोई सहरा-सहरा, दरिया-दरिया भटका बहुत, आवारा था कोई तमाम उम्र तन्हाईओं के तले रहा कितना बेआसरा-बेसहारा था कोई ज़िक्र भूले से मेरा जो आ गया इतना कहा- 'बेचारा था कोई' उनको हमसे कोई वास्ता ही नहीं कैसे कहें
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उदास सी तुम...

सुनो सुनयना, भरे-भरे से क्यों हैं तेरे नैना ग़म क्या है तुझको, देखो- मुझे दे दो ना... रूठी खुद से हो कि खफा हो जिंदगी से छोड़ो भी ना, मिलता क्या है यहाँ बँदगी से जो हुआ, हुआ - अब जाने दो ना... आओ ना- तमन्ना की राह पर चलेंगे मिलके खुली फ़िज़ा में साथ उड़े
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दर्द के मुकम्मल तराने पे...

दर्द के मुकम्मल तराने पे ना गिरे आँसू उनके मेरे अफ़साने पे ना गिरे सजदे में ज़माना है मगर, मेरी जिद- कि सर मेरा उनके बुतखाने पे न गिरे जिक्र उनकी बुलंदी के होते हैं अक्सर शख्स, जो लाख आजमाने पे न गिरे कमी उनकी ठोकर में नहीं थी मगर हम थे, जो लड़खडाने प
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हँसो-

हँसो- कि शायद, तुम्हारी हँसी सुने बगैर गुंचे खिलें ही नहीं! हँसो- कि शायद, तुम्हारी हँसी सुनकर धनक फूटते हों कहीं! हँसो- कि तुम्हें हक़ है हँसने का - मुझ पर भी! मेरी तो आदत है- कोई हँसे, तो लगता है- कहीं मुझ पर तो नहीं! हँसो- हो सके तो मेरे आँसुओं पर